akanksha_priya

Some infinities are bigger than other infinities ❤️

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Reposts
  • akanksha_priya 121w

    'Cause baby you're my morning tea
    Even after you leave,
    your fragrance lingers deep in my soul!!!

    ©akanksha_priya

  • akanksha_priya 121w

    काली गहरी रातों में हीं तो
    चांद की तारीफ में नज़्में लिखी जाती हैं ।

    ©akanksha_priya

  • akanksha_priya 121w

    I may look normal but deep inside I just want someone to love me irrespective of the complexion or the body weight that I have!!

    ©akanksha_priya

  • akanksha_priya 123w

    ❤️

    उस दिन पहली बार देखा था तुम्हें
    तुम अपने दोस्तों के साथ
    हमारे कॉलेज फेस्ट में आए थे
    लाल रंग की शर्ट में
    शायद उस दिन
    लाल मेरा पसंदीदा रंग बन गया था

    जब मेरी गाने की बारी आई
    मैं सहम गई
    तुम्हें देखते ही सारी लाइने जो भूल गई थी
    पर किसी तरह खुद को समझाया, शांत किया
    और शुरू हो गई।
    वो हज़ारों लोग मुझे कभी दिखे ही नहीं
    ऐसा लगा जैसे कोई था ही नहीं वहां
    सिर्फ तुम थे और मैं थी


    अगले दिन तुम मुझे गार्डन में मिले
    बेंच पर बैठे
    ना जाने आसमान में क्या देखे जा रहे थे
    फिर तुमने मुझे देखा
    वैसे तो कई बार लोगों ने मेरे गानों की तारीफ की थी
    पर ना जाने क्यों जब तुमने तारीफ की
    एक सिहरन सी दौड़ पड़ी थी पूरे शरीर में

    इस बात की अलग ही खुशी थी
    कि अगले दस दिन तुम ऐसे हीं मिलते रहोगे
    और हुआ भी कुछ ऐसा ही
    लगभग रोज़ दिखते थे तुम
    और कभी कभी तो मुझे देखकर मुस्कुरा भी देते थे
    सच कहूं तो
    सारे दुनिया की खूबसूरती उसी मुस्कान में समाई हुई थी

    इन सारी बातों के बीच
    मुझे पता ही नहीं चला कि कब आखिरी दिन आ गया
    बहुत सोचा और अंत में ये तय किया
    कि आज तुम्हें सब कुछ बयां कर दूंगी
    थोड़ा ढूंढने पर तुम मिल भी गए
    शायद उसी पल मैं सब कुछ कह देती तुम्हें
    पर अचानक ही तुम्हारा फोन बज उठा
    तुमने कहा, थोड़ी देर में आता हूं
    और चले गए।

    तुम वापस नहीं आए
    मैंने काफ़ी देर इंतज़ार किया
    और शायद आज भी कर रहीं हूं
    पता नहीं तुम कब आओगे
    पर तुमसे कुछ कहना है मुझे
    ज्यादा कुछ नहीं, बस यही
    कि लाल आज भी मेरा पसंदीदा रंग है।
    ©akanksha_priya.

  • akanksha_priya 123w

    Your eyes...
    Whenever I see them..
    I never get lost
    Rather,
    I find...
    Tranquility
    Healing
    Passion
    You
    Me
    And the entire universe
    ❤️
    ©akanksha_priya

  • akanksha_priya 125w

    आज सालों बाद फोन की घंटी बजी
    और सालों बाद मैंने सुनी वही पुरानी आवाज़
    तुम हैरान थे
    इतने सालों के बाद भी तुम मुझे याद थे

    भूल ही कहां पाई थी कभी
    चाहे वो हमारी दोस्ती हो
    या छोटी मोटी नोक झोंक
    चाहे वो तुम्हारा मुझे बेवजह सताना हो
    या रूठ जाने पर मुझे मनाना
    सब याद है मुझे

    क्लास में सबसे पीछे बैठकर साथ खेलना हो
    या फिर चुप चाप चॉकलेट खाना
    और हां, मेरा वो टिफिन भी
    जो तुम हमेशा चट कर जाते थे
    सब याद है मुझे

    फुटबॉल मैच में तुम्हारा फर्स्ट आना हो
    या क्रिकेट मैच में सेकंड
    और हां, वो सिंगिंग कॉम्पटीशन भी
    जिसमे तुम हार गए थे
    सब याद है मुझे

    तुम्हारी वो मनपसंद लाल टीशर्ट हो
    या मेरी मनपसंद नीली टाई
    और हां, वो सफ़ेद शर्ट भी
    जिसपे मैंने इंक गिरा दी थी
    सब याद है मुझे

    गर्मी में आईसक्रीम खाने जाना हो
    या ठंड के दिनों में कॉफी पीने
    और हां, वो बारिश भी
    जिसमे भीग कर हम बीमार हो गए थे
    सब याद है मुझे

    भूल ही कहां पाई थी कभी
    चाहे वो हमारी दोस्ती हो
    या छोटी मोटी नोक झोंक
    चाहे वो तुम्हारा मुझे बेवजह सताना हो
    या रूठ जाने पर मुझे मनाना

    सब याद है मुझे
    और शायद हमेशा याद ही रहेगा ।

    ©akanksha_priya

  • akanksha_priya 125w

    आज पार्क में दो बच्चियों को देखा
    उस पीली वाली बेंच पर बैठे
    मुझे हमारी याद आ गई
    वो हमारी मनपसंद जगह थी ना
    शाम होते ही साथ खेलने निकल पड़ते थे
    जब थक जाते, तो उस बेंच पर बैठ जाते थे
    छोटी से छोटी बात एक दूसरे को कहते थे
    हर किसी का मज़ाक बनाते थे
    एक दूसरे के बिना जैसे अधूरे थे हम
    याद है, लोगों को लगता था कि हम बहनें हैं

    फिर क्या हो गया हमें?
    क्यों इतने दूर हो गए हम?
    हमने वादा किया था कि कुछ भी हो जाए
    हमारे बीच सब वैसा ही रहेगा
    फिर क्यों शहर बदलने के बाद
    हमने दोस्त भी बदल लिए?
    क्यों अब कोई भी बात एक दूसरे को नहीं बताते?
    क्यों एक दूसरे के बिना एक अधूरी सी ज़िन्दगी जी रहे हैं हम?
    क्यों ये दोस्त बहनों से अजनबी बन गईं?

    ये मेरे कुछ सवाल हैं
    जिनके जवाब ढूंढते हुए थक गई हूं मैं
    अगर तुम्हारे पास इनका जवाब है
    तो मुझे बताने ज़रूर आना
    मैं इंतज़ार कर रही हूं
    पार्क की उसी पीली वाली बेंच पर

    ©akanksha_priya

  • akanksha_priya 137w

    Maybe we all are stars...
    Maybe you and I do not belong to the same constellation!!

    ©akanksha_priya

  • akanksha_priya 144w

    पूजा खत्म हुई
    घर छोड़ कर तो आ गई
    पर ये जो घर की यादें हैं
    इनका क्या करूँ ?

    ©akanksha_priya

  • akanksha_priya 147w

    मैं रंगों सी
    तुम जैसे चित्रकार कोई।

    ©akanksha_priya