#maintumauryadein

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  • iam_vaibhav07 38w

    मैं, तुम और यादें!

    पता नहीं क्यूँ आज भी तुम मेरे ज़हन में उसी तरह से मुस्करा रही हो, मगर कुछ बोलती नहीं सिर्फ़ मुस्कराती हो, खुश हो जिंदगी जी रही हो। मगर मेरी मौजूदगी से बिल्कुल अनजान मानो मैं हूँ ही नहीं।
    इंसान को अपना बीता हुआ कल, कभी नहीं भूलता, मगर तुम्हें देख कर ऐसा लगता है, जैसे तुम्हारे कल में मैं था तो, मगर मेरे होने ना होने से कोई फर्क़ नहीं पड़ रहा था।
    और अब तो ऐसा लगता है, मैंने तुम्हारी जिंदगी में अपना वज़ूद खो दिया है।

    दोस्त अक्सर कहते हैं कि मैं बदल गया हूँ, मगर कैसे?
    क्या मैं उन्हें बताऊँ कि जो मुस्कान मेरे चेहरे पर आती थी वो सबसे प्यारी थी, जिसकी एकमात्र वज़ह, तुम्हारा साथ रहना था।
    हर बार मैं खुद से आगे बढ़ने की दरख्वास्त करता हूँ। मगर अब, तुम्हारी इन यादों के साथ रहना रास है मुझे। अखिर वो तुम्हारी दी हुई एकमात्र निशानी है। और ये निशानी मैं जिंदगी भर सम्भाल कर रखना चाहता हूँ।

    एक वक़्त आयेगा जब तुम्हारी खाली जगह कोई और ले लेगा, मगर तुमसे जुड़ी यादों में कोई बदलाव नहीं ला पाएगा।
    चाहता तो तुम्हें भूल कर आगे बढ़ जाता, मगर सच बताऊँ तो अब मन नहीं करता कि इन यादों का हाथ छोड़ू। जी चाहता है इस हाथ को यूँ ही पकड़ कर चैन की नींद सो जाऊँ।

    एक उम्मीद बनी हुई है, कि एक दिन लौटोगी, पर सोचने वाली बात ये है, कि क्या हमारे बीच वो पहले जैसी बात रह जाएगी? क्या मैं तुम्हें अपना समझ पाऊंगा? तुमसे वो सारी बातें कर पाऊंगा, जो करना चाहता था? और सबसे अहम सवाल क्या मेरे अंदर उतनी हिम्मत होगी?
    इन सब सवालों का सिर्फ एक कठोर ज़वाब है कि 'नहीं ' , वो बात नहीं रह जाएगी, अपना तो एक बार को मान लूँ,  मगर वो बातें नहीं कर पाऊँगा।

    मेरी आँखों से बहता दरिया कल को शायद सुख जाए, मगर वहाँ एक रास्ता बन जाएगा, जिस रास्ते से मेरे सारे ग़म गुज़रे होंगे, जिस रास्ते से वो यादें गुज़री होंगी, गुज़री होंगी हमारी सारी मुलाकातें।
    वो दरिया सिर्फ़ कहने सुख गयी होगी, मगर सूख जाने से उसकी अहमियत कम नहीं होगी।
            
                                                               -वैभव