afreen_

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hope ,u will like my poetry & poems 'fond of poetry afreen Siddiqui

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  • afreen_ 150w

    मेरा दम घोट रही है ये बात ऐ बेवफा
    की क्यो मेरा दिल तेरा नाम रट रहा है।
    ©afreen_

  • afreen_ 150w

    When the heart doesn't listen to you,
    You don't listen to the heart
    ©afreen_

  • afreen_ 160w

    में रोने लगी, उसे हस्ता हुआ देख कर
    उसे हसी मेरी वफा पर जो अाई थी
    ©afreen_

  • afreen_ 161w

    तेरा इश्क़ मुझे कुछ ऐसे नीलाम कर गया।
    तन्हा ही नहीं बल्कि बेजान भी कर गया ।
    पड़ती है जादू –तंत्र की जरूरत लोगो को।
    पर तेरे लफ्जो का अंदाज़ ही काम कर गया।
    ©afreen_

  • afreen_ 161w

    Koi Dukh na hua , use khone par bhi
    Kyonki Wo mera na hua, mera hone par bhi
    ©afreen_

  • afreen_ 161w

    अगर रिश्तों में मिठास चाहते हो।
    तो ज़बान में कड़वाहट ना लाए।
    ©afreen_

  • afreen_ 163w

    #mirakee
    #love
    #you
    ❤️❤️❤️

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    Tu Meri wo Khushi hai
    Jise me kabhi na baatu
    ©afreen_

  • afreen_ 163w

    "वफ़ा"

    तूने ही मोहब्बत ठीक से ना निभाई,
    वरना में तो तेरे आगे बहुत गिड़गिड़ाई थी।

    बिन गलती के भी मैंने मांगी थी माफी,
    और तूने उस वक़्त भी की लड़ाई थी।

    ना जाने केसे गुज़र जाते थे दिन तेरे,
    जबकि मुझे तो रातो रात नींद ना आई थी।

    जब डांटा था तूने मुझे चीख चीख कर,
    में रोई नहीं ,बस आंखे नम हो आयी थी।

    मैने तो बहुत कोशिश की तुझे पाने की ,
    लेकिन तुझे पसंद ही कोई और आई थी।

    तुझे छोड़ जाने का फैसला केसे ना करती,
    तूने की ही मुझसे इतनी रुसवाई थी ।

    सोच।केसे जिए होगे हम तेरे बिन,
    जिसको हर वक़्त बस याद तेरी अाई थी

    मुझे खुशी होती है अपने बेवफा होने पर ,
    क्योंकि तुम जैसे वफादारों से दूर रखना , उस खुदा की लाख बेहतराई थी।
    ©afreen_

  • afreen_ 163w

    दिल अगर लगाया है ,तो टूट जाने की हिम्मत रख।
    ये इश्क़ है जनाब, यहां हार कर भी आपकी नहीं चलेगी।
    ©afreen_

  • afreen_ 163w

    #maa
    कुछ पंक्ति मां के लिए ।

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    मां

    गुस्से में रूठ कर भी अच्छा व्यवहार रखती है।
    एक मां ही है बस जो हमेशा मेरा खयाल रखती है।

    वो जानती है कि मुझे अंधेरे से डर लगता है ।
    इसलिए वो घर में मोमबत्ती भी हज़ार रखती है।

    वो खाना नहीं खाती जब तक में घर ना लोटू
    अपने सबर की इंतेहा भी बेमिसाल रखती है

    ज़रा- सी चोट लगने पर भी डर जाती है।
    मां जो है दिल अपना नरम दार रखती है।

    बचपन से ही करती रही परवाह मेरी
    आज बड़े हो गए ,वो फिर भी देखभाल रखती है।

    मेरी खुशियां पूरी करते करते, आ गई उसके चेहरे पे झुर्रियां
    आज भी मेरी खुशी से, अपनी मुस्कान बरकरार रखती है।

    एक मां ही है , जो अपने बच्चो के लिए हर ख़ुशी चाहती है।
    सच! मां तो मां होती है अपना रुतबा कमाल रखती है।
    ©afreen_