#K35

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  • krati_sangeet_mandloi 146w

    बाल विवाह

    कैसा यह अजीब रिवाज है,
    गुड्डा-गुड्डियों से खेलने की उम्र में,
    विवाह से खेलता बचपन,
    दबता जिम्मेदारियों के बोझ तले,
    नष्ट होता उनका आज है।

    मन में उमड़ते सवालों को,
    जिन्होंने अल्हड़पन में दबा लिया,
    रूढ़िवादी परम्परा से अनजान,
    इस प्रथा का खिलौना बनकर,
    खेल-खेल में जीवन-बंधन रचा लिया।

    नन्हे कंधे इसे कैसे निभाए,
    जिन्हें जीवन की समझ नहीं,
    रिश्ते की समझ वो कहाँ से लाए,
    जिन्हें अच्छे-बुरे और पराए की समझ नहीं,
    वो कच्ची उम्र के भाव कैसे छिपाए।

    दुष्परिणाम है इसके ऐसे,
    छोटी उम्र में विवाह करा कर,
    लड़कियां समय से पूर्व गर्भवती हो जाती है,
    एवं यौन शोषण की वजह से,
    गंभीर बीमारी और मृत्यु का शिकार हो जाती है।

    दहेज, गरीबी और अशिक्षा के घेरे में,
    दोनों इस खूंटी से बंध जाते है,
    लड़कियों के साथ भेदभाव कर,
    असुरक्षा की भावना से ग्रसित होकर,
    युवा या अधिक उम्र के लड़के से विवाह कराते है।

    गैर कानूनी होने पर भी,
    इसका प्रचलन देश के ग्रामीण क्षेत्रों में खास है,
    नियमों का उल्लंघन करते हुए,
    समूचे विश्व के कई देशों में फैला,
    इस प्रथा का सदियों पुराना इतिहास है।

    यह रूढ़िवादी प्रथा की जड़े तभी कटेंगी,
    जब जनसमुदाय शिक्षित हो,
    लड़कियां सशक्त और आत्मनिर्भर हो,
    जब इसके विरुद्ध मिलकर आवाज उठेगी,
    तभी तुच्छ मानसिकता की दीवार हटेंगी।

    विवाह समाज का महत्वपूर्ण अंग है,
    उचित उम्र में विवाह से ही,
    सामंजस्यपूर्ण समाज की नींव स्थापित होगी,
    जन जागरूकता के सहयोग से ही,
    देश के विकास की गति तेज होगी।

    ©Krati_Mandloi✍️
    (2-04-2019)