abhishek141

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Reposts
  • abhishek141 59w

    किताबें पड़ने का शौक था हमें
    फिर एक दिन किसी पन्ने पर तेरा नाम आ गया।
    ©abhishek141

  • abhishek141 63w

    सोचा था जो गयी तू तो जीना भूल जाउंगा
    आज डायरी के पुराने पन्नों में तेरा नाम याद आया।
    ©abhishek141

  • abhishek141 63w

    काफी आसान है किसी को बिस्तर पर सुलाना
    चंद झूठे अल्फाज़ों को हलक से निकालना पड़ता है।
    ©abhishek141

  • abhishek141 66w

    डुबे रहना गम में तेरे आसान तो नहीं
    देखते हें तेरे चेहरे की खुशी क्या क्या कराती है।

  • abhishek141 66w

    बंद आंखों से किस्से सुनाते हैं
    भरी महफिल में तुझे अपना बताते हैं
    जानते हैं मुकम्मल नहीं लेकिन
    तुझे पाने के सपने हम अब भी सजाते हैं।
    ©abhishek141

  • abhishek141 66w

    बदलता वक्त बदलते लोग बदलते रिश्तों को बदनाम नहीं करते
    उनकी हंसी पर अब भी मरते हैं जनाब, बस चर्चे सरेआम नहीं करते।
    ©abhishek141

  • abhishek141 66w

    #28 march 2021

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    है इश्क इसे बताया या भुलाया नहीं जाता
    अब मोहब्बत करना तो एसे सिखाया नहीं जाता
    एक महबूब जाए तो रूह से निकाल दो उसे
    गर चली जाए जिन्दगी तो जिन्दा रहा नहीं जाता।
    ©abhishek141

  • abhishek141 124w

    साहिल पर डुबा सूरज कुछ तो कहता होगा
    ए नरगिस तमन्ना उसको भी होगी
    पर ना जाने वो क्यों चुप रहता होगा
    शायद किसी के दीदार से कभी उसे भी सुकून आता होगा
    कल मिलनै कि उम्मीद में जिससे वो साहिल पार जाता होगा
    पर फिर शायद किसी रोज जब वो वापस आएगा
    और अपनी महबूबा को किसी हरीफ की बाहों में पाएगा।
    तो ताबीर मोहब्बत की दिखाने को वो तिल-तिल कर जलेगा
    और उसकी मोहब्बत से महरूम हर कोई इसे गर्मी ही समझेगा
    हाँ पर इस सब के बावजूद वो फिर जब किसी रहनुमा से राबता होगा
    अब उस रहनुमा को ही दिल-ए-रहजान वो समझेगा
    और इस तरह अब सच्चा प्यार शायद उसे बदल देगा
    पर लोग तो पागल हैं उसकी एकतरफा मोहब्बत को ठंडीयां कहकर टाल देंगे
    नवम्बर आ गया है कहकर एक आद कम्बल और निकाल लेंगे
    और इस सब के बीच उसकी मोहब्बत फिर खता कर जाएगी
    साल बदलेगा और वो किसी और को दिल दे जाएगी
    फिर एक रोज वही सब फिर से होगा
    साहिल पर डुबा सूरज कुछ तो कहता होगा
    ए नरगिस तमन्ना उसको भी होगी इश्क की
    तभी तो धरती पर मौसम बदलता होगा।
    ©abhishek

  • abhishek141 124w

    जुल्म खुदा से तुम कितने करवाओगे
    गलतियां करोगे खुद से फिर खुद को सही बताओगे
    और हो मुमकिन तो इबादतें करते चलना अबके
    वरना मिलो खुदा से कभी तो नजरें कैसे मिलाओगे

    "जिस्म पर मरता वो मेरे "जब सब को बताओगे
    जिस्मफरोशी का किस्सा भी क्या अपना साथ में सुनाओगे

    और जो मरता हुस्न पे तुझे कबका छोड़ आता
    तेरी गलतियों का किस्सा फिर दुनिया को सुनाता

    दास्तान-ए-महोब्बत देखो उसकी वो कुछ कह न सका
    जो टूटा बेवफाई से तेरी वो अब तक जुड़ न सका।
    ©abhishek141

  • abhishek141 132w

    By unknown writer

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    कुछ लफ्ज़ किसी के मार लेते हैं
    वहम वो अक्सर बार बार देते हैं।

    और वो जो मुस्कुराते हैं औरों को दिखाने को
    लगता है अबके वो भी दिल हार बेठे हैं।