#rachanaprati118

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  • alkatripathi79 8w

    शहीद जवान

    जो कर के अपनी कुर्बान जवानी
    लिखते हैं तिरंगे की कहानी...

    जीते जी तिरंगा फहराते
    मरकर, उसी में लिपट कर आते
    वही जवान “शहीद" कहलाते


    ©alkatripathi79

  • goldenwrites_jakir 8w

    #rachanaprati117 #rachanaprati118 @mamtapoet @gannudairy_ @jigna_a @anusugandh @anandbarun #jp
    #jakir


    आओ मिलकर हमसब अमन सुकून का पौधा लगाएं
    बो कर बीज प्रेम के दीप ज़िन्दगी में सब के जलाएँ
    आओ मिलकर हमसब अमन सुकून का पौधा लगाएं

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    #वीर जवान

    वीर जवान ना हो कभी शहीद
    वो खुशहाली दुनियां में अमर हो जाए
    रहे हम सब मिलकर इक साथ
    इंसान को इंसान से वो मुहब्बत हो जाए
    आमीन
    ©goldenwrites_jakir

  • anandbarun 8w

    लकीर के फ़क़ीर

    शहीदों के नमन में, जुड़ कर जो हाथ
    थर-थर काँपते हैं होकर भी अब साथ
    लाली डूबी जो सजे अहर्निश थी माथ
    काजल-बिंदी फिर न कर पाए सनाथ
    इक मासूम जो अब हो गया है अनाथ
    सिसकते भर रहे हैं, रह-रह उच्छवास
    बुढ़ापे की लाठी के हिल गए एहसास
    कित उड़ गए हैं नयनों से एकल आस
    बहनें जोहती रह जाऐंगी अब जो बाट
    जाने कहाँ खो गया है मन का हुलास
    भाई भी टूट कर बिखरा है अनायास
    सुध दफ्न होती जा रही श्वास-प्रश्वास
    भले हो गर्व हमें उनपर अब बेहिसाब
    बेबस मन ना बहले गा वीररस के राग
    मानव जीवन की है यह बड़ी उपहास
    इक पल की ज़िन्दगी के चुके ना भाव
    लुटा कर अचल खजानों का भी भार
    कहाँ तक इक लकीर पर हमें हो नाज
    अंतर है जिसके बस विध्वंस का राज
    उस पार भी ना होंगे ऐसे ही अहसास
    क्या हिंसा भी कभी कर सके आबाद
    कत्ल मानवता का घोर घृणित बर्ताव
    वक्त नहीं यह है करने की कोई बर्बाद
    जब प्रगति हमें ला रही है इतना पास
    मिटे हर फर्क, जो फैलाती रही दुराव
    मानवता का सदा, फैले सगर व्यापार
    अमानवीय कृत्यों पे चढ़े कभी न हार
    ©anandbarun

  • anusugandh 8w

    शहीद जवान

    देश के वीर जवानों की
    ऐसी है दास्तान
    देश की खातिर
    कर देते न्यौछावर जान
    न देखे सर्दी ना गर्मी
    कर देते दुश्मन को हलकान
    इस तिरंगे में
    बस्ती सबकी जान
    इस तिरंगे की खातिर
    करते सर्वस्व कुर्बान
    देश पर मर मिटने की
    उसने कसम जो खाई थी
    ना रात देखा ना दिन
    दुश्मन पर नजर गड़ाई थी
    हम सब की रक्षा की खातिर
    अपनी जान लुटाई थी
    हुआ जब जवान शहीद
    तिरंगे में लिपट कर आया था
    उसकी कुर्बानी देखकर
    तिरंगे ने भी शीश झुकाया था
    जय हिंद जय भारत
    ©anusugandh

  • jigna_a 8w

    शहीद जवान

    अंतिम चुंबन
    उसके सुर्ख़ होठों ने किया,
    रग रग में दाह उठा,
    शक्ति संचार के चरम तक,
    उसके हाथों ने
    रिपुदमन किया,
    खुरदुरी मिट्टी लगी थी
    जो होठों पे,
    उसे रेशम का आँचल लगती,
    जिसमें लिपट,
    अंतिम श्वास लिया,
    नहीं भूलेगी माँ भारती,
    रक्तरंजित बोसा अपने शिशु का,
    मिट्टी के कण कण में घुलकर,
    तेज़ चाल पवन से मिलकर,
    बन गया जैसे बवंडर,
    बाल बाल तेरा गाएगा गुणगान,
    माँ भारती के प्यारे संतान,
    मरता नहीं शहीद होता,
    देश का अमर जवान।
    ©jigna_a

  • gannudairy_ 8w

    जवान शहीद

    जवान वो शहीद हुआ है मरा नहीं
    तिरंगा हाथ में है अभी गिरा नहीं

    उसके लहू से जिसको लगा था टीका
    वो माँ है हमारी केवल धरा नहीं

    एक से स्वा लाख लड़े इतिहास गवाह है
    सपूत गुरु गोविंद सिंह का कभी डरा नहीं मार उसे दुश्मन क्या जश्न मनाता है
    रगों में शौर्य केवल उसके भरा नहीं

    बाद उसके वीर और भी आयेंगे
    बस रुकना वहीँ तू हिलना ज़रा नहीं

    वतन से है तू भी तो दिखा वतन-परस्ती
    लिख रहा है 'गौरव' चूँकि लड़ रहा नहीं
    ©gannudairy_

  • mamtapoet 8w

    #rachanaprati118

    @anusugandh ji@jigna_a,ji@anandbarun ji,@aryaaverma12@alkatripathi79 ji,@goldenwrites_jakir ji,@piu_writes @gannudairy jiआप सभी की रचनाएँ बहुत ही मनमोहक और काबिले तारीफ़ है, @anandbarun sir ji aur @goldenwrites_jakir neवो शब्द की अति उत्तम अभिव्यक्ति को दो दो रचनाओं में प्रकट किया। आज नये सदस्य @gannudairy ji की रचना की सराहना भी जरूर करूँगी, और मैं चाहूँगी कि वो इस श्रृंखला को आगे बढ़ाये और उनको सभी का सहयोग प्राप्त हो।
    ©mamtapoet

  • goldenwrites_jakir 76w

    यादें मिट्टी की

    वीर जवान

    यादें ज़ब भी आती है आँखों से लहू दिल का बहा ले जातीं है
    क़ुर्बान हो गए हमारे बाप दादा जिस मिट्टी की आजादी के लिए --- आज हम एक नहीं इस आजादी की खुसबू में
    हर तरफ नफरत की चिंगारी हर तरफ चंद सफ़ेद पोस लोगो की दादागिरी ये केसी आजादी हमें मिली हम होकर आज़ाद आज़ाद नहीं ---- रोज देखतें है सम्भिधान की मर्यादा का उल्लंघन होते हुए ये केसी हम सब की ख़ामोशी ,,,,

    याद करो वो क़ुरबानी जो हमारे अपनों ने लहू से हमें दिलाई भूलकर जातीं धर्म सबने एक साथ इस लड़ाई को आजादी का नाम दिया -- कौन छोटा कौन बड़ा सबने लहू से अपने
    धरती माँ की शान बड़ाई फिर क्यों आज हम बटे - बटे से रहते है ऊंच नीच के धागे से बंधे - बंधे से रहते है
    क्या है आज़ादी हमारी इसे भूलकर हम एक दूसरे को निचा दिखाते है क्या यही उन सब की क़ुरबानीयों का देश है
    हम कहा है खड़े हम चाहते क्या है ये सब एक सवाल से हम क्यों नजरें चुराए खामोश है ......

    याद करो शहीदो की कुर्बानियां जगाओ अपना ज़मीर
    हम सब एक है एक है एक है
    एक ही तिरंगा एक लहू का क़तरा हम सब आज़ाद है
    जय हिन्द जय हिन्द जय हिन्द जय हिन्द की हम सेना


    ©goldenwrites_jakir

  • goldenwrites_jakir 93w

    ये मेरी पुरानी कविता है
    इसे जादुई की किताब का नाम देता हूँ

    #jp #jakir #rachanaprati118 @gannudairy_ #abhivyakti29 @flame_ @rupanshu_saneedip @fairygurl @jiya_khan @di_hearted

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    ज़लियां वाला बाग ...

    गूंजती है आज भी फिजाओ में चीखो पुकार
    वो दर्द का सन्नाटा - वो गोलियों की बौछार
    हर तरफ मातम का था मेला
    चारो और खून में लठ पथ लासे अपनों की
    कही बच्चे - कही पर माँ बेटियां - हर तरफ शहीदो की लाश
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    वो शोर आज भी दिल को दहला दें
    ज़ब इतिहास के पन्ने पलटते है ....
    वो ज़लिया वाला बाग ज़ब याद आता है
    आँखों से फूल बरसते है
    घरो में रौशनी के दीप जलते है
    है नमन उन सबको जो सहीद - माँ के लिए क़ुर्बान हुए ....।

    जय हिन्द जय हिन्द जय हिन्द जय हिन्द जय हिन्द

    ©goldenwriteszakir