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  • dil_k_ahsaas 22h

    " उलझन "

    मरने की कोशिश में हर पल जीते रहे
    एक बार ना मर सके तो पल पल मरते रहे।

    मन मारने के नए नए तरीके ढूँढते रहे
    कुछ ना मिला तो औरों की खातिर खुद को भूलते रहे।

    दिल ने धड़कना नहीं छोड़ा और धक-धक करता ही रहा
    दिल पर बोझ लाद उसे कमजोर करने की कोशिश करते रहे।

    उलझनों में उलझ कर ताना बाना बुनते रहे
    एक सिरा सुलझाया तो दूसरे सिरे में पैर फँसते रहे।

    जिंदगी की राहें क्यूंँ बेवजह मोड़ ले लेती हैं
    मोड़ मुड़ते ही क्यूँ चौराहों पर खुद को खड़ा देखते रहे।

    दिल के एहसास। रेखा खन्ना
    ©dil_k_ahsaas

  • dil_k_ahsaas 1d

    " ना "

    मेरी " ना " को सुन कर भी सुनना नहीं चाहता
    मेरी " ना " सुनकर अब मुझे पहचानना नहीं चाहता।
    जिद्दी है इतना कि ज़िद्द छोड़, रिश्ता निभाना नहीं चाहता
    अपनी खोखली ज़िद्द के आगे कुछ समझना नहीं चाहता।

    दिल के एहसास। रेखा खन्ना
    ©dil_k_ahsaas

  • dil_k_ahsaas 1d

    " उधार "

    तितलियों से कुछ उनके हसीन मनमोहक रँग उधार माँगे हैं
    अपने मुरझाए चेहरे को मैं अब खिला-खिला देखना चाहती हूँ।

    तन्हाइयों की खनक से भरी हँसी गूँजती है चारों ओर मेरे
    अब मैं जंजीरों को तोड़ खिलखिला कर हँसना चाहती हूँ।

    इक तेरी चाहत में बेवजह ही फना कर दिया खुद को
    अब खुद को समेट कर फिर से जिंदा कर जीना चाहती हूँ।

    दूर कहीं आसमान मोहब्बत से धरती के गले मिलता दिखता है
    मैं धरती और तुम को अपना आसमां बनते देखना चाहती हूँ।

    बेबस दरिया बहता रहता है दो किनारों के बीच बँध कर
    मैं हर किनारे को तोड़कर उन्मुक्त हो कर बहना चाहती हूँ।

    दरख्तों की मजबूरी है कि एक दिन सूखा शज़र बन मरना है
    मैं सूखे पड़े शज़र को मोहब्बत से सींच हरा-भरा करना चाहती हूँ।

    रेत थी कि हाथों से फिसलती ही रही और मुठ्ठी में पकड़ी ना गई
    रेत की इस कला को सीख मैं हर बेड़ी को तोड़ निकलना चाहती हूँ।

    दिल में एक शोर मचा है एहसासों और हकीकत के नज़ारों का
    दिल की दीवारें फौलादी कर कर्कश आवाज़ छीन लेना चाहती हूँ।

    दिल के एहसास। रेखा खन्ना

  • dil_k_ahsaas 2d

    " आफताब और अँधेरा "


    वो आफताब बन कर जिंदगी में आया
    मेरी अपनी रौशनी को भी चुरा कर
    मेरे अंदर, दिल की गहराइयों तक
    मरघट का अँधेरा भर कर
    एक दिन चुपचाप चला गया।

    अपनी ही रौशनी को तलाशती रही मैं
    ना वो वापस आया ना मेरी अपनी
    रौशनी ही मुझे कभी वापिस मिल सकी
    पर हाँ जिँदा हूँ अब तक अँधेरों को
    अपने अंदर समेटे हुए शायद किसी उम्मीद में।

    रोज़ थोड़ा-थोड़ा करके मरघट का
    अँधेरा निगल रहा है अब
    अक्सर सोचती हूँ कि आफताब तो
    रौशनी भरता है किसी की जिंदगी में
    पर ये कैसा आफताब था जो
    सिर्फ अँधेरों को अपनी चमक के पीछे
    बड़ी ही कुशलता से छिपा कर लाया था।

    वो चँचल और अपने में ही खुश रहने वाली
    लड़की ना जाने मेरे अंदर से निकल कर
    कहाँ खो गई कभी पता ही ना चल सका
    बस अब आँखों को बेवजह ही तंग करती हूँ
    कि अंँधेरों में झाँक कर खुद को ढूँढ लाए
    कहीं से भी और कैसे भी, बस ढूँढ लाए।

    रोज़ खुद को यूं ही थोड़ा-थोड़ा सा मरता हुआ
    देखना बहुत दुख देता है पर जिँदा रहने की भी
    तो अब कोई ख्वाहिश ना बची है दिल में
    पर जी रहीं हूँ जैसे तैसे, हाँ अब बेवजह
    मुस्कराहट आ ही जाती है जब कोई हाल पूछ लेता है
    अब हर किसी को तो दुखड़ा नहीं सुनाया जाता है।

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    अक्सर सोचती हूँ कि मुस्कराहटों की भी उम्र होती है क्या
    आँखों की चमक की भी उम्र होती है क्या
    की एक दिन अचानक जैसे शरीर की मौत होती है
    इनकी भी मौत हो जाती हैं और फिर कितना भी चाह लो
    ये जिँदा हो कर फिर चहकती और चमकती ही नहीं है।

    कभी कभी ऐसा भी लगता है जैसे कुछ लोग
    एक श्राप के तरह जिंदगी में शामिल होते हैं और
    एक कोढ़ बन कर ताउम्र के लिए जिंदगी में ठहर जाते हैं
    और धीरे-धीरे कर के अँगो की भाँति
    जब तक सब-कुछ ना निगल लें, पीछा छोड़ते ही नहीं है
    और इनसे पीछा छुड़ाने के लिए सिर्फ मौत ही
    एकमात्र उपाय है, पर क्या कोढ़ का कोई इलाज नहीं है।

    आफताब, माहताब, मोहब्बत, प्यार,
    विश्वास सब कुछ झूठ है
    सब कुछ झूठ का एक ऐसा पुलिंदा है जिसे
    हर इंसान शायद बेबस है ढोने के लिए
    गर कोई आवताब बन‌ जिँदगी में आता है तो फिर
    वो अँधेरा बन कर कैसे छा जाता है चारों ओर
    और जो पहले से ही अँधेरों में जी रहा है
    कोई कैसे उसकी जिंदगी को रौशनी से भर जाता है।

    अनगिनत सवाल और उनके अनगिनत जवाब सोचते-सोचते
    जिंदगी बीत रही है पर दिल को तसल्ली देने वाला
    जवाब कभी भी ना मिला, मिला तो हर बार एक नया सवाल
    पुराने हो गए जवाब में से टुकुर-टुकुर झांँकता हुआ
    ऐसे जैसे कह रहा हो मैं तो पीछे ही रह गया अनदेखा हो कर
    मेरा जवाब भी तो ढूँढों ना, पर क्या हर सवाल का जवाब मौजूद है, तो क्या आफताब और अपनी खो गई रौशनी को ढूँढने के साथ साथ अब मन मार कर जवाबों के पीछे भी भागना पड़ेगा।

    अनगिनत एहसास, अनगिनत ख्याल एक दूसरे पर हावी होकर अक्सर मुझे उलझा देते हैं और मैं इनके सख्त
    तानों-बानों में उलझ कुछ समय के लिए रौशनी को तलाशना भूल कर अंँधेरोँ में रहना पसंद करने लगती हूँ।
    मैं दिया और ये मेरी कहानी। नाम है दिया पर वो दिया जिसकी अपनी रौशनी ना जाने कब की खो गई है। वो दिया, जो ना जाने कब अँधरों की भेंट चढ़ा दी गई।

    दिल के एहसास। रेखा खन्ना
    ©dil_k_ahsaas

  • dil_k_ahsaas 4d

    " Magnetic Waves "

    I am weaving a dream with golden thread of love and writting a love poetry with the ink of my pretty bubbly emotions.

    You are the one for whom my soul was craving. You are the one for whom my love poem was waiting.

    Waves of feelings are like a high tide and trying to grab me and dip me in the ocean of love.

    I am trying hard to not look at you but unfortunately the more I try to go away, the more your magical aura is sending a magnetic waves of love.

    I am weaving a imaginative niche in my heart where our love will take a breath and it's aroma will nourish and flourish every thing with it's magical touch.

    Rekha Khanna
    ©dil_k_ahsaas

  • dil_k_ahsaas 4d

    " ओस और ख्वाब "

    ख्वाब भी ओस की बूंँदों के जैसे होते हैं
    रात भर बेबाक सरगगोशियाँ करते हैं
    सुबह की पहली किरण के चूमते ही
    खफा हो कर कहीं छिपकर
    फिर रात का इंतज़ार करते है।

    दिल के एहसास। रेखा खन्ना
    ©dil_k_ahsaas

  • dil_k_ahsaas 4d

    " ख्वाब "

    आँखों की पुतलियों में एक चेहरा ठहर गया है
    जो पलकें झपकाऊँ तो सीधा दिल मेँ उतरता है।

    चाहत जाग रही है धीरे धीरे, तरंगों को ना छेड़ो यूँ
    चाँद दिलबर को लाया है, अब ख्वाब बन आँखो में उतरना है।

    नींद में भी क्यूँ अधरों पर मुस्कान खेलती है
    क्या साजन ने तुम को कस कर अंग लगाया है।

    दिल के एहसास। रेखा खन्ना
    ©dil_k_ahsaas

  • dil_k_ahsaas 5d

    " Far Away "

    Look at the moon, did you see my face
    No darling, like a moon I am too, far away
    Far away from you as no love left in me anymore
    Far from you as you pushed many thoughts in my heart as well as in my mind about my presence in your life.
    The essence of yours, which I love to smell and taste through my eyes and smile, whenever I see you, no longer lure me towards you.
    And darling, the way moon looses it's shine gradually, you have lost me forever but unfortunately.....

    Rekha Khanna
    ©dil_k_ahsaas

  • dil_k_ahsaas 1w

    " याद "

    मैं शायरी लिखती हूँ वो दर्द बन शब्दों में समाता है
    मैं दर्द लिखती हूँ वो मेरी मौत बन कर बुलाता है।
    मैं मौत लिखती हूँ वो बेवफाई कर मुकर जाता है
    मैं मुकरना चाहूँ गर वो अपनी मोहब्बत याद दिलाता है।

    दिल के एहसास। रेखा खन्ना
    ©dil_k_ahsaas

  • dil_k_ahsaas 1w

    " चाहत और मौत "

    टूटा दिल, बिखरे एहसास और लगाव
    धीरे धीरे मौत की तरफ धकेलते हुए
    अक्सर अनगिनत सवाल करते हैं मुझसे
    आखिर क्या कसूर था कि तुम फिर से
    जीने की शुरुआत ना कर सके।

    चाहत ने कुछ इस कदर मारा कि
    फिर कभी सँभल ना सके
    टुकड़े अनगिनत थे, किसे उठाते और
    किसे यूँ ही और बिखरने के लिए छोड़ देते
    जीने की फिर शुरूआत करने के लिए
    सभी टुकड़े जोड़ने जरूरी थे।

    मन ही विकृत हो चला था
    दिन-रात हो रही दिलो-दिमाग की जँग से
    दिमाग अक्सर ताना मारता कि
    समझाया था ना कि विश्वास ना करना कभी
    और दिल,
    दिल तो जैसे कुछ सुनना ही नहीं चाहता कभी।

    किस्मत भी हाथों की लकीरों की तरह ही
    हमेशा कटी-फटी ही रही या फिर
    लकीरें तो अनगिनत थी हाथ में पर
    किसी में भी किस्मत ना लिखी थी
    पर खाली खाँचा ही खिंचा हुआ है
    हथेली के छोर से दूसरे छोर तक।

    आँखो का दरिया तो ना जाने
    कब का सूख गया
    पर फिर भी ना जाने कहाँ से
    एहसास छलक ही जाते हैं
    रातें अक्सर यही सोचते हुए गुजर जाती हैं कि
    ये तन्हाई आखिर कब तक साथ देगी
    क्योंकि ये तो जबरदस्ती गले पड़ी हुई हैं
    एक दिन‌ इसकी मोहब्बत भी खत्म हो ही जाएगी।

    एक लम्बा वक्त बीत गया अकेले चलते-चलते
    ना जाने क्यों कोई मंजिल नहीं नसीब में
    राहें भी है अनगिनत मोड़ लिए हुए
    कोई राह नहीं जाती सुकून के मोहल्ले की ओर कि
    दो पल शाँति के ही बीता ले दिल
    दिल, कहने को दिल तो अब कुछ महसूस नहीं करता
    फिर भी दिल बहुत कुछ याद कर के
    हर पल एक नई मौत मरता है।

    दिल के एहसास। रेखा खन्ना
    ©dil_k_ahsaas