#rachanaprati142

16 posts
  • somefeel 17w

    रचनाप्रति 143

    आप सब का लेखन बहुत ही अच्छा और प्यारा था
    सब ने अपन हाथों से भिन भिन प्रकार का लिखा!
    मै इस काबिल भी नहीं आप सब के लेखन के की विजेता किसी एक को घोषित कर सकू,
    आप सब ही विजेता है!

    पर हैप्पी जी के लेख में लिखी बाते,

    मां की ममता से लेके, इन हाथो से लूटी जाने वाली जनता,

    मुझे बेहद पसंद आई!

    इस लिए मैं हैप्पी जी से निवेदन करता हूं की रचनाप्रति143 का आगे संचालन करे!

    मुझे बहुत खुशी हुईं, रचनाप्रति 142 का संचालन करने में,

    आप सब से उम्मीद करता हूं की आप भी सहमत होंगे!

    शुक्रिया❣️

  • _do_lafj_ 17w

    ❤️

    मेरी दुनिया है,
    तुझमें कही।।


    #rachanaprati142 @somefeel
    #Lol

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    मुझे ये कुछ पल के लिए तुम्हारे साथ नही रहना है,
    अगर इरादा हो उम्रभर साथ देने का तो चलो बात पक्की करते है।।
    थोड़ा तुम मुझे सम्भाल लेना,
    थोड़ा मैं तुम्हारे साथ चल लुंगी,
    थोड़ा तुम जल्दी आ जाना,
    थोड़ा मैं इंतेज़ार कर लुंगी।।
    कभी जो लड़खड़ाए कदम तुम्हारे,
    मैं तुम्हारा हाथ थाम लुंगी,
    सुनो!! तुम नाराज कम होना,
    और मैं प्यार ज्यादा कर लुंगी।।
    हर वक़्त साथ ना सही पर हाथ मत छोड़ना,
    पूरे दिल से चाहेंगे तुम्हें बस तुम दिल मत तोड़ना।।


    ©_do_lafj_

  • aryaaverma12 17w

    ✨हाथ ✨

    आज एक सपना देखा,तेरी हाथों की लकीरों को, मेरे हाथों कि लकीरों से मिलते देखा,मैने खूबसूरत सा वो नज़ारा देखा,
    हां, मैने एक खूबसूरत सा सपना देखा,हाथों में हाथ,
    तेरी बाहों में,मैने जन्नत देखा,आज मैंने एक सपना देखा,
    ©aryaaverma12

  • mamtapoet 17w

    मौसम संग शीतलता और
    कभी देता गर्माहट
    कुछ और नहीं ये है तेरे हाथ की सुगबुगाहट।

    गर्मी में-
    हवामहल के झरोखों से ,
    जैसे आती ठंडी बयार,
    जब हो ,
    तेरे हाथ में मेरा हाथ,

    सर्दी में लगता जैसे,
    बाजरे का खीचडाँ,
    घाट और छाछ,
    जब हो तेरी हथेलियों में मेरा हाथ।
    ©mamtapoet

  • anandbarun 17w

    प्रयास

    खड़े रहो ना भींचे हाथ
    कदम ढूंढ़ता तेरा साथ,
    जो इनमेंं रम जाए ताल
    खुलते जाऐं राह हज़ार।
    घिर जंजालों के अंबार
    सूझे ना कित उतरें पार,
    रुके रहो ना यूँ मझधार
    गति में मर्म अरु है सार।
    घनीभूत चिन्ता भरमार
    सुरसा लेती रहे आकार,
    तोड़ो भ्रम की ये दीवार
    पग है नैया कर पतवार।
    आस जगे जब बेशुमार
    राह नवेली खुले अपार,
    उठे कदम जब हर बार
    दिखते जाते आगे द्वार।
    ©anandbarun

  • goldenwrites_jakir 17w

    हाथ ✍️

    संग मेरे ज़ब तेरे हाथो में मेरा हाथ था
    वही तो मेरी ज़िन्दगी का सवेरा था
    हाथो में हाथ बस इक बहाना था
    रूह से रूह का मिलन वो था
    मोहब्बत कि शुरुआत का सवेरा था
    इश्क़ कहते किसे उस सागर का इक किनारा था
    ना रहे कोई दूरी हमारे दरमियाँ
    बाहों का वो मेला हमारा सावन था ,,,,
    आज याद बहुत आता है साथ वो तेरा
    जैसे अँधेरे जीवन का तू उजाला था
    आज हाथ है खाली पर तेरी वफ़ा कि ख़ुसबू
    आज भी बाकी है
    मिलती तू मेरी परछाई में - वो आईना है तू
    ये कलम है तुझसे तुझसे ही आज भी मुकम्मल इश्क़ है
    तुझे पा लेता हूँ कागज़ पर चंद शब्दों में
    ऐसे ही ज़िन्दगी कि सुबह और शाम में तू है .....
    ©goldenwrites_jakir

  • goldenwrites_jakir 17w

    हाथ ✍️

    हाथो कि लकीरों में - धुंधला ही सही तेरा नाम तो है
    हक़ीक़त से दूर तेरी यादों तेरी दुआ में मेरा नाम तो है
    ©goldenwrites_jakir

  • shru_pens 17w

    #rachanaprati142 @somefeel

    In kore kaagaz pr ye nanhe haatho ne ukera tha kuch
    Un ukre huye lekh pr rache the sapne kai
    Un haatho ko mitti ki saugandh ke dam par बेड़ियों ke hawaale krwaya kisi ne
    Aankho ki namee सोंक, bhula kr apni narmi, udd chali wo apne jahaan par

    Ghar ke kauravo ko hara kar
    Udd chali wo apne jahaan par
    Apne haatho se fir ukera usne
    Kore kaagaz ke aangan par
    Naam usne bnaya apnq
    Khud ke dam par, naa wo haari
    Mardaani usey banna padha, kuch kuruo ke khaatir
    Aag mein jal kar, raakho se janmi
    Wo ufan rahi kalam ke ghere mein...
    ©shruti_25904

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    ऐ इंसान !!!
    हाथों को बेड़ियों की राख में न जला
    दम है तो उसे भून कर रच तू कला।।।

  • tejasmita_tjjt 17w

    हाथ

    बहुत याद आता है वो मां के हाथों का खाना
    चाहे जैसा भी हो रूखा सूखा बना हो
    बड़े चाव से वो अपने हाथों से खिलाती थी
    छोटी छोटी शरारतों पर मार भी लगाती थी
    उन्हीं हाथों से आंसू पोंछकर गले लगाती थी
    मां ने ही तो जीना सिखाया इंसान बनाया

    अब मां तो है मगर मां के हाथ का खाना नहीं
    रोजाना वो प्यार भरा सिर पे हाथ नहीं
    स्नेह भरी गुस्से की झूठी ना ही वो फटकार रही
    पलकें बिछाए इंतजार करती है अब वो
    कब बेटी घर आए और उसे गले लगाए
    पास बैठ अपनी सभी बातें उसको बताए
    कुछ ठहाके लगाए कुछ तकलीफ अपनी बताए

    बहुत याद आता है वो हर लम्हा जो तुझ संग बिताया
    फिर से गोदी में सुला ले मां
    फिर से अपने हाथों से एक निवाला खिला दे मां

    ©tejasmita_tjjt

  • happy81 17w

    हाथ तो विस्तार का विषय हैं, पर अंक सीमा हैं तो संक्षेप में इतना ही लिखूंगी...
    एक सन्देश भी हैं..
    नौजवान अपने हाथों को सुदृढ़ और मजबूत रखे, देश सेवा करनी हैं..
    लड़किया हाथों से, रोटी के साथ -साथ दोनों घरों को बनाये अपना भविष्य बनाये..
    और वयस्क दिखाए, सफलता के सूत्र और हाथों की क्षमता बताये..
    अनंत कल्पनाओं को यहीं छोड़ कर पूर्णविराम करती हूँ, हाथ जोड़ कर सबका स्वागत करती हूँ..

    धन्यवाद... !!... ����

    #rachanaprati142

    @somefeel ji

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    हाथ...
    हाथ के हैं कई प्रकार,
    सबसे पहले आता हैं नवजात का कोमल हाथ,
    पिता बने नए युवक की सारी भावनाएं, सारे अहसास उस नवजात के हाथ की नाजुक ऊँगली को पकड़ कर मानों बरस पड़ती हैं उसके छोटे छोटे प्यारे प्यारे हाथ मानों पिता के बड़े से हाथ को चूमते हुए अमृत बरसा रहे हो..
    उस हाथ की तुलना गुलाब की पंखुड़ियों से करी जा सकती हैं..
    ये हैं ममता और भाव वाला हाथ.
    फिर आता हैं बचपन वाला हाथ.. वहीं हाथ जब बीचो बीच आता हैं एक तरफ माँ का दूसरी तरफ पिता का साथ आता हैं..बालपन में दोनों हाथों का खिंचाव चलना सीखा देता हैं..

    माँ के हाथ.. माँ के हाथों से बनी रूखी सूखी रोटी भी तृप्त कर देती हैं सदियों की भूख.. कोई विदेश में रहता हो तो उससे पूछना कीमत..
    फिर आते हैं दादी के हाथ.. अचार की खुशबू, मुर्रब्बें की तासीर, या हो दादी का काढ़ा सब उन्ही हाथों को देख कर याद आता हैं..
    बाबा के हाथों में होता हैं सदियों का ढेरा, उम्र भर की कमाई, उम्र भर के तजुर्बे का हिसाब..
    फिर आता हैं नौजवान का हाथ. जो इतनी गलन, और बर्फ से ढके हुए हाथों को भी अपनी आरज़ू और देशभक्ति की चिंगारी से पिघला देता हैं,
    फिर आते हैं किसान के कठोर हाथ जो बारहों महीनों तुम्हारे अन्न के लिए तपते हैं.. उनके हाथों पर आये हर खिंचाव, पसीने की बूँद, और कालेपन के धब्बे हमें रोटी पर बनी आकृति पर दिखाई देने चाहिए..
    फिर आता हैं भाई का हाथ.. जिसके हाथों पर रक्षा कवच पहना कर बहन भेज देती हैं निडर जीवन के संघर्षों में,
    फिर आता हैं सुंदर, सज्जा से परिपूर्ण प्रेमिका का हाथ उसके हाथों पर होती हैं प्रेमी के नाम की अंगूठी, उसके नाम की हरी हरी मेहँदी, और रंग बिरंगी चूड़िया.. सुहाग की निशानी जिसकी छनछन से ही उसका आँगन गूंजता हैं..
    फिर आता हैं नेता जी का हाथ जो बस चुनाव के वक़्त ऊपर उठता हैं और आपस में हाथ जोड़ कर जनता को ठगता हैं..
    फिर आता हैं गुरु का हाथ जो सर पर हो तो गोविंद के दोनों हाथ सर पर छत्रछाया की तरह सजे रहते हैं..
    फिर आता हैं मित्र का हाथ जो विपत्ति में असल दिशा तक पहुंचाते हैं..

    ©happy81

  • psprem 17w

    हाथ

    तकदीर लकीरों से नहीं,हाथों की मेहनत से बनाई जाती है।
    अगर दिल में है जज्बा तो अलग पहचान बनाई जाती है।
    ये जिन्दगी है यारो,ये खुद ही संवरनी पड़ती है।
    वर्ना तो दुश्वारियों की दीवार बनकर ये सामने दिखाई देती है।
    तकदीर तो उनकी भी होती है जिनके हाथ नहीं होते।
    मगर ये हाथ ही हैं जिनके बलपर जीवन की तस्वीर सजाई जाती है।
    ©psprem

  • goldenwrites_jakir 17w

    हाथो कि साख ✍️

    ज़ब भी दिल ने तुझे याद किया
    जुबां पर ख़ामोशी आँखों में नमी
    हाथो से कागज़ पर तुझे संग अपने सवारा है
    लिख कर नाम तेरा - तेरी वफ़ा को
    लफ़्ज़ों कि साँसो से रूह में उतारा है ,,,,,

    याद आते वो लम्हें ज़ब मेरे हाथो में हाथ तुम्हारा होता था
    लबों पर खुशियों के फ़ूल वो पल ज़िन्दगी के अनमोल होते थे

    आज ज़ब भी देखता इन तन्हा हाथो को तेरी यादों कि बरसात में खो जाता हूँ
    करके दोस्ती कलम कागज़ से - फिर रूबरू तुझसे होता हूँ
    मिलो कि दूरी तेरी हर एक बेरुखी को भुल जाता हूँ ,,,,

    मिटा तो ना सका तन्हाई कि लकीरों को
    पर तेरे सिबाह किसी और को नाम लिख भी ना पाया
    दिल कि हर एक गलियों में
    आज भी हजारों ख़त तुझे लिखे
    गुमनाम पते पर भटक रहे हैं
    मिले कहीं से तेरा पता वो दुआ कि अर्जी लगा रहे हैं
    मोहब्बत है कितनी वो एहसास के ज़ज़्बात मनमन्दिर में
    हर रोज ये सवाल पूछ रहे हैं
    देखता ज़ब भी ये खाली हाथ - आँखों में नमी
    हर और तुझे ढूंढ़ता हूँ .....
    ©goldenwrites_jakir

  • alkatripathi79 17w

    हाथों की लकीरों को क्यों माने तकदीर जहां
    जब मेहनत ही होती है हर बात की तदबीर यहाँ
    ©alkatripathi79

  • yuvi7rawat 17w

    हाथ

    हाथों pe lagi jo mehndi ha,
    La ushe mai chum lu,
    Kaagaz se bhi komal tan pe tere,
    Aapne ishq ki स्याही chhod du...

    हाथों ko jhod khada hu mai,
    Tujhe man-mandir me basa liya,
    Karke pooja teri O sanam,
    Tujhe ser-aakho pe baitha diya...

    हाथों ko dekh mere tu,
    Bhala itna kyu rote hai,
    Meri mehanat ki kamai bhi,
    To tere liye he hote hai...

    हाथों ko aapne tu jara,
    Mere ser pe yu fer de,
    Aapne pyar ki garmi me jara,
    Tu mere jism ko sek de...
    ©yuvi7rawat

  • somefeel 17w

    मैं @alkatripathi79 दीदी को धन्यवाद देता हूं की उन्होंने मेरी इस रचना को रचनाप्रति से जोड़ा, और @bad_writer भाई का भी बहुत धन्यवाद जो उन्होंने मुझे इस काबिल समझा!
    समय अवधि है गुरुवार रात 9 बजे तक!

    #rachanaprati142

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    रचनाप्रति १४२!

    रचनाप्रति १४२ का विषय है "हाथ"

    अपने फटे काले हाथों से मोहब्बत करना सीख लो,
    ये आपको आपकी मेहनत का अहसास कराते है,
    पैरों पे खड़ा होना तो एक उम्र के साथ जाते है सीख,
    पर इज्जत बनाने के लिए हाथ जिम्मेदारी उठाते है!
    ©somefeel

  • bad_writer 17w

    #rachanaprati142

    #rachanaprati141 ki sab rachna behtarin or durlabh thi or meri or se sab ko winner ghoshit karta hu..

    Or #rachanaprati142 ka sanchalan @somefeel ko de raha hun.
    ©bad_writer