Grid View
List View
Reposts
  • alkatripathi79 2h

    ये रचना मेरी भाभी Reetu की लिखी हुई है जो @bad_writer भाई की पत्नी है ����जो फिलहाल इनसे दूर है.....
    भाई @bad_writer भाभी miss you ����

    Read More

    मेरा प्यार

    जब भी तुझे सोचू मैं दुनियां के सवालों का जवाब लिख दूं,
    किसी लब्ज़ में मैं तुझे मेहकश तो किसी लब्ज़ में शराब लिख दूं,
    बना दुं तुझे मैं अपनी पूरी की पूरी ग़ज़ल ओर ख़ुद कोई शायर खराब लिख दूं।

    बनाके मैं ख़ुद को वो उर्दू की तहजीब
    तुझे लखनउ का कोई नवाब लिख दूं,
    ओर कोई पूछें जो मेरे दिल से मोहब्बत की दास्तां
    तो बस तुझे मैं पन्नों पर उतार के सबके जवाब लिख दूं ।

    मोहब्बत हैं तुझसे आगाज़ ए दोस्ती से मेरे यार
    तू कहे तो भरी महफ़िल में ये बात लिख दूं,
    जो बने बीच में हमारी दूरियों का सबब
    सुन मेरी जान क्या मैं उसकी मात लिख दूं?

    तू देखे नज़रों से नजरें मिलाके मुझे
    एक हसीन ख़्वाब की मैं वो रात लिख दूं,
    तुझे इश्क़ की दास्तां सुनाने को जान
    पन्नों पर तेरा नाम मैं अपने साथ लिख दूं।

    *ना लिखने में कोई मुशकत हैं मेरी जान*
    *तू पुकारे मेरा नाम ओर मैं एक मुक्कमल किताब लिख दूं।*

    By Reetu sharma

  • alkatripathi79 5h

    #rachanaprati141
    @bad_writer


    एकतरफ़ा ही सही मैंने तो प्यार किया था
    उसे था या नहीं पर मैंने बेशुमार किया था
    .
    .
    .
    .
    .
    .
    .
    अक्सर पहला प्यार एकतरफ़ा होकर रह जाता है
    जो दोतरफ़ा होता है वो तो किस्मत होता है

    Read More

    एकतरफ़ा प्यार

    इश्क़ होता मुक़्क़मल कहाँ
    ग़र इश्क़ में तुम तड़पे नहीं
    फिर भी इश्क़ मिल जाए तो
    तुमसा कोई खुशकिस्मत नहीं

    ©alkatripathi79

  • alkatripathi79 1d

    Rachanaprati141

    आप सबकी रचनाएँ ही बेहद उत्कृष्ट थी.. मेरे लिए आप सब ही विजेता है
    @tejasmita_tjjt को विजेता घोषित करती हूँ। और @bad_writer संचालन के लिए आमंत्रित करती हूँ
    ©alkatripathi79

  • alkatripathi79 3d

    युवा..

    मिले वसंत या पतझड़ मिले
    अपनी राह से जो ना हिले
    करते जो मजबूत इरादे है
    वही तो युवा कहलाते है

    देश को जब भी संकट घेरे
    आगे बढ़ ये उनको घेरे
    कदम नहीं जो डगमगाते है
    वही तो युवा कहलाते है

    जीवन जिसे भार ना लगे
    हर चुनौती जो स्वीकार चले
    राह अपनी स्वयं बनाते है
    वही तो युवा कहलाते है

    बालक,वृद्ध का जो बने सहारा
    नारी ने जिसे विपदा में पुकारा
    कर्तव्यनिष्ठ जो होते है
    वही तो युवा कहलाते है
    ©alkatripathi79

  • alkatripathi79 3d

    #rachanaprati140

    युवा शक्ति का वंदन अभिनंदन करने मैं आया हूं।
    नई उमंगों को फिर से मैं नभ में उड़ाने लाया हूं।

    शून्य सार्थकता पर मंथन कर शिकागो में पाठ पढ़ाया था।
    युवा में वायु सा वेग बहाकर भारत का परचम लहराया था।।

    उस एकत्व का आज मैं तुमको इतिहास बताने आया हूं।
    हे भारत के वीर पुत्रो मैं तुम्हे जगाने आया हूं ।

    छाकर तुम अब आसमान में रवि सा यू प्रकाश करो।
    देश को नई ऊर्जा देकर उन्नति अब ललाट करो।।

    फूलो सी तुम महक उड़ाकर मेहनत का आगाज करो।
    नई क्रांति की ज्वाला देकर अब फिर से तुम प्रयास करो।।

    निज गौरव को लेकर तुम भू-पर अमृत निर्माण करो।
    पर हार नही लेकर के तुम विजयो का माँ को हार करो।।

    कर्म अश्व चेतक को लेकर महाराणा सा इतिहास करो।
    वीर शिवाजी बनकर के तुम दुश्मनों का सर्वनाश करो।।

    उन वीरो की वीर भूमि पर तुम्हे बताने आया हूं।
    हे भारत के ‘ नरेंद्र’ जनों मैं तुम्हे जगाने आया हूं।
    By unknown writer

    Read More

    युवा पीढ़ी

    Youth....
    First read caption

  • alkatripathi79 4d

    Rachanaprati140

    सबसे पहले मैं gannudairy भाई का शुक्रिया अदा करती हूँ
    Rachanaprati 140 में विषय है, युवापीढ़ी (youth )
    परिणाम शनिवार 15 जानवरी को घोषित की जाएगी
    ©alkatripathi79

  • alkatripathi79 4d

    #rachanaprati139

    @gannudairy__

    काफ़ी दौलत मिल जाती है
    अपनी खासियत दे कर
    फिर भी लोग कमाते है
    अपनी इंसानियत बेच कर

    Read More

    काश! ऊपरवाले ने थोड़ी रहम दिखाई होती
    इंसानों से ज्यादा इंसानियत बनाई होती

    ©alkatripathi79

  • alkatripathi79 1w

    बन कर चिराग तुम,
    उजाले में खो गए...
    कभी मेरे हो गए,
    कभी तन्हा छोड़ गए...

    ©alkatripathi79

  • alkatripathi79 1w

    काई

    घर के एक बड़े हिस्से में आज देखी मैं
    दिवार ढंकी थी काई से...
    वही काई रंग (गहरा हरा )
    चिपका हुआ, अजीब सा
    किसी और के लिए जगह ही नहीं छोड़ता जो
    बिल्कुल यादों की तरह
    हर बार खरोच खरोच कर निकालती हूँ
    जैसे पस और मवाद से भरा ज़ख्म
    अपनी निशानी छोड़ जाता है
    वो काई भी उसी तरह कितनी निशानियां छोड़ जाता है
    और फिर बरसात होते
    आकर सजने लगता है दीवारों पे
    शायद उन दीवारों को भी इंतज़ार रहता है उस काई का
    जैसे मोर करता है इंतज़ार बरसात का

    मैं जब भी देखती हूँ उस काई को
    मुझे याद आने लगते है वो सारे ज़ख्म
    जो उसी काई की तरह दिल की दीवार से चिपकी है
    खुरच खुरच कर निकालती हूँi
    हर बार उसकी खुरचन के दर्द को सहती हूँ
    इस आशा में शायद ये काई अब नहीं लगेगी
    लेकिन फिर बरसात के मौसम में
    दोनों ही दीवारों पे जमने लगती है
    काई (गहरे हरे रंग की )

    ©alkatripathi79

  • alkatripathi79 2w

    लता

    बन कर लता तुम मुझसे लिपट जाना
    मैं ठूँठ सी , सूखी लकड़ी हूँ
    मेरा तो कोई अस्तित्व नहीं
    मैं तुमसे ढँक जाऊँगी
    दिखने में हरे रंग की मैं भी हो जाऊँगी
    मुझपर भी फिर फूल दिखेंगे
    भवरों का गुंजन फिर मैं भी सुनूंगी
    तितलियों के कुछ रंग फिर मुझपर भी लगेंगे
    तुम्हारे सुन्दर, कोमल, डाल और पात
    फिर मेरे ही तो लगेंगे
    मैं भी फिर इतराऊँगी,
    तेरा सहारा जो बन जाऊँगी
    तेरा सारा वज़ूद ही फिर मुझसे होगा

    मैं तुम्हारी रीढ़ बन जाऊँगी
    तुम हवा संग झूमोगे तब मैं संभालूंगी
    तुम कभी गिर भी जाओगे
    लेकर मेरा सहारा तुम उठोगे
    मैं अस्तित्व विहीन,
    हमेशा तुम्हारा अस्तित्व बचाऊँगी
    और सुनो!
    पर जब मौसम बदलेगा
    और तुम सूख जाओगे न
    तब भी तुम मुझसे यूँ ही लिपटे रहना
    फिर दोनों एक जैसे हो जायेंगे
    और दोनों संग जल जायेंगे

    Read More

    लता

    ©alkatripathi79