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2602 posts
  • kumar_manoj 3w

    सबके अपने किस्से, सबकी अपनी कहानियां हैं,
    कुछ मज़ेदार हैं, तो कुछ उनमे से परेशानियाँ हैं ।
    ©kumar_manoj

  • purnimaindra 9w

    दो जोड़ी हाथ
    ************

    जेल की सीखचों के पीछे
    अपराधिनी सी खड़ी
    सलाखों पर
    अपने एक जोड़ी हाथों से
    टटोलती रही
    "अपने एक जोड़ी हाथों को"
    जिनकी मुट्ठी में शायद--
    मेरे अपने ही सपने
    अपना सारा आकाश
    मेरी अपनी ही आकांक्षाएं
    मेरी अपनी पूरी जीवन लीला बंद थी।
    ठीक एक दुनियां में आए
    नवागन्तुक शिशु की तरह
    जो भाग्य बंद किए थी
    मुट्ठी में।
    और टटोल-टटोल कर
    उन रेखाओं में अपना जीवन-दर्शन
    खोज रही थी।
    और मैं भी--
    सलाखों के उस पार के
    एक जोड़ी हाथों को
    जो पृथक संवेदना के थे,
    टटोलती रही,रोती रही,
    अपनी व्यथा सुनाती रही।
    जल्दी पास बुलाने की
    मिन्नतें करती रही।
    लेकिन साथ ही
    सलाखें थे कि
    दो जोड़ी हाथों के बीच
    दीवार बन कर खड़े हो गये थे।
    जो मुझे और उसे
    आपस में देखने तो देती थीं,
    पर आलिंगन में बंधने को
    तीखी नज़र से देखती थीं
    शायद इसकी ईर्ष्या ही थी यह
    या फिर शायद-
    ये सींखचे भी सौतेलेपन का
    रूप प्रस्तुत करते रहे।
    मैं उसकी उंगलियों में
    वह मेरी उंगलियों में
    उंगलियां फंसाए--
    आलिंगनबद्ध होने को आतुर
    सारा दुखड़ा,बीती यादें,आने वाले पल
    सारा प्रेम,सारा आह्लाद, विषाद
    एक साथ परस्पर
    बिखेरने को आतुर
    एक दूसरे को निरीह सा ताकते रहे,
    आंसुओं की ज़ुबान से सब कुछ कहते रहे।
    और बार- बार इसी तरह
    मेरे व उसके दो जोड़ी हाथ
    सलाखों के आर-पार
    मिलते रहे।
    अनकही बातें कहते रहे।
    अपनी इच्छाओं को
    इन्हीं दो जोड़ी हाथों से कुचलते रहे।
    और चार वर्षों की
    अवधि खत्म होने की
    प्रतीक्षा करते रहे।
    ©️®️ purnima Indra



    ©purnimaindra

  • vickyvivek 11w

    कह ना पाए जो जुबां किसी से,
    आंखे बयां करती है
    मन की खुशी, मन का दर्द
    टूटा कोई हिस्सा, याद आया कोई किस्सा
    हुबहू ध्यान करती है,
    दर्द जो मिले किश्तों में, एक मुश्त हिसाब रखती हैं
    गैरों से ज्यादा,अपनी करनी का ध्यान रखती हैं
    दिख ना पाए आसानी से किसी को
    इस बात का ध्यान रखती है,
    कहे ना जुबां जो किसी से
    आंखे बयां करती है
    ©vickyvivek

  • vickyvivek 11w

    तेरी मेरी कहानी में फर्क सिर्फ इतना है,
    तुझे मिल जाएंगे हजारों मेरे जैसे,
    मुझे हजारों में सिर्फ तू मिली थी...
    ©vickyvivek

  • vickyvivek 11w

    कोरे कागज पर कुछ लिख रहा हूं,
    तुम्हे याद कर अब फिर से लिख रहा हूं,
    लिख रहा हूं जो ना कहा किसी से,
    कहना भी चाहा तो ना सुना किसी ने,
    अपने छुपे जज्बातों को अल्फाजों में बदल रहा हूं,
    सुखी पत्तियां वो गुलाब की अब कूड़ेदान में फेंक रहा हूं
    पुराने समान से भरी अलमारी साफ कर रहा हूं
    जाले जो जम चुके है अरसों से,
    उन्हे हटा कर कुछ नया रखने का सोच रहा हूं
    कोरे कागज पर कुछ लिख रहा हूं
    अपनी अनकही अनसुनी बात
    खुद से बयां कर रहा हूं...
    ©vickyvivek

  • vickyvivek 12w

    तेरा उसे मिलना उसका नसीब था,
    तुझे पाने वाला वो रकीब था,
    मेने पूछा खुदा से, क्या मुझमें कमी थी
    या उसका कुसूर थोड़ा था,
    खुदा ने कहा खुद पर रहम कर बंदे,
    ना तेरी वफ़ा कम थी ना उसका कुसूर थोड़ा था
    मेने इस कहानी को अधूरा ही छोड़ा था..
    ©vickyvivek

  • alfaazzmere 12w

    तेरे लिए तो हुमेसा दुआ ही निकलेगी । Amen.
    #hindipoet #hindiwriter #hindipoem #alfaazzmere

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    पता है आज मैं मौत को छूँ के आया
    वही गली उसी खिड़की को रूबरू कर आया
    वही यादें वही बातें एक बार फ़िर जी आया
    ख़ुदा से तेरी सलामती की दुआ भी कर आया
    मगर मुझ बेख़बर को ये इल्म ही नहीं रहा
    की मैं अपनी ही क़ब्र खोद आया ।।
    ©alfaazzmere

  • vickyvivek 12w

    शाम है ढल चुकी, दिन भी जा चुका
    दीए की लौ भी कह रही
    सजन तुम कब आओगे???
    ना काटे जाए ये तन्हाई,
    मन को छलनी करती ये पुरवाई
    मस्ती में अपनी बादल मचले,
    पंछी भी अपने घर को निकले,
    मिलने को ये नैना तरसे,विरह की ये बेला ना टले
    मन को कैसे बार बार बदले
    बार बार राहों को तके
    रह रह कर सवाल ये निकले,
    सजन तुम कब आओगे??
    ©vickyvivek

  • vickyvivek 12w

    पूछती है रात,
    उदास क्यूं है,
    तेरी आंखों में ये नमी क्यूं है,
    सिरहाने पे रखा तकिया भीगा क्यूं है
    तक रहा है तु राह को,
    जिन्हें जाने दिया,उनकेआने का तुझे इंतजार क्यूं है...
    तू खुद है अपनी राह का मालिक,
    फिर पता बताने वाले का तुझे इंतजार क्यूं है
    ना हो पाएगा तुझसे, मन में तेरे ये खयाल क्यूं है
    पूछती है रात, जो हाथ में नही तेरे,
    उस बात का तुझे मलाल क्यूं है...
    कोशिश कर होगा कामयाब तू,
    इस बात पे सवाल क्यूं है....
    ©vickyvivek

  • vickyvivek 12w

    नजरों से उनका शरमाना कुछ यू भा गया,
    जैसे रेगिस्तान पे कोई बादल छा गया
    कहने लगी जब वो अपना हाल
    लहराते अपना वो रेशम का रुमाल
    लगा ऐसे जैसे पतझड़ में बसंत छा गया..
    कहने को जुबान से कुछ ना बना
    जैसे शब्दों का अकाल आ गया..
    इक पल ही सही,पर दिल को करार आ गया...
    ना कुछ पाने की चाह ना कुछ खोने का डर
    बावरे मन को ना जाने क्या खयाल हुआ
    बारिश में जैसे चातक पक्षी,
    कुछ ऐसा ही हाल हुआ..
    ©vickyvivek

  • vickyvivek 13w

    जब मुझे प्यार का एहसास हुआ,
    दिल में मीठा सा दर्द 100 बार हुआ..
    हसने, गाने , नाचने का मन बार बार हुआ।
    उड़ने लगा मन अरमानों कि वादियों में,
    जैसे नाचता हो मोर बारिश की बूंदों में...
    जब मुझे प्यार का एहसास हुआ,
    कोई इस दिल के एक कोने के लिए बड़ा खास हुआ..
    मदहोश रहने लगे उन के खयालों में, भूख प्यास नींद किसी का ना आभास हुआ
    जब मुझे पहली बार प्यार हुआ..
    ©vickyvivek

  • vickyvivek 13w

    थोड़ा खुश हो जाता हूं, थोड़ा उदास हो जाता हूं
    कभी मस्ती में डूब जाता हूं,
    थोड़ी देर पढ़ के तुम्हारे पुराने खत
    फिर से बावरा हो जाता हूं...
    वो कहते है की सब खत्म हुआ दरम्या हमारे,
    फिर क्यों जिक्र आते ही उनका
    मैं दिल से जिंदा हो जाता हूं...
    जिन्दगी की हर मुश्किल को आसान पा जाता हूं
    हर चिढ़चिढ़ाहट को हवा कर जाता हूं
    तुम्हारे संग कही बातें जो याद कर आता हूं...
    तुझसे दूर हो कर भी मैं तुझमें खो जाता हूं...
    ©vickyvivek

  • vickyvivek 13w

    कहते हैं,जो होता है अच्छे के लिए होता है..
    शायद गलत कहते है
    बिछड़ना हो जिससे आगे जा के
    शुरुआत में साथ उसी के क्यों रहते हैं,
    ना मिले जिसके साथ बिताने को जीवन,
    उसी से मन मिलाने को बेताब क्यू रहते हैं
    7 महाद्वीप,सेकडो देश और अरबों की आबादी में,
    सिर्फ किसी एक के लिए ,
    जिसने लिखी किस्मत,उसके आगे नाक क्यू रगड़ते हैं
    जिस्मों की आवारगी के इस दौर में
    मन की शांति की बात करते है
    जो कहते हैं जो होता है अच्छा होता है,
    शायद गलत कहते है...
    ©vickyvivek

  • vickyvivek 13w

    जानता हूं ठीक नहीं है ये..
    अब भी तुम्हारी यादों में खोए रहना,
    तुम्हारे दिए खतों को पढ़ना
    खाली तन्हाई मैं जब याद सताए,
    चोरी से तुम्हारी तस्वीर देखना
    ठीक नही है ये...
    जिस राह से तुम गुजरते थे,बार बार उस पर इंतजार करना,
    एक नज़र देखने को घंटों खड़े रहना,
    ना आए कोई जवाब फिर भी तुम्हे खत लिखना,
    हर करीब आने वाले को तुमसे तोलना,गैरों मैं तुमको ढूंढना
    जो नखरे तुमने उठाए, औरों से उसकी उम्मीद करना
    ठीक नहीं है ये ..
    सोच कर हर बार फिर यही बात मैं बार बार करता हूं
    शायद अब भी मैं तुमसे किसी डोर से बंधा बैठा हूं..
    © vickyvictor

  • purnimaindra 14w

    मील का पत्थर
    **************
    सड़क के किनारे लगे मील के पत्थर की तरह हूं मैं,
    जो अपनी चिर स्थिर जगह पर विराजमान है।
    जो प्रतीक्षा में रत है आते जाते राहगीरों के लिए,
    शायद उसकी दयनीय निष्प्राण स्थिति पर दृष्टि डाले कोई।
    पर हाय! नहीं कोई मूल्य है मेरे शांत,मूक अस्तित्व का,
    केवल एक प्रतीक बन के रह गया है उनके मार्गदर्शन का।
    मेरे अस्तित्व के खोल पर कोई छायादार वृक्ष भी नहीं,
    क्यों कि मैं मील का पत्थर हूं न कठोर प्रस्तर,
    यही तो दुनियां समझती आ रही है पर कैसे कहूं कि,
    प्रस्तर हूं तो क्या? आख़िर एक अस्तित्व मेरा भी तो है।
    हां कभी कभी वर्ष में एक बार मेरे रंग रूप को चमकाने के लिए,
    कोई व्यक्ति रंग और तूलिका लिए आ बैठता है,
    अपनी गुनगुनाते हुए वह मगन हो मुझ पर नया आवरण चढ़ाता है।
    पर मैं उससे,अपना दोस्त समझकर बोलना चाहता हूं,
    तो उसकी गुनगुनाहट में मेरी आवाज़ गुम हो जाती है।
    आया हुआ व्यक्ति अपना काम निपटाकर चल देता है।
    फिर मैं अकेला तन्हा रह जाता हूं अपने चिर परिचित स्थान पर,
    सोंचता हूं आवरण तो सुंदर चढ गया पर ,
    मेरे अंदर की टूटन और घुटन वैसे की वैसी ही है,
    कुछ भी तो नहीं बदला,हां-बदला तो एक नया अहसास।
    जीवन के क्षणों में निरंतर, नये अहसासों को पाते हुए,
    टूटते-टूटते जीवन की अंतिम घड़ी तक पहुंचना चाहता हूं।
    पर क्या करूं?ठहरा प्रस्तर स्थिर हूं निरंतर,
    हां, कभी कभी उस वाहन की प्रतीक्षा करता हूं,
    जो टकरा जाए मुझसे और मुक्त हो जाऊं मैं,
    अपने मील के प्रस्तर के आवरण से,
    मुक्त हो जाऊं मैं अपनी चिर स्थिरता से,
    पहनूं नये जीवन का चोला जो परिवर्तन की ओर उन्मुख हो।
    फिर मैं अपने नये जीवन में प्रवेश करके नये अहसासों का भागी बनूं,
    और नये आवरण में नये अस्तित्व का निर्माण करूं।
    स्वरचित और मौलिक-
    ©️®️ purnima Indra
    ©purnimaindra

  • vickyvivek 14w

    लो हार गए हम अपना चैन ओ करार,
    चाबी अब अपने सुकून की तुम्हे सौंपते हैं..
    माना जब से तुम्हे अपना, नही कोई होश ओ हवास,
    फिर से सुध बुध लाने की जिम्मेदारी तुम्हें सौंपते हैं..
    तैयार है लेने को तुम्हारे सारे गम,
    अपनें हिस्से की खुशी अब तुम्हे सौंपते है..
    कुबूल करो चाहे ठुकरा दो हमारा इजहार,
    होगा सर माथे पर , समझेंगे तुम्हारा ही उपहार
    फैसला अपने किस्से का अब तुम्हे सौंपते हैं...
    ©vickyvivek

  • purnimaindra 14w

    आख़िरी किनारा
    ======================


    तनहाई का आलम ही अब सहारा है,
    किश्ती डूबी है कोई न अब किनारा है।

    राह में बहुत थक गये थे चलते चलते,
    मिली न कोई छांव न ही कोई आसरा है।

    भूली बिसरी मचलती यादों के जंगल में,
    न ही कोई डगर है न ही कोई उजियारा है।

    ढूंढता फिरता हूं कितने सारे अपनों को,
    कितना पागल दिल है कितना मतवारा है।

    दफ़न होती गयी हैं उम्मीदें और ख्वाहिशें,
    न ही कोई लख्त़े ज़िगर है न ही कोई प्यारा है।

    सबकी नादानियां भुला दी हैं मैंने मेरे यारों,
    दिल बस ढूंढता इक आख़िरी किनारा है।
    स्वरचित एवं मौलिक--
    ©purnimaindra

  • innocent_lover 14w

    Mujhe Qayamat dekhni thi
    .
    .
    .
    Woh apne aankhon mai kaajal laga kar aa gayi ❤

    ©innocent_lover

  • vickyvivek 14w

    बीते पलों को सोचते हो क्यों
    फिसल गई जो हाथ से रेत उसे तोलते हो क्यों,
    जो जाने दिया किसी को, मन में उसे रोकते हो क्यों..
    ना जी पाएंगे तुम्हारे बिना ,कहना था उसी पल,
    अब घुट घुट कर यूं रोज मरते हो क्यों..
    जो कुबूल की थी जुदाई, तो
    अब मिलने को तरसते हो क्यों
    कहते थे फर्क नहीं पड़ता किसी के जाने से
    तो अब उस खाली जगह को देख के किलस्ते हो क्यों..
    जो कर दिया किसी को पराया,
    तो अब अपनेपन की उम्मीद रखते हो क्यों...
    ©vickyvivek

  • vickyvivek 14w

    गुजरे हुए वक्त की कहानी
    भी कुछ अजीब है,
    कभी लगती अच्छी, कभी चूल्हा–ए–गरीब है
    कभी लाती लबों पे मुस्कान,
    कभी करती मन को जलील है..
    कोई किस्सा सावन सी मस्ती लाता,
    तो कोई पतझड़ सी वीरानी ले आता
    कभी शामें हसीन रंगीन है
    कहीं रातें भीगी गमगीन है..
    कोई लम्हा आज भी मन किलसाता,
    किसी से मिलती आने वाले कल की उम्मीद है,
    गुजरे हुए वक्त की कहानी भी कुछ अजीब है...
    ©vickyvivek