ashk_ankush

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सुनो, सुनाओ Admin - Hindiwriters

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  • ashk_ankush 43w

    कोई होता तो

    गर ज़िंदगी में कोई ऐसा होता
    जो मुझसे अपनी बातें बाँटता
    मेरी बातें सुनता, गलतियों पे डाँटता
    मुझसे प्यार करता, मुझे ये एहसास दिलाता,
    कि मेरी एक मुस्कान से उसका दिन है बन जाता,
    गर ज़िंदगी में ऐसा कोई होता
    तो शायद मैं, मैं ना होता ।

    मुझे आदत नहीं इन सबकी,
    शायद संभाल भी ना पाऊँ ये सब कुछ,
    मेहनत के साथ अपने सपनों में खोया,
    अकेला, उदास, अपने शब्दों में रोया,
    बात करने का जी नहीं करता,
    और दिल कहीं लग जाने से डरता,
    थोड़ा ज़िद्दी, थोड़ा आज़ाद हूँ,
    अपनी ही ज़िंदगी में बेहद बर्बाद हूँ,
    और गर ऐसी ज़िंदगी में कोई होता,
    तो शायद मैं, मैं ना होता ।

    ©ashk_ankush

  • ashk_ankush 48w

    शाम होते होते
    सपनों को कल पर डाल देना,

    आदत है हमारी
    ख़यालों को ज़्यादा उबाल देना ।

    ©ashk_ankush

  • ashk_ankush 56w

    दोस्त, दोस्ती, कॉलेज की बातें, और बस रात भर जगी आँखें ।
    आज से तीन साल पहले जब मुंबई की चकाचौंध छोड़कर B.H.U से M.B.A की पढाई करने बनारस पहुँचा तो लगा कहाँ से कहाँ आ गया । मुंबई और बनारस में वही फ़र्क है जो समुंदर और नदी में है । बनारस अपना होते हुए भी, अपना नहीं लग रहा था ।
    फिर एक हफ़्ता निकला और दोस्त मिले, ऐसे दोस्त जिनके साथ बनारस को उन नज़रों से देखा, जिनसे पहले कभी नहीं देखा था । और महसूस हुआ कि बनारस और मुंबई में वही फ़र्क है जो जलेबी और पेस्ट्री में है । बनारस में अपनी रूह से मिलने का मौका मिला और कलम चली, बहुत चली ।
    फिर डेढ़ साल निकल गए और पता भी नहीं चला । गंगा किनारे, दोस्तों के सहारे, चाय की चुस्की, मन की बेफ़िकरी, अंजान लोगों में अपनापन, और चेहरों पर मुस्कान की मिठास, सब देखकर लगा कि बनारस और मुंबई में वही फ़र्क है जो ज़मीन और आसमान में है । मुंबई ने एक तरफ़ सपने देखना सिखाया, उड़ना सिखाया, वहीं बनारस ने ज़िंदगी की सच्चाई को गले लगाना सिखाया । बनारस ने बताया कि आप शून्य से शुरू करके शून्य पर ख़त्म हो जाते हैं । बनारस ने सिखाया कि जितना ज़रूरी आगे बढ़ना है, उतना ही ज़रूरी है आपका अस्तित्व, आपका कर्म, आपका चरित्र और आपका रवैया ।
    आज कॉलेज ख़त्म होने के डेढ़ साल बाद, हम कुछ यार अपने अपने व्यस्त जीवन से थोड़ा वक्त निकालकर मिले । कुछ डर के लिए ही सही, पर मिले । और हमने ना काम की बात की, ना ज़िन्दगी की । हम बस कॉलेज की यादों में गुम रहे । हम सब बनारस की यादों में गुम रहे ।

    #hindi #hindinama #hindiwriters #hks

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    बनारस

    मुंबई और बनारस में वही फ़र्क है जो समुंदर और नदी में है ।


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  • ashk_ankush 59w

    सब धरा का धरा रह गया ना?

    इतनी मेहनत, इतना इंतज़ार,
    इतनी सच्चाई, इतना प्यार,
    इतने सपने, हज़ारों अपने,
    जाने क्या लिखा है किस्मत में रब ने!

    ©ashk_ankush

  • ashk_ankush 59w

    छोटी बहन को उसकी शादी के बाद विदा करना बहुत मुश्किल है! सबसे ज़्यादा मुश्किल तब, जब आप उसकी शादी में पहुँच भी ना पाओ किसी कारण वश ।
    COVID हालातों के चलते मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ, और मन के भावों को यहाँ लिख रहा हूँ । ना metre में है, ना ग़ज़ल है, ना नज़्म है, ना कविता है, कुछ नहीं है । :')

    @hindikavyasangam @hindiwriters @hindinama #hks #hindiwriters #hindinama

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    अलविदा बहना

    छोटी है और प्यारी भी,
    झगड़ती है और न्यारी भी,
    डाँटे भी, समझाए भी,
    सही राह तू दिखाए भी ।

    त्योहारों में हँसते-गाते,
    हर ग़म एक दूजे के भुलाते,
    हर शोर मुझे याद आएगा,
    आज एक दोस्त थोड़ा दूर चला जाएगा ।

    फिर त्योहारों में वो बात ना होगी,
    फिर क्या दसहरा, और क्या होली ?
    मैं ठीक से लड़ भी ना पाऊँगा,
    हर डाँट में छिपा प्यार किसे जताऊँगा ?

    मुझे राखी का इंतज़ार होगा,
    मुझे फिर रंगों से प्यार होगा,
    हर त्योहार में हँसेंगे-गाएँगे,
    जब भी हम फिर मिल जाएँगे ।

    और सेल्फ़ीज़ होंगी पोज़ेज़ में,
    मैं उनमें भी मुस्काऊँगा,
    पर फिर मैं लड़ ना पाऊँगा,
    तुझपर सिर्फ़ प्यार जताऊँगा ।

    मैं जानता हूँ ये शब्द हैं,
    शब्दों का ज़्यादा मोल नहीं,
    हम पास ही थे, हम पास ही हैं,
    ये दुनिया भी तो गोल सही ।

    हर पल तू बस मुस्काती रहना,
    अभी के लिए, अलविदा बहना!

    ©ashk_ankush

  • ashk_ankush 70w

    हर धड़कते पत्थर को मैं दिल समझ बैठा,
    निशान तनहाई के थे, वो तिल समझ बैठा,
    जाने कब, क्यों, कैसे ख़ुद को अकेला कर लिया मैंने,
    कि उसे घर बनाया और मंज़िल समझ बैठा ।

    ©ashk_ankush

  • ashk_ankush 72w

    रंगों का त्योहार है आया,
    रंग है जैसे रोग,
    रंग बदलती दुनिया सारी,
    रंग बदलते लोग ।

    ©ashk_ankush

  • ashk_ankush 72w

    ज़रूरत साथ रहने की
    नहीं समझे, मुनासिब है

    ज़रूरत बात करने की
    नहीं समझे, मुनासिब है

    जिन्हें दिखता था दिल का ग़म
    वो हँसकर टाल देते थे

    हमारे लाख कहने से
    नहीं समझे, मुनासिब है ।

    ©ashk_ankush

  • ashk_ankush 74w

    बहुत देर हो गई है,
    इंतज़ार में हो क्या?
    उसे आना होता तो आ जाता,
    तुम प्यार में हो क्या?

    ©ashk_ankush

  • ashk_ankush 74w

    दरवाज़े के बाहर कदम निकालता हूँ
    तो लोगों से नज़रें मिलानी पड़ती हैं,
    पूछते हैं जब हाल मेरा,
    तो बातें छुपानी पड़ती हैं ।

    ©ashk_ankush