#hindinazm

31 posts
  • nikhilkhandare 33w

    **नई दुनियाॅं**

    तुम बन जाओ चांद समंदर का,
    मैं बन जाऊं नाव आसमान की,
    तुम बन जाना महबूबा मछलियों की,
    मैं सितारों को सैर कराऊंगा आसमान की।

    तुम बन जाओ चकाचौंध गांव की,
    मैं बन जाऊ बूढ़ी नानी शहर की,
    तुम गांव की हर बस्ती में शहर वाली रोशनी भर देना,
    मैं थकी आबादी को पारियों की कहानियां सुना दूंगा।

    तुम बन जाओ ताजगी पत्थरों की,
    मैं बन जाऊं कठोरता फूलों की,
    तुम पत्थरों को बता देना दर्द मुरझाने का,
    मैं फूलों को दिखा दूंगा गर्व मूरत बनने का।

    तुम बन जाओ चंचलता मौत की,
    मैं बन जाऊं सुना कफन जिंदगी का,
    तुम मौत को सुनाना जोख़िम जीवन जीने का,
    मैं ज़िंदगी को यथार्थ समझाऊंगा स्वर्ग का।
    ©nik_heal_khandare

  • nikhilkhandare 34w

    **जीवित कमरा और खुमारी में तुम!**
    सिने में कुछ अरमान हो बचे कोई तो बताना,
    वरना हवा का लेनदेन तो मेरे कमरे की खिड़की भी करती है।

    सुनी बातों पर विचार करने की चेतना बची हो थोड़ी तो बताना,
    वरना बस सुनने का काम तो मेरे कमरे की दीवारें भी बखूबी करती है।

    दिल में बसी यादों को मिटाने का प्रयास भी कर रहे हो तो बताना,
    वरना चीजे संभाल कर रखने में मेरे कमरे में रखा टेबल भी माहिर है।

    खुली आंखों से कुछ देख भी पा रहे हो तो बताना,
    वरना ये जलने-बुझने का खेल तो मेरे कमरे की बत्ती भी खेलती है।

    गर रोना आए कभी तब आंख से आंसू बह जाए तो बताना,
    वरना मेरे कमरे में मटका भी अक्सर बाहर से नम ही रहता है।

    अगर चलती धड़कन महसूस कर भी लेते हो तो बताना,
    वरना बेवजह टीक-टिक तो मेरे कमरे में टंगी घड़ी दिनभर करती है।

    खामोशी में भी खुद से बातें कर भी लेते हो तो बताना,
    वरना मेरे कमरे का अंधेरा कोना भी सदियों से खामोश रहता है।

    बस छोटीसी चीज है जो तुम्हे मेरे कमरे से बहुत अलग बनाती है,
    मेरे कमरे में सिर्फ एक खिड़की है और तुम्हारी सोच को तो कोई दीवार ही नहीं।
    ©nik_heal_khandare

  • boywithmagic 78w

    ना तो किसी तोहफ़े की तमन्ना रखती है

    और ना ही उसे
    वादें-वफ़ा की बातें चाहिए

    उसे तो बस
    मोहब्बत की गहराई में
    इतना डूब जाना है

    कि इस ज़माने के रिवाज
    उस तक पहुँचने से पहले ही
    दम तोड़ दे।

    ©boywithmagic

  • idiotic_writer 103w

    Waqt tu toh dosti nibha
    Yuh bich raah mein saath naah chod jaa

    #mirakee #hindinazm #poetry #waqt #feelings

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    Waqt

    Waqt toh guzar raha tha
    Mein bhi kaha chal raha tha
    Log bhi badal gaye the
    Jab mere aakhon se ashq gir rhe the

    Aaj zinda hoon
    Tabhi kimat nahin
    Soo jaun agar mauy ki chadar odhe
    Tabhi badhegi ehmiyat sahi

    Na mein theher ta hun
    Na tu rukne de kabhi
    Saath tere chalta hun
    Haat chhod ke jana na kabhi

    Waqt tu toh dosti nibha
    Saat le chal mujhe acha insaan bana ke
    Meri mehnat ki keemat
    Logon ko bata de aise

    Lekin ae waqt tu bhi toh guzar jayega
    Jo Kabhi mein theher gaya toh
    Zamana agey nikal jayega

    Log fir badal jayenge
    Jab aakhon mein mere aasu aur
    Chehte pe ek jhuti hasi sajega

    ©idiot_with_words

  • amir_dastageer 131w

    Awara Tahzeeb

    Tujhe barisho me dekh kar
    Dharkane be-tarteeb hone lagti hain
    Awara meri tahzeeb hone lagti hain

    Tujhe apne khwabo me dekh kar
    Khwabo ki jaise tabeer hone lagti hai
    Tujhko paane ki fir tadbeer hone lagti hai

    Tujhe mere ghar se nikalta dekh kar
    Pagal ghar ki dahleez hone lagti hain
    Dar-o-diwar badtameez hone lagti hain

    ©aamir_dastageer

  • the_untoldalfaz 145w

    हसरतों को जीने मे एक उम्र बीत जाती है
    आखरी नसीब मे दो ग़ज़ ज़मीन ही आती है

    -अभिषेक✒️
    ©the_untoldalfaz

  • ronnie147 153w

    Manto

    अगर आप इन अफसानों को बर्दाश्त नहीं कर सकते तो ये जमाना नाकाबिले-बर्दाश्त है

  • rahulajeeb 165w

    मैं?

    क्यों अब कुछ लिख नहीं पा रहा हूं मैं,
    शायद उस दर्द में फिर डूब नहीं पा रहा हूं मैं,
    कुछ भूल हो गई कुछ किस्सों को भुलाने की,
    अब यूं हुआ कि जिंदगी जी नहीं पा रहा हूं मैं ।।
    ©rahulajeeb

  • raman_writes 166w

    इरादा

    ना जाने कल रात वो सपनों में क्या इरादा ले कर आए ।

    हाल पूछा उसी अंदाज से और घायल कर के चले गए ।।


    Naa Jane Kal Raat Vo Sapno Mein Kya Irada Le Kar Aaye

    Haal Pucha Usi Andaz Se Aur Ghayal Kar Ke Chale Gaye


    ©raman_writes

  • the_silent__quill 166w

    एक खलिश सी यूंँ दिल में बाकी रही है,
    जिन्दगी अपनी कुछ इस हद तक सादी रही है।
    पूरी होते होते भी आखिर में आधी रही हैं,
    ख्वाहिशें शायद अपनी बहुत ज्यादी रही हैं।




    ©the_silent__quill

  • raman_writes 166w

    खामखाँ

    किस्से बहुत से सुने है मैंने मोहब्बत के ।

    कितने ही दिल खामखाँ टूटे है ।।


    Kisse Bhuth Se Sune Hai Maine Mohbbat Ke

    Kitne Hi Dil Khamakhaa Tute Hai


    ©raman_writes

  • writerrai 191w

    एक अर्से से खुद को समेटे हुए हूं ।।
    वक़्त आए तो खुद को नीलाम कर दूं ।।

    सारे शहर को ये इत्तेला कर दू ,
    मोहब्बत का किस्सा इश्तहार कर दू ।।



    @लेखकRai

  • writerrai 192w

    बेगाना जो कहता रहा है मुलाजिम ,
    फिर मालिक ने अपना भला कब कहा है ।।


    @लेखकRai
    ©writerrai

  • laatsaabthewriter 195w

    चाय और तुम

    रंग तुम्हारा ऐसा
    दूध में पत्ती सा
    बातें कड़क और चटपटी सी
    एक दम हूबहू अदरक सी
    आंखें मीठी मीठी
    एक दम मिश्री
    याद दिला दे मुझको
    यादें भूली बिसरी
    और वो तेरा गुस्सा
    जैसे उबाल आया हो
    पीछे हटना पड़ता है
    गैस कम करनी पड़ती है
    तुम ज़रा सी भी कम या दूर न हो जाओ
    हाँ डर लगता है
    रखवाली करनी पड़ती है
    तुम ज़रा सी देर में कहीं बदल ही ना जाओ
    मेरी मेहनत बेकार जाए
    वो जायका भी न आये
    और फिर से बनानी पड़ जाए
    एक नई चाय
    पर मैं ख्याल रखता हूँ
    चाय अपनी जगह है
    तुम अपनी जगह हो
    ये तो मेरे हाथ में है
    पर पता नही तुम कहाँ हो

    ©laatsaabthewriter

  • yugmint 199w

    बाग़बानी

    बहुत मन की बोऊ फिर स्वप्न,
    नीशा के सौंधे जिस्म पर।
    कई सेकड़ो यादें ऊगाऊ
    नींद मे टटोलू लम्हे
    पिछले ख़ुश्क पौधें जड़ सहित छील
    नम आँखों से जज़्बात सिंचलु।
    बहुत मन की फिर बोऊ स्वप्न,
    खाली रात कुछ बाग़बानी हो
    कुछ उसकी कुछ अपनी यादें अंकुरित हो,
    पुचकार-पुचकार यादें सहजु
    वो मेरी यादें सींचें में उसके लम्हे संभालू।
    बहुत मन की बोऊ स्वप्न,
    नए नम पोधो की पल्लवित स्पर्श से
    फ़िर निशा सुगन्धित हो उठे।
    ©yugmint

  • iamnitishthakur 209w

    अब उद्देश्य है मेरा,देखूं तुझे तो नज़रों को बदल के ।
    कोशिश है मेरी,देखु ही ना, या देखूँ तो
    लबलबाते सागर को ,उसके मोती की सौंदर्य से बचके ।
    तुझे,ज़रा नज़रअंदाज़ से करके ।

    आप,जैसी भाव में भर के ।


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    नया उद्देश्य ।

    अब मोहब्बत को कुचल के,
    राहों से बिछड़ के ..
    उद्देश्य है मेरा मिलूं तुम्हें अगली बार,
    इस ठोकर से सम्भल के ।
    ©iamnitishthakur

  • kaustav_singh 214w

    ऐ ज़िन्दगी

    ऐ ज़िन्दगी तू यह बता,
    क्यों खफा तू मुझसे है,
    हुई क्या है वजह ,
    क्यों रास्ते अब अलग से है।

    मिल गया वो खाक में,
    जिस शख्स को तूने थामा था,
    जल गया उस आग में,
    जिसमे वो खुद से भागा था,
    अब आईना है सामने,
    अब सामने हर चीज़ है,
    हर चीज़ अब समझली है
    ऐ ज़िन्दगी तू यह बता,
    क्यों खफा तू मुझसे है।

    मेरा अतीत है चीखता,
    पास आजा मेरे दौड़के,
    पर वादा ना है तोड़ना,
    ना देखना है पीछे मुड़के,

    कुछ खो दिया है ऐसा जो पाना है मुश्किल अब हमें,
    पर कोशिशें ना छोड़ेंगे,
    जान, आजाये गलतियां भूल के,

    तू साथ मेरे अब तो चल,
    राब्ता अब सिर्फ तुझसे है,
    ऐ ज़िन्दगी तू यह बता,
    हुई खता क्या मुझसे है।
    - कौस्तव सिंह
    ©kaashi_writes

  • sarfaraz_multani 215w

    रह गए

    इनकार और इकरार की पहेली समझाने में रह गए,
    ज़रूरी काम और थे बहुत जो अनजाने में रह गए!
    - "राज़" मुलतानी
    ©sarfaraz_multani

  • sarfaraz_multani 215w

    ना कोई

    इन लाखों की बस्ती में पहचाने ना कोई,
    इन लाखों में ऐसे तो अनजाने ना कोई,

    इक सिर्फ हम ही जलके तुमको दिखाते,
    हम जैसे तो दुनिया में परवाने ना कोई,

    हर शहर में हमने तो उसे ढूंढ के देखा,
    इस आंखों के जैसे तो मयखाने ना कोई,

    एक तुम ही नहीं जानते इस दिल को मेरे,
    इस शहर में हम जैसे दिवाने ना कोई,

    युं नग़्मा ए मस्ती तो होते हैं हज़ारों,
    जो लिखें मैंने ऐसे अफ़साने ना कोई।
    - "राज़" मुलतानी
    ©sarfaraz_multani

  • sarfaraz_multani 215w

    बैठी है


    जब से देखा है तुमको सांस भी जमी सी बैठी है,
    देख के तेरा हुस्न-ओ-जमाल नब्ज़ थमी सी बैठी है,

    अपने रुख से पर्दा ज़रा धीरे से हटाना ज़ालिमा,
    तेरे इंतज़ार में रात आशिकों की सहमी सी बैठी है,

    बेपरवाह नजरों से इशारे ना तुम किया करो,
    भरी महफिल में दिलों में गलतफ़हमी सी बैठी है,

    नजरें झुकाना, शर्माना फिर धीरे से मुस्कुराना,
    लगता है मिज़ाज-ए-हुस्न मेंं बेरहमी सी बैठी है,

    तेरी बेबाक निग़ाहों का ये कैसा असर हो गया,
    तेरे आशिकों में ही अब तल्ख़-तरमी सी बैठी है!
    -"राज़" मुलतानी
    ❤️❤️❤️
    तल्ख़ तरमी : bitter term
    ©sarfaraz_multani