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  • chahat_samrat 8h

    कुछ न कुछ तो लगता है दांव पर,
    कुछ भी तो यहां खैरात में नहीं मिलता
    ©chahat_samrat

  • chahat_samrat 19h

    धैर्य बहुत बड़ी चीज है,
    जिसे खोकर कई बार हम बहुत कुछ खो देते हैं
    ©chahat_samrat

  • chahat_samrat 1d

    __________��

    आज यूं ही मोहोब्बत आकर बैठ गई उसके बगल में,
    जिंदगी की सर्द हकीकतों से सहमे ठिठुरे हुए उसके मन को पढ़कर,
    अपनी गर्माहट की कमी महसूस कर,
    उसपर उसके एक एक अनोखेपन की ऊनी तुरपायी से बुने ,
    अपने भीतरी मन से उपजी ढेर सारी तारीफों के रंगबिरंगे धागों से बुना ,
    एक सुकून का शाल ओढ़ाकर -
    उसके विचलित मन को शांत और तसल्ली देने की कोशिश करने लगी.....

    मोहोब्बत वाकिफ है उसकी हर फितरत से,
    मोहोब्बत जानती है की उसे सर्दी लगती है वो गर्माहट चाहती है
    पर वो किसी का दिया हुआ गर्म शाल नही ओढ़ती,
    जबकि मन से वो ओढ़ना चाहती है

    मोहोब्बत जानती है
    की वो मोहोब्बत से नही - मोहोब्बत की विरह से डरती है
    उसके बाद की बिछड़न से डरती है
    वो नही डरती दुनिया से, ना दुनियादारी से
    वो बस अपने भावुक , नाजुक , मन से डरती है....

    वो मन जो किसी को अपना कहकर ,
    फिर कभी उसे गैर नही कह सकता
    किसी से एक बार दिली मोहोब्बत कर,
    ताउम्र कभी बैर नहीं कर सकता,
    मुकर गया गर अपनी ही जुबान से तो फिर
    किन्ही खूबसूरत वादियों में वो सैर नही कर सकता ...

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    इक पतंग

    मोहोब्बत चाहती है उसे खुद में बांधना,
    उसे उम्रभर खुश रखने के लिए,
    पर उसका मन ,जैसे बंधा हुआ है किसी पट्टी से जो अब नही चाहता किसी भी हालत में खुलना ,
    शायद डर है उसे उसके मन के खुलने से एक वक्त के बाद नचाह कर भी बिखर जाने का,
    शायद बहुत वक्त लगा है उसे खुद के नाजुक से मन को इतना कसकर बांधने में...
    जो दोबारा से वो मशक्कत दोहराना नही चाहती ....

    मोहोब्बत चाहती है की,
    उसके यूं कसकर खुद में बंधे हुए मन को आजादी मिले,
    ये वो भी चाहती है की उसे खुद के बंधनों से आजादी मिले,

    पर वो डरती है खुद के बंधनों से आजाद होने पर बिना दिशा निर्देश के भटकने के बाद होने वाली दशा से....

    hmm..
    क्योंकि उसने देखा है मांझे से बंधी आसमान में बेफिक्र लहराती पतंग को , जो मांझे की डोर से अलग होने के बाद
    और कितनी देर तक हवा में रहती है....
    फिर कही किसी पेड़ पर अटक जाती है...
    या कहीं दूर जमीन पर जा गिरती है...
    .जहां कोई उस कटी पतंग को फिर से उड़ाने के लिए ढूढने ना जाकर
    नई पतंग पुराने मांझे में बांधकर उड़ाता है....

    मोहोब्बत देखती है उसकी आंखों की गहराइयों में उड़ती वो मिजाजी पतंग
    जो लहराती रहती है ऊंचे आसमान में उसके खुद के बंधे मनरूपी मांझे से जो
    कभी मन को हल्का कर मिजाजी पतंग को कुछ पल हवा के भरोसे छोड़ देती तो कभी उसे खींचकर दूर ऊंचाई तक की सैर कराती....जिसकी चरखी उसने अब हर पल अपने खुद के विश्वास के हाथों में थाम रखी है....

    मोहोब्बत उसका डर जानती है ,
    उसकी जरूरत जानती है,
    उसकी खुशी उसका दुख जानती है,

    बहुत कुछ करना चाहती है मोहोब्बत उसके लिए
    पर वो बहुत कुछ न करके सबकुछ करती है
    बस उसे दुखी नहीं करती ...
    hmm...
    क्योंकि वो मोहोब्बत है और मोहोब्बत करती है....
    ~चाहत

  • chahat_samrat 3d

    पकड़ में भी नही आता
    छूट भी तो नहीं जाता
    है जो वो उलझा हुआ
    बस इन्ही आते जाते रस्तों से
    ©chahat_samrat

  • chahat_samrat 3d

    बहुत दिन तक , बहुत कुछ भूला नहीं जाता
    गुजरे कुछ रास्तों पर फिर से चला नही जाता
    थका तो नही है वो, न ही है वो हारा हुआ सा
    बस मासूम बनकर अब खुद को छला नही जाता
    ©chahat_samrat

  • chahat_samrat 3d



    जरा सा उसका खुलकर आना,
    जिंदगी का उसपर भारी पड़ने लगना,

    जीने की भी अजीब रिवावतें हैं यहां,
    हम थोड़ा वक्त दें लोगों को,
    तो लोग तय करने लगते हैं हमारे हक की खुशियां
    ©chahat_samrat

  • chahat_samrat 1w



    अंधेरी कोठरी में भी आती रहती है रोशनी किसी सुराख से,
    कैद खुदा का एक बंदा जो कभी मायूस नही होता अंधेरों में,
    ©chahat_samrat

  • chahat_samrat 1w



    मेरा कुछ भी तुझमें ठहर जाए
    तो समझ लेनी कहीं ठहरी हूं तुझमें मैं,
    वरना,
    यहां तो,
    उस दीवार पे टिकी घड़ी भी एक पल ठहरी नहीं
    ©chahat_samrat

  • chahat_samrat 2w



    लिख कर ,छोड़ देना
    डायरी के कुछ पन्ने मोड़ देना
    ये मोड़,
    असल में बारीकी मोड़ थे, सफर ए जिन्दगी के
    जहां या तो बड़ी देर तलक बैठना हुआ है
    या तूफान सी रफ्तार में चलना हुआ है

    ....hmm जिंदगी
    ©chahat_samrat

  • chahat_samrat 2w

    हवा के बदले हर रुख से है वाकिफ
    तूफानी हवाओं से गुजरा हुआ वो परिंदा

    ©chahat_samrat