#45days

520 posts
  • anitasinghanu 160w

    ये कविता मैंने कुछ दिन पहले लिखी थी फिर से पोस्ट कर रही हूँ क्योंकि इसे मैं पंचदूत के लिये लगातार पोस्ट लिख रही थी देश से संबंधित उसमें शामिल करना चाहती हूँ!��
    मुझे खुद बहुत पसंद है इसलिये भी!
    #anitasinghanitya#anitya#writersnetwork #mirakee#hind#du
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    #impureindian(46)
    #panchdoot_sarthak_award#45days

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    हे वीर!

    काल के कपाल पर,बैठ दुर्गम हिमालय पर
    कर गुज़र कुछ ऐसा कर,रिपु का दमन कर

    हे वीर तू तिलक कर,मां भारती के भाल पर
    फहरा फहरा ध्वजा फहरा शत्रु की ज़मीं पर

    देर न कर,अब हुँकार भर,हर प्रहर सँहार कर
    कह रही है हर फ़िज़ा, माँ भारती पुकार कर

    तेज भर,तेज भर स्वयं भुजाओं में शक्ति भर
    निस्तेज कर निस्तेज कर,अरि को निस्तेज कर

    उठ न पाए फिर कभी इस प्रकार तू वार कर
    दम्भ का तू कर दमन,मृत्यु का आह्वान कर

    शस्त्र उठा,सहस्त्र बन,शत्रु हृदय में कंपन भर
    नाम तेरा ही काफी हो ऐसा तू स्वयं तेज धर
    ©anitasinghanitya

  • anitasinghanu 160w

    मेरी पहचान

    दामन में अपने मैं आग रखती हूँ
    झुलसती हूँ रोज़ उफ़ न कहती हूँ

    मुसलसल बारिश तेज़ होती है रोज़
    दरिया में कोई उफ़ान न रखती हूँ

    जानती हूँ न लौटकर आओगे अब
    श्मशान में अपने यों रोज़ जलती हूँ

    शहीद हुए हो तुम देश की खातिर
    तेरे चेहरे की मैं दमक ओढ़ लेती हूँ

    अनजान राहें, ख़ौफ़ज़दा ज़िन्दगी है
    पहचान तेरी ही मैं पहन निकलती हूँ

    हकीकत भी तुम्हीं,फसाना भी तुम्हीं
    मैं रोज़ तुम्हीं में जीती और मरती हूँ
    ©anitasinghanitya

  • ashish_says 160w

    मर्यादा

    चुनाव का मौसम है
    सियासत का खेल है।
    इस भागा दौड़ी में
    मैं साफ और तू मैल है।

    कुछ यही हाल है आज कल
    अपने देश के राजनेताओं का।
    हर कोई पुलिस बना घूम रहा है
    और पुलिस को ही चोर कह रहा।

    सारी मर्यादाएं दफना दी है
    और जुबां पर कोई लगाम नहीं।
    सत्ता के आगे सभी दुश्मन है
    बाप बेटे में कोई आपसी प्यार नहीं।

    कुछ तो इस हद तक गिर गए
    कि महिलाओं का अपमान कर रहे।
    और जनता से हाथ जोड़ कर कह रहे
    अपना कीमती वोट हमें ही दें।

    सियासत का ये खेल
    हर दिन गिरता जा रहा है।
    इस देश का आंचल
    हर पल मैला होता जा रहा।

    हैरानी इस बात की है
    कि जनता को फर्क नहीं पड़ रहा।
    एक के समर्थन में है सभी
    बाकी से कोई मतलब ना रहा।

    ए मेरे देश के राजनेताओं
    आपसे हाथ जोड़ कर निवेदन है।
    राजनीति अपनी जगह सही है
    पर ये शब्दों के महाभारत से हम बेचैन है।

    बंद करो ये बेकार की बहस बाज़ी
    असली मुद्दों की बात करो।
    हमारे अनसुलझे सवालों का जवाब दो
    और बहुमत से अपनी सरकार बनाओ।

    ©ashish_says

  • anitasinghanu 160w

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    #impureindian (44/45)
    #panchdoot_sarthak_award#45days
    एक शहीद की पत्नी के भाव दर्शाने की कोशिश है जो पति के शहीद होने के बाद उसकी अंतिम निशानी तिरंगे झंडे से खुद को जोड़ती है!
    थोड़ी लंबी हो गई है कविता पर पढ़ियेगा!��

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    तिरंगा और तुम

    जब भी देखती हूँ ए तिरंगे प्यारे तुझे
    एक गौरव का पदार्पण होता है मुझमें
    आन बान शान विस्तार पाता है मुझमें
    केसरिया रंग वीरता जगाता है मुझमें

    नहीं जाती हूँ सीमा पर लड़ने कभी भी
    अपनी ज़िन्दगी से रोज़ लड़ती हूँ यहीं
    रोज़ ही चुनोतियाँ होती हैं सामने खड़ी
    तुझे देखकर हिम्मत पा जाती हूँ मैं भी

    उलझनों में उलझती हूँ हर बार मैं भी
    धैर्य साथ छोड़ने को आतुर हो जब भी
    देख लेती हूँ सफेद रंग समाया है तुझमें
    असीम शांति का आगमन होता है मुझमें

    जब जीवन का पहिया अटकता है मेरा
    तेरा नीला चक्र बनता है खिवैया मेरा
    सदैव ही चलने की शक्ति देता है मुझे
    निरंतरता ही जीवन है समझाता मुझे

    कभी ज़िन्दगी मरुस्थल भी लगती मुझे
    जब खुशियाँ भी धोखा दे जाती हैं मुझे
    तब तेरा हरा रंग ही प्रेरणा देता है मुझे
    क्षणिक दुख दूर होगा,सुख खोजेगा मुझे

    जब गए थे तुम सदैव के लिये ज़िन्दगी से
    तिरंगा ही तो थमा गए थे मुझे तसल्ली से
    अंतिम समय मजबूती से थामा था तुमने
    देखना इसी में मुझे,यही तो कहा था तुमने

    तो देखो, इसी में रोज़ ही देखती हूँ तुम्हें
    जब भी दिल घबराता है खोजती हूँ तुम्हें
    बहुत सम्हाल कर यादों में रखती हूँ तुम्हें
    तिरंगे के साथ आस पास ही पाती हूँ तुम्हें
    ©anitasinghanitya

  • ashish_says 160w

    ये जो देश है मेरा
    यहां भाषा में है विविधता।
    पर यहां के हर निवासी को
    उनसे फर्क नहीं पड़ता।

    क्यूंकि उनके दिलों में है
    प्यार की ज्योत हमेशा जलती।
    तभी तो जन जन में है
    कल्याण करने की नीति।

    ©ashish_says

  • anitasinghanu 160w

    चुनाव

    चुनाव एक ज़रूरी प्रक्रिया है
    संविधान द्वारा प्रदत सुविधा है
    तानाशाही से छुटकारा दिलाकर
    लोकतंत्र की ओर कदम बढ़ाकर
    हमें दिलाता मनपसंद मुखिया है
    माना कि बहुत भ्रष्ट हैं ये नेता
    पर अपने वोट से देंगें उन्हें चेता
    बार बार झूठ की हांडी
    नहीं चढ़ा करती है
    जो जनहित में करते काज
    जनता उन्हें चुना करती है
    अपनी शक्ति को पहचानो
    धर्म,जाति के आधार पर
    अपना नियंता न मानो
    दो केवल उसे ही वोट
    जिसमें दिखती सच की चोट
    जो रोके किसानों की मौत
    दे रोजगार बेरोज़गारों को
    मुद्दे उठाए बेहाल जनता का
    भाषा जिसकी मर्यादित हो
    जिसकी नज़र में स्त्री सम्मानित हो
    देश की अखंडता में विश्वास हो
    गर निराश हो तुमने वोट नहीं दिया
    उठा जाएँगे फायदा
    जिन्होंने देश का बेड़ा गर्क किया
    पाँच सालों में एक बार चुनाव पर्व आता है
    सही व्यक्ति को चुन हममें गर्व आता है
    करना चुनाव केवल उसी का
    जिस में उम्मीद नज़र आती हो
    गँवा न देना सुनहरा मौका
    चुनाव में कर के तुम वोट
    खोलो दरवाज़ा उन्नति का
    देश और समाज हित के लिए
    ले कर चुनाव में भाग
    देशभक्ति अपने हिस्से की
    तुम शिद्दत से निभा देना!
    ©anitasinghanitya

  • anitasinghanu 160w

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    #impureindian (42/45)
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    मानव एवं प्रकृति का तुलनात्मक अध्ययन!
    मनुष्य को देश के लिए प्रकृति प्रदत्त गुण अपनाने चाहिए!
    संदेश देने की कोशिश!��

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    प्रकृति

    ये नदियों का स्वर,बहता निर्झर
    ये गंगा का पानी,ये जमुना का जल
    उत्तांग पर्वत पर बहती हवा
    बादलों के उर में दमकती तड़ित
    बेख़ौफ़ रहते हैं प्रकृति में सदैव
    मनुज के हृदय में ईर्ष्या का चाव
    भरा हुआ है लालच का भाव
    अनेकोनेक दुर्गुण सहेजे
    मिट्टी के पुतले ने कितने बैर पाले
    दो घड़ी के जीवन में भरम सम्हाले
    प्रकृति प्रदत्त मिले थे भाव खजाने
    ये तेरा धर्म ये मेरा धर्म
    लड़ लड़ कर रहे अधर्म
    भूल गए सब अपनी संस्कृति
    हम सभी भारत की है संतति
    हमें है रहना साथ तो फिर क्यों द्वेष?
    तज कर गरल दुर्गुणों का
    हमें ही मिलकर बचाना है देश!
    ©anitasinghanitya

  • ashish_says 160w

    अफवाह

    जब तिरांगे में है
    भगवा और हरा एक साथ।
    फिर क्यूं तुम यूं
    आपस में लड़ते रहते हो।

    धर्म निरपेक्ष देश है अपना
    सभी को यहां है सामान अधिकार।
    फिर चाहे हो वो कोई भगवा ब्राह्मण
    या फिर हो वो कोई टोपी वाला इंसान।

    कभी गौ हत्या के नाम पर
    तो कभी बच्चे अपहरण के अफवाह पर।
    जानवरों जैसे भीड़ उस पर टूट पड़ती है
    एक मासूम को मौत के घाट उतार देती है।

    अफवाहों के चक्कर में ना पड़ो
    उनसे तो दूर ही रहो।
    खुशहाल रहो और खुश रहो
    सभी को खुशी से जीने दो।

    ©ashish_says

  • anitasinghanu 160w

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    #impureindian (41/45)
    #panchdoot_sarthak_award#45days

    सीमा पर और देश के अंदर दोनों जगह दुश्मनों से मुकाबला करने की आवश्यकता है! हम सभी मिलकर सामना कर सकते हैं!��

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    हम

    चल पड़ा,राह अकेला धारण कर उर में साहस
    कंटक पथ गहन नुकीला पा जाऊँगा कर प्रयास

    एक शत्रु बैठा सीमा पर एक छिपा घर के अंदर
    हम दोनों मिलकर करेंगें सामना,कर देंगें बाहर

    मैं रोकूँगा बन कर प्रहरी लड़ जाऊँगा सीमा पर
    तुम रहना सजग,चौकस दिख न जाए देहरी पर

    इरादे वीभत्स दिख जाएँ,सामना करना साहस से
    हमारी ही हिम्मत से दानव,मृत्यु पाएँगे पल भर में

    हम भारतीय मिल सामना करेंगें हर आफत का
    सुख हो या दुख हर हाल में पैगाम देंगें राहत का
    ©anitasinghanitya

  • ashish_says 160w

    शिक्षा

    बात करते है गांव की
    जहां ना पहुंचे महिमा सरकार की।
    शिक्षा के लिए विद्यालय बनवा दिया
    पर पढ़ने के लिए कोई आता नहीं।

    गरीबों के है खर्चे हजार
    पर कमाने वाला बस एक।
    ऐसे में पढ़ाई के लिए वक़्त कहां
    पिता के काम में बेटा हाथ बंटाता।

    मजदूरी करता कोई बालक
    तो कोई बालक करता खेती।
    इनसे जो मजदूरी आती
    उससे ही घर में मां खाना बनाती।

    बहुत सारे मुहीम चल रहे
    जिससे ज्यादा आबादी पढ़ सके।
    पढ़ लिख कर जानकार बने
    अच्छा रोजगार कर सके।

    पढ़ेगा इंडिया तभी बढ़ेगा इंडिया
    ये नारा बहुत गूंज रहा आज।
    पढ़ा लिखा होगा हर परिवार
    तभी विकसित होगा समाज।

    ©ashish_says

  • anitasinghanu 160w

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    #impureindian (40/45)
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    बसंती हवा को सैनिकों के विश्राम के समय कुछ देर रोकने हेतू प्रयास!��

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    बसंती हवा

    ओ बसंती हवा!रुक जा ज़रा!
    कुछ देर ठहर कर जाना ज़रा!
    यहाँ कुछ सैनिक काम पर हैं!
    अभी दो घड़ी विश्राम पर हैं!

    जंग में ही नहीं जान जोखिम में होती
    देश आपदाओं में भी आजमाईश होती
    देश के किसी हिस्से में आई बाढ़ हो चाहे
    आँधी तूफानों से करना पड़ा सामना चाहे

    कभी न इन्होंने पीठ दिखलाई
    मौत को दी इन्होंने मुँह दिखाई
    धीमे धीमे चलना न करना शोर
    कच्ची है नींद अभी हुई नहीं भोर

    हर घड़ी समय लेता है नित नई परीक्षा
    आराम को त्याग,उसको दे दी है भिक्षा
    कठिन है डगर संभलकर इन्हें चलना
    दो पल ही मिलते हैं,उसी में ही खिलना

    ओ बसंती हवा!रुक जा ज़रा!
    कुछ देर ठहर कर जाना ज़रा!
    यहाँ कुछ सैनिक काम पर हैं!
    अभी दो घड़ी विश्राम पर हैं!
    ©anitasinghanitya

  • ashish_says 161w

    हमला

    कुछ चंद रुपयों के लिए
    हैवानों वाला काम करते हैं।
    और फिर बेफिक्र हो कर
    हजारों जानें लेते हैं।

    धर्म के नाम पर वो तो
    आसानी से बहक जाते हैं।
    हत्या कर के जन्नत पहुंचेंगे
    ऐसा वो मानते हैं।

    देश के हर शहर को
    उन्होंने अपना निशाना बनाया।
    सिर्फ उनके स्वार्थ के वजह से
    सैकड़ों परिवारों ने अपनों को गंवाया।

    आतंक फैलाना ही उनका मकसद
    बस इतना ही वो जानते हैं।
    मौत तो आनी ही है आज या कल
    मरने से वो नहीं डरते हैं।

    उनके हर एक हमले पर
    पूरा देश दहल जाता है।
    किसीको समझ नहीं आता कि
    आखिर इतना सांप कहां से आता है।

    ये अतंकवादी गतिविधियां
    सिर्फ जानें ही नहीं लेती।
    इससे भी बहुत बड़ा कुछ करती हैं
    ये देश की अर्थव्यवस्था को हिलाती है।

    हर एक हमले से देश को
    करोड़ों का नुक़सान होता है।
    कुछ लोग मजे लेते हैं
    बाकी पूरा देश रोता है।

    पर अपनी फौज भी
    उनके सामने दीवार बन खड़ी है।
    हमेशा से फौज ने उनकी
    जमकर धुलाई की है।

    कहीं कोई सेंध लगाए बैठा है
    तभी ऐसा बार बार होता है।
    वरना कोई इतना हानि पहुंचाए
    इतना किसी में दम कहां है।

    आंतकवाद एक बीमारी है
    जिसे खत्म हमें करना है।
    आंतकवादी एक रोगी है
    उनका इलाज़ करना है।

    ©ashish_says

  • krati_sangeet_mandloi 161w

    #Impureindian #panchdoot_sarthak #panchdoot #panchdoot_social #45days #K50 #17thapril_2019 #krati_mandloi #कृति_मंडलोई #hindilekhan #hindiwriters @panchdoot @hindilekhan @hindiwriters @hindikavyasangam @writersnetwork

    आज अंतिम पोस्ट अब अवकाश लेने का समय आया है��

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    सोशल मीडिया

    सोशल मीडिया ने अपना एक नया संसार बसाया है,
    दिखावेपन की चमक को सभी के बीच चमकाया है।
    सन्देश को बधाइयों का जरिया बनाकर,
    रिश्तों में दूरियों को इसने बढ़ाया है।

    सच और झूठ से नहीं रह गया कोई वास्ता,
    अन्धविश्वास को इसने जमकर फैलाया है।
    सोते-जागते सिर्फ़ इसका ही ख्याल रहता है,
    लाइक,कमेंट्स और स्टेटस पर कितना कुछ कमाया है।

    नए-नए फीचर्स से सभी को आकर्षित करके,
    मोहमाया का जाल इसने चारों ओर बिछाया है।
    बेफिजूल की बातों में ज्यादा ध्यान देकर,
    मानसिक बीमारी का शिकार इसने बनाया है।

    सभी को अपने नशे का आदि बनाकर,
    इसने पागल की तरह समय को चुराया है।
    काल्पनिक सपनों की दुनिया में रमकर,
    इसने मंज़िल से सबको भटकाया है।

    अकेलेपन को दूर करने के लिए इसे चुना,
    इसने जीवन को ही बोझ तले दबाया है।
    लोगो को बेवकूफ़ बनाना, उन्हें ब्लैकमेल कर,
    इसने अपराध करने का रास्ता दिखाया है।

    अश्लील सामग्री का प्रचार-प्रसार करके,
    गलत संगत में इसने फंसाया है।
    बच्चों और युवाओं को सबसे ज्यादा प्रभावित किया,
    उनके भविष्य को अंधकारमय बनाया है।

    जहाँ पर कंटेंट का किसी पर कोई नियंत्रण नहीं,
    अफवाहों से इसने देश में दंगो को भड़काया है।
    सोशल मार्केटिंग कंपनियों ने मुफ्त सेवाएं देकर,
    हमारी निजी जानकारी को मार्केट में बिकवाया है।

    मन की थकान को उतारने के लिए,
    अब अवकाश लेने का समय आया है।
    इसकी अति से बाहर निकलना बहुत जरुरी,
    जब सीमित समय देकर इसके फायदों को हमने पाया है।

    ©krati_mandloi✍️
    (17-04-2019)

  • anitasinghanu 161w

    माँ

    हे माँ!जाता हूँ मैं!मेरी सुन ले तू अंतिम पुकार
    मैं तुझसे ही हूँ जन्मा तुझ में ही लिया आकार

    आज मुझे समेट ले खुद में,अपनी बाहें पसार
    चिर निद्रित हो कर फिर जी उठूँ, न मानूँ हार

    पाऊँ नवीन अस्तित्व मैं तेरी मिट्टी में सो कर
    जन्म लूँ हर बार कर्त्तव्य निभाने इसी धरा पर

    जाऊँ मैं समर में नित नव उल्लास धारण कर
    योद्धा बनूँ, बनूँ महाकाल, मचाऊँ हाहाकार

    हर जन्म तुझ को ही हो समर्पित विविध प्रकार
    याद करे तेरे ही नाम से अब मुझ को यह संसार
    ©anitasinghanitya

  • neetu_rajeev_kapoor 161w

    खरपतवार

    सत्ता मोह में फ़िर एक नेता लाज शर्म को त्याग गया
    निर्लज्ज, अधमी मर्यादा की हर सीमारेखा लाँघ गया

    नारी की गरिमा पर यह हमला नहीं क़तई स्वीकार है
    माँ-बहनों का आदर न करे उस मर्द पर धिक्कार है

    पहला मौक़ा नहीं है यह जब बिगड़े हैं दुर्जन के बोल
    घटिया ज़बान ख़ुद खोल रही इसके संस्कारों की पोल

    राजनीति में ऐसे महिषासुर के लिए कोई स्थान नहीं
    जिसके मन में नारी जाति के लिए ज़रा सम्मान नहीं

    जनता जनार्दन ऐसे मानसिक रोगी का उपचार करे
    जड़ से उखाड़ बाहर राजनीति की खरपतवार करे
    ©neetu_rajeev_kapoor

  • anitasinghanu 161w

    वतन

    वतन मेरा गुलिस्तां की मानिंद गुलों को समेटे
    महकता ही रहता तमाम रंगीनियत को समेटे

    कश्मीर की दिलकश वादियाँ या सुहाने झरने
    पहरेदार पहाड़ है अपनी अमीरियत को समेटे

    इसका एक एक हिस्सा अपनी कहानी कहता
    ध्यान से सुनो,है यह कई शख्सियत को समेटे

    बहुत अलग अलग दौरों से गुज़रा वतन मेरा
    किस्सों में है दुश्मनों की हैवानियत को समेटे

    लिखा नहीं,बहुत कुछ है अभी लिखने को बाकी
    सोच में बैठी 'अनित्या' अपनी तबियत को समेटे
    ©anitasinghanitya

  • ashish_says 161w

    हत्या

    धरती मां के देश में
    घोर अन्याय हो रहा है।
    लड़का जीवन जी रहा है
    लड़की को जीने का हक नहीं मिला।

    पैदा होने से पहले ही
    उसे मार दिया जाता है।
    और सारा इल्जाम फिर
    मां पर मड़ दिया जाता है।

    ना जाने कब तक ये चलेगा
    ऐसा ढोंग कब तक होता रहेगा।
    भ्रूण हत्या के सैकड़ों मामले
    कब तक खबरों में आते रहेंगे।

    हैरान हूं मैं और परेशान भी
    ऐसी मानसिकता वालों से।
    कुछ ठोस कदम उठाने की जरूरत है
    इस कांड को रोकने के लिए।

    ©ashish_says

  • anitasinghanu 162w

    वैसे आमतौर पर मैं अपनी रचनाओं में कैप्शन नहीं लिखती हूँ बहुत हुआ तो 2-4 पंक्तियाँ कभी कभी लिख देती हूँ क्योंकि मेरा मानना है रचना वह जो पढ़ने पर अपना कथ्य स्वयं ही स्पष्ट कर दे!
    परंतु आज कैप्शन लिख रही हूँ��
    हिंदी लेखन जी ने महाभारत के पात्र कर्ण पर लिखने के लिये हम सब को प्रेरित किया था।काफी लोगों ने सुंदर कविताओं व लेखों के माध्यम से अपने विचार प्रस्तुत किये ।पढ़कर बहुत अच्छा लगा सभी साधुवाद के पात्र हैं।��
    कोई भी मनुष्य किसी भी पात्र का अपनी बुद्धि और समझ से अलग अलग तरीके से विवेचना या आँकलन करता है।सही -गलत हम किसी को ठहरा नहीं सकते।सब के अपने अपने विचार हैं।मैं सभी का सम्मान करती हूँ।
    महाभारत काल में जाति प्रथा निश्चित तौर पर थी ।तभी कर्ण एवं एकलव्य को गुरु रूप में द्रोणाचार्य न मिल सके।द्रोणाचार्य ने एकलव्य को महान धनुर्धर बनने से रोकने के लिये उसका अँगूठा तक गुरु दक्षिणा में माँग लिया था ताकि वे अर्जुन को विश्व का महान धनुर्धर बना सकें।।सत्यवती यदि राजमाता बनी तो केवल कामांध शांतनु के कारण बनी क्योंकि राजा जो चाहे कर सकता था नियम कानून से ऊपर राजा को माना गया है। योग्य होते हुए भी गंगा पुत्र को भीषण प्रतिज्ञा लेनी पड़ी ।पक्षपात कल भी विभिन्न रूपों में होता आया है और आज भी।
    कर्ण को शिक्षा प्राप्त करने के लिये परशुराम जी से झूठ बोलना पड़ा क्योंकि वो भी सिर्फ ब्राह्मणों को ही शिक्षा देते थे। कर्ण को आजीवन पक्षपात की पीड़ा सहनी पड़ी।उसका जीवन सरल नहीं था हर पल अपमानित होना पड़ता था।द्रौपदी ने भी सूतपुत्र होने के कारण उससे विवाह के लिये इंकार किया था जबकि वो आसानी से प्रतियोगिता जीत सकते थे। उसके बावजूद उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई।जिसकी आज मिसाल दी जाती है।
    मेरी दृष्टि में महारथी कर्ण एक महानायक थे और सदैव रहेंगें।
    अधिक न कहकर मैं आपके समक्ष अपनी कविता रखना चाहूँगी।मेरे विचारों से कोई भी असहमत या सहमत हो सकता है।ये मेरे निजी विचार हैं।��
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    कर्ण महानायक

    वरदान से जन्म मगर लोक लाज की शर्म
    शापित हुआ जो बालक,वह कर्ण है!
    सूर्य का अंश था,दमकता हुआ भी
    अंधकार में डूबा जिसका जीवन,कर्ण है!

    कभी सूत पुत्र,कभी राधेय,कभी कौन्तेय
    कभी कहलाया अंग राज,वह कर्ण है!
    मित्रता और समर्पण पर जो सदैव अडिग
    हिमालय की तरह रहा वह कर्ण है!

    नारायण भी जिसके समक्ष भिक्षु बने
    दानवीर कहलाया परमदानी कर्ण है!
    ज्ञान था धर्म का मगर अधर्म के साथ खड़ा
    फिर भी अधर्मी न कहलाया,कर्ण है!

    गुरु के प्रति समर्पण ही जिसका श्राप बना
    सहर्ष स्वीकार किया श्राप,वही कर्ण है!
    जिसे बोध था ज्येष्ठ होने का,दे गया जीवन
    निज भ्राता को,धर्म निभा गया वो कर्ण है!

    आज भी धरा पर वीरों के त्याग औ बलिदान
    की मिसाल बना वही तो कर्ण है!
    चरित्र का संयम भीष्म के बाद जिसने दिखाया
    पूरे महाभारत में वही कर्ण है!

    अतिश्योक्ति न होगी मेरी वाणी में यदि मैँ कहूँ
    राष्ट्र के जनमानस में बसा कर्ण है!
    न हुआ आज तक उस जैसा,विकट परिस्थितियों में जो डटकर खड़ा वही कर्ण है!
    ©anitasinghanitya

  • neetu_rajeev_kapoor 160w

    ख़बर

    उठाकर देख लीजिए कोई भी अख़बार
    बाक़ी ख़बरें तो बदली हुई नज़र आएंगी
    सिर्फ़ एक ख़बर होगी जो किसी न किसी
    पन्ने पर आपको नज़र आ ही जाएगी

    न जाने कैसे वहशी, अमानुष,भेड़िए हैं
    जो औरत की इज़्ज़त पर वार करते हैं
    दरिंदगी की तमाम हदों को पार करके
    अपनी माँ की कोख को शर्मसार करते हैं

    घर हो या बाहर,स्कूल,कॉलेज या दफ़्तर
    नारी कहीं भी महफ़ूज़ नहीं रह पाती है
    धिक्कार है कि पच्चीस फ़ीसदी महिलाएँ
    अपनों के ही हाथों अपनी अस्मत गंवाती हैं

    औरत का साथ कोई निस्वार्थ होकर नहीं देता
    मीडिया की नज़र टीआरपी पर अटक जाती है
    पुलिस की कार्रवाई महज़ खानापूर्ति होती है
    जनता जुलूस निकाल मोमबत्तियां जलाती है

    नेता घड़ियाली आंसू बहा वोट पक्के करते हैं
    दरिंदे खुलेआम घूमते हैं मानो कुछ हुआ ही नहीं
    पीड़िता शर्मिंदगी से घुट-घुटकर ताउम्र जीती है
    उस अपराध के लिए जो उसने किया ही नहीं

    जाने वो कौन सा मुबारक दिन होगा जब
    बलात्कार की एक भी ख़बर नहीं आएगी
    मेरे हिंदुस्तान की हर बेटी, हर बहन फ़िर से
    बेख़ौफ़ खुली हवा में चैन की सांस ले पाएगी
    ©neetu_rajeev_kapoor

  • atulmehpa 165w

    आखिरी ख्वाहिश है मेरी, गर जन्म हो दुबारा इस दुनिया में
    मां भी यही मिले और मिट्टी भी यही मिले!
    ©atulmehpa