#rachanaprati151

14 posts
  • dear_writer 16w

    कितनी खास हो तुम यह तो मेरा दिल ही जानता है
    अब इस दिल को किस कदर में समझाओ अब वो दिल

    किसी और के लिए धड़कने ने लगा है, उसकी यादों में अब
    कोई और आने लगा है, उसके संग वो हर एक लम्हा

    आशु से भर देती है, मुसाफिर-ए-आलम रुक क्यू
    नहीं जाता यह दर्द अब और सहा नहीं जाता है
    ©dear_writer

  • satender_tiwari 19w

    @yuvi7rawat ji please use #rachanaprati152 इस्तेमाल अगले विषय के लिए कीजिये।





    #rachanaprati151

    piu_writes

    अपने जीवन को कागज़ पे उतार दिया। और थोड़े से आराम को प्यार से आलस कह दिया । आपका धन्यवाद ।

    jigna_a

    आपकी कलम सुस्ता रही थी और स्याही भी आराम के mood में थी कि हमने आलस दूर भगाने का निवेदन किया तो , कलम चल पड़ी स्याही की साथ। आपका धन्यवाद ।

    anusugandh

    तो हमारे विषय ने आपके दिल का राज़ बता दिया। काश सबकुछ अपने आप हो जाता तो रोज़ होली दीवाली होती । और वो भी खुद मन जाती ! हा हा ।। धन्यवाद आपका ।

    alkatripathi79

    सच मे अगर प्रकृति ही आलस करने लगे तो , तो इंसान सुधर जाए। बहुत ही खूबसूरत विषय को चुना लिखने के लिए । धन्यवाद आपका।

    goldenwrites_jakir

    मिट्टी अवसर को समेट कर आलस को मिलाकर बहुत सुंदर विचारों को प्रस्तुत किया । धन्यवाद आपका ।

    yuvi7rawat
    आलास के चक्कर में धनिया भूले !भूले गर्लफ्रैंड का प्यार । मज़ेदार था आपका अनुभव । धन्यवाद आपका ।

    silent_pen_with_migrated_ink

    लो जी आपने तो आलस को ही निमंत्रण दे दिया । भला क्या बात करना चाहतें हैं । आपका धन्यवाद।

    gannudairy_
    और आपकी लिखी बात मान ले तो आलस घर मे तो क्या मौहल्ले में नहीं आ सकता। धन्यावाद आपका ।

    mamtapoet

    और अंत में चंद पंक्तियों में बड़ी बात कह देना। और रिश्तों की अहमियत समझाना वाह क्या कहने। आपका धन्यवाद ।

    आप सभी का ढेरों धन्यवाद जो आपने इतनी सुंदर कविता , इतने सुंदर विषय (हा हा) पर लिखा।

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    तो आगे की ज़िम्मेदारी हम @yuvi7rawat जी को सौंपतें हैं । आप जल्द ही कोई नया विषय बताएँ। /

  • mamtapoet 19w

    आलस

    Sorry या thank u बोलने में
    अक्सर हम कर जाते हैं आलस,
    तारीफ़ गर करनी हो तो ,
    शब्दों को चुनने में करते हैं आलस।
    अगर इतना आलस भी हम त्याग दे,
    तो शायद कई रिश्तें सँवार ले।

  • gannudairy_ 19w



    जीवन शैली का एक विकार है आलस्य ।
    मनुष्य का निकटवर्ती शत्रु है आलस्य।।
    सुबह का अमूल्य समय जो सो कर हैं गंवाते।
    वह जीवन में कभी भी तरक्की की सीढी नहीं चढ़ पाते।।
    अपना समय निरर्थक बातों में जो हैं गंवाते।
    अस्त व्यस्त दिनचर्या के कारण किसी भी काम को फुर्ती के साथ नहीं कर पाते।।
    जीवन में प्रेरणा की कमी के कारण आलस्य है आता।
    यह हम में सुस्ती को है बढ़ाता।।
    आलस्य से बचनें के लिए महत्वपूर्ण कार्यों की सूची बनाएं।
    उन के अनुसार कार्य करके आलस्य को दूर भगाएं।।
    व्यक्ति के सामने लक्ष्य स्पष्ट हो तो कार्य सफल हो पाएगा।
    नहीं तो निर्धारित कार्य भी विस्मृत हो जाएगा।।
    एक समय में एक ही काम को करने का नियम बनाओ।
    एक से ज्यादा काम करनें के चक्कर में अपना समय यूं न गंवाओ।।
    काम की क्रम बार श्रंखला निर्धारित करें।
    क्रम बार कार्य कर अपनें लक्ष्य की ओर बढ़ें।।
    कल्पना शक्ति के प्रयोग से सफलता आसानी से है मिल पाती।
    व्यक्ति के जीवन में वह उम्मीद का दामन है जगाती।।
    कार्य करनें का ढंग, कार्य करनें के परिणाम को यह सब देखना है जरूरी।
    इसके अनुसार कार्य करके अमल में लाना है जरूरी।।
    जीवन में शारीरिक श्रम को कभी नजरअंदाज मत करो।
    व्यायाम आदि और सुबह की सैर का कभी मत त्याग करो।। ।
    देर से उठना देर से सोना ,यह है आलसीपन की निशानी।
    बाद में हाथ पर हाथ धरे रह कर होगी तुम को ही परेशानी।।
    किसी न किसी रुप में आलस्य आकर हमें सताएगा।
    हमारे कार्यो में रुकावट डाल कर हमारी उन्नति के मार्ग को अवरूद्ध कर हमें भ्रमाएगा।
    हमें मन में यह दृढ़ संकल्प जगाना होगा।
    शरीर और मन से प्रमाद को दूर भगा कर अपनें में उत्साह जगाना होगा।।
    ©gannudairy_

  • shru_pens 19w

    O aalas, tum ho bade vichitra
    Sudhar dete ho aneko ke chitra
    Bade bado ko singhasan par chipka dete tum
    Kaha se rakhte ho itni pratibha tum?

    Aao Zara, tum farmao aaram Zara
    Karmath hone ka mauka to do Zara
    Aaram farmane ke liye padhi hai zindagi lambi
    Muh na modo yu, o aalas

    Tumhari tareef me lafzo ki Kami hai, janaab
    Vaado ki tashreef pesh karna koi tumse seekhe zara
    Aao Zara kabhi meri iss anjaan haveli mein
    Kuch ankahi ansuni guftgu ho jae, bin kuch bole ... Bin kuch sune.. khamosh andaaz mein...
    ©silent_pen_with_migrated_ink

  • yuvi7rawat 19w

    आलस

    Waah ye Aalas,
    Yaar ye Aalas,
    Pyara Aalas,
    Aalas he Aalas...

    Ye Aalas ki aada,
    Hai sabse juda,
    Aalas k nashe me chur,
    Mai duniya ko gaya bhul...

    Maa ne ek din dhaniya mangaya,
    Mai Aalas k mare vo bhi na laya,
    Girlfriend ko tha khandala jana,
    Lekin mai tho Aalas ka mara...

    Aalas k karan na mile Maa ki mamta,
    Aur na he mila Girlfriend ka pyar,
    Ye kaise ha Aalas ki mahima,
    Ye kaisa ha Aalas ka atyachar...

    Aalas jo mai karta hu,
    Tho bhot mai pachtata hu,
    Par kya karu mai sanam,
    Aalas kare bina jee nahi pata hu...

    Insaan tha mai pahale,
    Par aab mai sudhar gaya hu,
    Is papi duniya me mai,
    Aab ek janwar ban gaya hu...
    ©yuvi7rawat

  • goldenwrites_jakir 20w

    कोशिस कि तीनो अभिव्यक्ति को एक लिखने कि
    कुछ थी तकलीफ जिस बजह से दूर रहा ..... ��
    #rachanaprati149 #rachanaprati150 #rachanaprati151
    .... @alkatripathi79 @mamtapoet @anusugandh @satender_tiwari

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    #rachanaprati

    ( मिट्टी ) ( अवसर ) (आलस )

    मिट्टी के रंग अनेक
    मिलते अवसर ज़िन्दगी में अनेक
    कर जाते हम गलतियां आलस में आकर अनेक
    फिर पछताते खाकर ठोकर अनेक ......

    मिट्टी ---
    जन्म से शुरू अंत में भी बजूद जिसका रहे साथ
    ऐसी हमारी धरती माँ ....
    अवसर ________
    हाथो में थामकर कलम कागज़ पऱ बुनियाद जीने कि सीखि
    अवसर यही सत्य है - इसे नकार कर धोके में ज़िन्दगी को रखी
    आलस ...... .. .........
    कल कि फिक्र को छोड़ कर - आज हम आलस कर जाते
    देख कर दूसरों कि ख़ुशी को हम जल जाते ....
    ©goldenwrites_jakir

  • alkatripathi79 20w

    #rachanaprati151 @satender_tiwari


    इंसानों की तरह अगर प्रकृति में आलस्य आ जाए तो??

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    प्रकृति है अलसाई

    नहीं चली पुरवाई
    भवरें भी खामोश है
    चिड़ियों की चहक कहाँ गई
    कहाँ गुम सब शोर है

    सागर की लहरे कहाँ गई
    क्यों सरिता आज शांत है
    अंधियारा है चहु ओर
    फिर भी फूल क्यों है खिले हुए

    पतझड़ तो बीत गया
    क्यों कोंपले नहीं आई
    पेड़ों के मंजर कहाँ गए
    क्या प्रकृति भी है अलसाई
    ©alkatripathi79

  • anusugandh 20w

    आलस

    काश ऐसा कुछ हो जाता,
    काम अपने आप हो जाता ,
    लिखने का मन नहीं करता ,
    लिखना अपने आप ही हो जाता !!

    आलस इतना भर गया ,
    खाना भी कोई खिला देता ,
    वरना ऐसा कुछ हो जाता ,
    निवाला भी मुंह में चला जाता!!

    चलने में क्या होशियारी है ,
    बैठे-बैठे ही काम गर हो जाता,
    ना घुटने ही घिसते....☺️
    ना ऑपरेशन हो जाता !!

    लिख लिख कर क्यूँ कागज भरे
    पेड़ सारे ही कट रहे .. ..
    जब अंगूठे से काम चल रहा
    काहे खर्चा हम कर रहे !!

    पढ़-पढ़ कर क्यूँ अफसर बनना,
    अंगूठा टेक जब नेता बन रहे ,
    आलस के मारों की बात निराली,
    रोज दिवाली और होली मना रहे!!!!
    ©anusugandh

  • jigna_a 20w

    आलस

    सुस्ता रही थी कलम हमरी तनिक,
    स्याही भी मंद मंद मुस्काई थी,
    सुना रणभेरी बजा दी सतेंद्र जी ने,
    आलस पे लिखने की बारी आई थी।

    पर बात पते की बताऊँ ज़रा,
    नींद ने हमपे था पहरा धरा,
    हर शब्द हौले हौले सुझता सा,
    बेकारी की वृत्ति छाई थी,
    जब,आलस पे लिखने की बारी आई थी।

    हम काम सारे पहले मन में करते,
    समय की कमी के दोष न खलते,
    पर मनमौजी हम गर बैठें तो बैठें,
    फिर कोई भी युक्ति न रिझाई थी,
    हम्म, आलस पे लिखने की बारी आई थी।

    सुस्ता रही---------

    ©jigna_a

  • piu_writes 20w

    आलास

    नाम पिऊ ,उम्र पचास ,कद औसत ,गोल मटोल, चेहरा सौम्य जीवन के टेढ़े मेढ़े संघर्ष भरे रास्ते ,एक अकेल माँ
    घर बाहर के काम काज करते करते अपने बेटे को पाल पोस कर बड़ा करके
    अपनी सुख सुविधाओं को नज़र अंदाज़ करके
    नौकरी कर के, घर संसार चला कर
    हाँ अब कुछ आलसी हो गयी हूँ
    मेरा कमरा थोड़ा अस्त व्यस्त है
    मगर आज भी निरंतर कर्मठ
    निर्वाह कर रहीं हूँ मैं दाइत्व
    एक माँ, बेटी ,बहन ,दोस्त
    एक प्रोफेसर
    एक लेखिका
    एक एक्टिविस्ट
    होने का
    ©piu_writes

  • satender_tiwari 20w

    आलस

    कर आराम काम न कर
    आलस का गुड़गान ही कर
    जो होगा देखेंगे फिर कल
    कल का काम आज न कर।।

    मेरी बातों पर ध्यान तू कर
    कर आराम काम न कर
    बहुत पड़े हैं करने वाले
    तू आराम बर्बाद न कर ।।

    क्या हुआ जो संगी साथी
    कल को आगे बढ़ जाएंगे
    न होगा साथ में कोई तेरे
    ये सब चिंता तू अभी न कर।।

    कोई न पूछेगा तुझको तब
    क्या हुआ जो तू रोयेगा तब
    आज खुशी को बर्बाद न कर
    कल का काम आज न कर।।

    खरगोश भी आराम में सोया था
    कछुआ भले ही दौड़ जीता था
    ऐसी कहानियों पे ध्यान न कर
    कर आराम काम न कर ।।

    कल को तुझ पर लोग हसेंगे
    तेरी सीख किसी को न देंगे
    कोसेंगे तेरे आलस पे तो क्या
    आज तू बस आराम ही कर।।

    कर आराम काम न कर


    ©सतेंदर तिवारी (ब्रोकेन्वोर्डस)

  • satender_tiwari 20w

    #rachanaprati150

    बहुत बहुत धन्यवाद @anusugandh जी आपका , आपने मुझे ये अवसर दिया ।

    अपने दोस्तों को ज़रूर टैग करें । और रविवार रात 7 बजे तक अपने लेख को पोस्ट कीजिये।

    #rachanaprati151 का प्रयोग कीजिये।

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    आलस

    इस बार का विषय मैं देता हूँ "आलस" .....

    और आपको अलग अंदाज में लिखना होगा ।
    आलस की प्रशंसा करते हुए समझाना है कि आलस क्यों बुरा है।

    तो लिखिए फिर...और लिखने में आलस नहीं करना है

    मेरी कविता इस विषय पर इस पोस्ट के बाद ज़रूर पढ़ें।

  • anusugandh 20w

    ममता जी का में एक बार फिर से शुक्रिया अदा करना चाहूंगी ,उन्होंने मुझे रचनाप्रति का संचालन करने का मौका दिया ।
    आप सभी ने बहुत सुंदर रचनाओं इसे इस रचनाप्रति को सजाया।
    ममता जी, आनंद सर जी, अलका त्रिपाठी जी , सत्येंद्र तिवारी जी, गौरव कौशिक और isikaa ,
    आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद आप सभी विजेता हैं
    इस बार रचनाप्रति के संचालन की जिम्मेदारी मैं सतेंद्र तिवारी जी को देना चाहूंगी आशा है आप सब मुझसे सहमत होंगे
    @satender_tiwari