#K49

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    यह कैसा सम्मान है जिसके फलस्वरूप जीवन बलि चढ़ जाता है? ����

    सम्मान के लिए की गई हत्या से ना जीवन बचता है, और ना ही सम्मान ।


    संयुक्त राष्ट्र का दावा है कि विश्व स्तर पर इन 5,000 हत्याओं में 1,000 भारत में होती हैं. हालांकि गैरसरकारी संगठनों का कहना है कि दुनिया भर में इनकी संख्या 20,000 तक है. आम तौर पर भारत के छोटे शहरों और गांवों में इज्जत के नाम पर हत्या कर दी जाती है।

    संस्कृति, समाज और धर्म के नाम पर हो रहे ऑनर किलिंग के बहुत सारे कारण है। जिनमें से मैंने अंतरजातीय विवाह पर प्रकाश डालने का प्रयत्न किया है। कारण चाहे जितने भी हो हत्या कोई समाधान नहीं है। इसके विरुद्ध सख्त कानून का होना बहुत जरुरी है।

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    ऑनर किलिंग

    यह एक ऐसा अभिशाप जो मानवता को शर्मसार कर,
    मनुष्य के सभ्य होने की बात को नकारता है।
    अपनी झूठी आन-बान-और शान के ख़ातिर,
    अपना ही अपनों का जीवन हरता है।

    यह कैसी हत्या है? यह कैसी वेदना है?
    जो परिवार,समाज में अपनी मान-प्रतिष्ठा की दुहाई देकर करता है।
    दो बालिगों के निर्णय को स्वीकार करने का सामर्थ्य नहीं,
    जिसमें छिपकर अहंकार अपना दंभ भरता है।

    ना ही उनके साथ से किसी को नुकसान,ना किसी से उनकी दुश्मनी,
    ना ही उनका किसी से कोई विवाद...
    फिर क्यों कोई उनके निर्णय को स्वीकार नहीं करता है।
    उनके इस कृत्य से परिवार, वंश और समुदाय का अपमान होगा,
    इसलिए उनका परिवार उन्हें मृत्यु के घाट पर उतारता है।

    प्रेम ही धर्म है की शिक्षा देने वाले ही,
    हृदयहीन होकर द्वेष के कुकर्म में दिखाते क्रूरता है।
    रूढ़िवादी चोला पहन अंधे हो जाते है,
    इस अधर्म से ह्रदय उनका एक पल के लिए भी नहीं कराहता है।

    कहाँ जाते है तब इस सभ्य समाज के संस्कार?
    जब कोई अपने बेटे-बेटी की निर्ममता से हत्या करता है।
    लानत है ऐसी रूढ़िवादी मान्यताओं और परंपराओं पर,
    जिनके चलते कोई अपना जीवन कुर्बान करता है।

    क्या किसी के निर्णय पर उनकी हत्या करना न्यायसंगत है?
    यह एक गंभीर विषय है जो समाज को सोचने पर मजबूर करता है।
    अंतरजातीय विवाह का विरोध करना,
    संकीर्ण सोच को स्वतंत्र करने में बाधा उत्पन्न करता है।

    इसके पक्ष में खड़े पढ़े लिखे लोग भी,
    खोखले तर्को को आधार मानकर दिखाते मूर्खता है।
    ऐसा मानना भ्रम के अलावा कुछ भी नहीं की,
    जातीय विवाह के समर्थन से ही वंश पदोन्नति करता है।

    इस श्राप का अंत तब ही संभव है जब,
    ऐसी घटना पर हर कोई सामूहिक स्वर में इसकी निंदा करता है।
    जीवन से अधिक मोल नहीं परंपराओं का,
    गैरकानूनी और लज्जापूर्ण है यह जो मानव की विकृत सोच पर शासन करता है।

    ©Krati_Mandloi✍️
    (16-04-2019)