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  • amateur_skm 9h

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    तुम्हारे पाँव


    तुम्हारे महावर भरे पाँव
    इन्हें बचाकर रखना जमीन पर
    बिखरे हुए हैं स्मृतियों के घास
    उसमें घूम रहे हैं साँप
    ऐसे साँप जो प्रेम में लहर खाते हैं
    देखना कहीं वो पैर में ना लिपटें,
    अगर पाँव रखना ही तो रखती आना
    उन मछलियों पर
    जिस नदी के किनारे तुम कहती थी
    प्रेम कितना भी अभागा कर दे
    नदी भर का दुःख अंजुरी से पीने को देगा ही

    कोई और ना आए
    उन घोंसलों को उठा लेना
    जहां चिड़िया गूंगी बैठी हो
    जिनकी मां मारी जाती है बहेलियों के तीर से
    मैं वहीं बन बैठा रहूंगा
    एक ठूंठ सा पेड़
    तुम आना अपने पाँव रखना
    मेरे पाँव पर
    बसा देना एक नया संसार

    तुम्हारे महावर भरे पाँव


    /सौरभ

  • amateur_skm 2d


    मंदिर में,
    जब भी हाथ जोड़कर खड़े होगे
    तुम्हारी दादी मां हमेशा कान में फुसफुसाएंगी
    "बेटा!अपने लिए मत मांगना,
    अगर मांगना हो तो अपनों के लिए मांगना"
    तुम इसी भ्रम में रहोगे
    कौन अपना है कौन पराया?
    तभी मंदिर की सीढ़ियों पर बैठा कोई तुम्हें पुकारेगा
    तुम भ्रम में होगे कि जाऊं या नहीं!
    याद रखना कि तुम्हारी खुशियों के लिए
    कोई अपनी खुशियों को मार रहा होगा

    तुम्हें मालूम चलेगा
    मांगने से ज्यादा सुख देने में हैं
    इसलिए तुम हमेशा रखना
    अंजुरी भर प्रेम और दो आँखें,
    आँखें इतनी बड़ी हो कि
    अगर कोई रोती आँख चाहे
    तो तुम्हारी आँखों में
    चैन की नींद सो सके

    /सौरभ

  • amateur_skm 1w

    पुराने फिलम के डायलॉग

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    Filmy dialogue बाज़ी

    वीरू: बसंती!इन कुत्तों के सामने मत नाचों
    : काहे! क्यों? Dogs are human's best friend. दोस्तों के सामने क्या शर्माना। नाचो बसंती
    वीरू: नहीं बसंती! इन कुत्तों के सामने मत नाचो
    : ई साला!भौं भौं भौं(गुस्से वाली भौंक)। अरे शेरू आजा बेटा इधर बसंती के पतिदेव को अपने रेबीज वाले दांत से काट तो,जब ये सरकारी अस्पताल के पास नाचेगी सुई के लिए तब मजा आयेगा
    शेरू: अपने रेबीज वाले दांत चमकाते हुए
    बसंती: रूको! मैं नाचती हूं
    : भौं भौं भुआ भौं हुआ हुआ ( कुत्तों का गीत संगीत)


    हीरोइन: पापा! मैं इसे अपना पति मान चुकी हूं।
    पापा: ये गरीबों की फितरत होती है बेटी, अमीर लड़कियों को फंसाने की।
    हीरो: अरे नहीं अंकल ऐसा कुछ नहीं है
    पापा: तुझे कितने पैसे चाहिए,बोल दस लाख बीस लाख बोल कितने चाहिए। ये ले ब्लैंक चेक,भर ले जितना अमाउंट
    हीरो: अरे नहीं अंकल, आप चेक के बजाय डिमांड ड्राफ्ट दो।आप लोग चेक दे कर सिर्फ़ बनाते हो, अकाउंट फ्रीज कर दोगे ,एक रुपया नहीं मिलेगा
    हीरोइन: हरामी


    /सौरभ

  • amateur_skm 1w

    फिर से मां पर कविता(✿^‿^)

    *(समय की परिधि के पार : मृत्यु)

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    बेचैन लोरी


    मां कोई लोरी कहती
    नैन में निंदियाँ नहीं रुकती,
    तुम हमेशा मुस्काया करो
    भले ही आँगन में चिरैया नहीं रुकती,

    ये धरती भी अपनी धुरी पर
    तिरछी घूमती रहती है,
    क्या तुमने अपने कंधे पर
    धरती का बोझ ले रखा है?
    जो हर रात सिरहाने पर तुम अकड़ी रहती हो
    ताकि बच्चा किसी आहट से ना जाग जाए

    मां! बोलने के लिए सिर्फ़
    जिह्वा और कंठ ही नहीं चाहिए होता है,
    जरुरत होती है मां तुम्हारी मुख ध्वनि
    जिसे सीख तोतली जुबान से तुम्हें बुला सकें,

    अगर मैं *समय की परिधि के पार* चला गया
    तुम बुला लेना अपनी लोरी के धुन से
    तुम्हारी मुख ध्वनि सुन कर जान जाऊंगा
    मेरी सतत प्रार्थनाएं ईश्वर के प्रति
    उसके पास पहुँच गई,

    मां!ये संसार ही तृष्णा है
    लेकिन मेरी इच्छाओं का अंत है
    अगर हम फिर कभी मिलें
    दीदी बन जाए तुम्हारी सखी
    और मैं बन जाऊं तुम्हारे आँगन में जामुन का पेड़
    जिसके मजबूत डाल पर तुम
    जब तक जी चाहे सखी के साथ झूला झूल सको


    /सौरभ
    मां का छुटकू सा बच्चा(◕ᴗ◕✿)

  • amateur_skm 1w

    (✿☉。☉)

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    दो प्रेत

    गर्मी गुजर रही है
    धीरे धीरे ठंड आ रही है
    लेकिन इस बार
    देह नहीं दिल ठिठुर रहा है

    गर्मी के उड़ते धूल बैठ चुके हैं
    पार्क के कुर्सियों पर
    अब उन कुर्सी पर कोई नहीं बैठता
    सिवाय दो प्रेत के
    दोनो प्रेत सिर्फ़ एकटक निहार रहे हैं
    वो भी बिना आँखों के

    अब इस सन्नाटे में
    तुम्हें सुनने की कोशिश होती है
    लेकिन अब कोई कविता नहीं सुनाई देती
    सिर्फ़ सुनाई देती हैं सिसकियां
    वो भी प्रेम के देवता की
    जैसे
    उस देवता को किसी ने काल कोठरी में कैद कर
    भयंकर पीड़ाएं दे रहा हो,

    हां! उन सिसकियों के परे
    अब दो प्रेत भटकते रहते हैं
    कभी मेरे छत पर
    कभी तुम्हारे छत पर

    /सौरभ

  • amateur_skm 2w

    ��

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    झूठ झूठ ही होता है
    जो मैंने तुमसे बोला और जो तुमने मुझसे बोला,
    लेकिन जो नहीं बोला गया
    वो सच है,था और रहेगा

    लेकिन सच बोला नहीं जाता
    जैसे नई नवेली दुल्हन ससुराल से परेशान
    कहती है मैं फांसी लगा लूंगी
    लेकिन उसे डर लगता है
    मंगलसूत्र के फंदे से लटकने पर
    इसलिए झूठ बोलती है
    हां सब ठीक है
    लेकिन डर है
    कहीं वो भाग न जाए बंधन छोड़ कर
    इसी अधीरता में मैंने लिखी हैं कविताएं
    जो झूठ को सच में बांध कर रखे

    लेकिन उसे कितने दिन तक बांधा जा सकता है
    एक दिन वो भागेगी
    सारे बंधन तोड़ कर किसी अनजान रास्ते पर
    रास्ते में रोड़े मिलेंगे
    हो सकता है किसी एक से टकराकर
    उसका सीना फट जाए
    उसके अंदर का सच बिखर कर
    आखिर में
    वो मरते हुए कहेगी
    "सत्य अमर है"
    और मर जायेगी
    कवि या लेखक मुस्कुराएगा
    आखिरकार जो उसने नहीं कहा
    वो मर ही गया
    इसलिए सच कभी कहा ही नहीं गया

    /सौरभ

  • amateur_skm 2w

    बचपन

    मम्मी पापा बचपन से कहते थें कि जो काम किया करो उसमें ध्यान दिया करो।

    1) इसलिए बचपन में मैं मूवी देखने में पूरा focused रहता था।एक मूवी देखा था उसमें हीरो का चक्कर अपनी बीवी के अलावा किसी बाहर वाली से चल रहा था, वो घर लेट हमेशा आता था।एक दिन की बात है पापा एकदम लेट को आए थें सब्जी ले कर।मेरे दिमाग में कुछ घूमने लगा।फिर अगले दिन मामा आए थें,पापा मिठाई लेने गए थें लेकिन लेट में वापस आए।तभी मैं मम्मी के कान में बोला "मम्मी लग रहा है मुझे नई मम्मी मिलने वाली हैं"।मम्मी एकदम घूरने लगी, फिर मैं बोला "अरे मैंने देखा है वो आंटी जी से बात कर रहे थें"।मम्मी फिर पापा को घूरने लगी,पापा बोले क्या हुआ ऐसे क्यों देख रहे हो।फिर मम्मी पूरी बात बता दी,पापा हंस कर कहने लगे अरे वो बहन जी थीं उन्हें दुकान से अलमीरा लेने थीं उसी का दाम बता रहा था।फिर सब हंसने लगे,पापा ने पूछा ये सब कहां से खुराफात सीख रहा है,तो मैने बता दिया अनिल कपूर की मूवी देखी थी।

    2) ऐसे ही मैं शोले मूवी देख रहा था तभी गब्बर ठाकुर के हाथ काटने जा रहा था, मैं रोने लगा देख कर।पापा पूछने लगे क्या हुआ बेटा, मैंने पूछा अब वो पॉटी करेगा फिर धोने का क्या? पापा सर पकड़ लिए कहने लगे बेटा तू मूवी कम देखा करो।
    फिर एक दिन मूवी देख रहा था तभी हीरो आया, मैं चिल्ला कर बोला अभी तो कल मर गया था आज कैसे फिर जिन्दा हो गया।

    उसके बाद सेघर वाले सिर्फ़ संडे को मूवी देखने देते थें।

    उम्र: लगभग 10 या 11 साल की रही होगी

  • amateur_skm 2w

    Inglish

    1) Ravenous (बहुत भूखा/ भूक्खड़)

    मेरे हाथों में नौ नौ चूड़ियां
    जल्दी आओ सजना
    कहीं खतम ना हो जाए पूड़ियां

    (यहां पर भूक्खड़ "वो" के बारे में बात हो रही है)

    2) Vegabond (आवारा)

    तू पागल प्रेमी आवारा
    दिल तेरी मोहब्बत का मारा
    अब तू दिखा मोहल्ले में दोबारा
    तू पिट जायेगा भईया पापा के द्वारा

    (यहां मोहल्ले वाले "वो" के बारे में बात हो रही है)


    /आगे भी प्रयास करेंगे ऐसी पगलैती करने का

  • amateur_skm 2w

    बेटी के लिए

    जिस दिन अंधेरे से डरना बंद कर दी
    और
    फिर अगली सुबह तुम्हारे दूध का दांत टूट जाए
    तुम आंसू बहाने के बजाय
    आंसू घोंटना सीख जाओगी
    तब तुम थोड़ी बड़ी हो जाओगी

    फिर किसी शाम पार्क में
    हीलियम वाले रंग बिरंगे गुब्बारे दिखेंगे
    तुम उन्हें अपनी नन्ही उंगलियों से पकड़ने जाओगी
    गुब्बारा आसमान में उड़ जाए
    पैर फिसलेगा हो सकता है
    घुटना छिल जाए और खून बहने लगे
    तुम रोना शुरु कर दो तभी
    लगेगा कोई तुम्हारे कान में फुसफुसा रहा है
    "उठो!वो आखिरी गुब्बारा नहीं था"
    तुम रोना धोना छोड़ कर देखोगी
    कौन है? किसने कहा?
    वो कोई नहीं था!
    वो तुम खुद हो
    जो ख़ुद के हारने पर
    ख़ुद को हारने ना दे!

    जैसे जैसे और बड़ी होगी
    तुम्हें मालूम चलेगा
    ये सुख दुःख जीवन मृत्यु सब छोटी चीज है
    सबसे ज़रूरी संघर्ष करना
    चाहे ख़ुद के साथ हो
    या दुनिया के साथ हो!

    /तुम्हारा पिताअगर हम मिलें

  • amateur_skm 3w

    राज की बातें

    मेरी सबसे पहली हॉरर मूवी "जानी दुश्मन"थी जिसमें एक भूत रहता था जो डोली से उठा ले जाता था।अब मुझे देख कर बड़ा मजा आ रहा था कि लोग कैसे डर रहे हैं।

    शाम तक मैने सोचा कि क्यों ना दीदी को डरा दूं बड़ा मजा आयेगा।हमारे घर में बिजली नहीं थी उस टाइम , लालटेन जल रही थी।मैं दरवाजे के पीछे सफेद चादर ओढ़ कर बैठ गया था और मन ही मन मस्त था कि जैसे ही दीदी दरवाजा खोलेगी मैं उसके सामने आ जाऊंगा। तभी दरवाजे के पास किसी आने की आहट हुई और मैं सांस रोक हुए खड़ा था। जैसे ही दरवाजा खुला और मैं सफेद चादर लिए बाहर आ गया ,कोई चीखा और मैं दांत फाड़ कर हँसने लगा लेकिन ये हँसी ज्यादा देर के लिए नहीं थी। दीदी के जगह पर पापा थें।पापा डर गए थें उसके बाद मेरी कुटाई हुई।

    पापा के डरने के बाद एक चीज समझ में आ गई थी जब ये डर सकते हैं तो और भी डर सकते हैं। फिर सोचा अब घर में किसे डराऊंगा तो मेरी और भयंकर कुटाई होगी।अब किसी बाहर वाले को डराउंगा।

    मैं दीदी के साथ मिल कर प्लान बनाया कि क्यों ना बगल के अंकल जी को डराया जो हर शाम घूमने बाहर जाते हैं।शाम के 6 या 7 बज रहे थें जब कुछ साफ से नहीं दिखता, हमने एक बोरी में पत्ते भर कर सड़क पर रख दिए उसे देख कर लग रहा था जैसे कोई लेटा हुआ है।हम घर के किनारे छिप कर खड़े हो गए थें।जैसे ही अंकल जी हमारे घर के सामने से गुजरे दीदी खिलखिला कर हँसने लगी।अंकल जी इधर उधर देखने लगे तभी दीदी अंकल जी का नाम लेके हँसने लगी।अंकल जी हक्का बक्का थें कौन है अंधेरे में तभी बोरी की तरफ़ बढ़े फिर से दीदी हँसने लगी। अंकल जी बोरी के पास जा ही रहे थे तभी मैंने नकली रबर का बना हुआ सांप फेंक दिया। बेचारे डर कर भागने लगे और बोरी से फंस कर गिर गए।दीदी खिल खिला कर हँसने लगी। अंकल जी सबको तेज तेज चिल्ला कर बुलाने लगे। और फिर क्यासब आ गए और हम दोनों पकड़ गए।

    /सौरभ