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  • alkatripathi 20w

    मेरी परछाई

    संग मेरे चलती मेरी परछाई
    होती कभी छोटी
    कभी बड़ी
    कभी होती लम्बी सी
    कभी मोटी
    चाहे हो जाए जैसी
    संग चलती रहती है
    कोई रंग रूप नही
    कोई नैन नक्श नही
    कोई हाव भाव नही
    कोई उसकी चाह नही
    जिसकी हो
    उसी की हो के रहती है
    नही बदलती राह कभी
    पर वो अँधेरे से डरती है
    देख निशा आकर लिपटती है
    मुझसे मेरी परछाई
    चाहे हो धूप घनी
    चाहे छाँव सुहानी
    ना हो कोई संगी
    ना हो कोई राही
    तन्हाई में भी
    संग मेरे चलती मेरी परछाई
    ©alkatripathi

  • alkatripathi 20w

    ईश्वर ने दिया जो तोहफ़ा ‘वो' तुम हो
    माँ कहती है,मेरी परछाई भी तुम हो

    ©alkatripathi

  • alkatripathi 20w

    तुम..

    ज़ख्म दे कर ख़ुद मुझे मरहम भी लगाते हो,
    क्या ख़ूब प्यार जताते हो...
    दस्तूर ए इश्क़ भी तुम ऐसे निभाते हो,
    दिखाकर आईना मुझको ख़ुद शरमाते हो...
    बयां करने को इश्क़ अपना पास बुलाते हो,
    आँखों में देख मेरे चुप हो जाते हो...
    अनसुनी कर धड़कनों की शोर मुझको गले लगाते हो,
    इश्क़ के सारे वादे ऐसे निभाते हो...

    ©alkatripathi

  • alkatripathi 20w

    बेतरतीब बिखरे ज़ख्मों को समेट कर
    रोज उनपर मरहम लगाती हूँ
    क्या ख़ूब हुनर हमने पाई है
    दर्द के साये में रहकर भी
    हरपल मुस्कुराती हूँ

    ©alkatripathi

  • alkatripathi 20w

    तुम!

    कुछ सुनहरे सपने पलकों पे ख़ुद-बा-ख़ुद सज गए
    तुम! तुम ही रह गए...और हम तुम्हारे हो गए
    ख़ुद को अब देखूं कहाँ... मेरे दर्पण भी तुम्हारे हो गए
    तुम! तुम ही रह गए... और हम तुम्हारे हो गए
    ©alkatripathi

  • alkatripathi 20w

    #rachanaprati72 —73
    @anandbarun ji

    Rachanaprati 72 का संचालन कर के मुझे बेहद हर्ष हुआ की इतनी अच्छी अच्छी रचना मुझे और आप सबको पढ़ने को मिली।
    विजेता कोई एक हो ये संभव ही नही है क्योंकी सबकी रचनाएँ इतनी अच्छी है.. loveneetm जी ने अभिमान में स्वयं को रखा,,
    Anandbarman जी ने मियां मिट्ठू में पूरा जीवन दर्शन ही लिखें _do_lafj जी ने अपनी आँखों के बारे में कहा,, abr_e_shayri श्रुति जी ने अहं ब्राह्मस्मि लिखा,, somefeel जी ने भी अपनी तारीफ़ में लिखा,, aka_ra_143 जी ने मैं अपनी हिम्मत लिखी,, goldenwrites_zakir भाई जी ने मैं, मैं नही में बड़ी खूबसूरती से ख़ुद को बताया beleza__ जी ने भी काफ़ी अच्छा लिखा,,
    mamtapoet जी ने दो रचनाएँ लिखी दोनों काफ़ी ही उत्तम थी
    chahta_samrat जी ने भी दो रचना लिखी दोनों काफ़ी अच्छी थी।

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    happy81 जी ने भी शुक्ला डॉन काफ़ी ही अच्छा बिल्कुल अलग सी रचना लिखी थी suryamprachands (छोटे ) ने तो प्रचंड में दिल ही जीत लिया yuvi7rawat जी ने ख़ुद की तारीफ़ बड़े अच्छे से मज़ाकिया अंदाज़ में किया bad_writer or pain_addicted दोनों ने भक्ति रस में स्वयं को रखा vi_shine0202 जी ने, aryaaverma12जी ने,anusugandh इन तीनों की रचना भी काफ़ी सराहनीय थी
    shruti_25904 ने, deepajoshidhawan जी ने और deeptimishra (Depu ) ने भी काफ़ी उम्दा रचना लिखी...
    सभी विजेताओं को बधाई
    Rachanaprati73 की बागडोर मैं anandbarun जी को सौपती हूँ। आशा है आपसबको मेरा निर्णय ठीक लगा हो...
    @anandbarun जी को ढेरों शुभकामनाएं और बधाई
    ©alkatripathi

  • alkatripathi 20w

    रिश्तों की तुरपाई, ज़ख्मो की सिलाई
    क्या ख़ूब करने लगी हूँ मैं
    बिन बहाए आँसू, बिन लिए सिसकियाँ
    सबकुछ सहने लगी हूँ मैं
    ...................................
    अब तो माँ की नज़रों में भी
    बड़ी हो गई हूँ मैं.....

    ©alkatripathi

  • alkatripathi 20w

    बेशुमार रंजिशे हज़ार शिकायतें
    लेकर वो आए थे दर पे मेरे..
    ना जाने क्या ख़ता हुई मुझसे
    अपना दिल ही छोड़ गए,,
    बेधड़क वो दर पे मेरे..

    ©alkatripathi

  • alkatripathi 20w

    बस ‘एक ख़्वाब' अधूरा सा...
    मौत की दहलीज़ पे खड़ी “मैं "
    शुक्र अदायगी करुँ खुशनसीबी का
    शुक्र अदायगी करुँ ज़िन्दगी का...

    ©alkatripathi

  • alkatripathi 20w

    #garibi
    @amateur_skm
    सौरभ की रचना ग़रीबी का खेल पढ़ के एक सच्ची घटना याद आई... लिखने में सुविधा के लिए थोड़ा भाषा बदल रही हूँ...
    बात पुरानी है, मैं अपनी माँ के साथ अपने फैमिली डॉ. के पास गई थी.. वहाँ एक औरत बैठ कर रो रही थी और उसकेआठ साल के बेटे को पानी (saline water) चढ़ाया जा रहा था बच्चे को पानी की कमी से पेट में पड़ेशानी हुई थी बच्चा ठीक था पर उसकी माँ रोए जा रही थी,, तो डॉ. ने समझाते हुए पूछा...

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    डॉ.... इतना क्या रो रही हो, पानी की बस कमी से सब पड़ेशानी हुई है,, पानी भी तुमलोग को नही मिलता क्या?
    माँ..... मैं क्या करुँ ये पीता ही नही है कितना भी बोलूं...
    डॉ..... क्यों गोलू? क्यों नही पीते हो पानी.. देखो कितनी रो रही है तुम्हारी माँ...
    गोलू..... डॉ. साब माँ न झूठ बोल रही है... मैं पानी पीता हूँ, और भर पेट पीता हूँ... मैं ही नही मेरी छे महीने की बहन है न उ भी पीती है....
    डॉ. अचंभित हो कर.... तुम क्या बोल रहे हो...
    गोलू... हाँ और क्या,, रोज रात को हम तीनों भर पेट पानी ही पीते है और बाबू दारु......

    वहाँ बैठे सभी चुप थे..
    ©alkatripathi