#fellowshipjourney

25 posts
  • creative_chanchal 86w

    Emotions

    कई बार हम इतने Emotional हो जाते है
    चाहकर भी खुद की Feeling's को नहीं समझ पाते है
    ना आँखो में आँसू होंगे
    ना ही होठों पर मुस्कुराहट
    बस दिल की धड़कने कम, ज्यादा हो रहीं होती है
    सारे Emotions वह खुद ही समझ रही होती है
    और हरकतें धडकनो के साथ मिलकर बयां हो रही होती है।
    सारा खेल भी, इन्ही धडकनो का है, जो
    हमेशा लगाव के बाद घाव बन जाती है
    कसूरवार किसे कहें?
    इंसानी हरकतों को या इन दिल की धड़कनो को
    ना इसके बिना ज़िया जा सकता है और
    ना ही साथ रहकर इसे खूद से अलग किया जा सकता है।।
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 86w

    'Ending_Beginning'

    सफ़र कभी ख़त्म नहीं होता है
    कहते है एक यात्रा पूरी होती है, तो
    दूसरी यात्रा फिर से शुरू हो जाती है
    हर सफ़र का Ending ही,
    नये सफ़र का Beginning होता है।।
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 86w

    'Example_Struggle'

    "Example" हमेशा अच्छे होते है।
    क्योकि उन "Example" के पीछे "struggle"
    की एक कहानी छिपी होती है।।
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 86w

    'अच्छाई_बुराई'

    वक्त भले ही बुरा चल रहा हो
    पर खुश रहना बहुत जरूरी है
    होम कोरनटाईन हो या बाहर कोरोना हो
    पर हमेशा मस्ती मज़ाक करते रहने से ही
    असली लड़ाई जीती जा सकती है
    डर पर जीत, जंग की जीत या
    किसी बीमारी या वायरस पर जीत
    उस खुशी का ठिकाना नही होता है,वह
    आसमान में पाँव पसार रही होती है
    एहसास इस क़दर होता है कि
    हम फिर से जिंदा हो गये
    कुछ कर गुजरने के लिए
    और उस कुछ में अच्छे काम करना याद आता है
    बुराई तो सिर्फ लोग दिलाते है
    कसूर उनका भी नहीं है
    सब दूसरों में अच्छाइयों को कहाँ बरदाश कर पाते है
    शुक्रिया उन सभी लोगों को जो बुरे वक़्त में
    बुराईयों को अच्छे से याद दिलाते है
    हमें सोचने पर मजबूर करते है
    कि हमनें कहाँ और कौन-कौन सी ग़लतियाँ की है,
    ताकि आने वाले वक़्त में उन गलतियों को दोहराए नहीं
    गौर तो सब फ़रमाते है इस बात पर
    अगर गौर इस पर भी किया जाएँ कि
    हम दूसरों की बुराइयों के साथ खुद की गलतियों को, बुराईयों को भी याद रखें तो सारी परेशानीयों का हल
    अपने आप ही निकल आएंगे।।
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 86w

    रूप सच्चाई का_C19

    ''डर' समझ नहीं आ रहा है
    हम डरकर जी रहें है या खुद को डराकर जी रहें
    किसी को 'कोरोना' हो या ना हो?
    पर ख़ौफ इतना हो गया है कि हम
    किसी से बात करने से भी कतराने लगे है।
    बेबस दिल अगर किसी की मदद भी करना चाहे तो
    एक तरफ कोरोना का डर, दूसरी ओर
    आस-पास के साथियों की आँखे
    हमे अकसर रोक दिया करती है।
    अभी ख़ौफ लाखों दिलों में गर कर गया है
    ऐसा लगता है लोग बात करना तो दूर
    किसी का दूर से चेहरा भी देखना नहीं चाहते ।
    एक तरफ़ डॉक्टर है, जो जिंदादिली से रोगियों का ईलाज कर रहे है
    दूसरी ओर वो लोग है जो बिना रुके, बिना डरे
    तुम्हारे (हर एक) लिए काम कर रहें है।
    कोई मोरल सपोर्ट कर रहा है, तो कोई तुम्हें कोस रहा है
    कुछ ऐसे भी है, जो अपना फर्ज भुलकर मज़ाक का पात्र बनाए हुए है।
    जहाँ हिम्मत की जरूरत होती है, वहाँ आस-पास के लोग ही आपकी हिम्मत के साथ
    आपको अंदर से भी झिंझोड़ने की कोशिश करते है, ताकि आप सर्वाइव ना कर सके
    पर कुछ आपके आस-पास ऐसे भी लोग होते है, जो आपकी मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहते है
    आपके धैर्य को बढावा दे रहे होते है, आपको सुखद एहसास करा रहे होते है।
    किसी ने कहा है कि पड़ोसी भगवान का रूप होते है, जिसने भी कहाँ है उसमें यह सच्चाई तो झलकती है कि पड़ोसी आपकी भावनाओं को अच्छे से समझते है।
    अफ़सोस तो इस बात का है कि यह भावनाओ का एहसास सबमें नहीं झलकता है।
    खैर कुछ लोगों में इन्सानीयत अभी भी जिन्दा है, जो जिंदगी को जीना सिखाते हैं, 'इन्सान' को 'इन्सान' समझते है।
    "सलाम उन सबको जो इस मुश्किल घङी में भी दुनिया को बचाने का संकल्प लिए हुए है।"
    जिनमें इंसानियत का गुण नहीं रहा है उनके लिए क्या कहा जाए?
    इसकी परिभाषा वो खुद ही दे, तो अच्छा है।।
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 88w

    शातिर

    तुम शातिर बहुत हो!
    ना रिश्तों के सवाल पर जबाब देते हो
    ना ही बातों के जबाब समय पर देते हो!!
    तुम शातिर बहुत हो!
    तुम्हे पता है कि कब अपनी बातो को बताना है
    तुम्हे यह भी पता है कि कब सामने वाली की बात को अनसुना करना है!!
    तुम शातिर बहुत हो!
    तुम्हे पता है तुम्हे अपने एहसासों का पिटारा कब खोलना है
    तुम यह कला भी अच्छे से जानते हो कि
    सामने वाला तुम्हे संजीदा ना ले!!
    तुम शातिर बहुत हो!
    तुम्हे बातें करना और कराना दोनों आता है
    पर अपने दिल की बातों को कैसे छुपाना है
    ये तुम अच्छे से जानते हो!!
    तुम शातिर बहुत हो!
    बातों के साथ-साथ अपनो से अनजान हो जाने की हरकतें करतें हो
    फिर मासूमियत के साथ सबको यकींन दिला देते हो !!
    हाँ, तुम बहुत शातिर हो!!
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 89w

    सुचिंतित!!

    लगा आज तुम मेरी बातो को सुनोगे
    मुझे समझ सकते हो, मुझे समझा सकते हो
    पर बातों के बाद एहसास हुआ कि
    तुम शायद कुछ चीजों में मेरे जैसे हो
    पर तुममे वो बात नहीं जो मुझमें आज है
    तुम्हे उस भूलभूलया से बाहर निकलना होगा
    जिस इतिहास को तुम हकीक़त समझ बैठे हो
    तुम सोचते मेरे जैसा हो शायद मुझे ऐसा महसूस होता है
    पर उस सोच में अन्य विचारो का होना,
    मुझे अफ़सोस कराता है
    तुम्हारे विचारो में, तुम्हारे कार्यो में वो सच्चाई है
    जिससे आज लोग दूर भागते है
    पर तुम वो इन्सान हो जिसे आज की ख़बर होना भी जरूरी है
    हमें लगता है कि तुम्हे थोड़ा बदल जाना चाहिए
    पर इतना भी नहीं कि हकीकत ए दुनिया से दूर हो जाओ
    पर हाँ तुम्हे पूर्ण रूप से सुचिंतित(mature) हो जाना चाहिए
    ताकि तुम्हारे आस-पास के लोगों के साथ तुम्हारी समझ
    और इस प्रकृति की सच्चाई से रूबरू हो सको ।।
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 89w

    अलग है "हम"

    मैं और तुम "हम" हो सकते है।
    पर मैं और तुम दोनों बहुत अलग है।।
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 90w

    बहाना

    बहाना कुछ भी हो
    हैप्पी बर्थड़े हो या किसी का हाल-चाल लेना हो
    महीनों घर के अंदर रहने के बाद
    अचानक जब दो पल के लिए ही सही
    दोस्तो से मुलाक़ात
    चेहरे की रोनक बड़ा देता है
    और जब दोस्तो को सोशल डीसटेन्स का पालन करते देख
    खुशी ओर भी दोगुना हो जाती है
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 91w

    "इल्म-ए-सफ़र"

    जाने कल की ही बात है
    जब हम "इल्म-ए-सफ़र" के लिए,
    एक नये रास्तों के रूख के लिए
    हम अपना बैग पैक कर रहे थे।
    अनेको में एक, एक में अनेक
    सब अपनी छाप लिए
    एक राज्य से दूसरे राज्य की रोनक के सपने संजोये
    कोई झुंड में तो कोई अकेले ही अपनी रेल-बस का इन्तजार कर रहा।
    कुछ ख़ुश तो कोई ना खुश
    क्योकि रास्ते सबके बदल रहें, साथ में
    साथी संगी भी कुछ समय के लिए दूर हो रहे।
    सब एक नया सपने लिए यहाँ आते है
    उन सपनों की शुरुआत, नये बने रिश्तो के साथ करते है
    कुछ रिश्ते कुछ समय के लिए होते है तो
    कुछ जीवन विसार के लिए।
    रिश्तो की अहमियत तब पता चलती है
    जब वह दूर होते है
    उसी दूरी में पल दो पल के लिए मिलने की खुशी
    एहसास कराती है कि बरसों बाद,
    दोस्तो से मिलना हो रहा है।
    आज एक साल हो गया
    "इल्म-ए-सफ़र" को
    न जाने ये वक़्त इतना जल्दी कैसे गुज़र गया।
    हर रोज नया जानने, नया सीखने
    सब एक साथ, एक नई सोच लिए
    अपने पग पसार रहे होते
    कोई आनंद का भोगी तो कोई रोग का रोगी
    सब अपने दिलों में आग जलाए
    हर जगह चल रहे होते
    कोई प्रकृति का सुख ले रहा है,तो
    कोई अपनी राह खोज रहा है।
    फिर वह वक़्त भी आ गया
    हमारे लोटने का, जहाँ से हम आये थे।
    वक़्त तो अपनी ही रफ्तार से चल रहा है
    हमारी गति कभी धीमी तो कभी तेज रफ्तार लिए होती है
    हम वक्त को दोष देते है जबकि इसमें वक़्त का कोई दोष नहीं है, वह तो अपने अनुसार चल रहा है
    क्योकि गलतियाँ तो हम ही दोहराते है
    कभी चुनौतीयो से हार मान लेते है, तो
    कभी चुनौतीयो को हंसते हुए गले लगा लेते है
    इन्ही उतार-चढ़ाव में उलझते रहते है।
    इन्ही उतार-चढ़ाव ने जिंदगी के बहुत से सबक भी सिखाये है, तो कई हरकतों को गौर से देखना,समझना भी सीखा है।
    यह कहानी यही कहाँ थमने वाली है
    कभी ओर लिखेगे इस बारे में
    क्योकि यह मेरी ही नहीं हमारी (हर फेलो) की कहानी है।।
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 94w

    Bootcamp_2020

    आज वो वक़्त है, जहाँ सब दूर रहकर भी
    सब पास है, सब साथ है !!
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 96w

    "I am still trying to change myself as well as my life."
    #reflection #fellowshipjourney #observation #experience #Courage #volition :)

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    'हौसला'

    ना जाने क्यो ऐसा महसूस हो रहा है कि
    आजकल हर कोई हमे गिराने में लगा है
    हमारी चुप्पी को लोग हमारी कमजोरी क्यो समझते है
    हमें नहीं लगता हर बार, हर बात पर बोलना जरूरी होता है
    सबको बड़ा-चढ़ाकर बताना आता है
    हाँ, हममें वो गुण नहीं है कि हम खुद ही
    अपनी वाह-वाही लुटे
    अगर हम अपना किया हुआ काम बताने बैठेंगे तो
    शर्म से तुम सब अपनी गर्दन भी ऊपर नहीं कर पाओगे
    यह बात सब जानते भी हो
    फिर भी ऐसा लगता है कि हम
    कुछ नहीं कर सकते है, हम कुछ नहीं जानते है, हमे कुछ नहीं आता है
    कितना आसान होता है
    किसी के काम की आलोचना करना
    कभी उस काम के उद्देश्य को जानने की कोशिश करों
    ताकि बातों और काम में फर्क ना दिखें
    किसी के हुनर को महत्व देना सिखों
    ताकि सबके साथ क़दम मिलाकर चल सकें
    हम भी जिद्दी है, हम जो सपने देखते है
    उसे पूरा करने की चाहत और हौसला दोनों रखते हैं।।
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 99w

    एक तरफी 'याद'

    हर वक़्त किसी न किसी रूप में 'तुम' हमे 'याद' आ ही जाते हो !
    ओर एक तुम हो जो 'हमे' कभी 'याद' करना तो दूर, 'याद' करने के बारे में 'सोचते' तक नहीं हो !!
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 100w

    जंग_REAL LIFE की

    "दिल" और "दिमाग" दोनों ही "उलझन" में "सुलख" रहे है 
    "दिल" कहता है कि "दिमाग" की सुन लेनी चाहिए 
    वही "दिमाग" कहता है कि इस "दिल" की सुन लेनी चाहिए ।
    "हम" भी अपने "दिल" की ही सुन रहे है 
    इसलिए भीड़ का "हिस्सा" नहीं बन रहे है 
    हमें "भीड़" का हिस्सा नहीं बनना हैं 
    क्योकि हमे लोगों के जैसा नहीं बनना है
    "सब" खुद को "ऊपर" उठाने में लगे हैं 
    और "हम" आज भी सबके बहकावे में नहीं आ रहे है 
    आज के इस "दौर" में सब खुद को बेचने में लगे है 
    और "हम" आज भी इस बारे में नहीं सोच रहे है 
    बदलते "वक्त" के साथ कुछ ने अपने "आदर्शो" को छोड़ सबके साथ चल लिए और कुछ हमारे जैसे भी है जो आज भी "आदर्शो" को साथ लिए चल रहे है ।
    "हाँ", "हम" जानते है कि हम "प्रायोगिक" नही है 
    हो सकता है कि सबका कहना सही हो 
    हमें "विचारों" को छोड़ देना चाहिए 
    पर हम आज भी वही खड़े है
    सब "काम" करते है दिखाने के लिए और 
    हम "काम" करते है किसी की "मदद" करने के लिए ।
    हम सबके "दर्द" को समझते है इसलिए हर किसी के दुःख को अपना समझ लिया करते है । 
    हम भी सबके साथ चलना चाहते है पर हम अपने "मूल्यों" को नहीं छोड़ना चाहते है ।
    सबका कहना है कि हमे भी उसी "भीड़" का हिस्सा बन जाना चाहिए 
    मगर "हम" यह भी सोचते है कि इसमें "फायदा" क्या है ? 
    "क्यो" हमे इस भीड़ का हिस्सा बन जाना चाहिए ? 
    "क्यो" हमे अपने मूल्यो को छोड़ देना चाहिए ? 
    "हाँ", हमे पता है आज के इस "दौर" में इस तरह की बातें करने वाले "पागल" ही समझें जाते है । 
    सब इस "होड़" में है कि 
    "कोन" अपना काम बढ़ा चढ़ाकर दिखा पाएँगा ?
    "कोन" खुद को बेच पाएँगा ? 
    सबका कहना है कि "खुद" को बेचना जरूरी है 
    हमारा कहना है कि "काम" ऐसा करो
    कि लोग तुम तक पहुँचे ।
    हम ना खुद को बेचना चाहते है और ना ही अपने काम को 
    जिन्हें हमारे "काम" की "क़दर" होगी वो हमे "तवज्जों" देते हुए हम तक पहुँचेगा, जहाँ हमे खुद को निखारने का ओर मौका मिलेगा ।
    लोगों को काम से ज्यादा दिखावा पसंद है ।
    और "हम" आज भी यही सोच रहे है कि
    "ईमानदारी", "मेहनत", "विश्वास", "सत्यनिष्ठा"
     तुम्हारी बड़ी है या दिखावा ? 
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 101w

    "शब्दों का खेल"

    "शब्दों" को एक डोर में बाँधना भी जरूरी है
    वरना कैसे पता चलेगा कि
    आखिर तुम कहना क्या चाहते हो ?
    हम भी आजकल अपने शब्दो को बाँधने में लगें हैं
    ताकि कोई हमारी आवाज़ सुनें बिना समझ जाएँ कि
    आखिर हम कहना क्या चाहते हैं !
    हमारे पास अल्फाज़ो का पिटारा है, अहसास का सागर है
    नहीं है तो बस यह कि
    हम उस डोर को ढूँढ रहे है जिसमें
    हम अपने शब्दो को पिरो सके ।
    सब शब्दो से खेलते हुए दिखते है
    ओर एक हम है कि
    आज भी राजनीति नहीं समझ पाएँ ।
    दौर तेज़ी के साथ बदल रहा है
    और एक हम है कि
    चाहतें हुए भी खुद को पूरी तरह नहीं बदल पा रहें हैं ।
    हम भी शब्दो के खेल को समझ तो रहे हैं
    पर उस खेल को नहीं सीखे है, जहाँ खुद को निखार सकें।
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 103w

    वक़्त_तीर_योद्धा

    वक़्त के साथ सफ़र ए फैलोशिप का मज़ा ले रहे हैं हम
    वक़्त अपनी जगह ही है
    बस हमारे काम बढते जा रहे है
    हर रोज एक योद्धा की तरह
    उड़ते हुए तीर को सम्भालने में लगे हैं कि
    कैसे वक़्त की सीमा में रहकर
    तीर को सही दिशा में छोडा जाएँ
    ताकि एक कामियाब योद्धा की पहचान बन सके हम
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 106w

    कोशिश-ए-रंग

    कौन कहता है कि
    मेहनत रंग नहीं लाती !
    कोशिश करके तो देखिए
    इन्द्रधनुष की रुप-रेखा आपके सामने होगी !!
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 107w

    #सपने

    सपने खुलीं आँखो से देखने या सोते हुए नीन्द में देखने से सपने पूरे नहीं होते है ।
    बहुत मेहनत करनी पड़ती है और वही मेहनत रूपी रंग इन्द्रधनुष भी बनती है।।
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 108w

    "गम-दूरी-दोस्त"

    ये शीत लहर सिर्फ हमे ही नहीं
    हमारी रूह को छू रही है
    अहसास दिला रही है हमे हर एक पल की
    जो सिर्फ अब यादें बनकर रहने वाली है ।
    कहना आसान होता है कि दोस्त दूर रहकर भी पास ही होते है पर सच्चाई कुछ ओर ही कहती है
    अहसास हो रहा है हमे भी जब कोई हमसे दूर जाता है तो तकलीफ दिल को ही नहीं , रूह को भी होती है ।
    हम भी इसी कश्मकश में है कि हम सब साथ रहकर अच्छे थे या फिर दूर रहकर अच्छे है ?
    पर हमारी आँखे इस सवाल का जवाब दे रही है ।
    घर खाली है , छत सुनसान है
    और हमारे होंठों ने भी चुप्पी साध रखी है
    हमें खुद नहीं पता चल रहा है कि
    हम आने वाले दिनों को कांटेगे कैसे
    क्योकि जिंदगी जीने के लिए ,
    हर पल संवारने के लिए
    हंसते-मुस्कुराते दोस्त की भी जरूरत होती है ।
    कभी तक़रार,कभी गुस्सा, तो कभी हंसी-ठिठोली
    हर पल झांझर की तरह होते है
    जिसकी झंकार कभी कानों में मधुर रस घोलती है,तो कभी
    परेशान करती है ,तो कभी चेहरे पर मुस्कान लाती है
    आज ऐसा लग रहा है कहीं हम मुस्कुराना ना भूल जाएँ
    क्योकि कहीं बार दोस्त ही परिवार बन जाता है ।
    हम समझते भी है इस बात को
    सबके अपने-अपने सपने होते है
    कोई सपनों को पूरा करने के लिए दूर जाता है तो
    कोई मजबूरी उसे सबसे दूर ले जाती है
    वरना किसे अच्छा लगता है कि कोई किसी से दूर जाएँ ।
    ©creative_chanchal

  • creative_chanchal 111w

    "संजीदगी"

    हमारा दिल भी कही बार आँसूओ से भरा होता है
    हम भी खुलकर रोना चाहते है
    खुलकर अपने जज़्बातो को बयां करना चाहते है
    अपने दर्द के बोझ को हलका करना चाहते है
    पर वक़्त और हमारे सहचर इसकी भी इजाज़त नहीं देंते !
    हम भी लड़ रहे है
    कभी खुद से तो कभी वक़्त से
    कभी जज़्बातो से तो कभी ख्वाहिश-ए-सवालो से
    जिसको पाना कुछ ओर है
    और कर कुछ ओर रहे है !
    सपने बहुत बड़े है पर
    उस राह पर अभी चलना भी शुरू नहीं किया है
    बस काम करते जा रहे है और फिक्र लिए घूम रहे है !
    जिस सफ़र के मुसाफिर बनकर निकले थे घर से
    उस सफ़र में अनेक सहचर मिले है
    सहचर है जब तक, तब तक रास्ते एक है
    नजदीक आ रही है वो घडियां भी
    जब सबकी नाँव बदलने वाली है
    सबके रास्ते बदलने वाले है
    कल शायद फासले इतने हो कि
    हम में से कोई किसी से, मिल भी ना पाएँ !
    खुश नसीब है वो राही इस सफ़र के
    जिन्हें मुस्कुराने वाले, अपना दर्द बाँटने वाले,
    गलतियों पर सही राह दिखाने वाले, साथी-संगी मिले है !
    हम यह नहीं कर रहे है कि
    हमने इस सफ़र में कुछ पाया नहीं है
    पर हमने खोया भी बहुत है , जिसकी कोई गिनती नहीं है !
    मुश्किल दौर भी रहा है, सफ़र हसीन भी रहा है
    गमों को साथ लिए मुस्कुराना भी सीखा है
    धीरे-धीरे उम्मीदों का दामन भी छोड़ा है
    शीशे की तरह इस दिल को भी तोड़ा है
    पर अब नहीं चाहते है कि
    हम खुद ही अपना दिल तोड़े ,खुद को चोट पहुँचाए
    बहुत सह लिया है , बहुत चुप रह लिया है
    अब हमारी बारी है परचम लहराने की,
    खुद का नाम रोशन करने की !
    वक़्त भले ही कम है पर सिखना अभी भी बहुत बाक़ी है
    जी जान लगानी है
    मेहनत खुद ही को करनी है
    कोई कसर नहीं छोड़नी है
    बस अब कमर कस लेनी है
    ताकि बीते कल पर अफसोस की रेखाएं नहीं
    माथे पर गर्व की रेखाएं और चेहरे पर
    खुशी की चमक-दमक हो !
    ©creative_chanchal