#panchdoot_sarthak

1564 posts
  • jigyasabinni 27w

    When we talk of sacrifice, it's not only our soldiers who sacrifice so much for the country but also their spouses are the one who are actually sacrificing every day.. living with that grit of managing almost everything alone right from managing home to kids and everything....
    Salute to all the veer sanginis for their sacrifice...

    #mirakee #poems #poetry #writersnetwork #writersofinstagram #quoteoftheday #writersofig #writersofmirakee #wordporn #writing #writer #mirakee #writersnetwork #writerscommunity
    #thewriterstribe #pod #impureindian @panchdoot @writersnetwork @mirakee @mirakeewriters
    #panchdoot_sarthak #panchdoot #hks #panchdoot_social #likho_india #panchdoot_magazine
    #globalpoetcult #sacrifice_wt @writerstolli #writerstolli #indianarmedforces #indianarmy #indianairforce #salutetheforces

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    Air Force Wives - A sacrifice a pride

    Many years ago
    Saw them fly
    Their flying machines
    In that blue sky
    Doing aerobatics , flipping
    Acrobatics, zipping
    That jet roar
    Which were music to the ears
    And these aviators
    Used to disappear
    In few moments
    Always used to ponder-
    Who are they ?
    How do they look ?
    How would be that person
    In the mighty fighter plane ?

    Who knew that
    Destiny would bring me
    To the same aviator
    The jet roar which
    I heard from childhood
    Would become part of my life
    That man from skies
    Would become my soulmate

    With the first rays of the dawn
    They are our of the home
    For work
    To the Flying squadrons
    Every moment is like
    Preparation of the battles
    The flock goes out on their missions and campaigns
    Air defence, Strike
    Air combat, interdiction
    And so many names
    From morning to night
    Busy in these campaigns
    Far away from life's ups downs
    Busy they are, in their fighter towns

    For us, the better halves
    Getting alone in moonlit nights
    In emotions, in dreams
    In pictures, in thoughts
    Alone we are weaving dreams
    Incomplete ambitions
    Incomplete we..

    In those moonlit nights
    Riding on the light waves
    These avians are creating
    Formidable warfare

    When they are back home
    Seeing their blissful faces
    With our sleepy eyes
    We forget our loneliness
    In that pride
    We are also defending the country
    With our bit of sacrifice...

    ©jigyasabinni

  • kaviator 73w

    ऐ ज़िंदगी

    ऐ ज़िन्दगी !
    कितने रूप हैं तेरे ?
    अब और कितने रंग दिखाएगी ?
    अब भी कुछ बचा है क्या ?

    चाहती क्या है तू ?
    क्या किसी की खुशियां देखी न जाती तुझसे ?
    क्योँ कर झोंक देती है
    उन खुशियों को आग में ?
    क्यों तड़पाती है इतना ?

    थोड़ा सा समय निकाल
    मुस्कुराना गुनाह है क्या ?
    हर काम को पूजा मानना
    गुनाह है क्या ?

    तो फिर क्यों नहीं समझती तू ?
    ऐ ज़िन्दगी !
    जवाब देते जाना ज़रा ।।।

    ©kaviator

  • jigyasabinni 74w

    नज़्म मेरी सज़दा हैं तेरी,
    अल्फाज भी तेरी रूह है।
    सबब भी तसव्वुर है तेरा ,
    अश्कों की रवानगी भी है तेरी।

    ©jigyasabinni

  • jigyasabinni 74w

    लबों की ख्वाहिश थी, कि
    तुझे पहचान लूं,
    पर ज़माने के हर शै ने ,
    पढ़ लिया मुझे छोड़ कर ।

    ©jigyasabinni

  • jigyasabinni 74w

    कसक

    दिल की तबाही का आलम,
    कैसे बयां करूँ
    आज भी दूर जाने के नाम से ,
    बिखर जाता है आइने सा
    चंद लम्हात के लिए भी न सोचा,
    की इस बेवफाई की कसक में,
    मैं खुद को कैसे सिमट लूं,
    फिर भी तेरे जाने के नाम से
    हर बार यूँ ही चनक जाता है,,,,

    ©jigyasabinni

  • jigyasabinni 74w

    वो

    वो अक्सर अपने प्यार में
    उलझ कर रह जाता
    मैं चुपचाप उसकी नमी में
    गुफ्तगू करती रह जाती
    अपनी दिल्लगी में
    एहसास की कलम छोड़ ही देता
    मैं उस अपनेपन में
    खुद को संवारती रह जाती
    ख़ैरियत की बानगी में
    असले भी खूब दागे जाते
    मैं उस दिवानगी में
    जिंदगी के क़सीदे सातों जन्म गुजारने को तैयार हो जाती।

    ©jigyasabinni

  • jigyasabinni 74w

    बचपन की बारिश

    कोई लौटा दो मुझे वो,
    मेरा मासूम बचपन,
    वो सतरंगी सपने,
    वो अतरंगी ख्याल,
    वो चुपके से पांव पानी में,
    औऱ छपाके कितनी दूर
    टप की आवाज
    ये पानी की बूंदे,
    न वो इरादे हैं
    न खामोश शरारती आंखे,
    लबों पे नाम है मां
    और सुन रहा हूँ ,
    पर चेहरा है पानी मे
    आँखे बंद मानो
    सपने पूरे होने की मंजूरी हो,
    वो बारिश के नाम से
    रौनक दौड़ जाती ,
    छतरी तो शौक की थी
    असल मजा तो
    बूंदों से छेड़खानी में था,
    वो सरपट दौड़,
    पानी की टापों से होड़ ,
    आज भी मुस्कान बिखेर ही जाता है,
    सिर्फ और सिर्फ तुम.....

  • kaviator 75w

    तेरी हर शोखी मुझे
    मगरूर कर देती है,
    तेरी हर अदा मुझे
    मज़बूर कर देती है,
    ऐ हमदम तू यूँ
    न तड़पाया कर मुझे,
    तेरी दीवानगी मुझे
    मशहूर कर देती है ।।

    ©kaviator

  • kaviator 77w

    क्यों नहीं समझती

    तेरी मुस्कुराहट मेरी ज़िंदगी है
    क्यों नहीं समझती तू ।।

    तेरी आंखों की मस्तियाँ
    करें रोशन जीवन मेरा
    तेरे आँसू हैं गम मेरे
    क्यों नहीं समझती तू ।

    तेरी मुस्कुराहट मेरी ज़िंदगी है
    क्यों नहीं समझती तू ।।

    तेरी हर साँस से मेरी साँस है
    तेरा हर ख्वाब है ख्वाब मेरा
    तेरा जाना करे जीना दुश्वार मेरा
    क्यों नहीं समझती तू ।

    तेरी मुस्कुराहट मेरी ज़िंदगी है
    क्यों नहीं समझती तू ।।

    तू सामने हो तो धड़कन चले
    तू आंखों से ओझल हो
    तो मानो निष्प्राण हूँ
    क्यों नहीं समझती तू ।

    ©kaviator

  • kaviator 77w

    यूँ तो

    यूँ तो हर किसी को अपने
    घाव गहरे नज़र आते हैं
    पर थोड़ी सी कठिनाई हो तो
    नैतिक मूल्य बिखर जाते हैं ।।

    साहब से फ़ाइल पर साइन करने के
    देने हैं पैसे बढ़ाकर
    चपरासी को फ़ाइल बढ़ाने के
    देने हैं पैसे मिलाकर
    घूस भी इसलिए चाहिए क्योंकि
    मँहगाई का ज़माना है साहब ।

    यूँ तो हर किसी को अपने
    घाव गहरे नज़र आते हैं
    पर थोड़ी सी कठिनाई हो तो
    नैतिक मूल्य बिखर जाते हैं ।।

    व्यापारी व्यापार करे
    कमाई के नाम पर व्याभिचार करे
    सरकार से सुविधाएं सारी चाहियें
    लेकिन टैक्स देने के वक़्त
    दुराचार करे ।

    यूँ तो हर किसी को अपने
    घाव गहरे नज़र आते हैं
    पर थोड़ी सी कठिनाई हो तो
    नैतिक मूल्य बिखर जाते हैं ।।

    खाकी वर्दी में भी अनगिनत छेद हैं
    इनके भी अनगिनत भेद हैं
    कुछ तो अपराध होने से पहले ही
    बता देंगे अपराध कहाँ होगा
    कार्रवाई पूरी न हुई तो कहेंगे
    हमें खेद है ।।

    यूँ तो हर किसी को अपने
    घाव गहरे नज़र आते हैं
    पर थोड़ी सी कठिनाई हो तो
    नैतिक मूल्य बिखर जाते हैं ।।


    ©kaviator

  • kaviator 77w

    यूँ तो

    यूँ तो हर किसी को अपने
    घाव गहरे नज़र आते हैं
    पर थोड़ी सी कठिनाई हो तो
    नैतिक मूल्य बिखर जाते हैं ।।

    साहब से फ़ाइल पर साइन करने के
    देने हैं पैसे बढ़ाकर
    चपरासी को फ़ाइल बढ़ाने के
    देने हैं पैसे मिलाकर
    घूस भी इसलिए चाहिए क्योंकि
    मँहगाई का ज़माना है साहब ।

    यूँ तो हर किसी को अपने
    घाव गहरे नज़र आते हैं
    पर थोड़ी सी कठिनाई हो तो
    नैतिक मूल्य बिखर जाते हैं ।।

    व्यापारी व्यापार करे
    कमाई के नाम पर व्याभिचार करे
    सरकार से सुविधाएं सारी चाहियें
    लेकिन टैक्स देने के वक़्त
    दुराचार करे ।

    यूँ तो हर किसी को अपने
    घाव गहरे नज़र आते हैं
    पर थोड़ी सी कठिनाई हो तो
    नैतिक मूल्य बिखर जाते हैं ।।


    खाकी वर्दी में भी अनगिनत छेद हैं
    इनके भी अनगिनत भेद हैं
    कुछ तो अपराध होने से पहले ही
    बता देंगे अपराध कहाँ होगा
    कार्रवाई पूरी न हुई तो कहेंगे
    हमें खेद है ।।

    यूँ तो हर किसी को अपने
    घाव गहरे नज़र आते हैं
    पर थोड़ी सी कठिनाई हो तो
    नैतिक मूल्य बिखर जाते हैं ।।


    ©kaviator

  • kaviator 77w

    Guarding

    Every morning
    When I start from home
    My world becomes different
    I go in war zone

    I go with resolve
    I go with bombs
    To fight the enemy
    To build their tombs

    It's the flying machine
    That rides me in the air
    I patrol the sky
    For enemies I m the terror

    Coz this is my motherland
    N this is my job
    Of both my mother n motherland
    I am their pearl and heartthrob...

    @kaviator

  • parulsharma 110w

    मैं #आईना हूँ या #रूह हूँ तेरी
    मुझमें बस तुम ही #नजर आते हो
    पारुल शर्मा
    @hindiwriter@mirakeeworld@writersnetwork @panchdoot @hindilekhan @hindiurdu_saahitya @merakee @hindikavyasangam @readwriterunits @thegoodquote#likho_india#panchdoot_social#panchdoot_magazine #new_india #panchdoot_sarthak#hks#shabdanchal

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    प्रेम

    मैं आईना हूँ या रूह हूँ तेरी
    मुझमें बस तुम ही नजर आते हो
    ©parulsharma

  • archanatiwari_tanuja 119w

    पहचान चाहती हूँ-

    खुद की तकलीफों की परवाह किए बगैर
    सेवा भाव लिए मैं निरंतर चलती रहती हूँ,

    औरों की खुशी के लिए जीती - मरती हूँ
    सूर्य की प्रथम किरण के संग मैं उठती हूँ,

    दिन भर सबकी फरमाईशें पूरी करती हूँ
    पति, बच्चे, सास-ससुर,देवर-जेठ,ननद,

    सब ही से है भरा- पुरा परिवार मेरा
    इन्हीं में सिमट गया अब संसार मेरा,

    विवाह से पहले मायके हाथ मे थी ड़ोर मेरी
    मान-मर्यादा बनाए रखना थी जिम्मेदारी मेरी,

    इक हाथ से छूटकर दूजे हाथ पहुंची ड़ोर मेरी
    अपनी जरुरतों के मुताबिक खीचें सब डो़र मेरी,

    मैं कब खाती हूँ, सोती हूँ कब आराम करती हूँ
    इससे किसी को भी कोई सरोकार नहीं रहता,

    इस पर भी मैं खरी- खोटी सुनती रहती हूँ
    लोगों की खुशी की खातिर चुप ही रहती हूँ,

    मुझे भी पीड़ा होती है मेरी भी आँखें रोती है
    पर कह नहीं सकती किसी से यही है तहज़ीब मेरी,,

    जन्म से माँ- बाप के संस्कारों का मोल चुकाती हूँ
    विवशता वश मैं छिप-छिपकर आंसू बहाती रहती हूँ,

    समझ लिया है कतपुली मुझे घर,परिवार और
    समाज की कुरीतियों को चलाने वाले ठेकेदारों ने,

    मै भी हूँ इक इंसान तुम्हारी ही तरह ऐ दुनिया वालों
    दर्द मुझे भी होता है मेरा भी दिल जार-जार रोता है,

    पत्थर की मैं कोई मूरत नहीं हूँ मुझमें भी प्राण है
    भोग की कोई बस्तु नहीं हूँ मैं भी तो इंसान ही हूँ,

    मानव जीवन को आकार,आधार मैं देती हूँ
    जीवन को सुरक्षित गर्भ मे सहेजे रखती हूँ,

    आखिर कब तक सहूं मैं अत्याचार तुम्हारे,
    प्यार, स्नेह, दुलार पर मेरा भी तो हक्क है,

    सम्मान चाहती हूँ स्वतंत्रता का अधिकार चाहती हूँ
    "मै औरत हूँ"कतपुतली नहीं अपनी पहचान चाहती हूँ।।

    ©archanatiwari_tanuja

  • archanatiwari_tanuja 120w

    #hindiwriters#writerstolli#writersnetwork
    #mirakee#@panchdoot#panchdoot_magazine
    #panchdoot_social#panchdoot_sarthak
    #panchdoot_news

    विजय दशमी के पावन पर्व की आप सभी को बहुत बहुत
    बधाई प्रभु श्री राम की दया दृष्टि सदा आप सभी पर बनी रहे....
    ����������❤️❤️����������

    08/10/19 01:40 PM

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    राम-रावण

    त्रेता मे तो था इक रावण
    राम ने जिसें मार गिराया
    अब है घर-घर मे रावण
    कैसे इसको तुम मारोगे
    तब तो रावण के घर रह
    सीता पवित्र बनी रही
    अब अपने ही घर में सीता
    असहाय नजर आती है।

    नहीं सुरक्षित अपने ही घर मे
    राम के वेश मे रावण छिपा है
    कैसे करें पहचान भला इसकी
    ये तो मुखौटा लगा बैठा है
    नहीं पहचानी जाती शक्लें
    किसपर हम कैसे करें भरोसा
    जमीर को मार सब बैठे हैं
    जिस्म की भूख मिटाने को।

    अखबार उठा कर तो देखों
    बलात्कार की खबरों से भरा पड़ा
    कई-कई रावणों ने मिलकर
    बेचारी,असहाय का शिकार किया
    इतने पर भी तृप्ति नहीं मिली!!
    जिस्म को टुकड़ों में बांट दिया
    बरसों पहले मरे रावण को
    हर साल ही हम जलाते है ।

    मन का रावण कभी ना मार सके
    अपने भीतर की बुराई ना जला सके
    अपनी गन्दी नियत को ना साफ किया
    बस चीर हरण को हरदम तैयार रहे
    पुतले को जलाने से सुधार नहीं होगा
    दोषियों को बली चढ़ाना होगा
    फिर इकबार राम राज लाना होगा
    अपनी सोई आत्मा को जगाना होगा।

    राम-रावण के इस युद्ध मे
    विजय हो सदा ही सत्य की
    देश,समाज मे हो शान्ति खुशहाली
    नारी को समुचित सम्मान मिले
    सर उठा चलने का अधिकार मिले
    कलुषित मानसिकता को त्याग दे
    सात्विक आचरण जब हम अपनाएं
    तभी सार्थक हो दशहरा और दिवाली।।

    ©archanatiwari_tanuja

  • jigyasabinni 123w

    हिंदी

    हिंदी आज तो तेरा दिन है ...
    आज कुर्सी तेरी है शाम तेरी है...
    .पर
    सत्ता के गलियारो मे कहाँ कैद है ?
    मै तो तेरी माथे की बिंदी हूँ
    पन्नों मे, इतिहास में , इंकलाब में , कहाँ छुपी है
    तोड़ दे चुप्पी बता अपना विशाल रूप...
    दूसरा कौन नीलकंठ होगा जो समेटेगा तुझे ?
    गंगा सी सरल ,तलवार सी तीक्ष्ण
    हर दुख की जुबां थी हिंदी .....
    पर
    सिसकियों की गूंज मे अभी जिंदा है...
    देश भक्ति के सुर में अभी तेरी ही लहर है
    मनोरंजन और व्यापार में T.R.P.मे तेरी ही धूम है
    पर....
    लोगों की नजर में ,सोच में ...
    तेरे पांवो के नीचे दलदल जमीं है ....
    दिलों मे भी दबी सहमी है...
    लबों पे आके ठिठक सी जाती है...
    बोलूँ या न ...
    पर....
    मेरी हिंदी तू मेरी पहचान है
    मेरा अभिमान है ,,
    मेरे उगते हिंदुस्तान के ललाट का...चमकता सूर्य तू है
    मेरी हिंदी तू मेरी पहचान है ...
    जय हिंद, जय हिंदी, जय हिंदुस्तान !!!!!
    ©jigyasabinni

  • archanatiwari_tanuja 124w

    #writerstolli#tod_wt#challenge#teacher_wt
    #panchdoot#panchdoot_social#hindiwriters
    #panchdoot_sarthak#repost

    05/09/19. 04:35 PM

    आप सभी को शिक्षक दिवस की ढ़ेरों शुभकामनाएं ��������������������������������

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    गुरु महिमा

    मैं लाख करु प्रयास
    गुरु महिमा कही ना जाए,
    आप जीवन के आधार हो
    डगमगाती नौका के खेवनहार हो।

    मै मतिमूढ़ बहुत हूँ
    आप ज्ञान के भंडार,
    सही गलत का भान कराया
    मुझे ज्ञान का रसपान कराया।

    मै लक्ष्य हीन भटक रही थी
    आपने ही लक्ष्य का बोध कराया,
    निराशा के अंधकार मे जब फंसी
    हरदम आश्वासन का हाथ बढ़ाया।

    बहुत भूल हूँ मैं करती
    पग पग पर है सुधार कराया,
    जब व्याकुल हो उथता था मन
    आपने मुझको प्रति पल धैर्य धराया।

    दुनिया में मुझको ऊँच नीच
    खरे खोटे का इल्म नहीं था"गुरु माँ"
    मै बहुत ही डरी सहमी सी रहती थी
    आपने गर्व से सर उठा चलना सिखाया।


    आपके चरणों में हैं मेरा
    नमन शत - शत बारम - बार,
    प्रति पल मेरा मार्गदर्शन करना
    बनकर जीवन ज्योति ज्ञान आधार।।

    ©archana_tiwari_tanuja

  • archanatiwari_tanuja 125w

    #we_are_one@birajv#triveni#panchdoot
    #panchdoot_social#panchdoot_sarthak
    #repost#hindiwriters#writerstolli#tod_wt
    #panchdoot_magazine#likho_india

    500th पोस्ट आज इस मंच पर मेरी पूरी हो गई है ।और इस
    देश भक्ति रचना जो कश्मीरी भाई बहनों के लिए लिख कर
    मैंने पूरी की। इतने लंबे समय तक आप सभी ने मेरा साथ निभाया है
    उसके लिए हृदय की असीम गहराइयों से मैं आप सभी का आभार व्यक्त करती हूँ तथा अभिनंदन करती हूँ ऐसे ही सदा अपना स्नेह
    बनाएं रखें......����������❤️��������❣️❣️

    03/09/19 04:35 PM

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    कश्मीर की घाटी

    त्रिवेणी :-
    -------------
    (1)
    आज वह है स्वतंत्र हुई,
    अत्याचार सहे उसने अनेक।

    अब तक जो बंधक थी आतंक की।।
    (2)
    बम, बारुद,गोलियों की,
    अब तक बहुत है गूंज सुनी तुमनें।

    वक़्त है अब आ गया प्रतिशोध का।।
    (3)
    आतंकियों के बहुत सहे अत्याचार,
    जिसमें कुछ अपने भी है भागीदार।

    करना होगा उनका भी अब बहिष्कार।।
    (4)
    पराये तो पराये थे,
    ऐ पत्थरबाजों तुम तो अपने थे।

    फिर कैसे तुमनें अपनों का लहूँ बहाया।।
    (5)
    होगा तेरे भी हर जुर्म का हिसाब,
    कश्मीरी युवाओं को भ्रमित कर।

    मौत का भयावह खेल जो तुमनें खेला है।।
    (6)
    गैरों की औकात ना होती,
    गर कोई अपना ना डसता।

    कोई कश्मीरी ना जान गवाता।।
    (7)
    देश द्रोही है वे सब,
    जो भाई को भाई से लडवाते रहे।

    कत्ल करने को हथियार थमाते रहे।।
    (8)
    श्वेत मखमली चादर पर,
    वे रक्त का दाग लगाते रहे।

    जगह जगह लाशों का ढ़ेर लगाते रहे।।
    (9)
    सुनलो ऐ देशद्रोहियों,
    अन्त तुम्हारा अब निकट है।

    कही नहीं तुम्हें अब सरण मिलेंगी।।
    (10)
    हम एक ही माँ की संतान है,
    हम एक है और सदा एक ही रहेंगे।

    फूट का तुम चाहे जितना जहर घोलों।।
    (11)
    कश्मीर की घाटी ,
    करती है उसका आभार।

    जिसनें उसको बंधन मुक्त कराया।।
    (12)
    डरी-सहमी सी घाटी में,
    फिर से लाएंगे हम नई बहार।

    जब हम सब एक जुट हो जाएंगे।।
    (13)
    कश्मीर की वादियों में,
    खुशनुमा माहौल घुल जाएगा।

    जय हिंद के नारों से आकाश भी गूंज उठेगा।।
    (14)
    आतंक की जड़ें है कमजोर हुई,
    जन-जन मे है नव जागृति आई।

    चल पड़ा कश्मीर विकास की ओर।।
    (15)
    गिले शिकवे सब भुलाकर,
    हम सुख दुःख के भागीदार बने।

    इन्हें गले लगाकर नये रिश्ते की शुरुआत करें।।
    (16)
    रंग रुप का भेद-भाव मिटें,
    जाति - धर्म ना आने पाए आड़े।

    एक माँ की सब संतानें हिल- मिल रहें।।
    (17)
    एक ही देश,एक ही झंडा,
    एक ही नारा,एक ही कानून।

    तब जग में हिन्दुस्तान का मान बढ़ें।।

    जय हिंद जय भारत
    ©archana_tiwari_tanuja

  • anupamsabhivyakti 133w

    Written for Writerstolli

                   अब अौर नहीं
    कब तक यूँ शब्दों से भ्रास निकालेंगे,
    दरिंदों को कब तक हम और पालेंगे,
    कब तक उनको यूँ दरिंदगी करने देंगे?
    बस बहुत हुआ अब मोम से प्रतिकार,
    उठाकर हमें कोई प्रलयंकारी हथियार
    करने होंगे उन दुष्ट दानवों पर घातक वार।

    काट डाले टूकड़ों में उनके अंग दो चार
    जिन्होेंने छीना उनसे जीने का अधिकार
    जो बस अभी हुये थे चलने को तैयार।
    क्यूँ  हम ऐसे हैवानों को पनाह देते रहे,
    जो मासूमों की आबरूओं से खेलते रहे,
    क्यूँ न शैतानों को जलाकर राख करते रहे?

    कोई बताये उस शैतान की जननी को,
    जिसने कोख में पाला खूनी नेवले को
    अभिशाप बनकर बेखौफ रौंदता है जो
    कितनी ही निरीह कलियो औ' फूलों को;
    जो किया सो किया अब पाप धोने को,
    झूठी ममत्व भूला, मार दे खूनी संतान को।

    कितने कुकर्मों पर हम बस यूँ ही बौखलायेंगे
    जगह जगह कितनी ही मोमबत्तियाँ जलायेंगे
    दो चार गालियाँ देकर फिर चुप हो जायेंगे?
    यूँ ही अगर इन वारदातों को भूलते जायेंगे
    निर्दयी दानव कितने निर्भयों को खा जायेंगे,
    और हम बस मोमबत्तियाँ जलाते रह जायेंगे। 

    अब और नहीं, इन कपूतों को हम दिखायेंगे
    कि कैसे चील कौवे इन्हें ही नोंच नोंच खायेंगे
    औ' हम कोई और मातम नहीं,जस्न मनायेंगे।
    सामने खड़े भेड़िये पर हम इतना चिल्लायेंगे
    कि कान ही नहीं, रोंगटे भी उसके मुकर जायेंगे
    सशक्त प्रहार से उसे तिलमिला कर छोड़ेंगे।

    एक एक बेटी को हम इतना सशक्त बनायेंगे
    कि वह हर हरामी का सही जवाब दे पायेंगे;
    हर बेटे में ऐसी भावनाओं को हम जगायेंगे
    जो अन्याय के आगे सर न कभी अपना झुकायेंगे
    हर बहन की पूकार पर सब छोड़ दौड़ते आयेंगे
    हाथ से हाथ मिला सभी राक्षसों का सामना करेंगे।
    ©amritsagar

  • anupamsabhivyakti 135w

    इस रचना को लिखे दस वर्ष हो गये पर मुझे यह आज भी उतनी ही ताजी लगती है जितनी की तब थी जब मैंने इसे पहली बार लिखा था। ज़िंदगी की असली सच्चाई यही है।
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    अध्यात्म

    मुझमें ही है राम, मुझ ही में रावण,
    कभी मैं बनूँ राम, तो कभी मैं रावण।
    जब तक प्रेम के वश में रहूँ, मैं रहूँ राम,
    प्रेम को वश में 'गर करूँ तो मैं रावण।

    परमार्थ जियूँ जब तक, मैं रहूँ राम,
    पर हो 'गर स्वार्थी जीवन, तो मैं रावण।
    सारा जग मुझमें है, मै सारे जग में
    अहम से निकलूँ 'गर, मैं हर कण में।

    मैंने कल जन्म लिया था यहाँ
    कल मुझे ही छोड़ना है ये जहाँ।
    हूँ जगत के इस पार आज मैं ही,
    उस पार भी जाना है कल मुझे ही।

    मै नश्वर हूँ, जल जाएगा ये शरीर,
    मैं ही हूँ आत्मा, जो रहेगा अमर।
    मैं हूँ शून्य, उसका पूर्ण भी स्वयं ही
    शून्य - पूर्ण की अनंत कड़ी भी मैं ही।

    मैंने पाप किया है, किये पुण्य भी
    मैंने कष्ट दिया है, भोगी भी मैं ही।
    जो भी लूटाया है, उसे ही पाया भी,
    कर्म हूँ मैं और परिणाम भी मैं ही।

    मैं ही सत्य हूँ और मैं ही मिथ्या,
    मै ही नाविक हूँ और मैं ही खेवैया।
    मैं ही प्रश्न हूँ और मैं ही उसका उत्तर
    जो भी ढूँढू वह सब है मेरे ही भीतर।

    जो अँधेरापन है, उसकी रौशनी मुझीमें
    जो मेरी मंजिल है, राह उसकी मुझी में।
    मुझमें ही है अमृत, विष भी है मुझी में
    जो दर्द है भीतर, उसकी दवा भी मुझी में।

    मैं विजयी हूँ और पराजित भी मैं ही
    प्रेम को जीता है मैंने, हारा भी प्रेम से ही।
    मैं ही शोला हूँ, और शबनम मैं स्वयं ही,
    मैं ही कर्त्ता हूँ, उसका स्त्रोत औ' प्रारब्ध मैं ही।
    ©amritsagar