#rachanaprati117

14 posts
  • goldenwrites_jakir 24w

    #rachanaprati117 #rachanaprati118 @mamtapoet @gannudairy_ @jigna_a @anusugandh @anandbarun #jp
    #jakir


    आओ मिलकर हमसब अमन सुकून का पौधा लगाएं
    बो कर बीज प्रेम के दीप ज़िन्दगी में सब के जलाएँ
    आओ मिलकर हमसब अमन सुकून का पौधा लगाएं

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    #वीर जवान

    वीर जवान ना हो कभी शहीद
    वो खुशहाली दुनियां में अमर हो जाए
    रहे हम सब मिलकर इक साथ
    इंसान को इंसान से वो मुहब्बत हो जाए
    आमीन
    ©goldenwrites_jakir

  • mamtapoet 24w

    #rachanaprati118

    @anusugandh ji@jigna_a,ji@anandbarun ji,@aryaaverma12@alkatripathi79 ji,@goldenwrites_jakir ji,@piu_writes @gannudairy jiआप सभी की रचनाएँ बहुत ही मनमोहक और काबिले तारीफ़ है, @anandbarun sir ji aur @goldenwrites_jakir neवो शब्द की अति उत्तम अभिव्यक्ति को दो दो रचनाओं में प्रकट किया। आज नये सदस्य @gannudairy ji की रचना की सराहना भी जरूर करूँगी, और मैं चाहूँगी कि वो इस श्रृंखला को आगे बढ़ाये और उनको सभी का सहयोग प्राप्त हो।
    ©mamtapoet

  • jigna_a 24w

    "वो"

    इतनी लंबी ज़िंदगी
    यूँ देखो तो कितने किस्से,
    पर करने बैठोगे इसकी दास्तानगोई
    कुछ लम्हों के लंबे हिस्से।

    कुछेक "वो" में;
    सिमटी कहानी,
    ठहरा सा सहरा
    बहता सा पानी।

    रिश्तों के धागे
    उलझे उलझे से,
    अनमना कोई अपना
    और जो मन के, वो सपने।

    "वो" कोई सूरज सा
    दूर से दिखता,
    पर उसकी गर्मी से
    अपना जीवन पनपता।

    "वो" कोई जवाकुसुम
    खिलता, खिलखिलाता,
    "वो" कोई नागफनी सा
    चुभ के जीना सिखाता।

    "वो" लम्हों की फेहरिस्त
    सिमटी सी जिसमें जीस्त,
    कोई अधूरा मुकम्मल
    कहीं दिखती पूरी सी कहानी
    पर, पर
    समझ में ना आनी,

    एक "वो" कोई लम्हा
    एक "वो" शख़्स कोई,
    एक "वो" तेरा, तू ही
    आग़ाज़ से अंजाम तलक
    देगा साथ "वो" ही
    देगा साथ वो ही।
    ©jigna_a

  • aryaaverma12 24w

    #rachanaprati117 @mamtapoet
    @anusugandh @goldenwrites_jakir
    @alkatripathi97 @anandsardar

    वो तुम्हारा दिया गुलाब का फूल ,
    आज भी सम्हाल कर रखा है, डायरी में,
    हां जानती हूं कि उस गुलाब में,
    अब पहले वाली बात नहीं हैं,
    पंखुड़ियां मुरझा सी गई हैं,
    पर वो खूबसूरत अहसास,
    आज भी वैसा ही है,
    जब कभी डायरी को हाथ लगती हूं,
    तो उगलियां महक उठती हैं,
    पन्ने पलटती हूं, तो खुशबू बरसने लगती हैं,
    पंखुड़ियां मुरझा सी गई हैं,पर
    हर पंखुड़ियों पर लिखा तुम्हारा नाम साफ़,
    झलकता है, जैसे मेरे दिल पर लिखा तुम्हारा,
    नाम मिटाए नही मिटता,
    वैसे ही इन पंखुड़ियों पर लिखा तुम्हारा नाम ,
    छप सा गया है,
    वो तुम्हारा गुलाब देना,
    वो मेरा खूबसूरत अहसास से भर जाना,
    बखूबी याद है मुझे,
    गुलाब की बांखुड़ियां तो मुरझा गई ,पर वो यादें,
    आज भी एक दम ताज़ा हैं,
    जैसे कल ही की तो बात हैं,
    हर गुलाब के नसीब में खूबसूरत पल नहीं होते,
    कुछ गुलाबों को डायरियों की तनहाई नसीब होती हैं,
    मैं और तुम्हारा दिया वो गुलाब ,
    अक्सर ये बातें करते हैं,
    तुम होते तो ऐसा होता,����
    तुम होते तो वैसा होता,����

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    ✨वो✨

    लोग कहते हैं,वो अजनबी है,
    पर वो अजनबी मेरी जिंदगी हैं,
    ©aryaaverma12

  • gannudairy_ 24w

    वो

    वो जब भी खफा होती है मुझसे मुझे खामोश करती है,
    मुझे समझ नहीं आता वो मेरे साथ ही ऐसा क्यु करती है!

    हाँ गुस्सा तो आता है उसे मेरी छोटी छोटी बात पे,
    पर कुछ भी हो वो मुझसे रोज बात करती है!

    मैं गलती भी कोई जान पूछ के तो करता नहीं हूँ,
    बस वो साफ़ दिल की है हर बार मुझे माफ़ कर देती है!

    उसकी मासूमियत पे शायद घमंड ही है बेहद,
    कुदरत भी अपनी सादगी उसपे शुमार करती है!

    मैं हर बार एक नई सोच के साथ ग़ज़ल लिखता हूँ,
    काग़ज़ कोई भी हो कलम उसका नाम लिखा करती है!

    मैं तो बस मिट्टी सा हूँ जो एक चोट से भी टूट जाता है,
    उसके अल्फाज़ गोंद जैसे हैं मुझे हर बार जोड़ा करती है!

    थोड़ी नाराज है मुझसे वो चंचल हवा की तरह अभी वो,
    मेरे पास से गुज़रती है फिर अपना रुख मोड़ लेती है!
    ©gannudairy_

  • anandbarun 24w

    वो कौन..

    वो कौन है
    अब तलक क्यूँ मौन है
    समय की सतह से
    रहता क्यूँ गौण है;
    वेदना के पहर के
    अध्यावसान का
    कोई हद तो होगा।
    चुकाना है क्या
    कुछ तो तय किया होगा
    अभी और कितना
    अब, जद्दोजहद है।
    मिटा दो दूरियाँ
    होने दो असर ज़रा
    कि मिन्नतों का
    कोई तो सबब होगा।
    कहाँ आ गये चलते
    भूल की तहों में
    खो गया मतलब है।
    कहें अब क्या
    सिला उन बाजुओं का
    आगोश भरती बेपनाह
    वो अपना कहाँ
    हो गया है लापता।
    समर का शेष ना
    अब कोई कहर है
    जो वश था अपना
    कहाँ को चल दिये
    हैं बेसुध कदम ये।
    कहीं सोच में उसकी
    कुछ बेहतर बदा हो,
    शायद उससे भी कहीं
    प्रार्थना में निवेदित जो।
    है कुछ फलसफा
    जो समझ के परे रहा,
    नियति के नियमों में
    जो है अधखुला
    समय के परतों में
    कुछ अनकहा सा,
    नीति नियंता का।
    कैसा भविष्य होगा
    जो उसने चुना था
    मर्त्य के परे सृष्टि का
    है अजगुत न्योता।
    मिलेंगे उस पार
    जो समझ सको
    तो फिर बढ़ चलो
    इन अंधेरों के आगे
    है उम्मीदों भरा
    इक विहान जागे...
    ©anandbarun

  • piu_writes 24w

    वो तेरी नजरों का मेरी नजर से टकराना
    वो दिल्लगी तेरी और मेरा वो शर्माना
    हाय वो भी क्या दिन थे
    अब वो है गुज़रा ज़माना
    कहाँ खो गए जानम
    एक झलक दिखाना
    ©piu_writes

  • anusugandh 24w

    वो

    वो जिंदगी की ना खत्म होने वाली बातें आज भी याद है
    हर लम्हा जो साथ साथ गुजरा आज भी याद है
    वो पूरे दिन खिड़की पर तेरा खड़े रहकर इंतजार करना
    वो एक झलक पाने को तरसना आज भी याद है
    बारिश के दिन तिल तिल मिलने को तरसना
    वो आंखों से बरसता प्यार आज भी याद है
    वह डायरी में रखे तेरे प्यारे-प्यारे खत
    हर शब्द में भरा हुआ तेरा प्यार आज भी याद है
    कभी अनु तो कभी गुलमोहर का नाम दिया
    तेरे रखे हुए नाम के साथ जीना आज भी याद है
    वो कांपते लरजते होठों की बात अभी भूले नहीं हैं
    तेरी एक एक बातों की खनक आज भी याद है
    अब कितनी बातें याद करूं तेरी हर एक बात
    उन में भरा तेरा प्यार और एहसास आज भी याद है
    ©anusugandh

  • alkatripathi79 24w

    वो

    वो सूखी पंखुड़ियाँ.. आज भी है

    वो सूखी पंखुड़ियाँ, जिसमे थी गज़ब की कोमलता
    उसका वो गुलाबी रंग...
    अब नही है उसमें,, ना वो रंग ना वो कोमलता फिर भी,
    याद दिलाती है किसी अपने की,
    जो था मेरा नितांत अपना।

    वो सूखी पंखुड़ियाँ, जिसमे थे कुछ पराग भी
    और थी इक अनोखी ख़ुशबु
    अब नही आती उसमें से कोई ख़ुशबु
    फिर वो याद दिलाती है उसकी
    जिसकी ख़ुशबु से ही उसे पहचान जाती थी,
    जो था मेरा नितांत अपना।

    वो सूखी पंखुड़ियाँ, जुड़ी थी इक टहनी से
    उसमें थी इक नाजुकता, और था उसका हरा रंग
    अब कुछ भी नही बचा, उसके रिश्ते की तरह
    मगर आज भी महसूस करती हूँ
    उस टहनी पर उसकी उंगलियों की गर्माहट..
    जो था मेरा नितांत अपना।

    वो सूखी पंखुड़ियाँ आज भी ज़िंदा है
    मेरे डायरी के पन्नों के बीच
    जो हर पल याद दिलाती है
    कोई तो था कभी मेरा नितांत अपना।

    ©alkatripathi79

  • anandbarun 24w

    वो..

    जलती जमीं पर
    जग जाता है, वो
    जनम जाता है
    जलने को।
    जग जाए
    तो जग जाने
    जिये जा रहे हैं
    जो जगमग में,
    जगत में जन्में
    हैं जब से
    न जागे हैं तब से।
    जगा सकता
    न जो और है
    जो जलाना है
    खुद, जल के।
    ज्योति अंतर
    जाग जाए,
    जानें, क्यूँ जन्मे
    हैं जग में,
    क्यूँ जिंदा थे ऐसे
    जन्म जाया जो करते,
    अनजाने ही जैसे
    जस के तस
    जिये जा रहे थे।
    जो रूखी जमीं में
    जगा जाता है 'वो'
    तो जगाने की बारी
    कतराता है क्यों?
    ©anandbarun

  • goldenwrites_jakir 24w

    #वो ✍️✍️

    वो सुबह वो शाम "सब तेरे नाम
    वो रात का अंधेरा वो सहर का उजाला सब तेरे नाम
    तू ही चाँद तू ही जुगनू तू ही आफताब की हर इक किरण
    मेरे हमदम हमसफ़र तू ही मेरी ज़िन्दगी का हर इक लम्हा हर इक पल सब तेरे नाम
    ©goldenwrites_jakir

  • goldenwrites_jakir 24w

    #वो ✍️

    वो आख़री मुलाक़ात ज़िन्दगी में अब भी शामिल है
    बदला नही आँखों का पानी वो नमी की चादर अभी भी है
    वो आख़री मुलाक़ात का अंधेरा आज भी रोशन ज़िन्दगी में है
    याद आती नजरों की वो तड़प मुड़ - मुड़ कर देखना उसका
    आज भी ये आंखे उसी राह पर ठहरी हुई हैं
    आज भी उसका इंतज़ार कर रही है
    याद बहुत आती हर जगह वो
    जहां गुजरे थे हमारी ज़िन्दगी के खूबसूरत लम्हें
    वो सफर वो गलियां उसका घर आँगन
    वो अजनबी बातें वो अनकही हमारी नादानियाँ
    हँसता हुआ उसका चेहरा और उसकी ख़ामोशी में छुपे ज़ख्म के निशां सब वफ़ा कि इक कहानी बनकर आज भी आँखों के सामने नज़र आती उसकी मोहब्बत |
    वो क्या थी ज़िन्दगी में और क्या है वो ज़िन्दगी में
    वो सब हर पल दिल को इक नया एहसास दिलाती है |
    ©goldenwrites_jakir

  • mamtapoet 24w

    #rachanaprati117
    @jigna_a, @anusugandh, @anandbarun

    आज का विषय है "वो", वो पल, वो शख्स, वो खत, यहाँ वो शब्द सजीव निर्जीव कुछ भी हो सकता हैं, तो बस बुन लीजिये इस शब्द को लेकर खूबसूरत सी कोई कविता, कहानी।
    समय कल शाम 5 बजे तक। विषय चुनाव में विलंब के लिए क्षमा ।��

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    वो

    वो पल फिर याद आ गए
    जो गुलाब सी खूबसूरती रखते थे
    जाते जाते हाथ जख्मी कर गए
    क्योंकि वो काँटों से सलामी करते थे
    फ़ितरत जरा देर से समझ में आयी
    वो जो मुँह में राम, बगल में छुरी रखते थे
    कहने को अब कोई रिश्ता नहीं उनसे हमारा
    वो जो पराये होकर भी मुझमें मैं बनके रहते थे
    पलकों के समंदर ने भी कर लिया किनारा
    वो जो कभी खुशी के बादल बन मन को भीगोते थे।
    ©mamtapoet

  • jigna_a 24w

    सबने अगर को बहुत खूबसूरती से परिभाषित किया। फिर वो अल्का जी हो या अनु दी, आनंद जी, ज़ाकिर भाई, सोनालिका, प्रेम जी, सबने खूबसूरत लिखा।

    परंतु आज की विजयी कृति है ममता जी की। बहुत बधाई @mamtapoet