dipsisri

ig:- dipsi_srivastava बस इस बार ठहर जाना!

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  • dipsisri 18h

    Pov:- From a teenager who thinks she/he isn't loved and everything around them becomes depressed.

    (Just experimenting with different styles because I always write in love genre.So just trying)
    :)

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    A disposable teen.

    It doesn't make me happy,
    When you ask me 'How Am I?'
    do you know about my nightmares
    and why every day I scream loudly & cry?

    It kills me every fucking day,
    Why people around me
    are pretending to be genuine,
    Do they know 'I hate them all'
    And they made my day more ruined?

    It is all so awful in this fake loving life,
    At this moment I just want to
    stab myself with a sharp cut knife.

    Oh look, everything is dead now,
    And I'm feeling so free.
    Oh dear fake people,
    Just one thing for you to see,
    Please bury my deadbody in my favourite lea.

    Because now I'm a disposable teen,
    Drowning in the saddest blue sea.

    ~Divyanshi Srivastava

  • dipsisri 2d

    Highly inspired by the poem "Childhood" by Markus Natten.

    //I think it was never that "we" were in love.//
    ~D.S

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    When did our love vanish?

    When did our love vanish?
    Was it the day when I felt,
    I am just a dumb childish girl.
    And this "forever" thing doesn't
    Even exist in a world that's real.

    When did our love vanish?
    Was it the time when I realised,
    You are the murderer of that
    Innocent kid living inside me.
    And I just wanted to flee from
    this fake bond of love,
    Which was never meant to be.

    When did our love vanish?
    Was it the time when I find out
    My heart is the only thing that's really mine.
    And I am that special person I've been
    Searching for to make my heart shine.

    When did our love vanish?
    Was it the moment when definition of
    Love was in my diary,
    In a form of new written poem.

    Our love got hidden in that poem,
    Which my pen never wrote.
    This was the day when I looked up at
    myself in the mirror with gloat.

    ~Divyanshi Srivastava

  • dipsisri 2d

    तुम्हारे पूछे गए हर वो प्रश्न जिनका जवाब मैं अपनी चुप्पी से देती थी आज मैं उन जवाबों को लिखती हूं और मुझे इस बात की खुशी है कि मैंने उन्हें शब्दों का रूप नहीं दिया था। प्रेम में असहाय होना बहुत पसंद था मुझे, अपने प्रेमी से अपनी हर वो बात छिपाकर रखना जिससे उसे मेरे उसके प्रति प्रेम के बारे में ज्ञात हो जाए। उससे गानों के जरिए अपनी बातें कहना मेरे दिल के सबसे करीब हिस्सों में से था। तुम्हारे जाने के बाद सब कुछ तो तुम अपने साथ लेकर चले गए और पर मेरी आंखों में तुम्हारी मुस्काती हुई छवि और ये गानों का कलेक्शन इन्हें तुम मुझसे नहीं चुरा पाए और शायद कोई कभी इन्हें नहीं चुरा सकता। तुम्हारी दो भूरी चमकती आंखें तुम्हारे पूरे दिल का हाल बड़ी आसानी से बता देती थी मुझे और मैं इस बात का बहुत गुमान दिखाती थी तुम्हें कि तुम मुझसे कभी कुछ छिपा नहीं सकते। आखिरी बार जब मैंने तुम्हारी आंखों में देखा था उनकी चमक कहीं खो चुकी थी और काफी उदास थी तुम्हारी आंखें। मुझे उदास आंखों से बहुत लगाव है क्यूंकि उनमें मुझे तुम दिखाई देते हो। कई बार लगता है हर बार की तरह इस बार भी तुम आओगे और मुझे मना लोगे पर अब शायद ना तुम कभी वापस आओगे और ना मैं हर बार की तरह झट से मानने वाली हूं।

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    जानते हो, पहले तुम्हारे सिर्फ एक ख्याल से मेरी आंखें भर जाती थी मुझे नहीं पता ऐसा क्यूं होता था पर अब देखो गुजरते वक्त के साथ आंसू भी सुख चुके हैं और प्रेम का वो गुलाब भी जो मैं अपनी किताब में सजा कर रखती थी। प्रेम में रहकर प्रेम को बनाए रखना कितना आसान होता है ना पर आसान चीज़ों को व्यक्ति सबसे ज्यादा कठिन बना देता है। मैं खुद को बहुत भाग्यशाली मानती हूं क्यूंकि मेरे प्रेम ने मुझे उसके प्रेम में हमेशा रहने दिया कभी मुझे रोकने की कोशिश नहीं की और शायद यही इसका कारण भी है कि मैं वो एक रेखा नहीं देख पाई जो मेरे और तुम्हारे बीच में दुनिया ने खींची थी।वो सभी चीज़े जो व्यक्ति प्रेम में सिर्फ खुद से जोड़े रखता है और सामने वाले से बताने में डरता है मैं चाहती हूं मेरी कविताएं उनके लिए एक सुरक्षित स्थान बने जहां वो हर बात कही जा सके जो कहीं मन के कोने में दब कर रह जाती हैं।
    अब तो तुम मुझसे सब कह देना?
    तुम्हारे लिए तो मैं खुद एक "कविता" बन जाऊंगी।

    ~दीपसी
    २६ जनवरी || २०२२ ||

    /तू कहे तो बन जाऊं कागद,
    तू जो कहे तो बनूं मैं इक "कविता"!
    बस रहने देना तेरे "प्रेम" में पिया,
    बन कर इक प्रेम कविता।/❤

  • dipsisri 3w

    मुझे नहीं पता किसी से विदा लेने का सही तरीका कैसा होता है मगर जिस तरीके से तुम गए थे वो ठीक नहीं था। मेरे अंदर की वो लड़की जिसे लिखने का पागलपन सवार रहता था अब वो शांत हो चुकी है। एक लिखे को खत्म कर वो हर बार लिखना भूल जाती है। जब वो अपना पुराना लिखा दुबारा पढ़ती है तो उसे अपनेपन की जगह झूठ दिखाई देता है और उसके मन में एक दोषी की भावना जन्म लेने लगती है कि उसने ये जो कुछ लिखा था क्या वो बस एक कल्पना को शब्द दिया गया था या सच में जो कुछ उसपर बीता है उसे कल्पना मात्र बनाकर लिख दिया। तुम्हें पता है जब-जब वो कुछ नया लिखती है तुम मुझे एक नए रूप में वापस मिलते हो।
    अब मुझे तुम्हारे बारे में सोचने के लिए खुद से सोचना पड़ता है। एक वक्त था जब मुझे लगता था मैं तुम्हें किसी भी तरीके से बस भूला दूं और अब इस बात से डर लगता है कि मैं तुम्हें हर दिन थोड़ा-थोड़ा भूलती जा रही हूं। कितनी त्रासदी है इस बात में कि मैं तुम्हें भूल रही हूं और ठीक उसी गति में लिखना भी। तुम्हें भूलने से ज्यादा तुम्हें याद रखना अब मेरे लिए कठिन होता जा रहा है।मेरा लिखना तुमसे जुड़ा है जिस दिन मैं तुम्हें पूरा भूल गई उस दिन शायद लिखना भी मुझसे छूट जाएगा।

    ~दीपसी

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    बंद आंखें अब जाकर हैं खुली,
    कलम चलती रही रात भर,
    मगर ज़बान अभी तक है सिली।

    टूट गई थी सांसें दोपहर में ही कहीं,
    आत्मा फिर भी पूरी रात प्रेम पर लिखती रही।

    निष्प्राण पड़े शरीर में प्राण की लहर दौड़ गई,
    "उसकी" आवाज़ की धुन जब कानों में जा गिरी।

    एक हाथ था मेरे हाथों में जो पल भर में छूट गया,
    एक शख्स था मेरे जीवन में जो मुझसे रूठ गया।

    -दीपसी श्रीवास्तव

  • dipsisri 5w

    कुछ चीज़ें खुद पूरी तरीके से मिट जाती हैं मगर अपनी एक आहट 'कहीं' छोड़ देती हैं। वो 'कहीं' का स्थान मैंने तुम्हारे चले जाने के बाद सनकियो की तरह खोजा था फिर जब हारी हुई एक लंबी सांस ली तो आंखें पता नहीं क्यूं भर गई और वो 'कहीं' का स्थान मैंने अपनी उन दो भरी आंखों में पाया। लिखने वाला हर व्यक्ति एक समय के बीतने के बाद अपने लिखे को लेकर थोड़ा सनकी होने लगता है। मैं शायद धीरे-धीरे उसी सनकपन में अपने पैर रख रही हूं। कभी-कभी इतने सन्नाटे में चली जाती हूं कि उसकी नीरवता की गूंज मुझे डरा देती है। इस गूंज की आवाज से बचने के लिए मैं पन्नों पर कोई भी अनजाना नाम लिखकर उनके संवादों को सुनती हूं। कुछ समय बीतने पर वो अनजाने नाम वाले भी मुझसे बात करने की कोशिश करना चाहते हैं मैं झुंझला कर उन्हें और उन बेतुकी संवादों को 'वहीं' मार देती हूं।
    और फिर वो वहीं से 'कहीं' में जाकर वहां अपना घर बना लेता है।जब अपने लिखे को पढ़कर भी उब जाती हूं तो बादलों में कुछ मनचाही आकृति बनाकर उनसे जबरदस्ती की बातें करती हूं ताकि मुझे उस सन्नाटे का शोर फिर से ना डरा दे।

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    सच बताऊं तुम्हें तो अब शामें भी उतनी खूबसूरत नहीं लगती उनका रंग शायद तुम अपनी जेब में भर कर चले गए हो। कितनी चीज़ों को बेरंग कर गए हो तुम, मैं कितना भी उनमें कोई रंग भर दूं उनपे कोई असर नहीं होता सब कुछ अब नीले से 'काला' रंग का हो चुका है। तुम थे तो सब कुछ हल्का सफ़ेद और गुलाबी सा लगता था या मेरी आंखों में बस वो रंग थे जिसके कारण सब मुझे उसी रंग में नजर आता था। अभी मेरा सनकपन देखो तुम मैं कितनी बेबुनियाद बातें लिख रही हूं ऐसी चीजें जिसमें आपस में कोई संबंध तक नहीं है। या शायद तुम ढूंढना चाहो तो मिल जाए तुम्हें वैसे भी जबरदस्ती के संबध ढूंढ़ना बहुत पसंद था। तुम्हारी शिकायत नहीं लिख रही हूं बस तुम्हारे लिए कुछ नहीं लिखा के दुख से बचने के लिए कुछ भी ऊटपटांग लिख रही हूं। बहुत अजीब हरकतें करती हूं फिर खुद से ही डरकर खुद से दूर भागने लगती हूं। अपने हाथ में पकड़ी हुई चीजें अक्सर गिरा देती हूं। अपने फोन का स्क्रीन मैं लगभग तोड़ चुकी हूं। मेरा शरीर भी उस स्क्रीन जैसा हो गया है काम तो कर रहा है मगर बहुत टूट चुका है। पता है जब तुम जा रहे थे मैं तुम्हें बहुत बुरी तरीके से रोकना चाहती थी, तुम्हें गले लगाकर बताना चाहती थी कि तुम मेरा एक ऐसा 'साथ' हो जिसके साथ मैं हमेशा रहना चाहती हूं। पर...शायद तुम्हारे लिए मैं एक सहारा थी जिसे एक समय बिंदु के बाद छोड़ कर सब चले जाते हैैं। अब ये मेरा लिखा हुआ सब कुछ पीला पड़ रहा है और मेरे गीले मन की बारिश में भींगकर मिटने की कोशिश कर रहा है। अगर मैंने इस लिखने को नहीं रोका तो मैं भी पीली पड़ जाऊंगी बिल्कुल उस पेड़ से गिरे पीले मरे सूखे पत्ते की तरह।

    ~तुम्हारी
    दीपसी।

  • dipsisri 7w

    मैं बहुत सारी चीज़े अपनी जेब में संभाल कर रखूंगी के बहाने से डाल कर भूल जाती हूं।किसी चीज को संभाल कर कहीं सरिया देने के बाद हम भूल जाते हैं कि वो चीजें हमें संभालनी भी थी। तुम भी कहीं मुझे....खैर छोड़ो।
    पता है एक दिन गैस पर चाय चढ़ाकर आई और दुबारा उसके पास जाना ही भूल गई। चाय उबलते-उबलते मेरे आने के इंतेजार में पूरी तरह से जल कर बेकार हो गई। जब थोड़ी देर बाद उसके जलने की महक फैली तब मैं दौड़ी-भागी उसके पास गई। तुम भी मुझे कहीं चाय की तरह भूल मत जाना और वापस आने में मेरी जितनी देर मत करना कि सब कुछ जल जाए और उसकी महक पूरे घर में फ़ैल जाए। तुम डर तो नहीं रहे ना इन शब्दों को पढ़कर? मैं तो बहुत डर जाती हूं अपने पुराने लिखे हुए को पढ़कर। अभी जो ऊपर की पंक्तियां मैंने लिखी और आपने पढ़ी क्या वो पुरानी हो चुकी है? कुछ नए से 'पुराने' की स्थिति की दूरी कितने समय में तय करता है? कुछ 'पुराने' में जो दिखता है क्या वो सब मेरी खुद की बनाई काल्पनिक कहानी है या असल में चीज़े मेरे साथ घटित हुई हैं?
    मैंने जिस 'पुराने' शब्द को उपर लिखा है क्या वो भी अब पुराना हो चुका है? कुछ बहुत भारी वज़न उठाना पड़ता है पुराने लिखे को पढ़ने में,फिर से वो दुख बगल में बैठ कर मुस्काते हुए मालूम पड़ते हैं।
    तो क्या दुख में भी नए और पुराने दुखों को बांटा गया होगा? पुराने दुख किसी बुजुर्ग व्यक्ति से दिखाई देते हैं, जानते हुए कि अगर उनके पास बैठी तो बड़ा लंबा समय जाने वाला है फिर भी दया से हारकर ना जाने कब इनके पास बैठ जाती हूं पता नहीं चलता।
    देखो बात करते-करते मैं तुम्हें डर से दुखों की सीढ़ी तक लेते आयी। दुख अक्सर हमारे ही डर से उपजता है। सारे डर में सबसे भयावह डर होता है "किसी अपने को खो देने का"। अब 'अपना' कौन होता है जिसे हम दिल से अपना मानते हैं या वो जो समाज के हिसाब से हमारा अपना होता है?
    || डर || दुख || की बात करते-करते अब हम शायद अंत की दिशा में आ गए है। अंत की दिशा तो मुझे नहीं पता मगर दशा क्या होती है ये पता है। मैं लिख रही हूं उस दशा को तुम खुद पढ़ लेना.....!

    ~दीपसी श्रीवास्तव

    @amateur_skm @anshuman_mishra @mamtapoet @shayarana_girl @hindiwriters @araashi

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    "नया और पुराना"

    -दीपसी

  • dipsisri 8w

    मेरा बहुत दिल करता है सबसे "तुम्हारे" बारें में बातें करने का पर कोशिश करूं तो भी नहीं कर पाती हूं।क्लास में ब्लैकबोर्ड से लेकर खाली दिखी जमीन हर जगह दिल करता है तुम्हारा नाम लिख कर छोड़ दूं पर हर बार लिख कर मिटा देती हूं।

    मुझे हर किरदार में एक कविता या कहानी नजर आती है, सिर्फ तुम एक विशेष मिले थे मुझे जिसमें ना मुझे कोई कहानी दिखी ना कोई कविता इन दोनों के मध्य भी कुछ है जो मौजूद होकर जीवित सांस ले रहा है शायद "वो" दिखा था।

    "वो" कुछ धुंधला सा था और बहुत चमक थी उसमें। धुंधली चीज़े मुझे अपनी ओर आकर्षित करती है क्यूंकि उसमें मैं जिसकी छवि भी देखना चाहूं देख सकती है।जो धुंधला है उसमें स्पष्टता नहीं होती और हम अस्पष्टता में कुछ भी स्पष्ट रूप से देख सकते हैं।

    तुमसे मुझे प्रेम है या नहीं की ऊहापोह में कब मैं तुमसे इतना प्रेम करने लगी मुझे भी नहीं पता।हर बार लिखते वक्त सोचती हूं कि ये आखिरी बार होगा जब मैं "तुम्हारे" लिए कुछ लिख रही हूं पर फिर जब भी लिखना शुरु करती हूं तुम्हारे सिवाय कुछ और मुझसे लिखा ही नहीं जाता।

    (कविता अंत में पढ़े)

    *कुछ है जो अस्पष्ट होकर भी स्पष्ट दिख गया,
    कुछ है जो स्पष्ट होकर भी अस्पष्ट रह गया!

    कुछ है जो ना मेरा होते हुए भी मुझसे दूर गया,
    कुछ है जो मेरा होते हुए भी कभी करीब ना हुआ!

    कुछ है जो तुम्हें मुझसे दूर कर भी जोड़े रखता है,
    कुछ है जो मैं तुमसे करीब रहते हुए भी टूट गई!

    कुछ है जो हमेशा "मध्य" की स्थिति में छिप गया,
    कुछ है जो धुंधलेपन में भी प्रत्यक्ष रूप से दिख गया!

    कुछ है जो मैं तुम्हें बिना लिखे चैन में नहीं रह सकती,
    कुछ है जो लिखने के बाद भी मुझे बेचैन कर देता है!

    "कुछ है" को मैं कभी ढूंढ़ना नहीं चाहती,
    इस "कुछ" में जो मिला है उसे छिपा रहने देते हैं!

    ~दीपसी श्रीवास्तव*

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    सोचती हूं तुम्हें फिर से ढूंढ़कर वापस ले आऊं अपने करीब पर जो कभी मेरा था ही नहीं उसे वापस ला कर भी क्या मिलेगा।
    अब सब कुछ नीला-सा दिखता है और रंगों से शायद वर्णांध हो चुकी हूं। अब तो इंसानों में भी सिर्फ तुम ही दिखते हो,अब अस्पष्टता भी जा चुकी है और तुम भी। मगर जो स्पष्ट होकर मेरे पास छूट गया है उसका क्या? उसके बारे में तुम कभी सोचते हो?

    खैर जिसे तुमने कभी नजर भर के देखा तक नहीं जाना तक नहीं उसके बारे में तुम भला किसलिए सोचोगे। मैं जब किसी से कहती हूं मुझे लिखना नहीं आता वो इस बात से फौरन इंकार कर देते हैं।मुझे तो तुमसे बस अपनी बातें कहने का जरिया मिला है और एक लिखने का बहाना भी शायद।

    मैं तुमसे अभी भी प्रत्यक्ष रूप से ये नहीं बता सकती कि मैं तुमसे प्रेम करती हूं। मुझे लगता है ये कहने से सब कुछ छूट जाएगा और देखो ना...मेरे बिना कहे ही सब छूट चुका है। मुझे तुमसे इतना लगाव क्यूं है के जवाब मैं कभी नहीं ढूंढती और जिस दिन मैंने ये ढूंढ लिया शायद उस दिन ये लगाव भी मिट जायेगा।

    तुम्हें पता है हम किसी से अत्यंत प्रेम क्यूं करते है के जवाब हमें कभी भी नहीं ढूंढने चाहिए अगर हमें सारे जवाब मिल गए तो प्रेम हमसे विदा कह देगा। इसलिए जवाब ढूंढने से कहीं बेहतर है मैं तुमसे जीवनभर सवाल करती रहूं और अंतिम सांस तक सिर्फ तुमको ही लिखती रहूं।

    तुम्हें अगर किसी सवाल का ख्याल आए तो मुझसे कह देना, कहोगे ना?

    ~तुम्हारी
    दीपसी

  • dipsisri 8w

    तुम्हारे बारे में सोच समझ कर लिखना न मुझे आता है और ना कभी आएगा।बस जो भी लिख जाए वहीं लिख देती हूं उसमें सुधार करना मुझे नहीं पसंद है।कुछ चीजों का Unfiltered होना उस चीज की सबसे बड़ी खूबसूरती होती है।

    ~दीपसी

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    Unfiltered बातें।



    कभी-कभी अचानक बहुत डर जाती हूं मैं यह सोच कर कि धीरे-धीरे मैं तुम्हें भूलती जा रही हूं। तुम्हारा होना, तुम्हारी आवाज और तुम्हारी वो एक सबसे अनोखी खुशबू सब कुछ। किसी के लिए सब कुछ छोड़कर चले जाना आसान है? या फिर किसी के लिए सब कुछ कंधों पर संभाल कर रख कर जी लेने में आसानी है? खैर तुमने कभी उनके बारे में सोचा है जिनके साथ ये दोनों घटित होता है, जिन्हें छोड़ कर जाना भी पड़ता है और सब कुछ संभाल कर जीना भी पड़ता है।

    तुम्हारे लिए शायद चले जाना आसान था इसलिए तुमने उसे चुना। मगर जब मेरी चुनने की बारी आई तो मुझे तुम्हारी दोनों उंगलियां पकड़नी पड़ी थी। ईश्वर कहूं या तुम, दोनों मुझ से बहुत प्रेम करते हैं शायद जिन्होंने मुझे दोनों उंगलियों को चुनने के काबिल समझा। मैं तुम्हारा मेरे जीवन में आना कभी नहीं भूल सकती हूं अगर गुस्से में रोते हुए भी कह दिया कि तुम्हें भूल चुकी हूं तो भी वह सच नहीं होगा। वो तो बस मेरा प्रेम मुझे इस भ्रम में डालने की कोशिश करता है कि मैं तुम्हें भूल रही हूं मगर ये संभव नहीं है। कुछ है जो कि पूर्ण तरीके से स्थिर और संभव है तो वह है मेरा ''प्रेम"। मुझे नहीं पता तुमने कभी कोई दिन प्रेम की उदासी में बिताई है या नहीं। पर एक बात मैं पक्की तरीके से जानती हूं और कह सकती हूं कि मेरी उदासी में तुमसे ज्यादा करीब मैं कभी किसी और से नहीं मिल सकती।

    ~तुम्हारी
    दीपसी

  • dipsisri 9w

    Okay permanent =_=
    I'm very dramatic.

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    उदासी मुझे हमेशा तुमसे मिलाती है
    शायद,
    इसलिए मैं हमेशा उदास होना चुनती हूं।

    ~दीपसी

  • dipsisri 9w

    Hello Again Lovely Readers!��

    Today I am going to share positive perspective on love.Now few people may get this thought that love is positive only what special positive side I'll show here but please be patient and read this completely.

    [@diamond49 As you requested I'll talk about Attachment & love both and feeling of love different from love like you said.]

    There are few questions related to this that people have asked me:-
    •Is attachment love?
    •How can you not expect anything when you're in love?
    •How do you know that you really love someone?
    •Why one sided love hurts always?
    •Does true love even exists? Etc.

    For being able to differentiate between love and attachment firstly you need to understand what does this terms mean in reality.

    •What is attachment?

    Attachment can be defined as a deep and affectionate emotional bond between two people in which each seeks closeness.The major difference between love and attachment is that “love is a feeling directed toward the ‘other’ while attachment is self-centered meaning based on fulfilling your need.

    Love makes you patient but attachment makes you impatient. Attachment may seem like actual love but it is absolutely not.When you are attached to someone & you get separated with that person you don't feel sad for them you feel anxious for yourself that their care,love & support isn't with you anymore.

    But when you love someone if you get separated you still think about their condition, you don't feel upset that you aren't with them anymore you just pray for that person to be happy.
    We may feel infatuated with a person but tagging it as love will not convert it into love.

    •What is love?

    I can't define "Love" by putting it in some definition.In this millennial or gen-Z generation people have made so many stupid definitions of love and because of our conditioning we restrict love with some silly quotations & fulfillments.

    For example there was a quote "I am tired of loving you and hoping you'll do the same".If you're getting tired by loving someone then how come is it love? Neither it is personal attack on anyone nor I want to disrespect anybody's emotion.

    But my people✨ don't confuse yourself everything with love.And let me share one precious thing "Love is one sided always,two sided love is an illusion".Yes yes saying it after analysing, thinking, and some good research.It will take a lot of time to understand this but trust me one sided doesn't hurt what hurts is the "expectation".One sided love is so pure & just beyond anything.

    Pyaar me aap kuch bhi kar ke samne vale person ko khush dekhna chahte hai in return koi expectations nhi hoti aur bhai jaise hi expectations aayi vaha conflict hoga hi,( nasamjhi me aaj kal ke log jise pyaar kah de rahe that is just an attraction or attachment asal pyaar ko samjhne ke liye itni samajh chahiye jiski koi had na ho & ye line Sandeep Maheshwari ki h not mine)��


    वास्तविक प्रेम को समझने के लिए सम्पूर्ण जीवनकाल भी कम होता है। प्रेम आपको हमेशा सरल बनाता है अगर आप प्रेम को सच्चे रूप से समझते हैं।

    And yes true love exists.
    प्रेम के लिए अगर आप हर रोज दरवाज़े पे खड़े होकर इंतेज़ार करेंगे तो वो आपको कभी नहीं मिलेगा मगर जब आप गहरी नींद में सो रहे होंगे तब प्रेम स्वयं भीतर आयेगा और आपके माथे को चूमकर सिर्फ आपको चैन से सोता हुआ देख खुश हो जायेगा।

    One sided love hurts only when you expect love in return from that person.And I am not denying this thing here that when you do so much for someone you love & you expect a little care & love from their side too, when you don't recieve that it starts hurting and you start believing love is painful.That is why I am writing this if you love someone why to look at this aspect that you are not getting love from their side apart from this think that you are able to love a person truly how lovely is that.Sometimes people only love the idea of being in love with someone and don't actually love the person.


    जब मैं और तुम भूलाकर सिर्फ "हम" का ख्याल आए तो ये है प्यार!
    जब अपने प्रेम के चेहरे पे मुस्कान देख आप मुस्कुरा दे तो ये है प्यार!
    Ok I'll not turn this poetic and thank you for reading❤


    अगर आप किसी से सच्चा प्रेम करते हैं तो जरूरी नहीं की आप उनका हाथ थामेंगे तभी वो प्रेम सार्थक है,कभी-कभी
    बिना हाथ थामे भी हम उन्हें महसूस कर सकते हैं।
    प्रेम तब पूर्ण नहीं होता जब किसी दो लोगों का मिलन हो प्रेम तो तब से पूर्ण होता जबसे आप प्रेम में है।

    Hope it will help you even if a little bit it will mean so much to me.
    ��If you've anything to give as a suggestion or something you want next time do tell me.
    Tell me honestly your review and tag few people.��

    And surely your love will find you one day.Be patient.❤

    @fromwitchpen @love_whispererr



    #Apositiveperspective

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    #Apositiveperspective
    || Love and Attachment ||

    ~Dipsi Srivastava