#gazal

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  • archanatiwari 1d

    ग़ज़ल~:६

    वज़्न:- २१२ २१२ २१२ २१२

    ऐ खुदा मैं तुम्हें खोजता रह गया,
    तेरी चौखट को मैं चूमता रहा गया।१।

    हाल से मेरे तू बे-खबर क्यों रहा,
    मैं यही आज-तक सोचता रह गया।२।

    पांव के छाले भी दर्द से टीसते,
    फिर भी मैं तेरा दर ढूंढता रह गया।३।

    आसरा दे मुझे आस है तेरी ही,
    मैं दुआ बस यही मांगता रह गया।४।

    मैं लुटा जो सरे-आम तू भी वहीं,
    अश्क़िया बन फ़क़त देखता रह गया।५।

    बुत बने लोग सारे ही तनुजा यहां,
    रात भर सोच ये जागता रह गया।६।

    ©archanatiwari

  • rohaushik 4d

    मेरे लहजे में बोलता है मगर,
    बात मुझसी करे तो बात बने।

    - रोहन कौशिक

  • archanatiwari 5d

    #ग़ज़ल #gazal #mythoughts 14post
    1४/01/2022

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    ग़ज़ल~: ५

    वज़्न :- १२१२ ११२२ १२१२ २२/११२

    धुन:- खिजां के फूल पे आती कभी बहार नहीं

    तेरी निगाहों का है कौन जो तलबगार नहीं,
    रहा किसी का भी अब दिल पे इख़्तियार नहीं।१।

    करीब तुम जो आ जाओ बहार आ जाये,
    यहां फ़िजा भी है बिन तेरे खुशगवार नहीं।२।

    गिला करु भी तो कैसे कशिश ही है ऐसी,
    निसार उनपे हुए वो गुनाहगार नहीं।३।

    तमाम उम्र गुज़ारी है हमने तन्हा ही,
    बहुत किया है के अब होता इंतज़ार नहीं।४।

    न बिजलियां गिरा बे-मौत मारे जायेंगे,
    फ़ना हुए हैं कई इक़ हमीं शिकार नहीं।५

    सज़ा मिले या मिले इश़्क से रिहाई ही,
    यकीन कीजिए बिन तेरे है करार नहीं।६।

    गुबार ही भरा तनुजा ज़ुबां ही बस मीठी,
    जो खुद-निगार हैं उनपे है ऐतबार नहीं।७।

    ©archanatiwari
    अर्चना तिवारी तनुजा ✍️✍️

  • archanatiwari 1w

    ग़ज़ल~:४

    वज़्न-: १२२ १२२ १२२ १२२

    न जाना कभी दूर अपना बना के,
    रखेंगे सदा धड़कनों में बसा के।१।

    खुमारी हमें चैन लेने न देती,
    ज़रा चैन पा लेते हैं दिल जला के।२।

    बहुत अश़्क हमने बहाया सनम कल,
    सुकूं खो गया तुझसे ये दिल लगा के।३।

    क़फ़स का परिंदा मचलता है गोया,
    फ़लक ढूंढता है वो नज़रें गड़ा के।४

    लरज़ते लबों से तिरा नाम लूं मैं,
    गले से लगा ले मिरे पास आ के।५।

    अज़ीयत भरा इश़्क का ये सफ़र है,
    शिफ़ा चाहता है तिरे पास जा के।६।

    खियंबा महक जाए इस ज़ीस्त का भी,
    ये तनुजा यही मांगती सर झुका के।७।

    ©archanatiwari
    अर्चना तिवारी तनुजा ✍️✍️

  • archanatiwari 1w

    ग़ज़ल~:३

    वज़्न-: १२२२ १२२२ १२२२ १२२२

    खड़े हैं राह में तेरी झलक तुम कब दिखाओगे,
    बड़ा बेताब है ये दिल हमें कब तक सताओगे।१।

    तलब दीदार की हमदम कभी तो सामने आओ,
    तो चाहे जान भी ले लो यूं कब तक आजमाओगे।२।

    मिले फ़ुर्सत कभी बे-कस ख़यालो में ही मिल जाओ,
    मुक़म्मल हो दुआ मेरी कहो कब मिलने आओगे।३।

    तकल्लुफ़ से न यूं देखो मुसर्रत से न मर जायें,
    गये जो दूर तो तुम भी सदा आंसू बहाओगे।४।

    मुहब्बत की सज़ा क्या है? बता तेरी रज़ा क्या है?
    बताओ और कब तक तुम यूं हमें ज़ुल्म ढ़ाओगे?५।

    बहुत हैं ग़म जमाने में मुहब्बत के सिवा देखो,
    कहो क्या ग़ैर का ग़म भी कभी तुम बांट पाएंगे।६

    फ़क़त बातें बनाते हो नहीं है ये कलमकारी,
    अज़म"तनुजा"रविश का रख तभी सबको लुभाओगे।७।

    ©archanatiwari
    अर्चना तिवारी तनुजा ✍️

  • archanatiwari 1w

    #ग़ज़ल #gazal #mythoughts @hindiwriters
    @rekhta_ @hindinama 11thpost
    09/01/2022

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    ग़ज़ल~: २

    वज़्न-: २१२ २१२ २१२ २१२

    है भरम तेरा के वो सुधर जाएंगे,
    धमकियों से तिरी क्या वो डर जाएंगे।१।

    लड़खड़ाते कदम संभलेंगे कभी,
    छोड़ मैंखाना अपने ही घर जाएंगे।२।

    क्या भरोसा है उनकी किसी बात का,
    हां वो तो बे-अदब हैं मुकर जाएंगे।३।

    डर है इज़्हार कैसे करु तू बता,
    दिल के जज़्बात भी बे-असर जाएंगे।४।

    कब कहां सिर झुकाना हुनर सीख लो,
    इल़्म ये भी बड़े काम कर जायेंगे।५।

    हम ठिकाना तलाशें भला किस गली,
    सोचते हैं कि कल दोपहर जाएंगे।६।

    साल तनुजा नया आ गया है बता,
    अब पुराने हसीं दिन किधर जाएंगे।७।

    ©archanatiwari

  • archanatiwari 2w

    ग़ज़ल~:१

    वज़न:- २१२ २१२ २१२ २१२

    छोड़ के दर तिरा हम किधर जाएंगे,
    कर करम की नज़र वरना मर जाएंगे।१।

    संगदिल ये जहां वाले काफ़िर हुए,
    नेक दिल का हुनर छोड़ कर जाएंगे।२।

    इन परिंदों से उल्फ़त ज़रा सीखिये,
    छोड़ मासूमियत का असर जाएंगे।३।

    लोग इंसानियत भूल बैठे जहां,
    देखकर ये नज़ारा सिहर जाएंगे।४।

    साथ तेरे ये दौलत न जा पाएगी,
    अंत में सब यहीं छोड़ कर जाएंगे।५।

    दूर जा के न जाना कभी दूर तुम,
    बिन तिरे टूट के हम बिख़र जाएंगे।६।

    ज़िन्दगी के सफ़र में मसाफ़त बड़ी,
    इक़ न इक़ रोज़ हम भी उबर जाएंगे।७।

    अश़्क पी-पी यहां हम जिये जा रहे,
    यूं ही तनुजा बचे दिन गुज़र जाएंगे।८।

    ©archanatiwari

  • likhitvaat 3w

    आयुष्य

    धावपळीत या जगाच्या राहिल्या गोष्टी अजुनही समजायच्या...
    आणि
    डोळ्यांच्या पापण्या विस्फारलेल्याच राहिल्या....
    - लिखित वाट
    ©likhitvaat

  • likhitvaat 4w

    ❤️

    शब्दों में बयान हो जाए वह प्यार कैसा?
    हमारे प्यार के आगे लगे आसमान भी छोटा!

    बयान हो प्यार तो आंखों से काम लो
    इश्क है यह यारों, लगे गुड़ से भी मीठा।
    - लिखित वाट
    ©likhitvaat

  • likhitvaat 5w

    मोड़

    बदलते मोड़ रिश्तो की
    हमें समझ ना आए।
    मुस्कुराते रहे हम,
    आंखों में जब भी आंसू उभर आए।
    - लिखित वाट
    ©likhitvaat

  • saif5alam 6w

    मेरे महबूब को ना अदा आती है ना नज़ाकत आती है
    है मुझे शौक इल्म का और उसको उर्दू आती है
    ©saif5alam

  • likhitvaat 6w

    Be yourself

    If you are trying to be in everyone's "good books", trust me they will label you as taken for granted in their books.
    - Likhit Vaat
    ©likhitvaat

  • likhitvaat 6w

    नशा

    अगर हमारी नज़रों से छलके तो वह यार का नशा हो।
    जरुरत ही नहीं बातों की, जब हर तरफ प्यार ही प्यार हो।
    - लिखित वाट
    ©likhitvaat

  • pouredonpaper 7w

    याद किया फिर उसको, हाँ! इतना याद किया।
    की याद आती हो, उसको बताना भूल गया।

    यूँ तो ख़ालीपन को, भरने ने भी न फ़ुर्सत दी।
    पर जब भी ख्याल आया उसका,
    मै था कितना मशगूल जताना भूल गया।
    ©pouredonpaper

  • kesari_vahini 8w

    ना जाने क्यों

    ना जाने क्यों ये दर्द पिघलता नहीं,
    धड़कता है सीने मे आँखों से टपकता नहीं।

    परेशानी, निराशा, बेबसी ही बची है यहाँ,
    कोई दर्द अब दो दिन टिकता भी नहीं।

    परिंदे छिप जाते है दरख्तों के साए में,
    कमबख्त ये भूख छाँव मे छुपता भी नहीं!

    आसमाँ भी नाप ले हम तो क्या हो दिवस ?
    लौट आने को आधा ग़ज़ ज़मी भी नहीं।

    अबके सावन ना जाने ये उदासी कैसी है,
    बिन छतरी खड़ा हूँ और जौ भर भींगा भी नहीं।

    मैं कहता हूँ आज नहीं तो कल चाला ही जाऊँगा।
    कमबख्त ये कल, कल भी तो आया नहीं।

    सुना है अब तो मौत भी नसीब वालों को मयस्सर है
    मेरे हाथों में मृत्यु रेखा भी नहीं!

    -दिवस केसरी 'नारायण'
    ©kesari_vahini

  • rohaushik 9w

    कितनी टूटी हुई है, किसको पता?
    एक मूरत जो सजी रहती है।

    ©rohaushik

  • ajayamitabh7 10w

    #Poetry #Gazal #Alexander #Aurangzeb
    हुकुमत की जंग में रिश्ते, नाते , सच्चाई, जुबाँ की कीमत कुछ भी नहीं होती । सिर्फ गद्दी हीं महत्त्वपूर्ण है। सिर्फ ताकत हीं काबिले गौर होती है। बादशाहत बहुत बड़ी कीमत की मांग करती है। जो अपने रिश्तों को कुर्बान करना जानता है , वो ही पूरी दुनिया पे हुकूमत कर पाता है । औरंगजेब, सिकन्दर, अशोक इत्यादि इसके अनेक उदाहरणों में से एक है । ये महज इत्तिफाक नहीं है कि पूरी दुनिया का मालिक अक्सर अकेला हीं होता है।

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    वक्त का मारा हुआ

    वेवक्त बेसहारा हुआ ना सिंहासन का उतारा हुआ,
    बड़ी मुश्किल से है उठता  विश्वास  का हारा हुआ।

    तुम  दुश्मनों   की   फौज  पे  अड़े रहे थे  ठीक हीं,
    घर  भी तो  देख लेते  क्या क्या था बिगाड़ा  हुआ।

    थी  रोशनी  से  ईश्क  तो जुगनू  से  रखते  वास्ता,
    कोई अपना भी तेरा क्या जो दूर का सितारा हुआ।

    नजरें  मिलानी   खुद  से आसां   नहीं  थी  वाइज,
    हँसे  भी  कोई   कैसे  फटकार  का लताड़ा  हुआ?

    ये  ओहदा  ये  शोहरतें  कुछ  काम  भी  ना  आई ,
    नसीब  का  था मालिक  नजरों  का  उतारा हुआ।

    थे  कुर्बान   रिश्ते   नाते    हुकूमतों   की  जंग में,
    बादशाह क्या था आखिर तख्त का बेचारा हुआ।

    जिक्र-ए-आसमाँ है  ठीक पर इसकी भी फिक्र रहे,
    टिकता  नहीं  है  कोई  धरती  का  उखाड़ा  हुआ।

    जश्न  भी  मनाए  कैसे  आखिर वो किस बात का,
    था सिकन्दर-ए-आजम भी वक्त का दुत्कारा हुआ।

    अजय अमिताभ सुमन

  • pratibhajadhav 13w

    वक्त के पीछे दौड़ते दौड़ते,
    हर लमहे को खुल के जीना ; हम अक्सर भूल जाते है!

    उलझे रहते है बस लफ्जों के तानों बानों में,
    पर खामोशी को समझ लेना ; हम अक्सर भूल जाते है!

    हर किसी की खामियाँ गिनवाते - गिनवाते,
    खुद को ही आईना दिखाना; हम अक्सर भूल जाते है!

    नफरत के अँधेरो में ही खोये-खोये रहते है,
    पर मुहब्बत के दिये जलाना; हम अक्सर भूल जाते है!

    मुखौटा पहन कर झुठी मुस्कानों का,
    सच में खुल कर हँसना ; हम अक्सर भूल जाते है!
    - प्रतिभा .

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    उलझे रहते है बस लफ्जों के तानों - बानों में,
    पर खामोशी को समझ लेना; हम अक्सर भूल जाते है!
    ©pratibhajadhav

  • brijesh_banarsi 21w

    आसूं

    मेरा हर एक आसूं तेरे नाम का जो गिरा,
    उसकी नमी में सारी शर्दी ठिठुरता रहा।
    ©brijesh_banarsi

  • pratibhajadhav 22w

    मेरे कान्हा!

    तु जब भी बन्सी बजाता है, मैं दौडी चली आती हूँ!
    इक तेरा चेहरा देखते ही; सब के चेहरे भूल जाती हूँ!!
    ©pratibhajadhav