#rachanaprati119

13 posts
  • piu_writes 7w

    ये किसकी परछाई है आईने में कहीं मेरा ही अक्स तो नहीं
    ©piu_writes

  • goldenwrites_jakir 7w

    #rachanaprati119 #rachanaprati120 @anandbarun G आप संचालन को आगे बढ़ाए ��������
    ... @gannudairy_ भाई जी का तहदिल से आभार जिन्होंने मुझे अवसर दिया ��������
    .. @jigna_a दी " @anusugandh दी " @mamtapoet दी "
    आप सबने बहुत खूबसूरत इस पाठशाला का निर्माण किया ��������������������������������������

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    #rachanaprati120

    आप सभी आदरणीय पाठको का तहदिल से शुक्रिया
    आप सब ने इक दूसरे की रचना पढ़ी और सराहनीय की और दिल से अपनी रचना इस पाठशाला में उपस्थित की आप सभी लेखकों का दिल से शुक्र गुजार हूँ
    और कामना करता हूँ आगे भी इसी तरह हर रोज इस पाठशाला से जुड़े रहेंगे और अपने बिचार अपनी रचना इक दूसरे तक पहोंचाते रहेंगे
    हम सब mirakee पर इक परिवार हैं
    यहां पर इक दूसरे को जानने पहचानने और सिखने सिखाने का अवसर हमसब को मिला किसी को दोस्त किसी को भाई किसी को बहन किसी को गुरु मिला
    इनसब में मैं भी इक हूँ जहां मुझे बहन का प्यार गुरु का आशीर्वाद भाइयो का हौसला दोस्तों का साथ मिला .... |
    आप सबने लाजबाव कमाल की रचना से इस पाठशाला को खूबसूरत बनाया हर इक अल्फाज़ से रौशन बनाया आप सब ही विजेता है
    कोशिस यही रहती है हर बार इक नया इस पाठशाला को आगे बढ़ाए पर आज नई कलम से हम रूबरू नही हुए
    इसी लिए आज फिर दोबारा हमें किसी इक को इस पाठशाला को आगे बढ़ाने के लिए आमंत्रित करना है
    माननीय आदरणीय गुरु G आनंद सर से आग्रह करता हूँ पुनह वो इस पाठशाला को आगे बढ़ाए और हमें फिर कुछ नया लिखने का समझने का मौका प्रदान करें
    और आप सब से यही उम्मीद करता हूँ आप सब इस पाठशाला से जुड़े रहेंगे और ज्यादा से ज्यादा योगदान देकर इसे प्यार मोहब्बत से आगे बड़ाते रहें
    ©goldenwrites_jakir

  • goldenwrites_jakir 7w

    #आशिक़ी

    कईं दफ़ा देखा आईना .......पर अब मुद्दत हो गई
    परछाई पूछती सवाल और ज़िन्दगी जवाब हो गई
    खयाल तेरा रूबरू होता ऐसे जैसे फूलों में खूसबू
    चाँद में चाँदनी ऐसी मेरी रूह में तू समा गई ...|
    ©goldenwrites_jakir

  • mamtapoet 7w

    #rachanaprati119
    @goldenwrites_jakir, @anusugandh, @anandbarun


    सब कहे मुझे तेरी परछाई
    पर भाई में मुझे तू नज़र आई
    आईना क्यों झूठ बोले
    तेरी छवि तो मैंने उसमें पाई।

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    परछाई

    बचपन से सुनती आई हूँ
    लड़की जो पिता को गई
    बड़ी भाग्यवान वो कहलाई।
    लड़के ने यदि माँ से संस्कारो की विरासत पायी
    तो वो क्यों न कहलाया मां की परछाई।

    छोटी सी थी तब मम्मी मुझे छोड़कर भगवान के पास चली गई, क्योंकि उनको भी मेरी मम्मी जैसी मम्मी चाहिए थी, यही तो कहा था भैया ने। बस तब से ही भैया मेरी मम्मी बन गये , बिल्कुल मम्मी की परछाई जैसे हर दम मेरे साथ, प्रत्यक्ष और अपनी सीख और बातों से अप्रत्यक्ष रूप में। मेरी चोटी बनाने से लेकर, H. W. कराने और हाँ किस से कैसे बात करनी है, और कब चुप रहना है, सब कुछ तो मुझे भैया ने ही सिखाया।
    जब जब मम्मी की जरूरत थी वहाँ भैया मेरे साथ थे। और आज भी, जब पहली बार शादी के बाद पीयूष के साथ अपने घर में आई। पूजा की थाल हाथ में लिए माँ ने ( भैया)मेरी नज़र उतारी तो आँसू आ रहे थे उनकी आँखों में, मुझसे पूछा तू खुश तो है न, अपने नये संसार में, कभी कोई भी तकलीफ़ हो हिचकिचाना नहीं और सीधा मुझे आकर बताना, सबकी खबर ले लूँगा। ये कहते हुए उनकी आँखों में आँसू बहने लगे और उनकी आँखों में मुझे नज़र आई माँ की परछाई।

  • gannudairy_ 7w

    परछाई

    गुजार दिए होंगे तुमने कई दिन, महिने साल पर काट ना पाओगे वो एक रात हूँ मैं..

    की होगी तुमने कई लोगों से गुफ़्तगू, दिल पे लगेगी वो एक बात हूँ मैं...

    भीड़ में खुद को तन्हा पाओगे अपनेपन का एहसास कराए, वो एक साथ हूँ मैं...

    बिताए होंगे तुमने कई हसीन पल सबके साथ भुला ना पाओगे, वो एक याद हूँ मैं...

    और छोड़ा होगा तुम्हें लोगों ने बीच राह जिसे कभी चाह कर भी दूर ना कर पाओगे, वो एक रूहानी इश्क़ की परछाई हूँ मैं..
    ©gannudairy_

  • jigna_a 7w

    आईना/परछाई

    प्रतिबिंब
    देखा तो बस ये सोचा,
    आँखें छोटी दिख रही
    चल बनाते कजरारी और करारी,
    आईना रचता माया!

    नैन नक्श दिखते नहीं,
    अंधियारे में गुम हो जाए
    उजियारे में छिपते नहीं,
    परछाई या
    कूपमंडूक वृत्ति?!

    हर सोच से परे एक सोच
    हर छाया संग माया,
    हर आकृति में विकृति
    परंतु निश्चित संलग्न प्रकृति।

    खोज;कि सबकुछ तेरे भीतर,
    तेरी गाथा का,तू ही तो अक्षर,
    आईने से मोह ना लगा,
    परछाई से क्षोभ ना जता,

    भाव, कुभाव और अभाव
    तेरे ही दृष्टिकोण का परिणाम,
    फिर ना कोई छल
    और ना कुछ अभिराम!
    ©jigna_a

  • anusugandh 7w

    # आईना परछाई

    जिंदगी के आईने में सब कुछ घटता रहा
    परछाई बन साथ साथ चलता रहा
    यादों की किरिंच यूं ही चुभती रही
    आईना भी चूर-चूर होता रहा
    मूकदर्शक बन बस देखते रहे
    जिंदगी भर आईना सहता रहा
    आई गई जाने कितनी विपत्तियां
    पल पल वक्त बस यूं ही कटता रहा
    हम सुनते रहे आईना कहता रहा
    जिंदगी का हर गीत सुनाता रहा
    आईने का सूरत-ऐ- हाल अब क्या कहें"अनु"
    मेरी परछाई बन तनहाई में पलता रहा
    ©anusugandh

  • anandbarun 7w

    परछाई

    तुम मेरी सोच में हो
    जानता हूँ तुम्हे
    तुम सच ही तो हो
    कुछ तो कहो;
    लगता है, जरूर
    तुम वही हो।
    पर कैसे मिलूं तुमसे?
    क्या ये संभव है?
    ये क्या है, दरम्यां हमारे
    लगता है, तुम नहीं हो।
    पर कैसे मुमकिन है ये?
    तुम नजरों के सामने ही तो हो।
    और ये तुम्हारी आंखों के
    झलकते आईने में
    मेरे ही तो प्रतिबिंब हैं
    ये सच तो लगते हैं!
    फिर भी तुम्हें मेरा होने का
    एहसास ही नहीं है, कतई?
    क्या मैं ही नहीं हूँ?
    और ये जो मेरी परछाई है
    एक भ्रम है?
    फिर क्यूं ये यकीं है?
    जानता हूँ तुम्हें;
    नहीं, मैं मिल चुका हूँ, तुमसे
    समय के, भूले से,
    किसी, अदिष्ट मोड़ पे..
    ©anandbarun

  • goldenwrites_jakir 7w

    आईनापरछाई

    यादों की परछाई के साय में - हक़ीक़त का
    आईना ही देखना भुल गए ,,,,
    तेरे ख़्वाबों ख्यालों में डूबे हम कुछ इस तरह
    ज़िन्दगी जीने का हुनर ही भुल गए ,,,,
    फ़ूल गुलाब का अब चुभता है हाथों को
    हम ज़िन्दगी की जीने की खुसबू ही भुल गए ,,
    इश्क़ हुआ तबसे हम चाहत की हर इक दीवांगी में
    अब ख़ुदको ही पहचानना भुल गए ,,, ||
    शौर ज़माने का ख़ामोशी में बदल गया
    ज़ब तेरी तस्वीर को लगाकर रखा सीने में
    आईना बदल गया ज़िन्दगी का सनम तेरी यादों की परछाई में
    हर तरफ - दूर तक आता नही कुछ भी नज़र
    टूटकर बिखरे यार तेरे इंतजार में तन्हाई की गलियों में
    किस्से हमारी मुलाक़ात के कागज़ पर चंद लफ़्ज़ों में बयां हो जाते
    देखता ज़ब आईना वफ़ा का हमदम तेरा साया मेरी परछाई में
    |||||||||||||||
    गिला शिकवा - माफ़ी नामा सब तुझसे है किया
    देख कर अपनी ही परछाई में आईना तुझे जानकर
    लौटकर आई नही तू - तेरा ही इंतजार किया तेरी ही गली में
    मेरे घर का पता " मैं भुल गया
    ज़ब इंतज़ार तेरा किया तेरी ही शहर में ,,,,,
    आईना मुस्कुराहट का टूट कर बिखर गया यार तेरी ही गलियों में
    परछाई बनकर साथ तू चलती रही दर्द गम बनकर तन्हाई में |
    ©goldenwrites_jakir

  • goldenwrites_jakir 7w

    आईना|परछाई

    ज़ब भी देखा आईना
    अपना ही साया परछाई से दूर मिला
    मुझमे रहा कोई बाकी
    वो हमसफर हम साया मुझमे ही मिला ,,,,
    रात के अंधेरों में दिन के उजालों में
    कभी आगे कभी पीछे
    कभी बड़ा कभी छोटा मेरे साथ साथ रहा
    इक रूप पुरुष का इक रूप औरत का
    दोनों का मिलन ज़िन्दगी में कभी खूबसूरत तो
    कभी गम के साय सा रहा ,,,,,,
    ©goldenwrites_jakir

  • anandbarun 7w

    आईना

    कितने तो दिखा गये आपकी झलक
    इक मैं भी अदना, आपकी खिदमत
    सबने लगाई है कलई अपने मतलब
    निखारो जितने भी खुद को भरसक
    जोड़ना पड़े जो टुकड़ों में गए छितर
    देखोगे खुद की, फिर परछाँई अजर
    ©anandbarun

  • goldenwrites_jakir 7w

    #rachanaprati119
    ... @gannudairy_ भाई G का तहदिक से शुक्रिया इस पाठशाला को फिर मैं संचालन करूँ ��������
    ... @alkatripathi79 @jigna_a @anusugandh @anandbarun

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    #आईना परछाई

    #rachanaprati119 पाठशाला में आप सभी का स्वागत है
    आज का बिषय | आईना - परछाई |
    आप दोनों पर भी या इक पर भी लिख सकते हैं

  • goldenwrites_jakir 68w

    #prayasss57 आईना

    मन के आईने मे ज़ब भी देखा खुदको तन्हा ही पाया
    बेरुखी ज़िन्दगी मे तन्हाई बेबसी को ही पाया
    इंतजार के लम्हों ने मिटा दिया मेरा सुनहरा कल
    ज़ब भी देखा आईना खुदको बीते लम्हों मे ही पाया ..।।

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    ©goldenwrites_jakir