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  • aghora 4d

    बहन।

    खाली खाली सा लगता है ये जहां,
    खाली खाली सा लगता है ये मन,
    खाली खाली सा लगता है ये जीवन,
    बहनों के बिना, उनके प्रेम के बिना।

    ©aghora

  • aghora 2w

    अश्क–बारिश।

    नजरें उठी – झुकी , एक पल को अश्क बहे , मौसम
    गहराया ,बारिश की बूंदें गिरें मूसलाधार और फिर मौन।

    ©aghora

  • aghora 3w

    भाई–बहन

    रिश्ता क्या है भाई का बहन से ?
    वही जो है स्वास का जीवन से।

    ©aghora

  • aghora 6w

    चाय हो तेरा खयाल हो, और क्या चाहिए, गर तू साथ हो,तो महक चाय की और महक उठे।

    #tea #teashayri #chai @hindiwriters @miraquill @mirakeeworld @shabdanchal #like #follow

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    चाय और रात।

    वो बड़ी सर्द रात थी और हाथ में पकड़े चाय का प्याला था,
    हल्की सी बारिश थी और देखो तुम्हारा ख्याल घर आया था।


    ©aghora

  • aghora 18w

    चित्त प्रयोजन।

    एक क्षण को राग में भी अविराग लगता है।
    समंदर की लहरों का शोर पास लगता है।

    चोटियों से बहती पवन में प्रस्फुटन अट्टहास लगता है।
    घोर तम के शाए में एक विवादास्पद संवाद लगता है।

    कलम की स्याह का होश अब कुछ बदहवास लगता है।
    एकाकी मौन में भी अप्रिय ध्वनि का प्रसार लगता है।

    न जाने क्यों ? निस्वार्थ कर्म धर्म, संचार उपरांत भी
    अंतर आत्मा का खुद पर ही धिक्कार लगता है।

    ©aghora

  • aghora 30w

    शिवम्।

    एकांत मनभावनम शिवम् , हृदय स्पंदन स्वरं शिवम्
    प्रसन्न चित्त रागम शिवम् , आशक्त ध्यानम विभोर शिवम् ,
    गूढ़ रात्रि यौवन प्रकाश शिवम् , घोर अघोर सदाशिवम् ,
    यत्र लोक शिवम् , तत्र लोक शिवम् , उच्च लोक शिवम् ,
    निम्न लोक शिवम् , शिवम् तत्त्वम , तत्त्वम शिवम् ,
    सर्वत्र यत्र तत्र शिवम् । शिवम् सत्यम , सत्यम शिवम ,
    हरी प्रिये शिवम , शिवम् प्रिय हरी , अस्माकम प्रिय शिवम् ,
    युष्माकम प्रिय शिवम् , तेषाम प्रिय शिवम् , सर्वेशाम प्रिय शिवम्
    ।। ॐ तत्पुरुषाय विधमहे नमः शिवाय धी मही तन्नो रूद्र : प्रचोदायत।।
    ।।। ॐ श्री तत्सत शिवार्पण मस्तु ।।।

    ©aghora

  • aghora 62w

    New one me

    Resetting...........
    Installing new software.
    New one person on the way.
    Typically differ from the previous personality.

    ©aghora

  • aghora 64w

    व्यापार।

    जहां देखो वहां एक से एक नायाब रसूखदार करने को व्यापार बैठे हैं।
    जलती चिताओं और अर्थी में लांसों का कारोबार किए बैठे हैं।


    कोई आश्चर्य नहीं वक़्त का तकाज़ा है या कहो पाप का रंच मात्र नहीं।
    कर लो चलो अपने मन की कर्मफल निर्धारणकर्ता वैकुंठ में सरकार बैठे हैं।

    ©aghora

  • aghora 73w

    खयालात

    एक अजीब खलिस सी है तुझे
    इन कागज़ों पर उकेरने की,
    खयाल करता हूं अल्फाजों को
    इक डोर में जो पिरोता हूं।

    कलम को कागज पर फेरने की
    गुस्ताखी ज्यूंही करता हूं,
    तो ये कमबख्त स्याही है कि
    यार वफा नहीं करती।

    ये खयालात हैं कि जी में जहन
    में नहीं टिकते आवारा से,
    पिरोयी डोर को एक एक कर छोड़
    अंजान ओर निकल पड़ते हैं।

    ©aghora

  • aghora 76w

    दुनिया।

    दुनिया का मैने अलग सा ताना बाना देखा है।
    किसी ओर नजर किसी ओर निशाना देखा है।

    दु:ख में तेरे,अश्कों का दरिया बहाते देखा है।
    और उन्हीं अश्कों के पीछे मुस्कराते देखा है।

    ©aghora