bindu_singh_rajput

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Remember.. Never do somthing Parmanantly Stupid....Just becoz U are Temporarily Upset.✌��

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Reposts
  • bindu_singh_rajput 7w

    " क्यों नहीं "

    रूठूंगी मैं तुमसे एक दिन इस बात पे
    जब रूठी थी मैं तो मनाया क्यों नहीं ??

    कहते थे तुम तो करते हो मुझसे प्यार
    जो दिखाया मैंने नखरा तो उठाया क्यों नहीं

    मुंह फेर कर जब खड़ी थी मैं वहा
    बुलाकर पास सीने से अपने लगाया क्यों नहीं

    पकड़कर तुम्हारे हाथ पूछूंगी मैं तुमसे
    हक अपना मुझपर तुमने जताया क्यों नहीं

    इस धागे का एक सिरा तुम्हारे पास भी तो था
    उलझा था अगर मुझसे तो तुमने सुलझाया क्यों नहीं??

    © bindu_singh_rajput.

  • bindu_singh_rajput 26w

    " वो हूं मैं......

    गुजार दिए होंगे , तुमने कई दिन , महीने, साल...
    जो काट ना सकोगे वो एक रात हूं मैं....

    की होगी गुफ्तगू , तुमने कई दफा कई लोगो से,
    दिल पर जो लगेगी वो एक बात हूं मैं...

    भीड़ में जब तन्हा, खुदको तुम पाओगे,
    अपनेपन का एहसास जो करा दे, वो एक साथ हूं मैं..

    बिताए होंगे तुमने कई हसीन पल सबके साथ में,
    जो भुला नहीं पाओगे , वो एक याद हूं मैं.....!


    ©bindu_singh_rajput.

  • bindu_singh_rajput 44w

    " अनमोल बात "

    मन चाहा पाने के लिए …....
    मन से चाहना भी पड़ता हैं।।

    © bindu_singh_rajput.

  • bindu_singh_rajput 46w

    लगता हैं जैसे अपने साथ
    मेरे हर दुख ले जाती हैं.......

    मां से की हुई दो पल की बाते
    मुझे अलग सा ही सुकून दे जाती हैं


    © bindu_singh_rajput.

  • bindu_singh_rajput 51w

    " क्यों "

    ये इंसान कभी क्यूं संतुष्ट नहीं होता हैं??
    जितना मिलता हैं... उससे ज्यादा के लोभ में रहता हैं

    जिन चीजों से उसे शिकायत हैं.... क्या वह जानता हैं
    की कई बदनसीबों के पास तो यह भी नहीं होता हैं

    खुद भले कैसे भी मुखौटे लगा ले चेहरे पर...लेकिन
    लड़की सांवली मिले तो गोरी के तलाश में रोता हैं

    पूरे की ख्वाहिश मै ये इंसान बहुत कुछ खोता हैं
    क्यों भूल जाता हैं , की आधा चांद भी बहुत खूबसूरत होता हैं.......

    © bindu_singh_rajput.

  • bindu_singh_rajput 52w

    " फिर से वही हुआ "

    जिसका डर था वही हुआ....
    फिर से बातों का सिलसिला खत्म हुआ,
    फिर से वही तन्हाई भरी राते मिली,
    और फिर से दिल चकनाचूर हुआ...
    यूं तो पहले भी तुम धोका देके जा चुके हो ...
    लेकिन इस बार नुकसान कुछ ज्यादा हुआ।।

    © bindu_singh_rajput.

  • bindu_singh_rajput 56w

    ☝️ एक हकीकत

    रहती हूं किराए की काया में,
    रोज सांसों को बेचकर किराया चुकाती हूं
    मेरी औकात हैं बस मिट्टी जितनी,
    बात तो मैं महल – मीनारों की कर जाति हूं
    जल जायेगी ये मेरी काया एक दिन
    फिर भी इसकी खूबसूरती पे इतराती हूं
    मुझे पता हैं मैं खुद के सहारे....
    श्मशान तक भी ना जा सकूंगी
    इसलिए जमाने में दोस्त बनाती हूं ।।

    © bindu_singh_rajput.

  • bindu_singh_rajput 75w

    Loyalty & Respect goes both ways
    If they don't return it,
    they don't deserve it .

    ©bindu_singh_rajput.

  • bindu_singh_rajput 79w

    काश, जिंदगी सचमुच किताब होती
    पढ़ सकती मैं की आगे क्या होगा..?
    क्या पाऊंगी मैं और क्या दिल खोएगा..?
    कब थोड़ी खुशी मिलेगी, कब दिल रोएगा...?
    काश जिंदगी सचमुच किताब होती
    फाड़ सकती मैं उन लम्हों को
    जिन्होंने मुझे रुलाया हैं....
    जोडती कुछ पन्ने जिनकी
    यादों ने मुझे हसाया हैं
    हिसाब तो लगा पाती कितना
    खोया और कितना पाया हैं
    काश जिंदगी सचमुच किताब होती
    वक़्त से आंखे चुरा कर पीछे चली जाती..
    टूटे सपनों को फिर से अरमानों से सजाती
    कुछ पल के लिए फिर से मुस्कुराती
    काश, जिंदगी सचमुच किताब होती


    ©bindu_singh_rajput

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    काश

  • bindu_singh_rajput 93w

    " सोचती हूं ,
    " के कमी रह गई शायद कुछ या
    जितना था वो काफी ना था
    नहीं समझ पाई तो समझा दिया होता
    या जितना समझ पाई वो काफी ना था
    शिकायत थी तुम्हें की तुम जताती नहीं
    प्यार हैं तो कभी जमाने को बताती क्यों नहीं
    अरे मोहब्बत की क्या मैं नुमाइश करती
    मेरी आंखो में जितना तुम्हें नजर आया
    क्या वो काफी ना था
    तुम नासमझ हो.... ये रठ लगाते रहे तुम
    अरे मुझे बेइज्जत ना कर मेरी इज्जत कर जाते
    क्या वो काफी ना था
    " सोचती हूं के क्या कमी रह गई ,
    क्या जितना था वो काफी ना था......


    ©bindu _ singh_rajput.

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    " सोचती हूं "