#fellowshipdiary

23 posts
  • creative_chanchal 15w

    ख़ास पल!

    हम उस घङी का इन्तजार कर रहें है
    जब वक़्त के साथ तुम भी हमारे साथ होंगे
    अहसास भी साथ होंगे
    और हमारी बातें भी ख़ास होंगी!

    ख़ास..... हाँ ख़ास
    क्योंकि वक़्त पल दो पल के लिए खास हो सकता है
    पर जब किसी का साथ होता हैं तो
    हर पल ख़ास हो जाता है!!
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 86w

    Emotions

    कई बार हम इतने Emotional हो जाते है
    चाहकर भी खुद की Feeling's को नहीं समझ पाते है
    ना आँखो में आँसू होंगे
    ना ही होठों पर मुस्कुराहट
    बस दिल की धड़कने कम, ज्यादा हो रहीं होती है
    सारे Emotions वह खुद ही समझ रही होती है
    और हरकतें धडकनो के साथ मिलकर बयां हो रही होती है।
    सारा खेल भी, इन्ही धडकनो का है, जो
    हमेशा लगाव के बाद घाव बन जाती है
    कसूरवार किसे कहें?
    इंसानी हरकतों को या इन दिल की धड़कनो को
    ना इसके बिना ज़िया जा सकता है और
    ना ही साथ रहकर इसे खूद से अलग किया जा सकता है।।
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 86w

    'Ending_Beginning'

    सफ़र कभी ख़त्म नहीं होता है
    कहते है एक यात्रा पूरी होती है, तो
    दूसरी यात्रा फिर से शुरू हो जाती है
    हर सफ़र का Ending ही,
    नये सफ़र का Beginning होता है।।
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 86w

    'Example_Struggle'

    "Example" हमेशा अच्छे होते है।
    क्योकि उन "Example" के पीछे "struggle"
    की एक कहानी छिपी होती है।।
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 86w

    'अच्छाई_बुराई'

    वक्त भले ही बुरा चल रहा हो
    पर खुश रहना बहुत जरूरी है
    होम कोरनटाईन हो या बाहर कोरोना हो
    पर हमेशा मस्ती मज़ाक करते रहने से ही
    असली लड़ाई जीती जा सकती है
    डर पर जीत, जंग की जीत या
    किसी बीमारी या वायरस पर जीत
    उस खुशी का ठिकाना नही होता है,वह
    आसमान में पाँव पसार रही होती है
    एहसास इस क़दर होता है कि
    हम फिर से जिंदा हो गये
    कुछ कर गुजरने के लिए
    और उस कुछ में अच्छे काम करना याद आता है
    बुराई तो सिर्फ लोग दिलाते है
    कसूर उनका भी नहीं है
    सब दूसरों में अच्छाइयों को कहाँ बरदाश कर पाते है
    शुक्रिया उन सभी लोगों को जो बुरे वक़्त में
    बुराईयों को अच्छे से याद दिलाते है
    हमें सोचने पर मजबूर करते है
    कि हमनें कहाँ और कौन-कौन सी ग़लतियाँ की है,
    ताकि आने वाले वक़्त में उन गलतियों को दोहराए नहीं
    गौर तो सब फ़रमाते है इस बात पर
    अगर गौर इस पर भी किया जाएँ कि
    हम दूसरों की बुराइयों के साथ खुद की गलतियों को, बुराईयों को भी याद रखें तो सारी परेशानीयों का हल
    अपने आप ही निकल आएंगे।।
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 86w

    रूप सच्चाई का_C19

    ''डर' समझ नहीं आ रहा है
    हम डरकर जी रहें है या खुद को डराकर जी रहें
    किसी को 'कोरोना' हो या ना हो?
    पर ख़ौफ इतना हो गया है कि हम
    किसी से बात करने से भी कतराने लगे है।
    बेबस दिल अगर किसी की मदद भी करना चाहे तो
    एक तरफ कोरोना का डर, दूसरी ओर
    आस-पास के साथियों की आँखे
    हमे अकसर रोक दिया करती है।
    अभी ख़ौफ लाखों दिलों में गर कर गया है
    ऐसा लगता है लोग बात करना तो दूर
    किसी का दूर से चेहरा भी देखना नहीं चाहते ।
    एक तरफ़ डॉक्टर है, जो जिंदादिली से रोगियों का ईलाज कर रहे है
    दूसरी ओर वो लोग है जो बिना रुके, बिना डरे
    तुम्हारे (हर एक) लिए काम कर रहें है।
    कोई मोरल सपोर्ट कर रहा है, तो कोई तुम्हें कोस रहा है
    कुछ ऐसे भी है, जो अपना फर्ज भुलकर मज़ाक का पात्र बनाए हुए है।
    जहाँ हिम्मत की जरूरत होती है, वहाँ आस-पास के लोग ही आपकी हिम्मत के साथ
    आपको अंदर से भी झिंझोड़ने की कोशिश करते है, ताकि आप सर्वाइव ना कर सके
    पर कुछ आपके आस-पास ऐसे भी लोग होते है, जो आपकी मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहते है
    आपके धैर्य को बढावा दे रहे होते है, आपको सुखद एहसास करा रहे होते है।
    किसी ने कहा है कि पड़ोसी भगवान का रूप होते है, जिसने भी कहाँ है उसमें यह सच्चाई तो झलकती है कि पड़ोसी आपकी भावनाओं को अच्छे से समझते है।
    अफ़सोस तो इस बात का है कि यह भावनाओ का एहसास सबमें नहीं झलकता है।
    खैर कुछ लोगों में इन्सानीयत अभी भी जिन्दा है, जो जिंदगी को जीना सिखाते हैं, 'इन्सान' को 'इन्सान' समझते है।
    "सलाम उन सबको जो इस मुश्किल घङी में भी दुनिया को बचाने का संकल्प लिए हुए है।"
    जिनमें इंसानियत का गुण नहीं रहा है उनके लिए क्या कहा जाए?
    इसकी परिभाषा वो खुद ही दे, तो अच्छा है।।
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 88w

    शातिर

    तुम शातिर बहुत हो!
    ना रिश्तों के सवाल पर जबाब देते हो
    ना ही बातों के जबाब समय पर देते हो!!
    तुम शातिर बहुत हो!
    तुम्हे पता है कि कब अपनी बातो को बताना है
    तुम्हे यह भी पता है कि कब सामने वाली की बात को अनसुना करना है!!
    तुम शातिर बहुत हो!
    तुम्हे पता है तुम्हे अपने एहसासों का पिटारा कब खोलना है
    तुम यह कला भी अच्छे से जानते हो कि
    सामने वाला तुम्हे संजीदा ना ले!!
    तुम शातिर बहुत हो!
    तुम्हे बातें करना और कराना दोनों आता है
    पर अपने दिल की बातों को कैसे छुपाना है
    ये तुम अच्छे से जानते हो!!
    तुम शातिर बहुत हो!
    बातों के साथ-साथ अपनो से अनजान हो जाने की हरकतें करतें हो
    फिर मासूमियत के साथ सबको यकींन दिला देते हो !!
    हाँ, तुम बहुत शातिर हो!!
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 89w

    सुचिंतित!!

    लगा आज तुम मेरी बातो को सुनोगे
    मुझे समझ सकते हो, मुझे समझा सकते हो
    पर बातों के बाद एहसास हुआ कि
    तुम शायद कुछ चीजों में मेरे जैसे हो
    पर तुममे वो बात नहीं जो मुझमें आज है
    तुम्हे उस भूलभूलया से बाहर निकलना होगा
    जिस इतिहास को तुम हकीक़त समझ बैठे हो
    तुम सोचते मेरे जैसा हो शायद मुझे ऐसा महसूस होता है
    पर उस सोच में अन्य विचारो का होना,
    मुझे अफ़सोस कराता है
    तुम्हारे विचारो में, तुम्हारे कार्यो में वो सच्चाई है
    जिससे आज लोग दूर भागते है
    पर तुम वो इन्सान हो जिसे आज की ख़बर होना भी जरूरी है
    हमें लगता है कि तुम्हे थोड़ा बदल जाना चाहिए
    पर इतना भी नहीं कि हकीकत ए दुनिया से दूर हो जाओ
    पर हाँ तुम्हे पूर्ण रूप से सुचिंतित(mature) हो जाना चाहिए
    ताकि तुम्हारे आस-पास के लोगों के साथ तुम्हारी समझ
    और इस प्रकृति की सच्चाई से रूबरू हो सको ।।
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 89w

    अलग है "हम"

    मैं और तुम "हम" हो सकते है।
    पर मैं और तुम दोनों बहुत अलग है।।
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 90w

    बहाना

    बहाना कुछ भी हो
    हैप्पी बर्थड़े हो या किसी का हाल-चाल लेना हो
    महीनों घर के अंदर रहने के बाद
    अचानक जब दो पल के लिए ही सही
    दोस्तो से मुलाक़ात
    चेहरे की रोनक बड़ा देता है
    और जब दोस्तो को सोशल डीसटेन्स का पालन करते देख
    खुशी ओर भी दोगुना हो जाती है
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 91w

    "इल्म-ए-सफ़र"

    जाने कल की ही बात है
    जब हम "इल्म-ए-सफ़र" के लिए,
    एक नये रास्तों के रूख के लिए
    हम अपना बैग पैक कर रहे थे।
    अनेको में एक, एक में अनेक
    सब अपनी छाप लिए
    एक राज्य से दूसरे राज्य की रोनक के सपने संजोये
    कोई झुंड में तो कोई अकेले ही अपनी रेल-बस का इन्तजार कर रहा।
    कुछ ख़ुश तो कोई ना खुश
    क्योकि रास्ते सबके बदल रहें, साथ में
    साथी संगी भी कुछ समय के लिए दूर हो रहे।
    सब एक नया सपने लिए यहाँ आते है
    उन सपनों की शुरुआत, नये बने रिश्तो के साथ करते है
    कुछ रिश्ते कुछ समय के लिए होते है तो
    कुछ जीवन विसार के लिए।
    रिश्तो की अहमियत तब पता चलती है
    जब वह दूर होते है
    उसी दूरी में पल दो पल के लिए मिलने की खुशी
    एहसास कराती है कि बरसों बाद,
    दोस्तो से मिलना हो रहा है।
    आज एक साल हो गया
    "इल्म-ए-सफ़र" को
    न जाने ये वक़्त इतना जल्दी कैसे गुज़र गया।
    हर रोज नया जानने, नया सीखने
    सब एक साथ, एक नई सोच लिए
    अपने पग पसार रहे होते
    कोई आनंद का भोगी तो कोई रोग का रोगी
    सब अपने दिलों में आग जलाए
    हर जगह चल रहे होते
    कोई प्रकृति का सुख ले रहा है,तो
    कोई अपनी राह खोज रहा है।
    फिर वह वक़्त भी आ गया
    हमारे लोटने का, जहाँ से हम आये थे।
    वक़्त तो अपनी ही रफ्तार से चल रहा है
    हमारी गति कभी धीमी तो कभी तेज रफ्तार लिए होती है
    हम वक्त को दोष देते है जबकि इसमें वक़्त का कोई दोष नहीं है, वह तो अपने अनुसार चल रहा है
    क्योकि गलतियाँ तो हम ही दोहराते है
    कभी चुनौतीयो से हार मान लेते है, तो
    कभी चुनौतीयो को हंसते हुए गले लगा लेते है
    इन्ही उतार-चढ़ाव में उलझते रहते है।
    इन्ही उतार-चढ़ाव ने जिंदगी के बहुत से सबक भी सिखाये है, तो कई हरकतों को गौर से देखना,समझना भी सीखा है।
    यह कहानी यही कहाँ थमने वाली है
    कभी ओर लिखेगे इस बारे में
    क्योकि यह मेरी ही नहीं हमारी (हर फेलो) की कहानी है।।
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 92w

    *तुम_तुम्हारी*

    तुम बात करो या ना करो
    पर तुम्हारी रुवानी हमेशा रहती है!
    तुम दूर रहो या पास रहो
    तुम्हारा एहसास हमेशा रूह से जुड़ा रहता है!!
    तुम इन पलों को संजोये या ना संजोये
    तुम्हारे साथ इन पलों की रवानी चाहते है!
    तुम पृकृति की महक की तरह रहो या ना रहो
    तुम्हारी सादगी में हम सीमटना चाहते है!!
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 92w

    "जीत-ए-एहसास"

    भक्ति हो, निष्ठा हो, प्यार हो चाहे अनुराग हो
    गति हमेशा धीमी ही होनी चाहिए
    ताकि हर एहसास को समझा जा सके,
    हर एहसास के विश्वास को क़ायम किया जा सके,
    और हर एहसास की सच्चाई को जीता जा सके।।
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 93w

    "यक़ीन"

    तुम्हारी एक मुस्कान
    तुम्हारी मासूमियत को बयां करती है
    तुम्हारी आँखे
    तुम्हारे शांत स्वभाव को बयां करती है
    तुम्हारे ख़याल
    तुम्हारी सच्चाई को बयां करते है
    और तुम्हारा दिल उस विश्वास को बयां करता है
    जिस पर यक़ीन किया जा सकता है!!
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 93w

    "किरदार"

    क्यो बार-बार हमारी नज़रे
    वक़्त की इन सुईयो पर चली जाती है
    ना जाने इस दिल को कौन से पलों का इन्तजार है
    ना दिल और ना ही हमारी नज़रे रुकने का नाम ले रही है
    रात गहरी होती जा रही है
    पर नींद खुली आँखों से ख्वाब देख रही है
    कैसे समझाए इस दिल को
    कि अब रात हो गई है इन्तज़ार छोड़ 'सो' जाना चाहिए हमें
    हमारे लिए ख्वाबो को नींद में सजो लेना अच्छा है
    वरना हकीकत-ए-दासता एक नई कहानी का रूप लेंगी जिसका 'किरदार' शायद, हम अच्छे से नहीं निभा पाएँगे।।
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 93w

    ❤_

    Right now only some words going on in my Mind and ❤Heart❤
    *❤Dil_Dhadkane do*
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 93w



    ढलती शाम, रात की तरफ इशारा कर रही होती है!
    पर तुम्हारी बातें, न जाने कहाँ जानें का रास्ता पूछ रही होती है !!
    आज का चन्दा, आसमां में अपना ही नूर बिखेर रहा है
    और तारे उस नूर में खोये हुए से दिख रहे है!
    पर हम भी कहाँ पीछे है!
    हम भी तो इन्ही तारों के पीछे छिपे हुए है,
    तुम्हारे ही इस नूर के इन्तज़ार में!!
    आज रात, काली नहीं है!
    आज की रात अपने ही चन्दा की चाँदनी से रोशन है!!
    लोग चाँद में दाग कहते है!
    जनाब ज़रा गौर से रूबरू होइये....
    इससे ज्यादा खुबसूरत किसी को देखा है!!
    लोग किसी को भी चाँद का टुकड़ा कहते हुए फिरते है!
    ज़रा गौर से देखिये इस आसमां के चाँद को, इसकी खुबसूरती अपने में ही झलकती है!!
    चाँद किसी की परछाई नहीं है, ना ही कोई इस चाँद की परछाई है!
    चाँद सिर्फ गगन का नूर है, जो इस गगन को रोशन करने निकलता है!!
    चाँद को किसी प्रतिबिंब की जरूरत नहीं है!
    जनाब आज गगन की तरफ आँखे तो उठाईये
    उसकी परछाई में ही उसका प्रतिबिंब सा प्रतित हो रहा है !!

  • creative_chanchal 94w

    Bootcamp_2020

    आज वो वक़्त है, जहाँ सब दूर रहकर भी
    सब पास है, सब साथ है !!
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 107w

    #सपने

    सपने खुलीं आँखो से देखने या सोते हुए नीन्द में देखने से सपने पूरे नहीं होते है ।
    बहुत मेहनत करनी पड़ती है और वही मेहनत रूपी रंग इन्द्रधनुष भी बनती है।।
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 114w

    #fellowshipjourney #fellowshipdiary #fellowshiplife

    https://zindginamacom.wordpress.com/2019/11/14/सफ़री/

    Read More

    "सफ़री"

    इस सफ़री का आखरी व चौथा अध्याय भी शुरू हो गया है
    हंसते - हँसाते,
    रोते - रुलाते,
    गिरते - संभलते,
    लड़ते - झगड़ते,
    कभी गलतफहमियों के शिकार होते हुए तो
    कभी गलतफहमियों को दूर करते हुए ।
    कभी खुद को साबित करते हुए,
    कभी दूसरों को आगे बढ़ाते हुए ।
    कभी नाराज़ होते हुए तो
    कभी किसी की नाराज़गी दूर करते हुए ।।
    कभी छोटी सी बात को बड़ा करते हुए तो
    कभी बड़ी बात को भी दिल में छुपाते हुए।
    कभी अनजान थे सब एक-दूसरे से
    अनजाने सफ़र की तरह
    आज एक है दिल की धड़कन की तरह ।।
    कभी रुठे हुए को मनाया
    कभी रोते हुए को चुप करवाया
    कभी हमारी आखों में भी आँसू रहे
    कभी खुद से ही मुस्कुराना सिखा ।
    कभी करी किसी की टांग- खिंचाई
    तो कभी किसी को झाड़ से उतारा
    कभी किसी का सहारा बनें तो
    कभी हमने किसी की लाठी को थामा ।।
    कभी अनजाने अनगिनत सफ़र की सैर की
    कभी साथियों संग हंसी ठिठोली की ।
    इस सफ़री में कोई हमे छोड़कर गया तो
    किसी को हम छोड़कर नये रास्तो पर निकले
    छोड़कर हम जाएँ या कोई ओर गम हमेशा होता है ।।
    कभी पैदल सैर सपाट किया तो
    कभी गाड़ी पर तीन-तीन सवार हुए ।
    कभी रात को दिन बनाया
    कभी दिन को रात ।।
    कभी आइसक्रीम का स्वाद लिया
    कभी चाय की चुस्कियां
    कभी बरखादेवी ठिकाना था
    कभी लेक (Lake) एक बहाना था
    क्योकि सबकी मंजिल भी एक ही थी ।।
    कभी काम में इतना डूबे कि खुद को ही भूल गये
    और कभी इतना सोचा कि
    प्लानिंग में ही अटक कर रह गयें ।
    कभी खुद से शुरुआत की तो
    कभी किसी का हाथ बटाया ।।
    कभी स्कूल,कभी आॅफिस,कभी घर
    तो कभी ट्रेन ही हमारा घर । ।
    कभी साथ रह लिए
    कभी अलग हो लिए
    तो कभी बहुत दूर रहने वाले साथियों से भी मिल लिए । ।
    कभी बातें यादों के झरोखे बन गई तो
    कभी यादें सिर्फ बातों में ही रह गई
    और सफ़र कुछ मीठा, कुछ नमकीन सा ।
    कोई प्यार के साथ-साथ प्याज का दीवाना
    तो किसी का कोल्ड ड्रिंक बिना खाना हज़म नहीं होना ।।
    एक को आलू से प्यार दूसरे को आलू से तक़रार
    और हमारी दीदी करे मेल मिलाप । ।
    कभी झूलते हुए तारों को टूटते देखां ।
    तो कभी उगते हुए सूरज की चकाचौंध.... ।।
    ©creative_chanchal