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  • anamikappp 10h

    रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला।लेकर कूदि परयो पाताला॥
    शेष देव-लखि विनती लाई।रवि को मुख ते दियो छुड़ाई॥
    वाहन प्रभु के सात सुजाना।जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना॥
    जम्बुक सिंह आदि नख धारी।सो फल ज्योतिष कहत पुकारी॥
    गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं।हय ते सुख सम्पति उपजावैं॥
    गर्दभ हानि करै बहु काजा।सिंह सिद्धकर राज समाजा॥
    जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै।मृग दे कष्ट प्राण संहारै॥
    जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी।चोरी आदि होय डर भारी॥
    तैसहि चारि चरण यह नामा।स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा॥
    लौह चरण पर जब प्रभु आवैं।धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं॥
    समता ताम्र रजत शुभकारी।स्वर्ण सर्व सर्व सुख मंगल भारी॥
    जो यह शनि चरित्र नित गावै।कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै॥
    अद्भुत नाथ दिखावैं लीला।करैं शत्रु के नशि बलि ढीला॥
    जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई।विधिवत शनि ग्रह शांति कराई॥
    पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत।दीप दान दै बहु सुख पावत॥
    कहत राम सुन्दर प्रभु दासा।शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा॥पाठ शनिश्चर देव को, की हों 'भक्त' तैयार।
    करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार

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    शनि चालीसा

    जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।
    दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥
    जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।
    करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥जयति जयति शनिदेव दयाला।करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥
    चारि भुजा, तनु श्याम विराजै।माथे रतन मुकुट छबि छाजै॥
    परम विशाल मनोहर भाला।टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥
    कुण्डल श्रवण चमाचम चमके।हिय माल मुक्तन मणि दमके॥
    कर में गदा त्रिशूल कुठारा।पल बिच करैं अरिहिं संहारा॥
    पिंगल, कृष्णो, छाया नन्दन।यम, कोणस्थ, रौद्र, दुखभंजन॥
    सौरी, मन्द, शनी, दश नामा।भानु पुत्र पूजहिं सब कामा॥
    जा पर प्रभु प्रसन्न ह्वैं जाहीं।रंकहुँ राव करैं क्षण माहीं॥
    पर्वतहू तृण होई निहारत।तृणहू को पर्वत करि डारत॥
    राज मिलत बन रामहिं दीन्हयो।कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो॥
    बनहूँ में मृग कपट दिखाई।मातु जानकी गई चुराई॥
    लखनहिं शक्ति विकल करिडारा।मचिगा दल में हाहाकारा॥
    रावण की गति-मति बौराई।रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई॥
    दियो कीट करि कंचन लंका।बजि बजरंग बीर की डंका॥
    नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा।चित्र मयूर निगलि गै हारा॥
    हार नौलखा लाग्यो चोरी।हाथ पैर डरवायो तोरी॥
    भारी दशा निकृष्ट दिखायो।तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो॥
    विनय राग दीपक महं कीन्हयों।तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों॥
    हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी।आपहुं भरे डोम घर पानी॥
    तैसे नल पर दशा सिरानी।भूंजी-मीन कूद गई पानी॥
    श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई।पारवती को सती कराई॥
    तनिक विलोकत ही करि रीसा।नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा॥
    पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी।बची द्रौपदी होति उघारी॥
    कौरव के भी गति मति मारयो।युद्ध महाभारत करि डारयो॥

  • anamikappp 10h

    रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला।लेकर कूदि परयो पाताला॥
    शेष देव-लखि विनती लाई।रवि को मुख ते दियो छुड़ाई॥
    वाहन प्रभु के सात सुजाना।जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना॥
    जम्बुक सिंह आदि नख धारी।सो फल ज्योतिष कहत पुकारी॥
    गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं।हय ते सुख सम्पति उपजावैं॥
    गर्दभ हानि करै बहु काजा।सिंह सिद्धकर राज समाजा॥
    जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै।मृग दे कष्ट प्राण संहारै॥
    जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी।चोरी आदि होय डर भारी॥
    तैसहि चारि चरण यह नामा।स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा॥
    लौह चरण पर जब प्रभु आवैं।धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं॥
    समता ताम्र रजत शुभकारी।स्वर्ण सर्व सर्व सुख मंगल भारी॥
    जो यह शनि चरित्र नित गावै।कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै॥
    अद्भुत नाथ दिखावैं लीला।करैं शत्रु के नशि बलि ढीला॥
    जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई।विधिवत शनि ग्रह शांति कराई॥
    पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत।दीप दान दै बहु सुख पावत॥
    कहत राम सुन्दर प्रभु दासा।शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा॥पाठ शनिश्चर देव को, की हों 'भक्त' तैयार।
    करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार

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    शनि चालीसा

    जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।
    दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥
    जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।
    करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥जयति जयति शनिदेव दयाला।करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥
    चारि भुजा, तनु श्याम विराजै।माथे रतन मुकुट छबि छाजै॥
    परम विशाल मनोहर भाला।टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥
    कुण्डल श्रवण चमाचम चमके।हिय माल मुक्तन मणि दमके॥
    कर में गदा त्रिशूल कुठारा।पल बिच करैं अरिहिं संहारा॥
    पिंगल, कृष्णो, छाया नन्दन।यम, कोणस्थ, रौद्र, दुखभंजन॥
    सौरी, मन्द, शनी, दश नामा।भानु पुत्र पूजहिं सब कामा॥
    जा पर प्रभु प्रसन्न ह्वैं जाहीं।रंकहुँ राव करैं क्षण माहीं॥
    पर्वतहू तृण होई निहारत।तृणहू को पर्वत करि डारत॥
    राज मिलत बन रामहिं दीन्हयो।कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो॥
    बनहूँ में मृग कपट दिखाई।मातु जानकी गई चुराई॥
    लखनहिं शक्ति विकल करिडारा।मचिगा दल में हाहाकारा॥
    रावण की गति-मति बौराई।रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई॥
    दियो कीट करि कंचन लंका।बजि बजरंग बीर की डंका॥
    नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा।चित्र मयूर निगलि गै हारा॥
    हार नौलखा लाग्यो चोरी।हाथ पैर डरवायो तोरी॥
    भारी दशा निकृष्ट दिखायो।तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो॥
    विनय राग दीपक महं कीन्हयों।तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों॥
    हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी।आपहुं भरे डोम घर पानी॥
    तैसे नल पर दशा सिरानी।भूंजी-मीन कूद गई पानी॥
    श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई।पारवती को सती कराई॥
    तनिक विलोकत ही करि रीसा।नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा॥
    पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी।बची द्रौपदी होति उघारी॥
    कौरव के भी गति मति मारयो।युद्ध महाभारत करि डारयो॥

  • anamikappp 3w

    सुकून

    तलाश सिर्फ़ सुकून की ही होती है,
    रिश्ते को नाम चाहे कुछ भी दे दो,

    किसी की मदद करके जो सुकून मिलता है उसे दुनिया की कोई कीमत नहीं ख़रीद सकती।
    ©anamikappp

  • anamikappp 20w

    जहान-ए-दिल

    कि जो बस रही है आजकल, जहान - ए -दिल मे उनके
    तो कोई खास शख्सियत ही रही होगी,
    हम तो पुराने हो लिए जनाब ,
    अब हमारी कहा ,वो अहमियत रही होगी,

    लुड़क कर गिर चल दिए आज उनकी पलको से हम,
    अब वो आंखे किसी गैर की ,
    जी हुजूरी जो करने लगी है,
    कल तलक जो मीठी सी लगती थी हमारी बाते,
    आज उनको बेफिजूली लगने लगी हैं।

    कभी हम पर भी इस कदर मरते थे ,सिर आंखों पर बैठाया करते थे
    हमसे तो कहने मे डरते थे,आज उनसे पल पल इश्क़ बयां करते है...
    इश्क तब भी कम नही था, अब भी कम नही है
    तब तुझे पाने की दुआ मे शमां जलाया करते थे,
    अब तेरे इंतज़ार मे दिल जलाया करते हैं...
    ©anamikappp

  • anamikappp 22w

    #वादा खिलाफी #बे-ए'तिबारी#human #insaan #todna #chhora #chala gya #badal gya
    #Mirakee world #love #ishq #nazar#writer #writers network #writer's toli #poetry #sad love #black magic #writer's community #editor's choice#missing #yaaden #bichdna #Mirakeeworld #love #ishq #nazar#writer #writer's love #writer's network #writer's toli #poetry #Quits #sad love #black magic #writer's community #editor's choice #badal #sky are #creativearena #writingcontest

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    वादा खिलाफी

    कि इस मासूम दिल पर उन्होंने ,
    दर्द ए सफ़र की नक्काशी , क्या (खूब) की है,…
    वो तो इश्क़ पाक है हमारा,
    तभी तो उनकी ये अदा भी हमने ,
    ताउम्र के लिए (महफूज़) की है,…

    हमारे एतवार के बदले में जिसने, बे-ए'तिबारी की है
    हमारे एतवार के बदले में जिसने, बे-ए'तिबारी की है …

    वो आज कहते है कि ,
    हमने इश्क़ मे वादा खिलाफी की हैं…
    ..................वादा खिलाफी की हैं…
    ©anamikappp

  • anamikappp 25w

    Word Prompt:

    Write a 8 word one-liner on Identity

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    Identity

    No Identity of big lies.

    ©anamikappp

  • anamikappp 25w

    Word Prompt:

    Write a 3 word micro-tale on Lost

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    Lost

    Everybody lost innersoul
    ©anamikappp

  • anamikappp 25w

    Word Prompt:

    Write a 10 word micro-tale on Struggle

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    Struggle

    Everybody struggled ,do right or wrong ,only for living


    ©anamikappp

  • anamikappp 25w

    Dear Diary,

    लगता है जैसे इस ज़िंदगी को आगे बड़ाने के लिए, ज़िंदगी की क़िताब मे कुछ अनकहे, अंजान से पन्ने खुद बा ख़ुद जुड़ते चले जाते है , अब बचपन की ही बात ले लो, एक नन्ही सी प्यारी सी बच्ची जो मां, बाबा से लेकर पूरे घर की जान और मुस्कान हुआ करती थी ,
    जवानी के एक दौर में कभी कभी सबको बोझ लगने लगती है,
    और अब इस बुडापे की तो बस पूछो ही मत, ना हड्डियां साथ है ,ना बालक बच्चे, ना घरबार ना ,

    संग है मेरा ये नटखट वुढऊ, और ज़िंदगी के वो खट्टे मीठे लम्हे, हम भले ही मुरझा गए हैं वक्त के इस दौर में,लेकिन वो लम्हे आज भी जवां हैं।
    अब इस बुढ़ापे मे किस से क्या कहूं , हर अच्छा बुरा दौर देख तो लिया दोनो ने, बस अब तो यही प्रार्थना है प्रभु से , की जब प्राण निकले तो दोनो एक दूसरे के संग हो जैसे स्वर्ग में बिछड़े दो हंस,एक बार फिर से मिल गए।

    ©anamikappp

  • anamikappp 25w

    Word Prompt:

    Write a 8 word one-liner on Struggle

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    We all struggled all life for happy life