Grid View
List View
Reposts
  • abhi_mishra_ 1d



    The worst part is wondering how you’ll find the strength tomorrow to go on doing what you did today and have been doing for much too long, where you’ll find the strength for all that stupid running around, those projects that come to nothing, those attempts to escape from crushing necessity, which always founder and serve only to convince you one more time that destiny is implacable, that every night will find you down and out, crushed by the dread of more and more sordid and insecure tomorrows. And maybe it’s treacherous old age coming on, threatening the worst. Not much music left inside us for life to dance to. Our youth has gone to the ends of the earth to die in the silence of the truth. And where, I ask you, can a man escape to, when he hasn’t enough madness left inside him?
    The truth is an endless death agony.
    The truth is death.
    You have to choose: death or lies.
    .... I’ve never been able to kill myself.

    Louis-Ferdinand Celine

  • abhi_mishra_ 1w

    चश्म - Eyes
    फ़लक - Sky


    #hindi #hindiwriters #abhimishra

    Read More



    ये तेरे चश्म से टूटते बेइंतहा सितारे,
    मेरे फ़लक पर ठहर जाएँ, बस और क्या हो।

    ©abhi_mishra_

  • abhi_mishra_ 5w

    रंजिश-ओ-दिल - Jealousy
    तदबीर - contrivance, उपाय

    #hindi #hindiwriters #abhimishra

    Read More



    रंजिश-ओ-दिल की तदबीर इस तरफ़,
    दिल उस तरफ़, तस्वीर जिस तरफ़।

    ©abhi_mishra_

  • abhi_mishra_ 5w

    आह - Pain, शोक
    नागवार - disagreeable
    ख़ुमार - नशा, hangover
    कामिल - complete, पूरी
    तमाम - ख़त्म, End



    #hindi #hindiwriters #abhimishra

    Read More



    ज़रा सी आह भरने दे, ज़रा सा काम करने दे,
    मैं ख़ुद से भी ख़फ़ा हूँ, अब मुझे आराम करने दे।

    मैं तुझसे रूठ जाता हूँ, मैं तुझसे मान जाऊँगा,
    कि तब तक चैन मेरा और नींदें हराम करने दे।

    तेरी नागवारी पर, या तेरी इस ख़ुमारी पर,
    नाराज़ हूँ....... तू इश्क़ है, सलाम करने दे।

    माथे की शिकन क्या मुझसे कह रही है कुछ,
    ऐसे अनगिनत हिसाबों में, मुझे शाम करने दे।

    इश्क़ में सब लिख चुका हूँ, दो चार पन्ने बिक चुका हूँ,
    एक उम्र हुई कामिल, एक तमाम करने दे।

    ©abhi_mishra_

  • abhi_mishra_ 6w

    मुंतज़िर - one who waits
    क़ुर्बत - Relationship, Nearness
    जफ़ा - Injustice

    #hindi #hindiwriters #abhimishra

    Read More



    तू ख़ुदा है तो मुंतज़िर हूँ मैं भी तेरी क़ुर्बत का,
    मैं वफ़ा करूँ, जफ़ा करूँ, दग़ा करूँ, क्या करूँ?

    ©abhi_mishra_

  • abhi_mishra_ 8w



    तेरे इश्क़ में मुसलसल, मुक़म्मल हो रहा हूँ,
    था कल, फ़िर मैं आज, फ़िर कल हो रहा हूँ।

    जो तुझ पर लिखी है, जो तुझ से बनी है,
    मैं तेरी कहानी, अमल हो रहा हूँ।

    ना जन्मों के वादे, ना सदियों के किस्से,
    इन्हीं चंद घड़ियों का पल हो रहा हूँ।

    जो माथे पर लिपटी है, बातों में दिखती है,
    अब हर उस शिकन का, मैं हल हो रहा हूँ।

    मोहब्बत में लाज़मी है, हुनर मात खाने का,
    मैं हर उस हुनर में सफ़ल हो रहा हूँ।

    ©abhi_mishra_

  • abhi_mishra_ 13w



    कहने को काफ़ी एक लफ्ज़ ही मुक़म्मल,
    लिखने जो बैठूँ, तो जहां कम है।

    ©abhi_mishra_

  • abhi_mishra_ 14w



    एक ज़िम्मा है जो गहरा है,
    एक ख़्वाब है जो ख़ाली है।

    मुझे डर है तो बस झरोखों से,
    मैंने तूफां में कश्ती संभाली है।

    ©abhi_mishra_

  • abhi_mishra_ 14w

    तुम्हारी समझदारी और मेरे पागलपन के बीच की जो महीन रेखा है उसी का नाम प्रेम है।
    जब हम उस रेखा पर होते हैं तो सब कुछ सुनहरे सपने जैसा प्रतीत होता है।
    हम साथ हंसते हैं, साथ मुस्कुराते हैं, एक दूसरे के प्रति समर्पित रहते हैं।
    लेकिन उस महीन रेखा के दोनो ओर जो जाल है उसमें फंस कर शायद ही कोई खुशी से रह पाया हो, क्योंकी प्रेम में ना तो समझदारी चलती है ना ही पागलपन।
    रेखा के इस ओर यह महज़ एक पागलपन है, रेखा के उस ओर केवल समझदारी।
    समझदार व्यक्ति प्रेम सिर्फ़ तब तक ढूँढता है जब तक उसे प्रेम की आवश्यकता हो, और पागलपन में तो प्रेम को पीड़ा बनने में अधिक समय नहीं लगता।
    या फ़िर यूँ कहो कि प्रेम एक परिंदा है जो उड़ता फिरता है उस महीन रेखा के दोनो ओर।
    दिन भर वह कभी समझदारी में होता है तो कभी पागलपन में, लेकिन शाम को वह आकर बैठ जाता है उस रेखा पर जहाँ सब कुछ शांत और खूबसूरत है, और हर सुबह वह फिर निकल जाता है।

    मैं तुम्हें बताता हूँ विरह का कारण।

    जब वह परिंदा रोज़ उड़ता है, वह समय बिताता है या तो समझदारी में या पागलपन में।
    जब वह अधिक समय देने लगता है किसी एक तरफ़ (समझदारी या पागलपन) तो वह उस जगह का हो जाता है, वह शाम को लौटकर नहीं आता, और कभी आता भी है तो सिर्फ़ दूसरी तरफ़ का निरीक्षण करने।

    यही कारण है विरह का और यही कारण है कि या तो प्रेम आग है या फिर बैराग।

    तुम्हें यह ज्ञात होना चाहिए कि जब हम मिले, मैं भी समझदार हुआ करता था।
    लेकिन दोनो का रेखा के एक ही तरफ खड़ा होना प्रेम में मुमकिन नहीं है।
    हमारे लिए, मैंने रेखा के उस ओर जाना आवश्यक समझा।

    लेकिन, अब मैं हर शाम बैठता हूँ उस परिंदे की राह ताकते हुए, कि किसी शाम वह लौटेगा और मेरा इस ओर आना सार्थक होगा।
    मैं ख़ुद से कहानियाँ बनाता हूँ कि वह क्यों नहीं लौट रहा, उसकी क्या मजबूरियाँ होंगी, और मैं ख़ुद ही उन्हें मानने से इनकार भी कर देता हूँ।
    मैं चाहता हूँ कि या तो वह परिंदा लौट आए वहाँ जहाँ उसे होना चाहिए, या फिर मैं लौट आऊँ उस ओर जहाँ तुम हो, समझदारी है।

    लेकिन क्या अब उस ओर लौट पाना मुमकिन है?

    नहीं!

    Read More



    लोग अक्सर मुझसे पूछते हैं कि क्यों मैं शून्य के पीछे भाग रहा हूँ?
    मैं उन्हें नहीं समझा सकता,

    क्योंकि वह समझदार हैं।

    ©abhi_mishra_

  • abhi_mishra_ 15w



    मेरे दिल में यूँ तो स्याह अँधेरा है,
    मगर तुम आ सको तो थोड़े तारे समेट लाना।
    रोशनी की थोड़ी कमी होगी,
    पलकों में शायद नमी होगी,
    रात शायद स्याह और काली होगी,
    पर वो ही मेरी चाँद रात, दिवाली होगी।
    उन तारों को यूँ ही बिखेर देना,
    जैसे पंछी को दाने सवेर देना।
    फिर जैसे सितारे रोशन होंगे,
    मेरे दिल के अँधेरे ओझल होंगे।
    अँधेरे के साथ चली जाएँगी यादें,
    तुम्हारी नहीं,
    उस वक्त की जो मैंने तुम्हारे बिना बिताया है।
    क्योंकि अँधेरा गवाह है मेरी कसक का,
    और गवाहों ने कब साथ निभाया है।

    ©abhi_mishra_