aaditya

and all i loved, i loved alone.

Grid View
List View
Reposts
  • aaditya 1d

    up with your turret
    aren't we just terrified?

    Read More

    for a while, i am constantly having the urge
    to tell people i hate being loved, missed or seen.
    nowadays i am fine with a raging god complex
    inside my bones alone
    that keeps me sane from insecurities
    and thoughts about others.
    i take space in my own void to
    curl up or become gigantic as much as i want.

    if someone texts or tells me 'i missed you'
    i always wonder why?
    what on the earth were you doing
    that i took space in your cold heart?
    i am comfortable here without any human noticing me,
    it just gets pathetic when someone really does.

    and i think this problem has some
    buried memories or moments
    which come inside of me.
    i know i have to face them but
    i am not emotionally ready to handle them.

    but it is just sometimes when
    instead of sleeping, i keep staring at the ceiling,
    being awake softly over knives made up of roses
    and you switch on the flashlight of violence.
    you come closer to me, like really close and whisper "i miss you" and it makes me naked. and visible.

    even my soul.

    ©aaditya

  • aaditya 2d

    to them he is a mirror,
    but to you he is a room.

    Read More

    i cried at the midnight
    to a terrible news,
    my heart had one less human
    and that human is you.

    her smile was the summer
    her eyes were but sad,
    her heart had the warmth
    as cold as the feb.

    now my world feels bigger
    but my heart feels small,
    like my soul shed your name
    and your love was the fall.

    some grief has no measure
    but you want it to be heard,
    some do it with crying
    but few do it with words.

    so i kissed every stranger
    but they all felt the same,
    i was fine until realised
    i still moan your name.

    are you still inside me?
    where did you go?
    but where lovers go after love
    only dead people know.

    your love perfumes all my skin
    so i slit and put some new,
    now your place remains as nothing but just

    the cut that i bled blue.

    ©aaditya

  • aaditya 3d

    एक पुराना मौसम लौटा, याद भरी पुरवाई भी
    ऐसा तो कम ही होता है, वो भी हो तनहाई भी।

    Read More

    मैंने जब भी किसी को कुछ पढ़ते देखा है तो
    उसकी किताब में मैंने तुम्हारी आँखें देखी हैं।
    प्रेम में पड़ा लेखक कितना सुंदर होता है ना?
    वह सिर्फ़ यह सोच अपने आप को तसल्ली देता रहता है
    कि उसका प्रेमी जब उसके लिखे प्रेम को कहीं बैठ के शायद पढ़ता होगा।

    लेकिन मुझे एक बेकार-सी किताब लिखनी है।
    कुछ ऐसा जिस में मेरी कविताएँ तुमसे प्रेम में नहीं हैं।
    मेरा एक प्रकाशक दोस्त है, शायद वो सस्ते में छाप दे।
    उसको छपवा कर सिर्फ़ तुम्हें भेंट करना है।
    ब्रेकप ऐनिवर्सरी गिफ़्ट यू नो!
    मैं नहीं चाहता मेरी कविताएँ तुमसे प्रेम में सफल रहें
    और मैं नाकाम।

    मगर शायद तब तुम मेरा लिखा पहचान ना पाओ।
    जब कविताओं में प्रेमी नहीं होता तो वह
    हरप्पन सभ्यता की लिपि बन जाती हैं।
    तुम्हारा प्रेम भी मेरे लिए उतना ही प्राचीन हो गया है।
    मैंने तुम्हारे लिए नस नहीं काटी, लेकिन पर्फ़ेक्ट लव-लेटर ना लिख पाने पर
    कई पन्ने फाड़े हैं।
    शायद खुदकी कायरता मैं मेरी कविताओं को शांत मृत्यु देकर छुपाता आया हूँ।

    जानती हो
    कई बार हम इतना प्रेम करते हैं
    कि प्रेमी को चूमने के बजाय
    हम उसका प्रेम लिखने लगते हैं।
    और इतना लिखते हैं कि हमारा प्रेमी

    फिर दोबारा उन्हें पढ़ने नहीं आता।

    ©आदित्य

  • aaditya 36w

    the last dance.

    Read More

    often, I write my poetry as
    my tears fall.
    the paper soaking
    the imprints of broken pieces

    while my grief dries dead.

    ©aaditya

  • aaditya 36w

    अपने शब्दों से ख़ौफ़ खाता लेखक
    असल में अपने शब्दों में भी प्रेम के ना मिल पाने की नाकाबिलियत से डरता है।
    फिर भी मैंने हमेशा तुमको ठीक ठीक लिखने की कोशिश की है।
    अगर प्रेमी लिखना जानता है तो कभी मर नहीं पाता।
    वह ना चाहते हुए भी खुदको ज़िंदा रखने की कोशिश
    अपनी कहानियों में करता है।
    ठीक उसी तरह जैसे की एक तैराक कभी
    आत्महत्या करने को नदी में नहीं कूदता।
    उसकी जगह अपने छत पर मज़बूत पंखा लगाने की कोशिश करता है।

    पर शायद तुम्हें ठीक ठीक लिखने की कोशिश इस लिए करता हूँ
    की मेरे ना रहने पर भी मेरा प्रेम तुम्हारे समक्ष रहेगा।
    मैंने अपनी कल्पना में भी हमेशा खुदको तुम्हारा पाया है।

    जानती हो
    प्रेम को कभी अमर नहीं होना चाहिए।
    एक उम्र हो जाने के बाद उसका मर जाना ठीक रहता है।
    ज़्यादा उम्र होने पर प्रेम डरावना हो जाता है
    क्योंकि दो प्रेमी कभी उतना ज़िंदा नहीं रहते।
    वह धीरे धीरे मरते जाते हैं।
    फिर आप साथ तो सोते हैं पर बिस्तर के किसी कोने पर
    आपका प्रेम अकेला पड़ा रहता है।
    अपने मृत्यु की प्रतीक्षा में।
    ठीक उसी तरह जैसे किसी गाड़ी से कुचले जाने पर
    सड़क के एक कोने पर जानवर पड़ा रहता है।
    उसको जीवन से ज़्यादा मौत की ज़रूरत होती है।
    ठीक उतनी जितनी एक डरे हुए लेखक को ज़रूरत होती है,

    प्रेम की।

    ©आदित्य

  • aaditya 36w

    मेरी उदासी तुम्हारे प्रेम तक ले जाने वाली अदृश्य सीढ़ी है।
    जिसकी बढ़ती ऊँचाई के साथ मैंने हमेशा
    खुदको तुम्हारे थोड़ा और नज़दीक पाया है।

    ऊँचाई बढ़ने पर मैंने पाया की मेरा प्रेम डरा हुआ था।
    मैंने उसको अपनी मुट्ठी में क़ैद करके रख लिया
    और बिना किसी और बिना किसी को दिखाए ख़ूब रोया।
    अक्सर इतना रोना काफ़ी होता है की आपके मन में
    उदासी की जगह थोड़ा-सा प्रेम रह जाए।

    जानती हो
    दुःख को हमेशा प्रेम के साथ मिल कर पारदर्शी होना चाहिए।
    इतना की जब दुखी होके मैं अपने ईश्वर से तुम्हारी बुराई करूँ
    तो मेरे उदासी भरे संवाद को तुम प्रेम-मात्र समझो।
    मेरी प्रार्थनाएं वो आँसूँ बन जाएँ जो मेरी आँखों से होते हुए
    तुम्हारे होठों तक पहुँचे।

    जिन्हें तुम अपने मन में मेरा शोक
    और मैं संकोच करते हुए मेरे हिस्से का प्रेम समझ रख लूँ।

    ©आदित्य

  • aaditya 36w

    जब लेखक किसी स्त्री से प्रेम करता है
    तो उसके सामने उसके सारे शब्द फीके पड़ जाते हैं।

    किन्तु जब कोई स्त्री किसी लेखक से प्रेम करती है
    तो उसे लेखक से ज़्यादा अलौकिक उसके लिखे शब्द लगते हैं।

    जानती हो
    हमारे लिए कोई उतना ही प्रेम लिख पाता है
    जितना खालीपन उसके मन में होता।
    उससे ज़्यादा ना कोई अपना लेख और
    ना ही अपने प्रेम का हिस्सा देना चाहता है।

    और ना ही आप उससे ज़्यादा सह पाते हैं।

    ©आदित्य

  • aaditya 36w

    लिखने में हमेशा लेखक का एक हिस्सा खर्च हो जाता है।
    और जब कहानी ख़तम होती है तो आपको खुद नहीं पता होता है
    आप उस कहानी के मुख्य किरदार के तौर पर उभर के आए हैं
    साइड रोल या फिर हमेशा की तरह विलेन।
    पर ध्यान से देखा जाए तो मैं हमेशा वो किरदार रहा हूँ जिस पर ज़्यादा कोई ध्यान नहीं देता।
    जो चुपचाप अपना काम कर के साइड से निकल जाता है।
    हीरो और विलेन तो भूल जाओ हमें खुद डायरेक्टर नहीं ध्यान दे रहा होता है।

    हमारा दिल कभी हीरोइन पर नहीं बल्कि उसकी बेस्ट फ्रेंड पर आता है
    और वो भी हमेशा की तरह बिना हाँ बोले किसी और के साथ निकल जाती है।
    हम वो हैं जिनकी बस किसी इम्पोर्टेन्ट एग्जाम से पहले या तो ख़राब हो जाती है
    या भीड़ इतनी होती है की धक्का देके भी चढ़ नहीं पाते।
    हमारी ट्रेन स्टेशन से ज़्यादा समय हमेशा आउटर पर बिताती है।
    जब हमें रिजर्वेशन मिलता है तो कभी भी बगल वाली सीट पर कोई सुन्दर लड़की आके नहीं बैठती
    बल्कि एक दादा होते हैं जो हमारी विंडो सीट बेटा-बेटा कह के हथिया लेते हैं
    और हमको अप्पर बर्थ पर टांग दिया जाता है।

    हम एग्जाम में चिट लेके जाते हैं तो उस दिन खुद प्रिंसिपल राउंड पर निकला होता है।
    हमारी शकल देख कर टीचर हमें बिना कुछ किये ही बाहर भेज देता है।
    हम पढ़ाई में सबसे ज़्यादा मेहनत करते हैं पर पास हमेशा बॉर्डर पर होते हैं।
    फिल्म और सीरीज में हम कभी मेन हीरो से कनेक्ट नहीं करते
    बल्कि उसको जीते हैं जो हमेशा ब्रोकेन बट ब्यूटीफुल टाइप होता है।

    हम भगवान में इतना मानते हैं की अंत में नास्तिक हो जाते हैं।
    हम कोई काम बस उतना कर पाते हैं जितना जीने भर के लिए काफी होता है।
    हमको घर वाले सबसे ज़्यादा प्यार से तभी बुलाते हैं जब कोई काम करना होता है।
    गर्मी में कूलर में पानी भरने से लेके दिवाली में घर के जाले मुंह पर गिराते हुए हम ही साफ़ करते हैं।
    बारिश होती है तो छत से भाग के कपडे लाने का काम हमारे सर ही आता है।

    Read More

    हम इतने शर्मीले होते हैं की कभी धूप वाला चश्मा लगा के नहीं जाते क्योंकि
    मन में शक रहता है की लोग कार्टून समझेंगे।
    हम बाल कटाने सैलून नहीं नाइ की दूकान पर जाते हैं और कभी ये नहीं बताते
    की बाल कैसे काटना है।
    उसके 'कैसा रहेगा' पर हमारा जवाब बस इतना होता है की 'छोटा कर दो।'

    हम लोगों की बर्थडे हमेशा रिमाइंडर पर लगा के रखते हैं पर हमेशा विश करने वाले दिन जल्दी सो जाते हैं।
    शादी-बियाह में हम लोगों के ज़िद्द करने पर भी कभी 'सात समुन्दर पार' पर नाच नहीं पाते बस कोने में खड़े होक गुलाबजामुन का मज़ा लेते हैं।
    डी.पी के नाम पर हमारे कोई रैंडम इंटरनेट से डाउनलोड हुई फोटो होती है।
    हम ज़माने से सिंगल रहते हैं पर ज्ञान इतना होता है की शादी-शुदा लोगों के झगडे भी सुलझा देते हैं।
    हम हमारे सारे दोस्तों के बेस्ट फ्रेंड होते हैं पर हमारा बेस्ट फ्रेंड कोई नहीं हो पाता।

    हमारी सलाह को घर में कोई सीरियस नहीं लेता है।
    टीचर कभी हमारा नाम नहीं याद रखते बल्कि हमारे दोस्त से हमारे बारे में पूछते हैं की वो जो लड़का तुम्हारे साथ रहता था कहाँ गया।
    सड़क पर चलते चलते हम अक्सर बॉलिंग वाला एक्शन करने लगते हैं
    किसी से मिलना होता है तो हम हमेशा 10 मिनट पहले पहुँचते हैं पर सामने वाला हमेशा सॉरी कहके आधा घंटा लेट आता है।
    हमको न ढंग से अंग्रेजी आती है न ही हिंदी। बस बीच में कहीं झूल रहे होते हैं।

    रिश्तेदार हमेशा हमको अपने बच्चों की कहानी सुना के चले जाया करते हैं।
    हम कभी कोई नशा नहीं करते पर दोपहर का खाना खा के 4 घंटे सोते हैं।
    लड़ाई में हम हमेशा सुनाने के बजाय शांत रहके गुस्सा दिखाते हैं
    और जब कोई बेइज़त्ती करता है तो लाइव लड़ने के जगह हम उसको अपने मन में सुना के हराते हैं।
    हमसे ज़रूरी वादे अक्सर टूट जाते हैं और पहले ब्रेकअप के बाद फुट फुट कर रोते हैं।
    भिखारी को हम कभी सिक्का नहीं 10 की नोट देते हैं।
    हमारी प्रेमिका हमसे हमेशा शादी के बाद मिलती है।

    इतना कुछ हो रहा होता है फिर हम खुद को एक कहानी में लिखते हैं
    और थोड़ा-सा फिर से खर्च हो जाते हैं।

    ©आदित्य

  • aaditya 36w

    गोया: as if
    महरम: a confidant
    बुत: statue
    तर्ज़-ए-वफाई: way to love someone

    Read More

    मेरा ज़ख्म अब कोई हरा नहीं होता,
    इश्क़ होता है तो कुछ भी बुरा नहीं होता।

    मेरी हर नज़्म गोया बे-फिज़ूल गयी,
    लफ़्ज़ों में अब कुछ भी बयां नहीं होता।

    ज़रा-सी उदासी हुई और रो दिए हम,
    महरम हमारा कोई तेरे सिवा नहीं होता।

    एक शख्स का होके इतना समझ आया,
    महबूब होता है महज़ बुत खुदा नहीं होता।

    वो बतलाएगा क्या सिलसिले तर्ज़-ए-वफाई के,
    वो रूठा इस क़दर की कभी अब मिलना नहीं होता।।

    ©आदित्य

  • aaditya 36w

    the room was fit for two,
    the bed was left in ruins.

    Read More

    before i fell
    for your hollow words,
    with withered wings
    like a frighted bird.

    i fell in love with
    the prose in your eyes,
    the smile of yours
    and my heart demised.

    i fell in love with
    how my heart was tore,
    i reached for your hands
    but it was there no more.

    i fell in love with
    my lips were slain,
    i kissed few others
    but it was never the same.

    but first love is silly
    your heart never knows,
    you sleep with a lover
    or just the remorse.

    when you dream of past
    while all alone,
    you will think of kisses
    or just cuts on the bone.

    and then poet inside you
    is peeled and devoured,
    and tears in your eyes are
    just futile metaphors.

    you offer your skin
    to a bowl full of leeches,
    you still write about love
    but between the parentheses.

    then you ask yourself
    have you ever felt loved,
    you say-plenty of times just

    never right kind of love.



    ©aaditya