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1356 posts
  • uttampoetry 2w

    इश्क़ एक साल और पुराना हो गया।

    ©uttampoetry

  • devbhandari 3w

    ~~ आया करो~~

    कोहरे की चादर में लिपटा है,मेरा सहर आज कल,
    कभी चाय पीने के बहाने ही सही
    टपरी पर मिलने आया करो
    मुशायरों का मौसम फिर से लौट आया है मेरे सहर में
    नामी शायरों के नाम पर ही सही
    सायरी सुनने आया करो
    सुना है,तुम माहिर हो इश्क ए जहां में,
    मुझ नादान को इश्क के नए नए उसूल
    सीखाने आया करो

    ~~~ देव भंडारी
    ©devbhandari

  • vikkoo 8w

    मानो गिरने के डर से घुटनों के बल चलते हैं
    कुछ लोग इश्क भी नाप तोल के करते हैं...
    ©vs

  • vikkoo 8w

    मज़ाक बनता रहा ज़माने में खबर तो हमको भी रही
    पर गुरुर हम कर लेते तो इश्क फिर कर पाते नहीं...

    ©vs

  • uttampoetry 8w

    दिल, दिमाग, ख्वाब, सपने,
    वो हर जगह आई बस किस्मत को छोड़कर।

    ©uttampoetry

  • 26decemberborn 9w

    नग़्मा-१५

    मुझे उसके सोहबत में हँसना-रोना, चलना क़ुबूल है
    जलाए लाख़ों बार मोम-सा मुझे, पिघलना क़ुबूल है

    उसके शिकवा-ओ-शिकायतें सारे मंज़ूर कर देता हूँ
    हद-ए-दिल में बस वहीं हो इतना ही रहना क़ुबूल है

    भाए न अंदाज़-ए-नज़र तो न सही ग़लत तो नहीं है
    वो जले अंदरूनी इस से पहले मेरा जलना क़ुबूल है

    जाँ-निसार है उस के हर अदा पर दिल-ओ-जाँ से मैं
    सद-हज़ार-साल उसी पर मुझे मर मिटना क़ुबूल है

    यूँ तो बितेगी उम्र मेरी सोहबत में बस उसी के यहाँ
    ग़र हो ग़म-ए-हिज्र हम में तो मुझे मरना क़ुबूल है

    आसाँ नहीं है दिल से दिल का मिल जाना दुनिया में
    आख़री साँसों तक निभाएँगे या बिछड़ना क़ुबूल है

    हँस देंगे बात पर मेरे के मुमकिन न इस दौर में अब
    ऐसा है तो इस जहान से फ़िर मुझे गुज़रना क़ुबूल है

    ©26decemberborn

  • 26decemberborn 10w

    ग़म-ए-हिज्र- जुदाई का गम
    वस्ल - साथ मिलना
    दिल-ए-रेज़ा - टूटा हुआ दिल
    मलाल- बुरा लगना
    फ़िदा- सब कुछ लुटाना
    सीरत - नीयत
    वाबस्ता- संबंधित
    कस्में-ओ-वादे - कसम या वादे
    कूचा-ए-महबूब - सनम की गलियाँ
    निग़ाह - आँखें
    दिल-ए-नादान- नादान दिल का
    बे-हाल - बुरे हालात
    सर-ए-आम - सब के सामने
    नूर-ए-हुस्न - तेजस्वी सूरत
    दीदा-ए-जाल - आँखों का जाल
    हश्र- हाल
    उल्फ़त- प्रेम
    अहवाल- हालात
    अश्काल- सूरत
    पर-साल- पिछला साल

    #hindiurdu #26dec

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    नग़्मा-१४

    ग़म-ए-हिज्र के बा'द वस्ल कर हाल मत पूछो
    दिल-ए-रेज़ा रहने दो क्या है मलाल मत पूछो

    फ़िदा सीरत पर हुए थे वाबस्ता क्या सूरत से
    दौहरा के बात बार-बार अब सवाल मत पूछो

    झूठे कस्में-ओ-वादे करना आता न मुझे यहाँ
    कहा तो माना हमने ऐ हुआ कमाल मत पूछो

    कूचा-ए-महबूब की और निग़ाह न जाती अब
    दिल-ए-नादान अंदर क्या है बे-हाल मत पूछो

    सर-ए-आम जलील कर ठुकरा दिए इश्क़ में
    नूर-ए-हुस्न के उस के दीदा-ए-जाल मत पूछो

    हश्र के बा'द मेरे भरोसा उठ गया उल्फ़त से
    किया-लिया क्या-क्या अब अहवाल मत पूछो

    यहाँ तक भूल गया हूँ इस क़दर के याद नहीं
    तस्वीरों में वो कौन उसका अश्काल मत पूछो

    बे-रहम बन कर टूटा हूँ अंदरूनी दिल में मैं
    कैसे गुज़रा-गुज़ारा मैंने पर-साल मत पूछो

    ©26decemberborn

  • 26decemberborn 10w

    ब-दस्त-ए-साक़ी - प्यालों को भरने वाले हाथों से
    सुब्ह-ओ-शाम - सुबय या शाम
    ग़मी - दुखी- उदासी
    फ़ुर्सत- आराम
    दौर-ए-मुश्किल- परेशानियों की घड़ियाँ
    चराग़ो- दिपकों
    ज़ियादा - ज्यादा
    मंज़र-ए-शाम- शाम का दृश्य
    बे-दस्त - हाथों से निकलकर
    दिल-ओ-दिमाग़ - दिल या दिमाग
    रहम-ओ-करम - रहम या करम
    अशआर -ए - ग़जल - ग़ज़ल का शेर
    हर्फ़-दर-हर्फ़- हर इक शब्द
    क़लाम - बातें

    #hindiurdu #26dec

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    नग़्मा-१३

    ब-दस्त-ए-साक़ी छोड़ दो अब... कई बदनाम न हो जाऊँ
    मदहोश न कर इतना के.... बाँटता कोई जाम न हो जाऊँ

    सुब्ह-ओ-शाम आ जाता हूँ.... ग़मी का जहाँ छोड़ कर याँ
    फ़ुर्सत से संभालना दिल... इशारों से ना-काम न हो जाऊँ

    उठाया है दौर-ए-मुश्किल से... ख़बर है किस को कहाँ पे
    श'हर में आया जो आज़... सोचता हूँ इल्ज़ाम न हो जाऊँ

    नशीली निग़ह से.. और न पिलाना.. और न मिलाना मुझे
    हूँ जिसके लिए आया मैं... कोई पुराना पैग़ाम न हो जाऊँ

    ग़ैर-ए-वस्ल देख जला था..... चराग़ों से ज़ियादा मैं कभी
    जले अंदाज़ में इसी वो.. देखने मंज़र-ए-शाम न हो जाऊँ

    भागता हूँ फ़ासलों से.... फ़ासलें कम हुए कितने कहाँ याँ
    शोर दबाया अंदरूनी..... लगे अभी कम दाम न हो जाऊँ

    जिस तरह से नवाज़िश... कर रही बे-दस्त कर सबको तू
    दिल-ओ-दिमाग़ से.... तेरे हरक़तो का गुलाम न हो जाऊँ

    रहम-ओ-करम से बना हूँ... अशआर-ए-ग़ज़ल किसी का
    बिना पढ़े किसी का दिया...... न मिला सलाम न हो जाऊँ

    मत दे यक़ी मुझे के होगा न कुछ..... बुरा इस से ज़ियादा
    हर्फ़-दर-हर्फ़ दर्ज़ के बा'द..... आख़री क़लाम न हो जाऊँ

    ©26decemberborn

  • 26decemberborn 10w

    निग़ाह- आँखें
    ख़ूँ- खून
    अश्क- आँसू
    महफ़ूज- संभाले
    फ़क़- हरा हुआ
    गिरेबाँ- गिरेबान
    सहरा- रेग़िस्तान
    हक़- बारे में
    ज़ीस्त- ज़िंदगी
    अदक़- बहुत ही मुश्किल
    ख़िताबी- सम्मानित
    सुकूँ-ए-दिल- दिल को राहत
    इंतकाम- बदला
    अरक़- पसीना
    दिल-ए-नादाँ- नादन दिल का
    फ़ऱक- भेद
    बहर-ए-लुत्फ़- मनोरंजन
    अंदाज-ए-बयाँ- बयान करने का अंदाज
    इक़- एक
    नुत्क़- बोलने की शक्ति

    #hindiurdu #26dec

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    नग़्मा-१२

    भूलाती रही जिसे दुनिया, उसे बे-शक़ याद रखते है
    निग़ाह से ख़ूँ कि तरहा बहा, हर अश्क़ याद रखते है

    मत समझ के आख़री पड़ाव मेरा, जंग बाक़ी रही है
    महफ़ूज हो न हो पास में, पर हम फ़क़ याद रखते है

    गिरेबाँ में इस सहरा छुपाएँ, महताब से जलते रहे है
    जले तो जले अंदर क्यों?, इसका हक़ याद रखते है

    दौर आता-जाता रहेगा, हिम्मत बड़ाएगी ज़ीस्त मेरी
    सफ़र तन्हाई का गुज़रा, हालत अदक़ याद रखते है

    अभी ख़िताबी कह जाते तो, सुकूँ-ए-दिल मिलता है
    इंतकाम में बहाया हम ने, सारा अरक़ याद रखते है

    अर्से से बनाई जगह से, हमें यूँ कुरेदा गया यहाँ पर
    उनके दिल-ए-नादाँ से हुआ, हर फ़ऱक याद रखते है

    हमीं हम थे बहर-ए-लुत्फ़ में, जिसे औरों ने उठाया
    अंदाज़-ए-बयाँ हम भी तो, इक़ नुत्क़ याद रखते है

    ©26decemberborn

  • 26decemberborn 10w

    हल्ल-ए-हाल-ए-दिल - दिल के हाल का हल
    अहबाब-दोस्त
    मग़्मूम-उदास
    शज़र-पेड़
    दौर-ए-मुश्किल- मुश्किल घड़ियाँ
    आलम-ए-दिल- दिल की दुनिया
    सहरा-रेग़िस्तान
    बाग़-ए-उल्फ़त- प्यार का बगीचा

    #hindiurdu #26dec

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    नग़्मा-११

    चला क्या हूँ तो दिखाई श'हर के बा'द श'हर गुज़रा है
    हल्ल-ए-हाल-ए-दिल करने मिरा यहाँ सफ़र गुज़रा है

    अहबाब आए गए कितने बस मग़्मूम करते गए मुझे
    उगा कल जो पौधा था बन कर आज़ शज़र गुज़रा है

    फ़हमीयाँ सोहबत में अच्छी-ग़लत लिए मिला तो क्या
    दौर-ए-मुश्किल आया तो बस होकर ज़हर गुज़रा है

    ख़ामख़ा बे-चैनी पाल रख चला हूँ आलम-ए-दिल में
    अंजान चाहत की गहराई का छोड़के असर गुज़रा है

    सहरा बन गया जो कभी बाग़-ए-उल्फ़त हुआ करता
    बस इक़ उसके आ-जाने से यहाँ पर कहर गुज़रा है

    अब तो हलक भी ख़ामोश और राह भी ख़ामोश है
    दरिया दिल में उठ कर ख़ामोशी से ऐ लहर गुज़रा है

    जन्नत हुआ करता था जो कभी आलम-ए-दिल मेरा
    कब्र बना वहीं या इंतज़ार का इसपर सबर गुज़रा है

    ©26decemberborn

  • 26decemberborn 10w

    उक़्दा-ए-आसाँ- साधी परेशानी
    दर-ब-दर- हर एक जगह
    कूचे- गलियाँ
    दिल-ओ-जाँ - दिल-या जान
    क़ुर्बान- मिट जाना
    तबस्सुम- हँसी
    बाग़-ए-उल्फ़त- प्रेम का बगीचा
    परी-रुख़- सुंदर सूरतवाली
    ग़म-ए-हिज्र - जुदाई का ग़म (दुख)
    दौर-ए-वक़्त- समय की धारा
    सुर्ख़ - लाल
    गुल-दाँ - गुलाबों का फूलदान
    परीबान- अप्सरा जैसी
    हश्र- हालत
    इंतज़ार-ए-यार - यार की राह तकना
    हैरत- अचंबित
    मयक़दे - शराब मिलती जगह
    नश्शे- नशा ( मदहोश)
    ताबूत- शव


    #rachanaprati105 #hindiurdu #26dec

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    नग़्मा-१०

    उक़्दा-ए-आसाँ हुआ तो भी राहत कहाँ मिलती है
    चाहा दिल ने जिसे हाँ! वहीं चाहत कहाँ मिलती है

    हम्में अभी बाक़ी है हिम्मत दर-ब-दर हो आने की
    कूचे में पलकें उठाऊँ ऐसी हिम्मत कहाँ मिलती है

    दिल-ओ-जाँ क़ुर्बान कर तबस्सुम खिलाए बैठे है
    बाग़-ए-उल्फ़त खिले यहाँ जन्नत कहाँ मिलती है

    परी-रुख़ बीना सहते ग़म-ए-हिज्र दौर-ए-वक़्त में
    मिटा दूँ ख़ुदी को ख़ुदा बता मन्नत कहाँ मिलती है

    सुर्ख़ गुल-दाँ मुरझाया बग़ैर परीबान के अब यहाँ
    ताज़ा कर दे दिल को वो मुहब्बत कहाँ मिलती है

    हश्र का मिरे जिम्मेदार ख़ुदी जो इश्क़ कर बैठा है
    इंतज़ार-ए-यार ख़त्म करें ऐ हैरत कहाँ मिलती है

    मयक़दे का शौक़ न फ़िर भी नश्शे में रहते उसके
    ताबूत में लिपटकर भी पूरी हसरत कहाँ मिलती है

    ©26decemberborn

  • 26decemberborn 10w

    उल्फ़त-प्रेम
    क़ुबूल-ए-जुऱम- दोष को मानना
    दिल-ए-नादाँ- नादान दिल का
    हैरत-अचंबित
    कूचे-गलियाँ
    निग़ाह- आँखें
    शमअ्'- दिपक
    शब-रात

    #hindiurdu #26dec

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    नग़्मा-९

    सफ़र में हूँ उस जिस की सोहबत अंजान है
    चुभे तो दर्द निकलता क्यूँ उल्फ़त अंजान है

    क़ुबूल-ए-जुऱम है दिल-ए-नादाँ का सच में
    क़ुबूल करूँ तो उठी दिल की हैरत अंजान है

    बक़्श न दे ख़ुदा जुऱम तो जुऱम है दिल का
    जिस्म चाहे कुछ दिल की ज़रूरत अंजान है

    ग़र होके आया कूचे से ग़लत-फ़हमीयाँ न हो
    निग़ाह कहती कुछ इसकी नफ़रत अंजान है

    थम कर चल दिया होगा ऐ शमअ्' जलाकर
    शब की गहराई में हुई हर हरक़त अंजान है

    बस साफ़ करूँ जज़्बात दिल से निकाल के
    माना के हमारी बीच रही मुहब्बत अंजान है

    ©26decemberborn

  • 26decemberborn 10w

    हैरत- हैरान
    इमामत - नेता
    तिश्नगी-प्यास
    इल्ज़ाम-दोश
    होश-ओ-हवास- मन की जागृतता
    हम-सफ़र- साथ चलने वाला या में निभानेवाला
    मुकर्रर- ठराया हुआ
    नूर-रौशनी
    पयाम-संदेश, ख़त
    ताल्लुक़- संबंधित
    जश्न- समारोह
    छोर-किनारा
    दरिया- समुद्र
    उम्र-ज़िंदगी
    बे-नश्शीला- मदहोश न करे ऐसा

    #hindiurdu #26dec

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    नग़्मा-८

    अब क्या शिकवा-ओ-शिकायतें करें गुमनाम अच्छा हूँ
    अब तलक ग़ैरों में था अपनों में हुआ बद'नाम अच्छा हूँ

    हैरत किस बात की करूँ, इमामत सभी सिकंदर यहाँ है
    तिश्नगी मिटती न जीत की, हार में मैं इल्ज़ाम अच्छा हूँ

    होश-ओ-हवास खोए उन्हें मिलता हूँ हम-सफ़र की तरह
    बुरा या भला जो भी कहो मुक़र्रर किया अंजाम अच्छा हूँ

    टूट कर चूर हुआ या दूर हुआ या नूर हुआ कुछ भी कहो
    बस नज़रों में आधा-अधूरा रह गया वो पयाम अच्छा हूँ

    अभी ताल्लुक़ ख़ुद से ख़ुदी का न रहा ख़ुदाया जहाँ में
    महफ़िलों में जश्न सभी का यक़ मैं ही ना-काम अच्छा हूँ

    छोर दरिया का मिला न कभी मुझ से बिछड़ कर उम्र में
    तालशों में गुज़ारता चला, बे-नश्शीला क्या जाम अच्छा हूँ

    ©26decemberborn

  • 26decemberborn 11w

    तकलीफ़ - मुसीबत
    गिरेबाँ- गिरेबान
    शरीफ़-सज्जन
    वालिद- पिता
    माई- माता
    तारीफ़- प्रशंसा
    तबस्सुम- हँसी
    ता-उम्र- पूरी ज़िंदगी
    लतीफ़- हास्यास्पद
    अहबाब- दोस्त
    हम-नफ़स- दोस्त
    कसीफ़- गंदा
    तलाश-ए-यार - दोस्तों की खोज़
    मुसलसल- लगातार
    हलीफ़- दोस्त
    ज़दा - ज्यादा
    आलम- दुनिया
    नेक-दिल - अच्छा दिल
    अफ़ीफ़- समर्पित

    #hindiurdu #26dec

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    नग़्मा-७

    अभी लिखता नहीं गुज़रा कल जो तकलीफ़ों से भरा है
    हर शख़्स जो हम-सफ़र था गिरेबाँ में शरीफ़ों से भरा है

    वालिद सच कहता था माई के संभल कर चलना तुमें है
    कश्तीयाँ डूब जाएगी तेरी जिसे तुमने तारीफ़ों से भरा है

    इतनी तबस्सुम ना-काम कि है बेटे तुम समझ लौ अभी
    ता-उम्र लुटा कर क्या काम की जभी लतीफ़ों से भरा है

    नोक से कुचल देंगे वक़्त कि नज़ाक़त देख अहबाब वो
    हम-नफ़स के नाम पर सोहबत में यूँ कसीफ़ों से भरा है

    तलाश-ए-यार ख़ुद ढूँढ लेंगे सबर रख वक़्त आएगा वो
    ख़ुली निग़ाह से देख मुसलसल जहाँ हलीफ़ों से भरा है

    ज़दा ज़िक्र कर उम्मीद ज़िंदा रख चला हूँ अब्बा-अम्मी
    ख़ुदा का आलम सारा नेक-दिल याँ अफ़ीफ़ों से भरा है

    ©26decemberborn

  • 26decemberborn 11w

    क़ाफ़िर - न मानने वाला या अपात्र
    लब-ओ-लबाब - निकले शब्द
    दिल-ए-रेज़ा - टूटा हुआ दिल
    खुल-ए-आम - सब के सामने
    दिल-ओ-जाँ - दिल और जान से
    मिरी - मेरी
    तमाम हयात- पूरी ज़िंदगी
    तासीर - प्रभाव
    दवा-ओ-दुआएँ - दवा या दुआ से
    मग़्मूम- उदास
    असीर - कारावासी

    #hindiurdu #26dec

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    नग़्मा-६

    दिल दुखाकर उसका ख़ुद के नज़रों में गिर गया हूँ मैं
    सच तो है उसके नज़र में आज़ बन काफ़िर गया हूँ मैं

    लब-ओ-लबाब जो निकले है दिल-ए-रेज़ा करते गया
    कुछ वज़ह से इस राह का हो कर मुसाफ़िर गया हूँ मैं

    उठेगी क्या निग़ाहों से पलकें ख़ुल-ए-आम सामने याँ
    बद'नाम वो न हुआ बल्कि हो बद'नाम फ़िर गया हूँ मैं

    लगता है दिल-ओ-जाँ से गलतियाँ सब मिरी से हुई है
    चंद लफ़्जों में गुनाह को क़ुबूल, कर जाहिर गया हूँ मैं

    बे-शक़ न करे माफ़ तमाम हयात में कोई बात नहीं है
    ग़र लगता है उसे तो सही तो, कर के तासीर गया हूँ मैं

    दवा-ओ-दुआएँ ना-काम रह गई जब मालूम गिरा याँ
    मग़्मूम हुआ तो क्या लफ़्ज से बनके असीर गया हूँ मैं

    जगह तो नहीं अब तमाम हयात में उसके न किसी के
    देखते हर नज़र में बस बन कर अब फ़क़ीर गया हूँ मैं

    ©26decemberborn

  • 26decemberborn 11w

    रजा- चाहत
    सर-ए-आम- खुला दृश्य
    शब-ए-ग़म- दुख भरी रात या रातों का दुख
    दर्द-ए-दिल- दिल का दर्द या दर्द भरा दिल
    मंज़र-ए-शाम- शाम का दृश्य
    गुस्ताख़ियाँ- अभीमान
    मसरूफ़ियतें- व्यस्त रहना
    मुसलसल-लगातार
    क़ुर्बान-ए-दिल - दिल से मर मिटना
    ख़िताबी- सम्मान
    इल्ज़ाम- दोष
    दिल-ए-नादाँ- नादान दिल का या दिल का नादान
    दिल-ए-रेज़ा - टूटा हुआ दिल
    बे-पर्दा - स्पष्ट रूप से
    रम्ज़-ओ-राज़ - छुपाए रखी बातें
    रिवाज़- परंपरा
    मिज़ाज- मनोवृत्ति
    लिक्खे- लिखना
    पैग़ाम - ख़त
    बे-जाँ - जान से गया हुआ
    लिफ़ाफे - envelope
    क़ैद-ए-नज़र - नज़र से क़ैद करना
    दिल-ए-मुर्दा - मरा हुआ दिल

    #hindiurdu #26dec

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    नग़्मा-५

    तिरी रजा, तिरी सजा सब कुछ सर-ए-आम क़ुबूल है
    ऐ शब-ए-ग़म, ऐ दर्द-ए-दिल, मंज़र-ए-शाम क़ुबूल है

    गुस्ताख़ियाँ, मसरूफ़ियतें, चाहतें, मुसलसल आ रही
    शिकवा-ओ-शिकायतों से, मिला हुआ जाम क़ुबूल है

    दवा-ओ-दुआ, तिरी इबादत या तिरी हरेक हसरत से
    क़ुर्बान-ए-दिल पर लगाया ख़िताबी इल्ज़ाम क़ुबूल है

    रवानगी दिल-ए-नादाँ से दिल-ए-रेज़ा तक कर गए
    सर आँखों पर लगाएँ गुनाह के हरेक नाम क़ुबूल है

    बे-पर्दा रह गए सारे रम्ज़-ओ-राज़, रिवाज़, मिज़ाज
    स्याही से क़लम के सफ़र में लिक्खे पैग़ाम क़ुबूल है

    टूटे आइने, तस्वीरें, बे-जाँ लिफ़ाफ़े क़ैद-ए-नज़र है
    इतना होकर भी दिल-ए-मुर्दा को अंज़ाम क़ुबूल है

    ©26decemberborn

  • 26decemberborn 11w

    चराग़- दिपक
    पत्थर-दिल - पत्थर दिल का
    नाम-ए-नेक - अच्छा नाम
    आब-ए-चश्म- आँसू
    तमाम हयात- पूरा जीवन
    नूर - रौशनी
    वालिद-पिता
    जाँ-निसार - जीवन का समर्पण

    #hindiurdu #26dec

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    नग़्मा-३

    यक़ साहिल है जो सोहबत मेरे रहता हमेशा है
    डूबने कि फ़िक्र नहीं है वो संभालता हमेशा है

    जलता हूँ ख़ुशी से मैं ख़ुश'किस्मती है मेरे लिए
    चराग़ बना हूँ तो उसके लिए जलता हमेशा है

    पत्थर-दिल में दर्ज नाम-ए-नेक तो हुआ क्या
    उसके यक़ आब-ए-चश्म से पिघलता हमेशा है

    ख़र्च कर देता हूँ तमाम हयात उस के लिए यहाँ
    बस खो न दूँ यक़ पल बग़ैर दिल ड़रता हमेशा है

    संजोए रखा है आज़ भी हर लम्हा अब तक का
    वहीं नूर आज़ भी मुझे उस से मिलता हमेशा है

    ख़त्म हो जाती है तलाश जभी पास रहती वो है
    वहीं ख़ुदा मेरे लिए है दिल बात कहता हमेशा है

    यक़ वालिद चाहेगा क्या अपनी परछाई से अब
    तैयार है करने जाँ-निसार जिसे चाहता हमेशा है

    ©26decemberborn

  • 26decemberborn 11w

    इशरत- खुशी
    तबस्सुम- हँसी
    वगर्ना-वऱना
    साहिल- किनारा
    यक़-एक
    वाँ-वहाँ
    दास्ताँ-ए-उल्फ़त - प्यार कि दास्तान
    गुफ़्तगू- बातचीत
    निग़ाह - आँखें

    #hindiurdu #26dec

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    नग़्मा-४

    बिताया जो भी है अभी याद कराया नहीं जाता
    यादों का दरिया बड़ा है उसे भुलाया नहीं जाता

    तुम महफ़ूज ख़ुद की सोहबत में यह ख़ुशी मेरी
    ये इशरतों के पल हरेक को दिखाया नहीं जाता

    तन्हाई में अक्सर गुन-गुनाया हूँ तो करिबी रही
    तबस्सुम खिलाई जो भी इसे बताया नहीं जाता

    वक़्त बड़ा ही कदरदान निकला जो लौट लाया
    वगर्ना! हम-सफ़र से साथ निभाया नहीं जाता

    मौजूदगी उसे पसंद थी हम नापसंद कर के भी
    दिल अंदर से कहे अब और सताया नहीं जाता

    दोनों साहिल है इश्क़ के दरिया के कैसे बताएँ
    चाहतों के बा-व्ज़ूद उसे याँ मिलाया नहीं जाता

    मिटने को तैयार है पर मिलने को नहीं दोनों भी
    यक़ जिस्म यक़ जान तो, समझाया नहीं जाता

    ख़ाली हाथों से गुज़रते है तन्हाई लिए हम वाँ
    दास्ताँ-ए-उल्फ़त को सीने में बुनाया नहीं जाता

    गुफ़्तगू निग़ाहों से कर लेते हुनर सिख ही लिया
    जुल्फ़े कह दे तो निग़ाह को सुनाया नहीं जाता

    कश्मकश अज़ीब-ओ-ग़रीब ख़िदमत आती है
    दु दिलों के खेल को अब लिखाया नहीं जाता

    ©26decemberborn

  • 26decemberborn 11w

    मग़्मूम-उदास
    ख़ामियों- गलतियाँ
    क़ाबिलिय्यत- पात्रता
    निगहबानी - देखभाल करना
    गुल-एज़ार - गुलाब का बगीचा
    आस्माँ - आसमान
    दरिया-दिल - समुद्र के जैसा दिल
    आसाँ - आसान
    उक़्दा- गुत्थी
    इमामत - नेतृत्व
    वालिद - पिता
    इस्मत - सम्मान

    #hindiurdu #26dec

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    नग़्मा-२

    नहीं जानता क्या होगा मेरा, पर उसे सलामत रखना
    दिल कर आया वहीं, दिल में उस के मुहब्बत रखना

    मालूम है मग़्मूम होगा दिल, जो चाहता इस दिल को
    ख़ामियों के बाव्ज़ूद मेरे, उसके दिल में हसरत रखना

    ना-क़ाबिल में भी उसने, क़ाबिलिय्यत देखी मेरी है
    ख़ुदा दिलदारों में उसकी, निग़हबानी हरक़त रखना

    काँटों में खिला गुल-एज़ार है, जख़्मों से मुस्कुराया है
    दुआएँ कर देना ख़ुदाया, उसके पास में बरकत रखना

    ऊँचाईयाँ आस्माँ की हो, दरिया-दिल रहे हमेशा पास
    कर जाए वो आसाँ उक़्दा, इतनी संग इमामत रखना

    आजमाएँ दुनिया अगर, टूटे न अंदर से कभी हौसला
    मौजूद रहूँ सदा इर्द-गर्द,उसके सोहबत हिम्मत रखना

    ना-काम न हो जाऊँ, वालिद बन निगाह में उस के मैं
    मैं क़ुर्बान हुआ यहाँ, दिल में उसके वहीं इस्मत रखना

    ©26decemberborn

  • 26decemberborn 11w

    नग़्मा - नग़मा
    व्ज़ूद - वज़ूद
    साल-दर-साल - गुज़रता हर साल
    आग़ाज़- शुरुआत
    अब्र - बादल
    शौक़-ए-चश्म - आँखों का शौक़
    दर्द-ए-दिल - दिल का दर्द, दर्द भरा दिल
    सितमगर - जुल्म करने वाला
    अल्फ़ाज - शब्द
    अमवाज - लहर

    #hindiurdu #26dec

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    नग़्मा-१

    कोशिशों के बाद भी उसका अंदाज़ भुलाया नहीं जाता
    नग़्मा खूबसूरत था मिला या ऐ राज़ भुलाया नहीं जाता

    ख़ुदी का व्ज़ूद भूलाने लगा साल-दर-साल ज़िंदगी भर
    पर उस से मुलाक़ात का वो आग़ाज़ भुलाया नहीं जाता

    बे-मौसमी बरसात अब बिना अब्र के दस्तक दे जाती है
    कैसा शौक़-ए-चश्म पालता मिज़ाज भुलाया नहीं जाता

    मशगूल करता हूँ ख़ुद को के फ़िर से उल्फ़त न हो जाए
    ड़रता हद से ज़दा शौर भरी आवाज़ भुलाया नहीं जाता

    था दरमियाँ उसके इतना के साँसे गिनती हो जाती वहाँ
    यादों से करीब रही है के मेरा आज़ भुलाया नहीं जाता

    वादे, कसमें इतनी हुई थी के उसी पर चला जाता अब
    दर्दो ग़म से दर्द-ए-दिल का रिवाज भुलाया नहीं जाता

    सितमगर कह जाते जो दिल लगाकर तोड़ गए हमको
    उनके हलक से निकला अल्फ़ाज भुलाया नहीं जाता

    तबाही क्या है मत पूछो कभी मुझ को यारों तुम यहाँ
    सुब्ह-ओ-शाम तोड़ने उठा अमवाज भुलाया नहीं जाता

    ©26decemberborn