#dearkamra

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  • nikhilkhandare 29w

    प्रिय कमरा

    प्रिय कमरा, जब वो आए मुझसे मिलने तो उसे कुछ भी मत बताना,
    की कैसे मैं उसके इंतजार में अपनी रातें खुली आंखों से गुजार लेता हूं,
    की कैसे मैं उसकी चाह में हर पूनम की रात में खिड़की से चांद को भीतर बुला लेता हूं,
    की कैसे मैं उसकी याद में अपनी मीठे पानी की प्यास अक्सर खारे अश्कों से मिटा लेता हु ,
    की कैसे उसकी महक का नशा जहन से उतरने ना पाए इस चाहत में फूलदान को तन्हा खाली छोड़ देता हु,
    की कैसे उसकी बालों को हवा में लहराने की पसंद के चलते मैं ठीक पंखे के नीचे की कुर्सी आज भी खाली छोड़ देता हु,
    की कैसे मैं उसके आने की आस में खुले दरवाजे पर रात भर नज़रे टिकाए आंखे नम कर लेता हु,
    की कैसे मैं उसका दीवार की दूसरी ओर होने की आशंका में दीवारों की दरारों से झांक लेता हूं,
    की कैसे मैं उसकी किताब पढ़ने की आदत से वाकिब मेरी हर किताब टेबल पर बुकमार्क लगाकर छोड़ देता हु,
    की कैसे मैं उसकी रात में आने की आदत से दीवार पर लटकी तस्वीर पर चमकता सूरज भी ढक देता हूं,
    की कैसे उसके पायल की छन्-छन् मुझे दूर से सुनाई दे इस हसरत में मैं घड़ी की टिक-टिक का शोर दबोच लेता हु,
    की कैसे उसके जल्दी आने की बेसब्री में उस घड़ी के कांटो को उंगलियों से जल्दी जल्दी घुमा लेता हूं,
    प्रिय कमरा जब वो आए मुझसे मिलने उसे बिलकुल मत बताना की,
    मैं आज भी उसको ख़्वाब में मेरा समझकर सुबह तक अक्सर दिल को बहला लेता हूं।

    ©nikhilkhandare