#mesmerisingpoem

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  • likhitvaat 8w

    वकालत

    वकालत तू खूब की थी तुमने अपनी मोहब्बत की
    मुकदमा तो हमने कभी बिठाया ही नहीं था।

    सजा तू सुना गया मेरे दिल को
    जिसने कोई गुनाह किया ही नहीं था।

    अब शायद तुम्हारा जमीर हमारे यादों की बोझ से हल्का हुआ...

    जाओ हमने खुद को माफ किया।
    - लिखित वाट
    ©likhitvaat