#prakriti_iipsaa

58 posts
  • prakriti_iipsaa 8w

    #prakriti_iipsaa
    18/03/2022. 03:31pm

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    "जी लो जी भरके अधूरे को, पूरे में क्या रखा है!"

    (जिंदगी को कई संज्ञाएं दी गई हैं आज मैं जिंदगी को 'अधूरा' कहना चाहूंगा क्योंकि जब तक आप जीवित हो तब तक जिंदगी चलती रहती है, मरने पर पूर्ण हो जाती है। ऐसे ही अधूरी मुलाकात, अधूरे ख्वाब, अधूरे लक्ष्य, अधूरे एहसास भी पूर्ण होने पर कुछ पल में आपके लिए महत्वहीन हो जाते हैं और नये ख्वाब, एहसास उत्पन्न होने लगते हैं इसलिये इन अधूरे पल या एहसास को जी भर के जीना चाहिए। जी भर के जीने से तात्पर्य यह है कि पूरे मन से जीना चाहिए, जैसे आप अपने लक्ष्य के लिए पढ़ाई कर रहे हैं तो पूरे मन से पढ़ना चाहिए। यदि आप ऐसा नहीं करते तो आप जीवित तो हो पर जीने की कोशिश से विहीन हो,विस्मय या अवसाद के मार्ग पर जीवन को अग्रसर कर रहे हो।)
    ©prakriti_iipsaa

  • prakriti_iipsaa 9w

    #prakriti_iipsaa
    16/03/2022. 02:42pm

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    है दुआ या ख़ुदा

    ऐ जिंदगी
    कुछ पल ठहर के चल दिया
    तो है दुआ या ख़ुदा....,

    शक्ल झूठ है बिखरती हुई अरमाँ,
    चलों लूट लें अब ख़्वाबो का
    हर समाँ,
    मुस्कुराती है रूह या ना
    है किसको पता,
    भर के बाहों में खुशी के पल,
    एहसास मीठा मीठा सा
    ले के चल, है दुआ
    या ख़ुदा....

    सुकूँ जो रूह को मिले
    ग़म -खुशी में क्या फासला?
    दर्द का भी तो है अलग सा मज़ा,
    बन सकूं जो मुस्कुराने की इक वजह
    ये मेरी हंसी ये मेरी रज़ा,
    या खुदा या है दुआ....!
    ऐ जिंदगी
    कुछ पल ठहर के चल दिया
    तो है दुआ या ख़ुदा.....!
    ©prakriti_iipsaa

  • prakriti_iipsaa 9w

    #prakriti_iipsaa
    08:24pm. 11/03/2022

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    "किसी से इतना भी ना लगाओ
    दिल, दिल बड़ा नाज़ुक होता है....
    हर एहसास लौटकर कांच के टुकड़े सा चुभता है
    गर बिछड़ गये तो सम्भलना ... मुश्किल होता है....
    समेट ना पाओगे खुद को, खुद को
    ढूंढ़ना यूं ही ..पेचीदा बड़ा
    ज्यों मुश्कबू से मुश्क.. मृग ढूंढ़ता है...!"
    ©prakriti_iipsaa

  • prakriti_iipsaa 12w

    #2_4_lines
    #prakriti_iipsaa
    21/02/22. 2:35pm
    कृपया टिप्पणी ना करें।��

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    देखो ना इस कदर ....आँखें तेरी साक़ी हैं,
    दरख़्त बूढ़ा हूँ फिर भी मुझमें.... नमी अभीं बाकी है!
    लहराओ ना जुल्फें घनें बादलों सी......घनी काफी हैं,
    एहसासों के फूल अरमाँ की टहनियों से झड़ गये कुछ... तो बचे काफी हैं!
    ©prakriti_iipsaa

  • prakriti_iipsaa 15w



    दरमियाँ हमारे...कहानी कम, सिर्फ जज़्बातें रहीं हैं,
    तुम पास ही रहे...हर दफ़ा, अधूरी मुलाकातें रहीं हैं!
    ©prakriti_iipsaa

  • prakriti_iipsaa 24w

    बाल सौंदर्य

    ऐ बहती शीतल मारुत सुन....
    मन उड़ता पंक्षी
    एहसास दीवानी तितली सी
    धड़कन संगीत-मधुर मेरे
    छू कर मुझको तूं भी सपने बुन.....

    खिलखिलाहट से उर-हर्ष भरे
    नयनों में प्रीत-समंदर लहरे
    शब्द सुखद निर्झर से
    ऐ ठहरे अम्बु स्वर भर ले
    पल-पल में कलकल की धुन.....

    अलक निराले अविरल से
    लहराते बलखाते मुखमंडल पे
    कुछ अविरत कुछ अल्हड़ से
    मानो प्रेम परस्पर पल्लवित हुए
    ऐ वारिद तूं भी अपनी अवनि चुन...

    होंठ-पंखुड़ी खुलते शोभित अभिमत ले
    दौड़े मधुकर सुमन छटा समझ कर के
    धरती-अम्बर मंजुल मंजुल
    ऐ तरुवर कोमल किसलय धर ले
    वन- उपवन में अब तूं भी खिल जा रे प्रसून...

    रूप निराली छटा बिखेरे
    चहके घर, आंगन में हो जो मेरे स्वर
    सविता की सुनहरी रश्मि, चंदा की मधु-चांदनी
    सब पलपल मुझमें सिमटे
    माँ तूं ममता भर ले, लोरी कर गुनगुन......

    ---श्याम
    ©prakriti_iipsaa

  • prakriti_iipsaa 32w

    #shyam_jee_mirzapuri
    #prakriti_iipsaa
    03/10/2021. 22:17
    ________________________________

    ★कुछ कर...फिर चले जाना★


    जिंदगी मौत से ये दास्ताँ सुनाये
    आ गले लगा ले फिर चले जाना,
    " " " " " "
    घर पुकारे कुछ पल ठहर
    निभा ले फ़र्ज़ रिश्तों के; फिर चले जाना,
    दिल की धड़कन पुकारे
    वतन के लिए कुछ कर; फिर चले जाना,
    राह में फटे कपड़ों में खड़े नन्हे-मुन्हें
    उनकी आँखें करें इशारा कुछ कर; फिर चले जाना,
    ये दुनिया तेरी नहीं अहं लोगों का सताये;
    स्वभिमान कहे कुछ कर; फिर चले जाना,
    गरीब को देख लालच की पट्टी बांधे इंसानियत
    मुस्कुराये, तो गरीबी कहे कुछ कर; फिर चले जाना,
    हवस भरी नज़र जब जिस्म चीर जाये
    दर्द अश्रु बनकर कहे कुछ कर; फिर चले जाना,
    लिख-लिख कर कलम थक जाये
    जो गीत पन्नों पर ना आयें वो कहें कुछ कर; फिर चले जाना,

    जब ख़ूँ नसों में सुलग जाये
    जिंदगी मौत से ये दास्ताँ सुनाये
    आ गले लगा ले फिर चले जाना।
    _________________________________

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    रोज-रोज की आपाधापी में मन अक्सर बहक ही जाता है इसे सुकूँँ की याद कहाँ? हाँ इसे बहलाना पड़ता है...

    कुछ पल ठहर कर
    छत पर टहल कर
    चाँद-तारों पर नज़र कर
    मेघ से मयंक का निकलना छिप-छिप कर
    तितलियों का मडराना फूलों पर
    भौरों का परागण
    पंक्षियों का चहचहाना इतरेतर
    रवि रश्मि की
    अठखेलियां जल पर
    तिनकों के शबनम पर
    स्पर्श मारुत का तन पर
    शीतल अति अहसास कर
    कुछ पल ठहर कर
    निकलना फिर अगली सुबह
    बन के दिवाकर।
    ©prakriti_iipsaa

  • prakriti_iipsaa 43w

    आ मिल के चलूँ.....!

    कफ़स जिंदगी की कितनी
    मौत से ये आरज़ू करूँ...,
    एक पयाम बाकी रहा
    सोचा तुम्हें भेज दूँ...,
    तुम आओगे या ना
    दिले जुस्तजू करूँ...,
    गुमसुम सा दिल ये सोचे कि
    दूर से आये पयोद से;
    पता तेरा पूछ लूँ...,
    फूलों से; खुशबू आयी या ना
    तेरी पूछ लूँ...,
    कलियों से; नाजुकता का अनुभव
    हुआ या ना तेरा पूछ लूँ...,
    भौर से; गुंजन सुनाई या ना
    तेरी पूछ लूँ...,
    खग से; खिलखिलाहट सुनाई या ना
    तेरी पूछ लूँ...,
    हवाओं से; एहसास शीतल
    आया या ना तेरा पूछ लूँ...,
    धरती से; पग स्पर्श के कंपन से तेरे
    गुदगुदी आयी या ना पूछ लूँ...,
    राह कटते नहीं; तुम दूर कितने
    रास्तों से पूछ लूँ...,
    दिन बितते नहीं; तुम मिलोगे कब
    दिवा से उस घड़ी का वक्त पूछ लूँ...,
    होगे तुम रूबरू या कहो
    ख्वाबों ढूंढ लूँ...,
    दिल में हसरत है कुछ तुमसे कहूँ या
    फिर चलूँ...,

    कफ़स जिंदगी की कब तलक
    मौत से ये राज जान तो लूँ...,
    आ मिल के चलूँ....!!!!!!!!!!!!!!!!
    #shyam_jee_mirzapuri
    #prakriti_iipsaa
    19/07/2021 20:41

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    आ मिल के चलूँ...
    कफ़स जिंदगी की कितनी
    मौत से ये आरज़ू करूँ....⬆️
    ©prakriti_iipsaa

  • prakriti_iipsaa 55w

    #prakriti_iipsaa
    22/04/2021. 03:49pm.

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    कोरोना☠️

    हतप्रभ संसार!
    अरे! नीरव निराकार
    अदर्श वायु सम
    अविरत अविसर्गी
    हाहाकार को आतुर
    शत्रु भयंकर
    निरंकुश निरंतराल
    तड़ित गति ले
    प्राणों का प्यासा
    दौड़ रहा,
    हट जाओ....!
    सजग हो जाओ...!
    सम्भल जाओ...!
    लुकाछिपी खेल
    वो प्राणों को निगल
    ताकत बढ़ा रहा,
    छीप जाओ...!
    हाथों पे जहरीले द्रव्य
    बदन पे मुखौटे लगा
    थोड़ा स्थिर हो जाओ
    ताकि भ्रमित हो
    अपने प्राण लेने
    की मनसा से
    व्याकुल हो
    मृतप्राय हो
    तुमसे हार मान ले..!
    देखो कब्रिस्तानों में
    जगह नहीं बची
    श्मशानों की आग
    कैसे धधक रही
    लाशों पे लाशें
    वियोग के दृश्य
    क्रंदन के स्वर
    क्या तुम्हें विचलित
    नहीं करते...!
    सजग हो जाओ...!
    सम्भल जाओ...!
    ©prakriti_iipsaa

  • prakriti_iipsaa 56w

    #prakriti_iipsaa
    19/04/2021. 09:32am.

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    मन मीरा
    तन श्याम भयो
    उमंगों में राधा
    अधरों पे मुस्कान दयो
    मैं ना चाहूँ तुमको
    फिर काहे को तंग कियो
    तुम वृंदावन वासी
    हम काशी में ठाठ ठयो!

    द्वापर में दुर्योधन एक
    कलयुग में तमाम भयो
    चहुओर घोर दुशासन
    भीम सरिस नहीं पहलवान भयो
    सच का चीरहरण
    विश्वास में घात आम भयो
    बोल जरा तूं कान्हा रे
    छलिया छलिया काहे बदनाम भयो!

    छल को छल से; बल को बल से
    मात दयन को
    पापियन के संहारन को
    संत जनो के तारन को
    मीरा के उबारन को
    फिर द्रौपदी के न्यायन को
    विराट रूप लै आ परयो
    रे कान्हा कान्हा रे!
    मन मोरा मीरा....
    तन श्याम भयो.....!!!
    ©prakriti_iipsaa

  • prakriti_iipsaa 56w

    #prakriti_iipsaa
    16/04/2021 17:03

    इतनी जल्दी मैं कहाँ जा रहा हूँ,
    जज्ब़ात तुम तक पहुंचे ही नहीं
    कैसे सोचा कि मैं जा रहा हूँ.....!
    जिंदगी में फ़कत सोता रहा हूँ,
    अभी तो जगा हूँ जहाँ मुझको देखेगा
    कैसे सोचा कि मैं जा रहा हूँ ....!

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    शमा को जलाये रखना, चरागों से दूर जा रहा हूँ
    काफिए़ को रदीफ़ से मिलाये रखना, कि कलाम
    आखिरी गा रहा हूँ....
    दिलों में प्यार जगाये रखना, होके चूर जा रहा हूँ
    अच्छाई को गंदगी से बचाये रखना,कि ख्वाहिश
    आखिरी सुना रहा हूँ....
    होश सम्भाले रखना, होके यूं मजबूर जा रहा हूँ
    मुस्कान होठों पे रखना कि फिर कोई सुकूँ भरी
    शायरी सुना रहा हूँ....
    आँखें नम मत रखना, जिंदगी से दूर जा रहा हूँ
    दिल के कोनों में कुछ यादें हैं सम्भालना,पूरा का
    -पूरा कहाँ जा रहा हूँ...
    नटखट अदाएं यूं रखना, झलक लिए जा रहा हूँ
    हौसला हमेशा बनाये रखना कि संदेश आखिरी
    सुना रहा हूँ....
    हँसी में गम उड़ाये रखना,डर के कहाँ जा रहा हूँ
    इंतजार खत्म हुआ ना रोकना कि मौत से
    मुलाकात करने जा रहा हूँ....
    अब मुझे ना खोजना,रिश्ता तोड़ कहाँ जा रहा हूँ
    वक्त ने मिलाया था वक्त जुदा कर रहा है सो तेरी
    याद लिए जा रहा हूँ.....
    समाँ को यूं बनाये रखना,नज़र लगाये जा रहा हूँ
    ध्यान रखना, आशा की शमा बुझने ना पाये कि
    जानबूझकर कर थोड़ी जा रहा हूँ....
    ©prakriti_iipsaa

  • prakriti_iipsaa 57w

    मैं तो राधा....

    वो मयूर बन पीछे आये
    मैं मदमस्त मयूरी सी नाचूँ
    वो म्याऊँ-म्याऊँ चिल्लाये
    मैं डाल-डाल उड़ जाऊँ
    पल अंतस् से पूछे; सुरभि किस अहसास की.....,
    मैं बोलूं मैं क्या जानूं; मैं तो राधा अपने श्याम की!

    वो श्वेत हंस इतराये
    मैं पंख-पंख जल बरसाऊँ
    वो गर्दन मोड़ देखे जाये
    मैं टीला-टीला उड़ती जाऊँ
    पल अंतस् से पूछे; ये शरारत किसके नाम की....,
    मैं बोलूं मैं क्या जानूं; मैं तो राधा अपने श्याम की!

    वो भौंरा बन इठलाये
    मैं सूरजमुखी सी शर्माऊँ
    वो गुनगुन गीत सुनाये
    मैं हौले-हौले पंखुड़ी फैलाऊँ
    पल अंतस् से पूछे; सकुचाहट किसके नाम की...,
    मैं बोलूं मैं क्या जानूं; मैं तो राधा अपने श्याम की!

    वो विस्तृत काला अंबर हो जाये
    मैं धरती सी हरियाली धर आऊँ
    वो सविता का गोला उड़ाये
    मैं चंदा सागर में तैराऊँ
    पल अंतस् से पूछे; ये अनबन किसके नाम की....,
    मैं बोलूं मैं क्या जानूं; मैं तो राधा अपने श्याम की!

    वो मजदूर हो जाये
    मैं भी मजदूरन बन जाऊं
    मैं मुस्कुरा के काटूं फसल
    वो बोझ उठाकर देखे जाये
    पल अंतस् से पूछे; ये उमंग किसके नाम की.....,
    मैं बोलूं मैं क्या जानूं; मैं तो राधा अपने श्याम की!

    वो फूलों को सिंचने वाला माली हो जाये
    मैं भी झाड़ू-पोछा वाली हो जाऊँ
    मैं झरोखे से देखूँ
    वो उपवन से नयन लड़ाये
    पल अंतस् से पूछे;नयनों में बात किसके नाम की.,
    मैं बोलूं मैं क्या जानूं; मैं तो राधा अपने श्याम की!

    मैं नैनो से उतरूँ
    वो BMW में मुस्काये
    मैं हँस के जुल्फें फेरूँ
    वो सामने आ जाये
    पल अंतस् से पूछे; ये हँसी किसके नाम की....,
    मैं बोलूं मैं क्या जानूं; मैं तो राधा अपने श्याम की!

    मैं उद्दीपन उसकी;
    वो मेरी प्रतीति हो जाये
    मैं पायल छनकाऊँ
    धड़कन उसकी शोर मचाये
    मैं तार वो गिटार
    नजरों के स्पर्श से अंतर संगीत सुनाये

    पल अतस् से पूछे; ये चाहत किसके नाम की....,
    मैं बोलूं मेरे श्याम की, श्याम मेरा; मैं राधा उसकी!
    ©prakriti_iipsaa

  • prakriti_iipsaa 57w

    #prakriti_iipsaa
    10/04/2021 07:39pm

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    दर्शक, वादक,कृतिकार बहुत हैं पर
    एक शख्स जो खामोशी समझ सके; वो साथ चाहिए,
    जीने के लिए सिर्फ अपने ही नहीं
    कुछ खुशबू, कुछ अपनेपन का मधुरिम अहसास चाहिए,
    पर परवाज़ को फड़फड़ाते अक्सर हैं
    पर अंबर में उड़ने के लिए जरूरी ताक चाहिए,
    पैरों तले जमीं कब फिसल जाये; सम्भलते हैं
    देख आसमां को पलकें झुकाते हैं; जमीं से भी तो आस चाहिए।
    ©prakriti_iipsaa

  • prakriti_iipsaa 57w

    #prakriti_iipsaa
    09/04/2021. 22:48
    अमृत पीते रहिए, कोरोना से बचे रहिए। ��

    शशिलेखा=चंद्र किरण, गिलोय
    शुभ्रा= श्वेत, सुंदर नारी
    श्यामल =काली मिर्च, काला भौंरा,धुंधला
    क्वाथ=काढ़ा, कष्ट
    आदी=अदरक, अभ्यस्त, आदत
    लौंग=एक फूल, नाक-कान का आभूषण
    वृंदा=राधा, तुलसी
    अमृतसार=अमृत का सत्व, अंगूर, मक्खन

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    द्विअर्थी

    श्यामल शशिलेखा सलिल-शुभ्रा वृंदा अरु लौंग-आदी, सामंजस्य अद्भुत हो तो क्वाथ अमृतसार होवे!

    १- काली मिर्च, गिलोय, श्वेत(स्वच्छ) जल, तुलसी और लौंग एवं अदरक का अनोखा मेल हो तो काढ़ा अमृतों का भी अमृत हो जायेगा।
    २- काला भौंरा, चंद्रमा की किरणें, जल की तरह श्वेत सुंदरी
    राधा आभूषणों की शौकीन, ऐसा अद्भुत सामंजस्य हो तो दर्द(कष्ट) मक्खन सा हो जायेगा।
    ©prakriti_iipsaa

  • prakriti_iipsaa 57w

    #prakriti_iipsaa
    #girls
    #boys
    #thinking
    #parents
    09/04/2021. 12:14am
    ______________________________
    "यह जरूरी नहीं कि आप लड़की होते तो आपको ज्यादा प्यार और सहानुभूति मिलता या फिर
    आप लड़का होती तो घूमने-टहलने, रात में देर से आने और मन की करने की आजादी होती। यह तो आपके माता-पिता, आपकी परिस्थिति और आपके स्वभाव एवं विचार पर निर्भर करता है।"

    ������
    जिंदगी का इक ताना-बाना
    नित्यशः माँ का हाथ बटाना
    इजाजत लेकर बाहर जाना
    जाने से पहले एक आवाज
    सुन थोड़ा, जल्दी आ जाना
    जरा सी देर जब हो जाये
    पल-पल का हिसाब बताना
    पिजड़े की जिंदगी का क्या
    खुले आसमाँ में मुझको भी
    है पंक्षियों सा पर फैलाना।।।।

    ��‍��‍��‍��
    सोच किसकी कैसी है,
    किसके मन में क्या है!
    समाज बदलना मुश्किल है
    सो मन में चिंतन तेरा है!
    हर डांट में परवाह तुम्हारी,
    तुझको खोने का डर है!
    ना पैरों में बेड़ियां हैं,
    ना ही यह कोई बंधन है!
    ये तो प्यार और फ़िकर का
    बस थोड़ा सा संगम है।।।।।।

    काश अगर मैं लड़का होती
    मेरे यारों की इक टोली होती
    टोली में कुछ मस्ती
    अपनी भी एक हस्ती होती
    टहलती रात या दिन में
    ना कोई रोक-टोक
    ना ही डर की बस्ती होती
    बना-बनाया खाकर सोती
    जो चाहे वो करती
    जिंदगी कितनी अच्छी होती!!!!!

    बहुत हुई कपोल-कल्पना
    क्या कुछ ऐसा होता
    करने पड़ते बाहर के सारे काम
    हर बिगड़ी चीज टीवी, फ्रीज, पंखा
    सब बनवाना पड़ता
    घर के मरम्मत से लेकर
    हर जिम्मेदारी निभाना पड़ता
    गलती करने पर माँ की डांट
    पापा के चाटे भी खाने पड़ते
    एक काम जो छूटता
    तो गरजते बादल से होते टंकार
    किसी काम का नहीं तूं
    चल हट नालायक निकम्मा....!!!!!

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    नहीं कभीं नियमित सा
    नित दिन काम नया नया
    सोचो होगी थोड़ी मस्ती
    फिर देखो अब समय कहाँ
    नहीं शिकायत कभीं किसी से
    पर ना समझे कोई अपना
    डांट की तो आदत सी
    फिर फर्क क्या पड़ता
    पापा का सर पे हाथ
    माँ का चुम्बन तो बचपन में छूट गया...!!!!

    ‍‍‍
    ना कुछ भूला है, ना कुछ छूटा है,
    सिर्फ तुझे राह पकड़ाना है,
    हम तो माँ-बाप हैं, तेरे दुश्मन नहीं,
    हमें अपना फर्ज निभाना है।।।

    काश अगर मैं लड़की होता
    माँ संग सीरियल देखता
    खूब गपशप गपशप करता
    माँ का प्यार, पिता का प्यार
    सबका दुलार पाता
    माँ के साथ बाजार घूमता
    और आराम फरमाता...।।।
    ऐसा क्या? उठ जल्दी सुबह हो गई है
    अच्छी-खासी नींद में
    माँ की बेसुरी आवाज गूँजती
    नित सारे काम समय पर करने पड़ते
    अतिथियों के आवभगत में
    पकवान भी बनाने पड़ते
    तुझको क्या परवाह
    तेरा घर है क्या ये
    लोगों की ऐसी बातें सुनकर
    तेरे मन में क्या टीस नहीं उठती?
    तुझको जाना होगा दूर
    एक दिन अपनों से
    असहज भाव, नम आँखें क्या सहज लगती?!!!!

    "श्रमिक हो तो खाने के लिए
    कमाना ही पड़ेगा,
    किसान हो तो खेतों में जाना
    ही पड़ेगा,
    व्यवसायी हो तो ग्राहक
    बनाना ही पड़ेगा,
    अपने आप से कौन भाग सकता है?"
    ©prakriti_iipsaa

  • prakriti_iipsaa 58w

    #prakriti_iipsaa
    03/04/2021. 22:17pm

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    "आप मुझे अपने आँखों के पास ही क्यों रखना चाहते हैं? क्या प्यार का ये हद जायज है? क्या आपने कभीं ये सोचा कि कहीं मुझे कैदी सा एहसास तो नहीं हो रहा है या फिर मेरी भी इच्छाएं हो सकतीं हैं? कहीं आपका मेरे प्रति ये प्यार आपको स्वार्थी बनाकर मुझे प्रताड़ित तो नहीं कर रहा है? एकबार अंतर्मन से पूछकर बताना !"
    ©prakriti_iipsaa

  • prakriti_iipsaa 59w



    पलकों के कोरों पर
    शबनम से एहसास सजाये
    क्यों बैठे हो तुम गुमसुम से मुर्झाये मुर्झाये

    आने-जाने की रीत पुरानी
    जिंदगी का वही खिलाड़ी
    जो गम के आँसू मोती कर मुस्काये

    जो दुनिया छोड़ गये वापस ना आयेंगे
    प्यार भरे दिल से, सम्मान भरी नज़र से
    कर याद उन्हें हम क्यूँ ना आगे बढ़ते जायें

    साथ कोई गर छोड़ गया
    पाकर धोखा कयूँ हो मन उलझाये
    दो पैर-हाथ हमारे भी क्यूँ ना हम उनसे आगे हो जायें

    बिखरे ख्वाबों को
    देख क्यों हो अश्क बहाये
    नहीं हौसला नहीं धीरज क्या तुममें
    चलो फिरसे नयें अरमां जगायें

    हार हार कर पस्त हुये
    मृतक समान क्यूँ अस्त-व्यस्त हुए
    अपनी कमजोरी को ताकत कर
    क्यूँ ना आसमां में हम पर फैलायें

    लोग जब ताने दें
    अपने भी मुह टेढे़ करें
    तो वक्त बुरा नहीं, यह वक्त तुम्हारा है
    तुम क्या हो तुमको अब दिखलाना है

    बोलो....
    पलकों के कोरों पर
    शबनम से एहसास सजाये
    क्यों बैठे हो तुम गुमसुम से मुर्झाये मुर्झाये
    ©prakriti_iipsaa

  • prakriti_iipsaa 59w

    जिंदगी

    कुछ ज्यादा नहीं; कुछ कम नहीं,
    मैं जिंदगी हूँ जिंदगी सनम नहीं!

    ढूंढ़ते क्यों हो बेसब्र से दर-ब-दर,
    ढूंढ़ लो चाहे जिधर वहां हम नही!

    साथ छूटे गर किसी का किसी से,
    दूर जाऊँ मैं भी ऐसी हमदम नहीं!

    तेरे बिखरे ख्वाबों में बिखरी सी,
    तेरे गम में, खुशी में तुझ संग रही!

    ना खुबसूरत चेहरों ना वादियों में,
    तूं जहां भी रहा, वहां सुगम रही!

    तूं रहा जैसे-तैसे, वैसे ही मैं रही,
    तुझसे अलग नहीं तुझ सम रही!

    तेरे जीत में जीती, हार में मरती,
    हर हालत में चलती दमख़म रही!

    तुझमें तम, दीप्ति, प्रेम, तर्पण भी,
    मैं तुझमें एहसासों की सरगम रही!

    कुछ ज्यादा नहीं; कुछ कम नहीं,
    मैं तेरी जिंदगी तुझमें हरदम रही!!
    ©prakriti_iipsaa

  • prakriti_iipsaa 59w



    नज़र औरत पर डालने से पहले पुरुष जब शर्मिंदा होगा
    ये दुनिया खुबसूरत होगी पता जब प्यार का मायना होगा

    जब शादी बंधन ना होगी; खुशियों का एक तोहफ़ा होगा
    ये दुनिया खुबसूरत होगी_ _ __________ _मायना होगा

    जब हर औरत माँ,लड़की बेटी-बहन, हर घर अपना होगा
    ये दुनिया खुबसूरत होगी ________ ___मायना होगा

    ना ससुराल होगा ना मायका, सारा जहाँ ही अपना होगा
    ये दुनिया खुबसूरत होगी _ _ _________ _मायना होगा

    फटे कपड़े वालों के भी खयाल अच्छे होते हैं पता होगा
    ये दुनिया खुबसूरत होगी _ ________ _ _ मायना होगा

    जाने अनजाने में हम एकदूजे के लिए ही हैं पता होगा
    ये दुनिया खुबसूरत होगी _ _ _ _ ______ मायना होगा

    ना ईर्ष्या ना अहंकार,संस्कृत संस्कृति और सदाचार होगा
    ये दुनिया खुबसूरत होगी_____ __ __ __ _ मायना होगा

    लफ्ज़ होठों से निकले; इसके पहले असर का पता होगा
    ये दुनिया खुबसूरत होगी _ _ _ _ ______ मायना होगा

    ना काला ना गोरा सरस-भाव के संगम से भरा जहाँ होगा
    ये दुनिया खुबसूरत होगी________ ____ _ मायना होगा

    ना मैं ना तुम ना हम होंगे हमारे रंगो से सजा जहाँ होगा
    ये दुनिया खुबसूरत होगी पता जब प्यार का मायना होगा!!!
    ©prakriti_iipsaa

  • prakriti_iipsaa 74w

    अल्हड़= सरल, मनमौजी

    #prakriti_iipsaa
    15/12/20
    शुभरात्रि ��

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    मेरे छंदों में प्रबंधन ना मिले,
    कविताएं लय और तुक से रहित हों,
    गज़लों में काफ़िया-रदीफ़ ना मिले,
    तो समझ लेना उनमें अल्हड़ से तुम हो।।
    ©prakriti_iipsaa