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  • _prajjawal_ 9w

    बेवजह

    ना तुम्हे फुरकत हुई, ना मेरा ख्याल आया
    फिर तुम्हारी यादें सताती हैं क्यूँ बेवजह

    मेरे हर ताबीर से फ़िराक़ हो तूम
    फिर ख्वाबों में आते हो क्यूँ बेवजह

    हर तस्वीर जला दी हमने तुम्हारी
    तो आईने में दिखते हो क्यूँ बेवजह

    तुम खुशी, तुम चैन और तुम ही मरहम
    दर्द के वजह बन गए तुम क्यूँ बेवजह

    तुम्हारा होना मेरे ना होने से कहीं बेहतर
    दिल को फिर भी तुम्हारी ख्वाहिश है क्यूँ बेवजह
    ©_prajjawal_

  • _prajjawal_ 9w

    Seasons of my life

    You are the first ray of sunshine
    On a lazy summer morning
    The harvest moon
    On a brisk autumn night
    The uniqueness of a snowflake
    On a chilly winter day
    The scent of a blossomed rose
    On a warm spring afternoon
    You
    Are the seasons of my life.
    ©_prajjawal_

  • _prajjawal_ 9w

    I remember you

    I remember you
    When last ray of sun fades into the dusk
    In the days warmth and night dance of fireflies
    And in the death of the day,
    when the silent hills sleep away.

    I remember you
    In the faint smell of soil, when rain kisses the parched land
    And memories descend from the heavens
    When gloom engulfs the darkness
    And when smiling sun rises from the horizon

    I remember you
    When scorching summer's ray touches my skin,
    And when the dew from the grass blades evaporates
    In the caramel laughter of children frolicking in the sand
    And when in the welcoming breeze, I smell your fading scent

    I remember you
    In the chirping of birds and in the buzzing of bees,
    In the rustling of leaves and gushing streams
    In the silence of winter, when a sparrow screams
    When in the abandoned garden, the Parijatha blooms.

    I remember you
    When last leaf gently touches the ground, in the death of spring,
    And I hear silence, in the winnowing wind .
    They say there's no music to autumn but
    I hear your voice, ringing in my heart,
    And you walk in, regally, carrying a golden latern to lighten my hearth.
    ©_prajjawal_

  • _prajjawal_ 9w

    Notion

    The notion of love can't be captured by the light of reason.
    ©_prajjawal_

  • _prajjawal_ 10w

    Love

    That soothing air,
    And swampy smell of soil.
    Those cluster of small and big houses,
    And greenery of fields.
    That caring hand of dad on the forehead,
    And love bestowing glance of mom.

    Being back at home after a vacation feels heavenly good.
    ©_prajjawal_

  • _prajjawal_ 10w

    क्या होगा

    छोटे बच्चों से हस देता हूँ तुमको सुनकर
    और बातें भी कर लेता हूँ खुलकर कई बार
    बता न पाया तुमको ऐसी भी बातें है कई
    मन होता है कि बता दूँ
    पर रुक जाता हूँ सोचकर
    की अगर नाराज हो गयी तुम तो क्या होगा

    कुछ सपने है तुम्हारे संग
    कुछ उत्कंठाए, थोड़ी अपेक्षाएं है
    जी करता है कि बता दूँ सब तुम्हें
    पर रुक जाता हूँ ये सोचकर
    की अगर वो सब टूट गए तो क्या होगा

    थोड़ी नाराज़गी है तुमसे
    और कुछ शिकायतें भी हैं
    ख्याल आता है कि फटकार दूँ तुमको प्यार से
    फिर चुप रह जाता हूँ ये सोचकर
    की अगर तुम रूठ गयी फिर क्या होगा

    कितनी बातें करनी बाकी हैं ना तुमसे
    और तुम्हारी कहानियाँ सुननी भी
    और ये भी तो बताना है कि कितना प्यार है तुमसे
    सोचता हूं कि कह दूँ सब
    फिर दिल करता है कि रुक जाऊँ
    कुछ देर और, थोड़ा संवार लूँ खुद को
    पर डर इस बात की भी लगती है कि देर करते करते
    अगर तुम छूट गयी तो फिर क्या होगा
    ©_prajjawal_

  • _prajjawal_ 10w

    फुरसत

    सुनो,
    इस दीवाली फिर से
    एक दिया, कुछ मिठाइयाँ और अपना दिल
    आरती की थाल में सजा के रख दिया हूँ
    जो थोड़ी फुरसत मिले तुम्हे
    तो ले जाना।
    ©_prajjawal_

  • _prajjawal_ 10w

    तुम आ रही हो ना?

    खिड़कियों पे बारिश की छम छम,
    नीले गगन पे फैले स्याह बादल,
    एक टेबल, दो प्याली चाय,
    कुछ बातें और मेरा दिल,
    सब सजा के रख दिया है,
    सिर्फ तुम्हारी कमी है।
    सुनो,
    तुम आ रही हो ना?
    ©_prajjawal_

  • _prajjawal_ 10w

    बेचैन

    एक चाय की प्याली लेके बैठा हूँ बारजे पे
    सुहानि शाम,
    ढलता सूरज,
    धुंध, मन लुभाती हुई प्यारी ठंडी हवा,
    और एक गर्म प्याली चाय,
    सब कुछ कितना अच्छा सा है ना!
    फिर ये दिल क्यों इतना बेचैन है?

    हाँ ठीक है कि तुम्हारा सर नही है इन काँधों पे,
    की इन हवाओं में तुम्हारी खुशबू नही तैर रही है,
    तुम्हारी उँगलियाँ नही है मेरी हाथों में,
    ना तुम्हारी बातें इस सूनेपन को छाँट रही है,
    और ये चाय तुम बिन फीकी सी लग रही है।

    पर, तुम देखो तो उस ढलते सूरज को,
    की कैसे वो क्षितिज को चूम रहा है,
    और हया से लाल क्षितिज उसे आलिंगन कर रही है।
    देखो वो थोड़ी दूर हरे बाग में,
    बच्चे कैसे अठखेलियाँ कर रहे हैं,
    और वही पास गुलमोहर पे बैठी मैना गीत गा रही है।

    देखो, वो नीचे फूल पे बैठी तितली,
    पगडंडी पे दौड़ते लोग,
    बगल के घर से सुनाई दे रही संगीत,
    और कहीं दूरसे आती हुई मोगरे की खुशबू।
    सुहानि शाम,
    ढलता सूरज,
    धुंध, मन लुभाने वाली प्यारी ठंडी हवा,
    और एक गर्म प्याली चाय,
    सब कुछ कितना प्यारा सा है ना!
    फिर दिल इतना बेचैन क्यों है?
    तुम्हारी कमी से, शायद।
    ©_prajjawal_

  • _prajjawal_ 11w

    मैं ये मान लूँगा

    संदेशा भेजा है मैंने चाँद के हाथों एक,
    यदि तुम्हे मिले तो पढ़ लेना।
    ये सोच कर चिंता मत करना कि जवाब में क्या लिखुँ,
    बस लौटते समय उसके हथेली में ,
    अपनी एक मुस्कुराहट रख देना।
    तुम जहाँ हो खुश हो, मैं ये जान लूँगा।

    जब कभी कोई झोंका हवा का निकले तुम्हे छू के,
    उसके आँचल में अपनी खुशबू रख देना।
    घबराना मत की कैसे पहुँचेंगे ये मुझ तक,
    बस मेरा नाम सोच कर,
    प्यार की एक साँस भर लेना।
    कुछ पल के लिए तुम्हारे साथ हूँ, मैं ये मान लूँगा।

    अपने दिल का एक टुकड़ा भेजा है मैने बारिश के साथ,
    छत पर बरसे तुम्हारे तो अपने अंजुली में रोक लेना।
    परेशान मत होना इसे यूँ अकेला पा के,
    तुम बस चेहरे पर पसरती थोड़ी हया के साथ,
    इसे अपने सीने से लगा लेना।
    रहता हूँ तुम्हारे धड़कनों में कहीं, मैं ये मान लूँगा।

    कभी किसी अमावस की रात में कोई तारा चमके तो,
    अपनी खिड़की से तुम परदा हटा देना।
    कहीं खो मत देना सँसार की बातों में खुद को फिर,
    बस आकाश में अपनी आँखें गड़ा के,
    एक प्यार भरी निगाह से उसे देख लेना।
    बसता हूँ मैं तुम्हारी आँखों मे अब भी, मैं ये मान लूँगा।
    ©_prajjawal_