#prayasss45

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  • go_win_the_hearts 63w

    || सरकारी बनाम निजीकरण ||

    //सरकार//

    सत्ता, क्षमता और नीतियां
    कभी संप्रदाय, कभी जातियां।
    कभी पी.सी. कभी छल
    कभी धन, कभी बल।
    जिसमें लाभ वही चला
    कभी जन-धन कभी उजाला।
    जहां घाटा
    उसे टाटा।
    यह जैसा, वह वैसा (राजनीतिक दलें)
    इसको उसको सबको पैसा।
    जैसे चलता, वैसा तु चल
    जो चले कर अमल।
    फ़ाइलों की फसल,
    कुछ असल कुछ नक़ल
    कुछ चले, बहुत अचल।।

    //सरकारी//

    जहां है वहां नहीं
    ज्यादा गलत कम सही।
    जो भाया वहीं चला
    चाहे बुरा हो या भला।
    हर तरफ मुफ़्त की स्किम्
    अधिकारीयां खाए रिसवत के क्रीम।
    जिसे मिला वह सही
    जिसे नहीं कुछ भी नहीं।
    नहीं नहीं में भी कुछ है
    जो भी है सही है!

    //निजी//

    निजी विभाग
    सिर्फ लाभ।
    जिसका पैसा
    उसका भरोसा।
    सुख बिका हर सुविधाएं बिका
    जेब खाली तो सब फिका।
    हर सेवा उसने है ख़रीदा
    जिसने पहुंचाया है फायदा।
    गरीब बेचारा सरकारी
    निजीकरण है अत्याचारी।
    जंगल लुटा जमीन लूटा
    आदीवासी का सपना टूटा।
    फ़कीर बना और फ़कीर
    मलाई खाए बस अमीर।
    पूंजीपति का किस्मत चमका
    महालक्ष्मी घर मारती ठुमका।
    ये निजीकरण का मेहरबानी है
    बन्धु! यहां दुकान में बिकता पानी है।

    © गोविंद
    दिनांक: २१/०९/२०२०

    ||✿ o ✿||

  • rnsharma65 63w

    शिक्षा द्वंद्व

    मन में बार बार यह द्वंद्व होता उत्पन्न
    सरकारी शिक्षा से है बेहतर शिक्षा निजीकरण ।
    सोच विचार फैसला अवश्य है सच
    ध्यान दें शिक्षक लापरवाही या है और कुछ बिच ।
    सरकारी शिक्षा व्यवस्था है देय मुक्त
    किन्तु निजीकरण शिक्षा ज्यादा से ज्यादा देय युक्त ।
    सरकारी शिक्षा में विद्यार्थी मन मर्जी पढ़ता
    निजीकरण शिक्षा में विद्यार्थी अभिभावक दोनों पढ़ते ।
    सरकारी शिक्षा में अभिभावक ध्यान नहीं
    निजीकरण में अभिभावक के नज़र गृह कार्य पर सही ।
    गरीब अशिक्षित बच्चे सरकारी शिक्षा पाते
    समझदार विद्वान धनिक परिवार निजीकरण में पढ़ाते ।
    निजीकरण में शिक्षक का काम सिर्फ़ शिक्षादान
    सरकारी में शिक्षक पर साल भर विविध काम नियोजन ।
    जबतक अभिभावक विद्यार्थी शिक्षक नहीं मिलन
    तबतक सरकारी शिक्षा ठीक से हो नहीं सकती संपन्न ।।
    ©rnsharma65

  • tiwaripriti 63w

    निजीकरण

    शिक्षा के क्षेत्र में निजीकरण अच्छा है
    क्योंकि निजीकरण वाले अपना
    नाम बढ़ाने के लिए विद्यार्थी की शिक्षा
    वे बहुत ही अच्छे ढंग से कराते हैं
    सरकारी विद्यालय तो सिर्फ लापरवाही ही करते हैं
    बच्चों की भविष्य से तो सिर्फ खिलवाड़ करते हैं
    उन्हें तो सिर्फ पैसो से ही मतलब होता है
    पैसा तो अधिक ही प्राइवेट वाले लेते हैं
    सरकार को चाहिए सिर्फ फीस जो ये
    मनमानी लेते हैं उसको अगर कम करवा देते
    तो हर गरीब बच्चे भी कोशिश करके
    इन निजीकरण वाले विद्यालय में
    शिक्षा अर्जित कर सके।
    ©tiwaripriti

  • mittal_saab 63w

    Start reading from here..

    कई दिनों से देखता आ रहा हूँ कि निजीकरण का जोरोशोरो से बामपंथी विरोध कर रहे है, रविश कुमार tv पर अपने गले के साथ कपड़े फाड़ रहा है तोह कभी राहुल बाबा इसे देश के साथ गद्दारी बता दे रहे है

    ठीक है निजीकरण बुरा है, बहुत ही बुरा है लेकिन किसी भी सरकारी दफ़्तर में काम करवाने जाइए तो वहाँ के बाबु लोग ऐसे ट्रीट करते हैं जैसे वो स्वयं कृष्ण हैं और कस्टमर भिखारी सुदामा टाइप कोई जिसके वो फ़्रेंड नहीं हैं.

    सीधे मुँह से एक बात नहीं निकलती हैं इनसे. चाहे आप कोई टेलिफ़ोन के ऑफ़िस में जाइए या ब्लॉक के किसी ऑफ़िस में या ज़िला स्तर वाले ऑफ़िस या सरकारी बैंक में. लगता है कि इनके बाबु जी ने वो संस्था बना कर इनको समर्पित किया है कि लोग बेटा यहाँ राज करना, जो पब्लिक किसी काम के लिए आए उसे ख़ून के आँसू रुलाना. उसको अपने ऑफ़िस के इतने चक्कर कटवाना कि वो चक्कर खा कर या तो मर जाए नहीं तो टेबल के नीचे से तुम्हें घुस खिलाने पर मज़बूर हो जाए. आप जा कर देखिए सरकारी अस्पताल, कॉलेज, हाई-स्कूल या कोई भी ऐसी जगह जो सरकार के अधीन है आपको छठी का दूध न याद दिला दें तो कहिएगा.

    #prayasss45
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    निजीकरण

    Start reading from caption
    लेकिन नहीं वो सब नहीं सूझता है ख़ाली विरोध करना है जैसे कि सरकार के अधीन ये सब रहेगा तो पता नहीं क्या हो जाएगा.

    हाँ, उन कम्पनीज़ का निजीकरण करना सरासर ग़लत है जो प्रॉफ़िट में चल रही हैं जैसे भारत पेट्रोलियम और LIC टाइप्स की कम्पनी. आप रवेन्यू के लिए इनको एक बार तो बेच कर पैसे निकाल लोगे लेकिन उसके बाद क्या? सरकार को यहाँ ठहर कर सोचना चाहिए लेकिन फिर सरकार क्यों सोचे पाँच साल या दस साल में बदल हाई जानी है तो बोझ बढ़ेगा वो जनता पर बढ़ेगा और जनता तो गदहा ही है जो क़र्ज़ का बोझ ढोएगी जगाए ढोते आयी है.

    हाँ, BSNL और MTNL जैसी कम्पनी को बेचिए और अगर कोई नहीं ख़रीद रहा तो बंद कीजिए. उसको क्यों रखें हैं अपिजमेंट के लिए कि उनके कर्मचारी को निकाल देंगे तो वोट-बैंक डुल जाएगा.

    सभी रेलवे-स्टेशन को दीजिए प्राइवेट कम्पनी के हाथों में जो स्टेशन का दुर्दशा सुधरे. लोग जो थूक फेंक कर पोस्टर बनाते हैं उनका इलाज हो. वो लोग बाथरूम का मग और ट्रेन का शीशा और शीट उखाड़ कर ले जाते हैं उनको हथकड़ी लगे. एर्पोर्ट से तो कोई नहीं ले जाता है कुछ भी चुरा कर या सीट उखाड़ कर, या फिर अधिकतर एर्पोर्ट तो भारत का हिस्सा भी नहीं लगते इतने सुंदर हैं. क्यों? क्योंकि उनका रख-रखाव प्राईवेट कम्पनियाँ कर रहीं हैं. रेलवे स्टेशन भी एर्पोर्ट इतने सुंदर हो जायें, ट्रेन टाइम से चले इसके लिए रेलवे का निजीकरण ज़रूरी है. और हाँ टिकिट की धांधली भी बंद हो.

    लेकिन सरकार फिर सोच समझ कर ठीक से ही सब कर लेगी तो आलोचना के लिए बचेगा क्या. वैसे भी मोदी जो ने कहा है उनको आलोचनाएँ पसंद है और मुझे उनकी आवाज़ का बेस!

    हर वक्त अब सिरियस तो नहीं रह सकता न. ख़ुशियों को ख़ुद ही अन्लॉक करना होगा

    #BeingLogical

  • loveneetm 63w

    निजी करण

    नवयुग की लाचारी है,
    जग विपदा आई भारी है,
    निजी सब संस्थान हुआ,
    बस नेता ही सरकारी है।

    यहाँ रोजगार महामारी है,
    नव पीढी दुःख की मारी है,
    रेल बैंक या ऊँचा पद,
    सब जगह ही भ्रष्टाचारी है।

    अर्थव्यवस्था बदल रही,
    घटते घटते घट रहीं,
    शून्य से नीचे जा बैठी,
    यह देश की बड़ी बीमारी है।

    निजिकरण कोई राह नहीं,
    यह व्यवस्था की लाचारी है,
    सशक्त नहीं है नेतागण,
    विकास भी इनसे हारी है।
    ©loveneetm

  • mamtapoet 63w

    निजीकरण

    हर एक फैसले के भी दो उपाय हैं,
    जिसके पक्ष में उसे फायदा, विपक्षी को नुकसान हैं।
    राय ये हर एक की अलग अलग ही होगी,
    ग्लास भी आधा भरा, तो किसी के लिए आधा खाली होगी।

    निजीकरण किसका हो रहा है ये उस पर निर्भर हैं,
    ऐतिहासिक इमारतों की बात हो तो ये वाजिब हैं।
    क्षति न वो जरा भी उसे पहुँचने देगा,
    किराया भले ही बढ़ाये पर हीफाजत उसकी करेगा।

    विदेशो में टापू खरीदने का भी एक रिवाज है,
    मन लुभाते वो, अपने देश की वो शान है।

    कुछ कंपनी, उद्योग की यदि बात करे हम,
    सहमत हमें होना चाहिए, मजदूर है क्यों काम से डरे हम।
    सरकारी काम है, ऐसे धीरे धीरे ही होगा,
    नुकसान हो रहा है कहीं तो हो,
    हमारी जेब से थोड़े ही कटेगा।

    सोच जो ये लोगों की आम हो गई हैं,
    उसे बदलने का ये (निजीकरण) अच्छा सुझाव हैं।

    मेहनतकश इंसां को फर्क न कोई पड़ना चाहिए कभी,
    देश प्रगति के पथ को न बाधित करना चाहिए कभी।।
    और भी हैं विचार पर विराम देती हूँ यहीँ,
    बड़े बड़े ज्ञानी बैठे, सबकी सलाह सही होगी कहीं न कहीं।।

  • mogembo 63w

    #prayasss45
    @mittal_saab
    @happy81lovepreet
    जरूर पढ़े❤️❤️������
    आपके विचार क्या है कॉमेंट म जरूर बताए।।।
    When we say privatization, a lot of things come to one’s mind. They are both positive and negative. It basically refers to the shift of control from the public sector to that of private. The first world countries brought this concept first after which the developing nations caught on the trend.

    भारत में बैंकों के निजीकरण के मेरे हिसाब से तीन सकारात्मक प्रभाव: -
    1. इसने बैंकिंग क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को बढ़ाया और क्षेत्र की सेवाओं को बढ़ाया।
    2. इसने सेक्टर में उनकी हिस्सेदारी को कम करके सरकार के कर्ज को कम कर दिया।
    3. इसमें बैंकिंग क्षेत्र में निजी कुशल बिज़नेस men की भागीदारी थी।
    भारत में बैंकों के निजीकरण के नकारात्मक प्रभाव: -
    1. परिवर्तन ने अर्थव्यवस्था के मध्य वर्ग के समूह को प्रभावित किया जो दिन के लेनदेन के लिए बड़े पैमाने पर सार्वजनिक या सहकारी बैंकों पर निर्भर थे।
    2. इसका दूसरा नगेटिव इफेक्ट है निजी बैंको की वजह है जो सहकारी बैंक थी उनकी महत्ता कम हुई ।।।

    और जब निजीकरण की बात शिक्षा विभाग पर आती है तो
    उसके भी कुछ फायदे और कुछ नूकसान है --
    चलिए हम पहले फायदे की बात करते है वैसे भी 80% इसका privatisation हो चुका है।
    --- यह एजुकेशन सिस्टम को बेहतर बनाता है और इससे सरकार को बहुत फायदा होता है जो कि इनके tax से होगा ।।।
    एक रिपोर्ट के मुताबिक 50 % नर्सरी के बच्चे private स्कूलों में पढ़ते है।।
    और अगर बात नेगेटिव इफेक्ट की आती है तो
    --- इसने गरीबों और किसानों को भारी फीस का सामना करना पड़ेगा
    साथ ही higher education में भी प्राइवेट clgs फायदा उठाएंगे।।।
    इसका सबसे बड़ा कॉलेज स्टूडेंट्स को होगा जो अभी सरकारी college में पढ़ते हैं

    Privatisation of अग्रीक्लचर ---
    Bahrat कृषि प्रधान देश है और अभी भारत की जीडीपी कृषि कार्यों की वजह से ही बनी हुई है
    जब बाहर की बड़ी कम्पनी बाज़ार में अपनी मंडी लगाएगी तो वो सिर्फ बड़े शहरों में लगाएगी जिस वजह से सारे किसान मंडी नहीं पहुंच पाएंगे।।और बीचोलियो को फायदा होगा।।और छोटे किसान कर्ज मार खाते रहेंगे।।।
    हालांकि प्राइवेट कंपनी अच्छे दाम दे सकती है लेकिन सारे किसानों का फायदा देखते हुए एक रेट फिक्स होना चाइए जिससे कम किसी किसान का अनाज ना बिके।।
    जरूर पढ़े����
    धन्यवाद ������

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    जय जवान ,जय किसान

    privatization

    आज के युग को देखते हुए जरूरी है पर सीमित होना चाहिए



    ©badluckboy

  • rnsharma65 63w

    विद्यालय

    सरकारी बेसरकारी विद्यालय है बहुत
    समयानुसार पढ़ाई होती प्रेम सहित
    सरकारी विद्यालय में होते दक्ष शिक्षक
    संतोष दायक उच्च वेतन मिलती मासिक
    बेसरकारी विद्यालय की शिक्षक नव युवक
    वेतन तो मिलती नहीं कुछ ही पारितोषिक ।
    किन्तु देखिए दोनों में कितना अंतर
    निजीकरण के कारण अच्छे अंक रख कर
    शत प्रतिशत छात्र छात्री होते उत्तीर्ण
    सरकारी विद्यालय परीक्षा फल का नहीं मान ।
    सरकारी अनुष्ठान सब बंद कर दिया जाय
    निजीकरण संस्थान सब बना दिया जाय ।।
    विशेष व्याख्या करने का प्रयास नहीं करता
    खुद को ज्यादा अपमानित करने को नहीं चाहता ।।
    ©rnsharma65

  • anantsharma_ 63w

    #prayasss45
    ◆निजीकरण◆
    @mittal_saab
    @rnsharma65 @mamtapoet @tiwaripriti @neha_ek_leher

    सभी के अलग अलग विचार होते हैं और इसीलिए यहाँ पर मैन केवल अपना विचार व्यक्त किया है।आप सहमत हैं या असहमत है मेरे विचार से यह आपके विचार के ऊपर निर्भर करता है।����

    आज के समय मे निजीकरण को ले कर सब यह कहते हैं की निजीकरण हो जाने के कारण बहुत सारी नौकरियां छीन गई है,
    और यह उदाहरण भी देते हैं कि जैसे बैंको का निजीकरण हो रहा है।

    यहाँ मैं उन लोगो से यह पूछना चाहूँगा की मान लीजिए कि आपके छेत्र में अलग अलग बैंक के 2 ब्राँच है और अगर दोनो बैंक निजीकरण हो कर एक ही बैंक बन गए तो क्या इससे यह होगा कि उन दो बैंको के ब्रांचों में से एक बैंक का ब्रांच बंद हो जाएगा ?
    क्या उस एक बैंक के ब्राँच की वेकैंसी खत्म हो जाएगी जो बैंक मर्ज हुई?

    नही यहाँ पर निजीकरण होने से 2 ही ब्रांच रहेंगे बस होगा यू की दोनों ब्रांच एक ही बैंक में मर्ज हो जाएंगे एक साथ काम करेगी एक बैंक के लिए
    ओर दोनो ब्रांचों में पहले जितनी वेकैंसी थी उतनी ही अब भी रहेगी

    यहाँ तो नौकरियां में कमी नही आई ।

    हां अगर निजीकरण होने केकारण एक ब्राँच बंद हो जाता तब नौकरियां छिन्ति लेकिन यहाँ तो ऐसा कुछ हुआ नही।
    यह बस यूथ में एक भ्रांति फैल रही है निजीकरण होने से नौकरियां छीन जाएगी।

    और जहाँ तक नौकरियां की सवाल है तो वह इस वजह से कम हो जाती है क्योंकि जब बैंकों की सुरुआत हुई थी उस समय बैंक के सारे पद खाली थे, मगर आज के समय मे धीरे धीरे वह सारी भरते जा रही है/या यूं कहें कि लगभग भर चुकी है, ओर एक बार नौकरी लगने के बाद तुरंत उस पद को खाली नही किया जा सकता उसमे वर्षों का समय लग जाता है।
    तो इस कारण वेकैंसी नही निकल पाती है।

    और यही वजह है कि लोग बिना समझे बैंको में कम वेकैंसी निकलने की वजह निजीकरण को दे रहे हैं।

    वैसे यह नजरिया मेरा बैंकिंग sector को ले कर के था।

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    ◆निजीकरण◆

    निजीकरण की समय जब आई
    सरकारी दफ्तरों को प्रयबेट करवाई
    तब बेरोजगारों ने यह भ्रांति फैलाई
    और सरकारों पर आरोप भी लगाई
    क्यूं युबाओ की नौकरी/वेकैंसी छीनी तूने भाई।
    ©anantsharma_

  • happy81 63w

    #prayasss45
    @mittal_saab

    ये इतना बड़ा टॉपिक है की मुझे आधा कट करना पड़ा,

    ऐसे कई कारण हैं जिनके कारण किसी देश की सरकार कुछ क्षेत्रों के निजीकरण का निर्णय लेती है।

    इनमें से कुछ में सरकार का बोझ कम करना, वित्तीय घाटे का सामना करना, बेहतर सेवाएं प्रदान करना और समग्र ग्राहक अनुभव को बढ़ाना शामिल है। जबकि कुछ देशों ने निजीकरण से लाभ उठाया है, दूसरों को भारी असफलता मिली है। भारत ने एक मिश्रित परिणाम देखा है। हालांकि भारत में कुछ उद्योग एक अच्छा काम कर रहे हैं, जबकि निजीकरण के बाद अन्य लोगों ने सेवाओं की गुणवत्ता को डुबो दिया है और कीमतें बढ़ाई हैं।
    सरकारी अर्थशास्त्र पर निजीकरण का प्रभाव काफी हद तक सकारात्मक है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिस रफ्तार से सरकार विभिन्न उद्योगों का सरकारीकरण कर रही थी, उस रफ्तार से उसका निजीकरण हो रहा है। हमारे देश में सार्वजनिक क्षेत्र के अंतर्गत कई उद्योग खराब प्रबंधन, मालिकों के अपर्याप्त ज्ञान और उचित संसाधनों की कमी के कारण बड़े नुकसान झेल रहे थे।
    , मेरी भूल चूको को माफ़ करे,, मैं चाहती हूँ हमारा देश विकासशील देश है,, जिसकी प्रगति के लिए हमे अन्य विकसित देशो की तरह निजीकरण को अपनाना चाहिए,, हर किसी के दो पहलू होते है इसकी नकरात्मकता के लिए सरकार कुछ ना कुछ ज़रूर करेगी क्युकी इसकी जरुरत बहुत ज्यादा है,, भाई साहब को बहुत बहुत बधाई उत्तम विषय देने के लिए... धन्यवाद.. ������

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    बात करते है निजीकरण निजीकरण क्या है ??.
    (Privatization), जिसे निजीकरण (Privatisation) भी कहा जाता है, इसका अर्थ अलग-अलग चीजों से हो सकता है, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र से कुछ को निजी क्षेत्र में स्थानांतरित करना शामिल है,, आजकल बैंको में निजीकरण हो रहे है,, रेलवे में,, और बहुत जगह निजीकरण को बढ़वा मिल रहा है मैं इसके पक्ष में हूँ मैं जानती हूँ इसके फायदे और नुक्सान दोनों निजीकरण मूल रूप से निजी मालिकों के हाथों में सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया है। शिक्षा के मामले में भी इसकी बहुत जरुरत है ,देशकी अरबो की जनसँख्या को शिक्षित करना सरकार के बस की बात नहीं,, अभिभावकों के निजी स्कलों में अपने बच्चों के भेजने के पीछे तीन वजहें हैं। पहली तो यह कि निजी स्कूल बेहतर शिक्षा मुहैया कराते है, दूसरी सस्ती और तीसरी बात यह कि ये बच्चों और उनके अभिभावकों के जिसकी मांग मौजूदा समय में दिनोंदिन बढ़ती जा रही ये क्रांति लाने का सबसे ज्यादा श्रेय जाना चाहिए इंटरनेट को! जबसे इंटरनेट आ गया हालांकि एक नेगेटिव बात ये भी है वो प्राइवेट संस्थान शिक्षा के बदले मोटी रकम भी वसूलते है अब गरीब कहाँ जाये हा स्कॉलरशिप मिल रही निजीकरण का प्रभाव कुछ मामलों में नकारात्मक रहा भारत में बैंकिंग क्षेत्र के निजीकरण के साथ, इस क्षेत्र को चलाने की शक्तितुलनात्मक रूप से कुशल हाथों में चली गई है। इससे देश में बैंकिंक्षेतकीस्थिति में सुधार हुआ है।
    निजीकरण का एक बड़ा सकारात्मक प्रभाव यह हुआ है कि इसने सरकार के ऋण को कम कर दिया है।नकरात्मक है
    निजी मालिक अपने कार्यों को पूरा करने के लिए विभिन्न माध्यमों को अपनाते हैं। वे रिश्वत, धोखाधड़ी और कई अन्य ऐसे बुरे व्यवहार करते हैं जो भ्रष्टाचार को जन्म देते हैं।
    ऐसे क्षेत्रों में, जहाँ निजी स्वामी की प्रतिस्पर्धा या एकाधिकार कम है, उपभोक्ताओं को सामान और सेवाएँ खरीदने के लिए बड़ी मात्रा में धनराशि की आवश्यकता होती है। कीमतों में बढ़ोतरी है और ग्राहकों के पास भुगतान करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है!
    ©happy81lovepreet

  • mittal_saab 63w

    सबको मित्तल साब का प्रणाम

    आर एन शर्मा जी को शुक्रिया 'Prayasss45' का संचालन मुझे सौपने के लिए

    इस बार का जोह विषय मै देना चाहता हूं वोह है

    'निजीकरण' / Privatization

    आज देश मे बोहोत से सरकारी विभागों के निजीकरण पर चर्चा की जा रही है, और देश की जनता इसके पक्ष और विपक्ष में बंट गयी है,
    मैं चाहता हूं आप निजीकरण पर अपने विवेकानुसार सहमति या असहमति पर अपनी रचनाये सांझा करे उम्मीद है आप अधिक से अधिक इस पर रचनाये सांझा करेंगे, चूंकि ये आज देश के भविष्य के लिए एक नई नीव रखने जैसा सिद्ध होगा

    विषय को लेकर किसी भी प्रकार के स्पस्टीकरण के लिए आप नीचे कमेंट् बॉक्स में लिख सकते है

    निवेदन है कि आप सब अपने परिचित को यहॉं टेग करें

  • rnsharma65 63w

    #Prayasss45

    Sabhi sahityakaron ko saprem bahut bahut dhanyawad. Prayasss Pathashala ko aage badhane ke liye badi umeed se @mittal_saab Ji ko amantrit kar raha hun.
    Saprem namaskar.
    ©rnsharma65

  • mittal_saab 62w

    #prayasss46 / शिक्षानीति

    आप सभी को साहिल का प्रणाम और हिंदी दिवस की शुभकामनाएं

    मंच : #prayasss46
    विषय : शिक्षा नीति

    आज का विषय मै शिक्षा नीति रखना चाहूंगा, क्यो की समय के साथ मेरे देश की शिक्षा नीति को पूर्ण रूप से नष्ट कर दिया गया है, चाहे वो मुगलो के दौर मे हो या अंग्रेजो के समय में हो, याह आजादी के बाद मेरे देश के नेताओ की मानसिक गुलामी के कारण हो, कैसे गुरुकुल शिक्षा व्यवस्था देश से लुप्त हो गए..

    मैं चाहता हूं कि आप सब इस पर अधिक से अधिक लिखे और अपने विवेकानुसार जानकारी साँझा करे, आप अपनी रचनाएँ लेख, कविता, आदि रचनाओं के माध्यम से साँझा कर सकते है निवेदन यह भी है आपसे की अपने मित्रों को भी यहाँ टेग करे ताकि अधिक से अधिक रचनाये आ सके,

    शिक्षा नीति नही हमारे देश की रीढ़ की हड्डी को खोखला किया गया है और इसके बारे मे जितना अधिक लोग जाने उतना ही हम सब के लिए अच्छा होगा

    ©mittal_saab