#prayasss25

11 posts
  • kanchanjha 91w

    आप सभी की रचनाएँ अनुपम हैं। पढ़कर मन गदगद हो गया। विजेता तो सभी हैं। सभी के लिए जोरदार ��������
    अगली कड़ी के संचालन के लिए मैं आमत्रिंत करती हूँ @sparkling_ji को।
    #prayasss25
    #prayasss26

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    #prayasss 26
    संचालक _@sparkling_
    ©kanchanjha

  • neha_ek_leher 92w

    फूल

    फूलों की खूबसूरत सी है कहानी
    बस पल दो पल की उनकी जिंदगानी
    सफर उनका हसीन है
    कभी चढ़े सिर ईश के
    कभी चरणों की धूल से
    कभी वीर शहीद पे
    कभी प्रेम प्रतीक से
    कहीं खुशियों का आगमन लिए
    कहीं ग़म की श्वेत चादर चढ़े
    टूट के खुद बिखर गए
    समाप्त स्वयं को कर गए
    दे मुस्कान होठों पर
    खुद में ही सुख गए।

    ©neha_ek_leher

  • goldenwrites_jakir 92w

    गुलदस्ता फूलों

    दुनियां में अनेक तरह के लोग सब होते एक साथ
    लगते ऐसे जैसे हो फूलों का गुलदस्ता
    खुदा के लिए ये दुनियां एक खिलता हुआ चमन
    हम रंग बिरंगे फूल गुलशन के महेकता पृथ्बी का ये आँगन


    ©goldenwrites_jakir

  • loveneetm 92w

    फूल

    वैजयंती फूलों की माला,
    राधा रहीं बनाएँ,
    नटवर नागर गिरधर के,
    कंठन रहीं सजाएँ।

    चरणों में मोहन माधव के,
    अर्पण करती पुष्प,
    राधा मन भक्ति भर के,
    चित अपना करती शुद्ध।

    नयनों में छवि गोपीनाथ की,
    हर दम रही बसाए,
    विरह से कातर राधा बस,
    नयना नीर बहाएँ।

    प्रेम भाव रख कृष्ण कन्हैया,
    यमुना तट पर आएँ,
    वेणी में राधा रानी के,
    सुंदर सुमन सजाएँ।
    ©loveneetm

  • goldenwrites_jakir 92w

    #av ume praya

    आज के दौर में वो पुरानी फिल्मो की याद आती है
    जहां डाकुओं का आतंक रहता था ज़ब चाहे जिसे वो लूट लेते हर तरफ इंसानों की खामोशियों का बलात्कार होता था
    बही दौर आज भी है सब के सब खामोश है कुछ करने के लिए कुछ बदल ने के लिए किसी के पास समय ही नहीं है
    सब अपनी दुनियां में मस्त मोला है
    फिर बदलाब केसे आएगा ये सबाल बेकार है इसका जबाब सोइ हुई आत्माओ के पास नहीं है
    ये सब वो पुतले है जिनमे जान है पर ज़मीर नहीं
    तभी ये सब अपने कदम को पीछे की और बढ़ाते हैं
    कोई नहीं चाहता इसे बदलना और ना खुदको बदलने का ये प्रयास करते है इन सबको इन सब की आदत हो गई है ,,
    ये एक फ़िल्म की तरह है यहाँ कुछ ही हीरो है बाक़ी सब गांव की वो भीड़ जो सिर्फ तमाशा देखती है हीरो अकेले ही लड़ता है और जनता खामोश रहती है बही खामोशियाँ आज mirakee पर abhivyakti umeed prayasss की पाठशाला पर नजर आता है जहाँ कुछ लोग लड़ रहे है वाकई सब तमाशा देख रहे हैं
    मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पढ़ता वो क्या मेरे बारे में और मेरे साथी लोगो के बारे में क्या सोचतें हैं हम सब मिलकर कुछ करना चाहते है जो आप लोवो के बिना अधूरा है उम्मीद है एक दिन सबेरा जरूर आएगा उसी प्रयास में अभिव्यक्ति की मशाल उज्वल है .. कल ये मशाल सूरज की तरह सबके दिलो में रोशन होगी उसी इंतजार में हम सब साथ खड़े हैं


    ©goldenwrites_jakir

  • kanchanjha 92w

    सर्वप्रथम मैं बहुत बहुत आभार व्यक्त करती हूँ आदरणीय @rnsharma65 जी का,अगली कड़ी के संचालन का कार्य भार मुझे सौंपने के लिए। साथ ही मैं सभी विद्वानों, गुणीजनों, कवि मित्रों का हार्दिक वंदन अभिनंदन करती हूँ।
    अगली कड़ी #prayasss25 का विषय है "फूल "
    रंग बिरंगे फूल, तितलियाँ, बाग -बगीचा किसे आकर्षित करता। तो आप सभी अपने भाव व्यक्त कीजिए अपनी रचना के माध्यम से।
    ����������������
    ,@piu_writes, @goldenwrites_jakir, @neha_ek_leher, @loveneetm
    #prayasss24

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    विषय-फूल
    ©kanchanjha

  • rnsharma65 92w

    Prayasss25

    आप सब बहुत सुंदर वर्णन किए हैं । सब के रचना एक से एक बढ़कर सराहनीय हैं । #Prayasss25 का संचालन दायित्व लेने के लिए मैं @kanchanjha .. जी को अनुरोध कर रहा हूं ।
    ©rnsharma65

  • rnsharma65 92w

    Prayasss25

    प्रिय सज्जनों सप्रेम नमस्कार । हमें संचालन दायित्व सौंपने का बहुत समस्या होता है इसीलिए की बहुत कम साहित्यिक अपने अपने रचना पोस्ट करते हैं और प्राय सभी बार बार दायित्व निभाएं हैं । अतः आप सभी से अनुरोध अपने तरफ़ से दायित्व निभाने के लिए मुझे कॉमेंट कीजिए ।
    बहुत बहुत धन्यवाद ।
    ©rnsharma65

  • kanchanjha 102w


    कांटो की उम्र बड़ी लम्बी, पल भर के लिये गुल का जीवन।
    कांटे देते हैं जख्म सदा,सुरभि सुमन आह्लादित मन।

    कांटे रह गए सदा द्रुम पर,और फूल ईश शृंगार बना।
    कांटों को सराहा कब किसने, हाँ फूल गले का हार बना।
    दीघार्यु शूल से उत्तम है,फूलों के सदृश क्षणिक जीवन।

    कांटा कब वंश बढ़ाता है,फल सदा फूल पर आता है।
    देता जो दर्द सदा सबको,सर्वदा पृथक रह जाता है।
    मत बनो क्रूर कांटों के सम,फूलों से सीखो प्यार अमन।

    अपने आकर्षण से ही,सुमन सभी को भाता है।
    कोमल स्वभाव के कारण ही,यह प्रेम प्रतीक कहाता है।
    चाहेगा कौन भ्रमण करना, बिन सुमन,शूल से सज्जित वन।
    ️️️️️️️️️
    ©kanchanjha

  • rnsharma65 108w

    फूल

    कर रहा था उपवन की सैर,
    कुसुम पौधों से था भरपूर,
    सुवासित फूल खिले थे हज़ार,
    मिलता था आनंद असीम अपार,
    उस समय मन में आया अद्भुत विचार,
    लग गया हृदय एक ही सुमन पर ,
    जो था अनोखा सुन्दर,
    भुल गया मैं सारा संसार
    और कर बैठा उससे अतुलित प्यार ।

    उस दिन से खुल गया मेरा मोहब्बत का द्वार ।
    ©rnsharma65