_hoshi_

AIHSAS KO LAFZ DENA MUMKIN NAHI SABHI KI TARAHA MAI BHI KOSHISH HEE KAR RAHA HUN....

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  • _hoshi_ 15w

    ज़रूरत।

    रूपियों को है समय की ज़रूरत,
    समय को है रूपियों की ज़रूरत।
    जो इन दोनों की दूरी को दूर करदे,
    उसे कहते हैं सिर्फ और सिर्फ मेहनत।
    ©_hoshi_

  • _hoshi_ 16w

    रूह-दारी

    ये रूह-दारी कैसी तुझसे !
    कि मोहब्बत तुझसे नफ़रत तुझसे!
    गिला शिकवा तुझसे,
    खुशियों की वजह तुझसे!

    अब वास्ता कुछ बचा नहीं तुझसे,
    फिर भी बे हिसाब लगाओ तुझसे!
    खयाल तेरे करे बेचैन,
    फिर सुकून भी है क्यों तुझसे!

    नफ़ा, नुकसान, फिक्र, आराम,
    हूं चाहे तनहा, या हूं मैं सरे आम,
    बातों की पहल हो तुझसे,
    मेरा हर ज़िक्र होता खत्म तुझसे।
    ©_hoshi_

  • _hoshi_ 17w

    मतलब

    जो निकलता हो तुझसे कोई मतलब,
    तब ही तो रखा गया है तुझे से मतलब।
    जो मतलब तुझ से कोई ना निकले,
    तो फिर क्या किसी को तुझ से मतलब।
    ©_hoshi_

  • _hoshi_ 17w

    तुलना।

    जहां तुलना के बादल सिर्फ बूंदे छलकाते हैं,
    वहां मजबूत रिश्तों के घर ढहते नहीं बह जाते हैं।
    ©_hoshi_

  • _hoshi_ 17w

    हक

    जो मैं पूछूं वास्ता क्या तुम्हारा उससे,
    बताओ जवाब देते क्यों नहीं ?
    वो कहते तेरे शक पर तू करले यकीन,
    तेरा मेरे पे अब कोई हक नहीं।
    ©_hoshi_

  • _hoshi_ 18w

    दिल जले।

    अब तेरे ज़िक्र पर मेरा जो दिल जले,
    कब बीत जाए दिन फिर पता ना चले।
    मैं घुटता अंदर ही अंदर,वाह क्या कला मेरी,
    जो मुस्कुरा दूं तो फिर पता किसी को ना चले।
    ©_hoshi_

  • _hoshi_ 25w

    बस।

    आखिर तक ठहरने और साथ निभाने वाला चाहिए बस,
    वरना बहुत हैं ज़िमेदारी से भाग कर,अपने आप को मुसाफिर कहने वाले।
    ©_hoshi_

  • _hoshi_ 28w

    पहाड़।

    ज़िंदगी ज़िंदगी सब करते हैं,
    कमाते कमाते समय बर्बाद बहुत लोग करते हैं।
    लम्हों को जीने की काबिलियत सब में नहीं होती,
    वरना हसीन वादियों को सिर्फ पत्थर कहने वाले,
    बहुत लोग मिलते हैं।
    ©_hoshi_

  • _hoshi_ 28w

    फिलहाल।

    बहुत खास शख्स जब साथ छोड़ जाए,

    फिर इंसान या तो बिखर जाता है,
    या फिर कोशिश करता है संभलने की।

    कोशिश अब उम्र भर की रहेगी, और
    बिखरने का फिलहाल मेरा इरादा नहीं।
    ©_hoshi_

  • _hoshi_ 29w

    अरमान।

    अरमान जागे हैं बिगड़ने के,

    वो क्या है कि सीधे लोगों को,
    लोग यहां समझते कुछ नहीं।
    छीन लेते जिसको जो हासिल है,
    फिर समझते खुद को किसी से कम नहीं।

    अरमान जागे हैं कि चलो दगा करें,

    वो क्या है कि भरोसा तुम ना तोड़ो,
    तो सामने वाला मार ले जाता बाजी।
    तुम भले कितने भले हो फिर चाहे भले कितने दिखो,
    फितरत जो हुई धोखे कि तो फिर दिए बिना वो जाएगा नहीं।

    अरमान ढह गए कि चलो जैसे हैं वैसे ही रहें,

    वो क्या है कि कर्मा जब मुड़ कर देखता है,
    फिर वो जल्दी बक्शता नहीं,
    कर्मों पर ब्याज़ लगना जो एक बार शुरू हो जाए,
    फिर कितना चुकाओ वो चुकता नहीं।
    ©_hoshi_