abr_e_shayari

trying to be little bit more humble�� IG- assorted__shades

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  • abr_e_shayari 10h

    गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं ��

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    कलम भी दो अगर तो,
    "भारत" नाम लिखेंगे,
    भारत मां के सींचे हम,
    गौरव-गान लिखेंगे,
    जय श्री भारती जय जय,
    जगत सिरमौर श्री जय जय,
    लिख,तिरंगा नाम लिखेंगे,
    जगत अभिमान लिखेंगे!
    -शायरा

  • abr_e_shayari 3d

    Back after a long break ��
    @happy81 didi bas itna hi aya smjh !
    Or acha likhna chahti thi hua nhi ��

    @suryamprachands @anshuman_mishra
    @anandbarun @abhinavmishra11 @anusugandh
    #rachanaprati143

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    शंकर

    वह बसता हर कण कण है,
    वह कोही तपता भीषण है,

    जो बस गंगा को बांध सका,
    वह एक मात्र ,वो बंधन है!

    जो दीप्त जग के दासों में,
    जिसकी छवि कैलाशों में,

    वो नाग लपेटे फौलादी,
    नन्दी है जिसका साथी!

    जो खोले लोचन धूप दिखे,
    जो बंद करे तो निशा बहे!

    ठाढ़े तो विकराल विकट,
    स्थान ले अम्बिका संग!

    जो स्वर्ग बना पाताल रहे,
    जो भस्म लगा संताप हरे!

    चार दिशा यह नाद करे,
    बस उसका ही जाप करे!

    जो शोर मचाता आरव है,
    बह शंकर है,वह शंकर है!
    -श्रुति

  • abr_e_shayari 5w

    Kuch boring!

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    आंगन में जल ,राख हो गई थीं,
    मेरी राख तलक बची नही थी,
    सजी उस दिन बहुत दुल्हन तेरी,
    मेरे जैसी मगर सजी नहीं थी!
    -शायरा

  • abr_e_shayari 6w

    ना जाने कैसे, हर शाम,
    आजकल, मीलों दूर हो कर भी
    मैं तेरे हाथ का तकिया,
    बना सो लेता हूं!

    ना जाने कैसे, हर शाम,
    आज कल , मीलों दूर होकर भी,
    मैं , तेरे हाथ पकड़,
    सर झुका,
    सो लेती हूं!

    -shayra

  • abr_e_shayari 6w

    निहायती बकवास����

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    संग-ए-दिल हूँ, फिर भी दिल में उसका सय्याल रखता हूँ,
    वो मेरा ख्याल रखती है, मैं उसका ख्याल रखता हूँ!

    वो मुझको मासूम कहती है, गुनहगार हूँ जबकी,
    वो दिल में इश्क रखती है, मैं दिल में दाग रखता हूँ!

    वो अमीर हैं दिल की, मैं फकीर हूँ दिल का,
    वो रोज़ देती है ,मैं रोज़ नयी मांग रखता हूँ!
    ©shayरा

  • abr_e_shayari 7w

    बंद कमरे में स्त्री ने दोनों देखा है,
    यातना भी और वासना भी!
    -शायरा

  • abr_e_shayari 7w

    अरे! उठिये आप सब , आज तो अवध सजी है, मिथिला दुल्हन हुई है!
    क्यों?

    अरे आज हमारे ठाकुर राजा राम जी का विवाह है, अवध की और मिथिला की ओर से आमंत्रित हैं आप सब!

    आज जहां एक ओर अयोध्या नव वधु के लिए उत्सुक है, वहीं दूसरी और मिथिला अपने चार चार ह्रदय समर्पित कर रही है!
    ईश्वर ने भी जब मानव के रूप को धरा तब उन्हें भी सरल भाव से समाज की रीतियों को स्वीकार किया! तो इसी भावना के साथ प्रस्तुत करती हूं एक अतुकांत रचना!
    अपना बहुमूल्य सुझाव साझा करने की कृपा करें ��
    जय श्री राम ����
    (Collaboration with Hemant shukla)

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    मिथिला व्यथा

    पान, सुपारी ,असि कनक की,
    मुंदरी ऐसी ना होएगी,
    सिया अन्य सब लेते जाना,।
    मिथिला बहुत रोएगी!

    बाग अमरपाली के मनोहर,
    कदम्ब की डाली लचके सुंदर,
    पोखरे -नदिया लह लह करते,
    फिर भी कुछ ना सोहेगी,

    मिथिला बहुत रोएगी!

    अंजुरी भर भर चावल जो,
    फेक रही जानकी हमारी,
    सौ सौ गुना भरे भण्डारे,
    अवधपुरी में राम तुम्हारी!

    पर यहां रसोई सोहेगी?
    मिथिला बहुत रोएगी!

    ना गुहार कोहार अवधेश,
    जनक फूटते है नरेश,
    चार चार, जग सुन्दर
    दे दे कैसे तुम्हें सुरेश!

    ना ना लखन चलो तुम धीरे,
    कहो भरत, अकुलाएं धीरे,
    ना ना शत्रुघ्न चलो तुम धीरे,
    अवध कुमारो, बनो ना अधीरे!

    सोलह कोहार , चौ-पालकी खड़ी,
    चार चली अब वज्रमणि,
    हाथ लिए कनक सिंघोरी,
    संसार यमन की पहने चूड़ी!

    अहा! तनिक संभालो राघव ,
    गांठ जटिल ये होएगी,
    ले जाओ रश्मी कुल की,
    अब कहां भोर फिर होएगी!

    राम, बिदा कर ले जाओ,
    पर मिथिला बहुत रोएगी
    मिथिला बहुत रोएगी!

    -श्रुति

  • abr_e_shayari 7w

    बात तो सिर्फ एक रात की थी मगर,
    इंतेज़ार आपका उम्र भर कर लिया!

    इंतज़ार , उम्मीद देता हैं, और बदले में मांगता है आपसे आपका सब कुछ! बेइख्तियार होने तक का इंतज़ार , इस रचना के माध्यम से आप से साझा करने का प्रयास कर रही हूं!
    आपकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा रहेगी ��������❤️
    सौजन्य से - #rachanaprati123
    @anusugandh
    @suryam_prachands
    @gauravs
    @mamtapoet
    @anandbarun
    @goldenwrites_jakir
    @officialhimanshu
    @anshuman_mishra
    @baagad_billa
    @abhinavmishra11

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    इंतज़ार

    शाम और हसीन होती,
    गर अस्ल में शाम होती,
    तेरे चहरे को देख देख,
    चिराग-ए-रौशनी तमाम होती,

    तेरा सर मेरी गोद में होता,
    मेरी जुल्फों से उसकी बात होती ,
    सो जाते तुम भी बतियाते बतियाते,
    मैं भी महकती , गुलफाम होती,

    मेरी चूड़िया जगा देती तुम्हे ,करवट लेते ही,
    तुम कहते "काश ये ज़रा ,खामोश मिजाज़ होती",
    मैं कहती"अच्छा, तुम सोओ ना",
    और इस तरह फिर अवध में शाम होती!


    ज़हे इंतेज़ार की घड़ियां तमाम होती,
    गर अस्ल में ये शाम वो शाम होती!


    ©Shruti

  • abr_e_shayari 7w

    मुझे आसान लगता है,
    बा खुद चले जाना,
    तुम्हे समझाने से बेहतर,
    खुद ही को समझाना!
    -शायरा

  • abr_e_shayari 9w

    आधुनिक प्रेम

    प्रेम का एक प्रकार यह भी होता की जिसमे, आप कभी भौतिक रूप से न मिले हो, परंतु तब भी आप , उसके "मैं रो रही हूं/मैं रो रहा हूं" वाले संदेश देख कर दुखी हो जाए!
    ©shayara