#rachanaprati171

23 posts
  • camyyy 8w

    दिल से
    #rachnaprati 171


    प्रेम -: कब बंधन कब मुक्ति

    प्रेम जब तक उम्मीद के डोर से जुड़ा है
    प्रेमिका के दिल के छोर से बंधा है।

    प्रेम जब तक प्रेमिका के साथ खड़ा है
    उसपे उसका विश्वास अड़ा है।

    प्रेम जब तक प्रेमिका के आदर्श से जुड़ा है
    वह उसके सम्मान में खड़ा है ।

    प्रेम जब तक प्रेमिका के शब्दों का अर्थ है
    वह उसके स्वप्न का सर्वस्त्र है।

    प्रेम बंधन है .....................................

    जब प्रेम के उम्मीद का डोर ढीला हो जाए
    प्रेमिका के दिल से बंधा छोर ढीला हो जाए

    जब प्रेम का साथ ना हो
    उसका उसपे टिका विश्ववास ना हो

    जब वो प्रेयसी के वर्ण का ना अर्थ हो
    प्रेमिका के स्वप्न का ना सर्वस्त्र हो

    प्रेम मुक्ति है..........................................
    ©camyyy

  • jigna_a 8w

    रचनाप्रति

    अनु दी का हृदयपूर्वक धन्यवाद, मुझे संचालन की ज़िम्मेदारी सौंपने के लिए।

    आज का विषय है "प्रेम- कब बंधन क्यों मुक्ति" समय सीमा 12 may रात 12 बजे तक।

    सहभागिता अवश्य हो सबकी। अनुग्रहित

  • anusugandh 8w

    #rachanaprati171
    #rachanaprati172

    मैं एक बार फिर से @khaire_patil जी का धन्यवाद करती हूं ����
    आप सब ने एक से बढ़कर एक रचनाएं लिखी आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद ��

    अलका जी ..ने प्यार भरी शिकायत को दर्शाया
    तुम गर पास होते......��

    जाकिर भाई ---ने कलम की शिकायत खुद से करने के लिए लिखी है, कागज कलम की तंहा दुनिया का जिक्र किया है बहुत खूबसूरती से��

    प्रेम जी ने दो रचनाएं बहुत सुंदर लिखी खुद की शिकायत खुद से करने के लिए कहा ��

    उत्तम जी ने तीन बेहद बेहतरीन रचनाएं लिखी
    दिल दुखने पर शिकायत पर खुद को कसूरवार ठहराया खामोश रहकर शिकायत...... ��

    @_scratched_emotions ने बेहद उम्दा दो ही लाइन में बहुत कुछ कह दिया, शिकायत खुद से.........��

    खैर पाटिल ....जी ने बेहद खूबसूरत तरीके से एक लड़की के दिल की शिकायत किसी से ना करने का बेहतरीन रचना के रूप में पेश किया��

    आर्यन वर्मा.... जी ने जिंदगी से शिकायत तो की पर सुकून की बात भी कही ��

    सत्येंद्र तिवारी जी ने शिकायत के पुलिंन्दों के लिए जवाब तलाश किये ,बेहतरीन रचना लिखी��

    पार्थ जी ने बेहतरीन अंदाज में रचना पेश की
    ये एक शिकायत है तुमसे........��

    ममता जी ने शिकायत का अलग अंदाज प्रस्तुत किया जो प्रकृति से संबंधित रहा����

    जिगना जी ने शिकायत को बहुत खूबसूरती से पेश किया शिकायत अजब सी सब कह के कुछ ना कहती.......����

    अजय पांडे जी ने रिश्तो में शिकायत को बखूबी शब्दों के माध्यम से उकेरा, बेहद उम्दा लिखा .....��

    Isikaa जी ने शिकायत को नसीब से जोड़ा और खूबसूरती से लिखा��

    आप सभी इतने बेहतरीन कलमकार हैं इनमें से किसी एक को विजेता घोषित करना बहुत कठिन कार्य है��

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    ✍️

    #rachanaprati171 के विजेता के रूप में मैं सतेंद्र तिवारी जी, जिगना जी और पार्थ जी को घोषित करती हूँ।

    #rachanaprati172 के संचालन के लिए मैं पार्थ जी को आमंत्रित करती हूं कि वह अगली रचनाप्रति का संचालन करें ।
    आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं पार्थ
    अभी पार्थ के दोस्त से पता चला कि पार्थ के पेपर चल रहे हैं इसलिए अगली रचना प्रति के संचालन के लिए मैं जिगना जी को आमंत्रित करती हूँ कृपा करके जिगना जी संचालन करें❤️
    @jigna_a @parth_101 @alkatripathi79
    @gannudairy_
    ©anusugandh

  • isikaa 8w

    शिकायत

    लफ्ज भी हैं खाली से आंखों में दर्द भरे
    नसीब ही नहीं था जो शिकायत क्या करें!!!..
    ********************
    वो चंद दिनों का साथ था मिला बिछड़ भी गया
    आंखों में नया सा ख्वाब था वो ख्वाब अधूरा ही रहा..
    हम मिले थे अजनबियों की तरह
    कहानी नई ही बनने लगी
    कुछ दूर ही साथ चले थे हम
    और मंजिल सहसा ही विभक्त हुई..
    यह खेल था महज किस्मत का
    या साजिश ये हमारी मंजिल की थी
    बिछड़ना ही था जब आखिर में
    फिर राहें आकर यूं टकराई क्यूं थी...
    * * * * *
    कैसी कश्मकश है ये दोष भी अब किसे ही दें
    नादानी तो हमारी थी इसकी शिकायत भी क्या करें..!!

    ©isikaa

  • pandeyajay 8w

    #rachanaprati171
    @anusugandh

    क्या करूँ शिकायत तुझसे कि....
    मुझसे दूर क्यूँ हुई,
    मैं गलत था या मुझसे कोई भूल- चूक हुई,
    क्या करूँ शिकायत तुझसे..?
    लगी थी शर्त उस बगिया में एक साथ जीने की,
    चलेंगे साथ कदम ऐसे हमदम हमसफ़र बनके,
    फिर शर्त क्यूँ टूटा रिश्तों में खटास क्यूँ हुई,
    खिला था प्रेम का दीपक फिर काली रात क्यूँ हुई,
    क्या करूँ शिकायत तुझसे कि......
    मुझसे दूर क्यूँ हुई..?
    बिना अपलक निहारें आँखों से नजरअंदाज क्यूँ हुई,
    बिन खंजर घोपें दिल से रक्त प्रवाह क्यूँ हुई ,
    बोलो ना....क्या करूँ शिकायत तुझसे कि,
    मुझसे दूर क्यूँ हुई...????

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    #rachanaprati171
    @anusugandh


    शिकायत

  • anusugandh 8w

    ✍️

    शिकायतों की गली में कुछ यूं मुड़े
    रिश्ते काफूर हो ,जाने कहां उड़े!!
    ©anusugandh

  • anusugandh 8w

    शिकायत

    शिकायतों का दौर कुछ यूं चला
    रिश्ता मौका बस ढूंढने चले चला
    ©anusugandh

  • jigna_a 8w

    #शिकायत

    आह जो सिसक के रह गई,
    बन चुभन ठहरती,
    भूखें पेट से जो की,
    आग बन धधकती,
    इश्क़ का हो दर्द गर,
    मौज सी उछलती,
    त्याग की हो बात तो,
    चुप्पी साध लेती,
    आब सी बरसती,
    ज़ालिम बड़ा तड़पती,
    कहीं गीत और ग़ज़लों में,
    स्याही बन के रिसती,
    शिक़ायत अजब सी,
    सब कह के कुछ न कहती।
    ©jigna_a

  • mamtapoet 8w

    #rachanaprati171
    @anusugandh,@alkatripathi79

    फल देने के लिए फूलों का मरना जरूरी है क्या,
    शिकायत एक ये भी रहती हैं ,
    कलियों की, ख़ुदा से।

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    शिकायत

    अपने ही विचारों के समंदर में ,
    बड़े गहरे तक डूब जाती हूं,
    और शिकायत हवाओं को रहती हैं,
    जो जिस्म को छूकर चली जाती हैं।

  • parth_101 8w

    रातें जग रही थी अंधेरे में, तुमको सुलाने के नाम पर
    बोलो क्या खता हुई कि जुगनू चल दिए थे काम पर
    #rachanaprati171
    @anusugandh

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    एक शिकायत

    खाब हूँ कहा है तुमने
    तो आँख भर
    पसरकर
    देखते क्यूँ नहीं
    मुड़-मुड़के चले जाते हो
    ठहर कर
    देखते क्यूँ नहीं

    ये एक.. शिकायत है तुमसे

    सवेरे बस्ता लिए चले जाते हो
    शाम की चाय छूट जाती है
    उसका भी एक
    हिसाब देते क्यूँ नहीं
    बाहर धूप है कितनी
    कितनी किताबें बेंची है तुमने
    हिसाबों की एक मुझे भी
    किताब देते क्यूँ नहीं

    ये एक.. शिकायत है तुमसे

    पता लगता भी नहीं सुबह
    किस ठिकाने चले जाते हो
    क्या अखबार हो गए हो?
    रूठ जाते थे मेरे रूठने के बदले
    अब क्यूँ मनाने चले आते हो
    क्या जिम्मेदार हो गए हो?

    हाथ हटाकर क्या पता कब
    मेरे सर सिरहाने रख चले जाते हो
    शाम गुजरती जाती है
    रूठ जाती हूँ अँधेरे से तब
    क्यूँ उजाले की तरह
    रिझाने चले आते हो

    ये एक.. शिकायत है तुमसे

    शिकायतें मिटने लगी हैं कुछ
    कुछ रह गई हैं आदतें मेरी
    मेरी आदतों में होने लगे हो तुम
    लगे हो जबसे मुस्कुराने तुम

    मग़र अब सोचती हूँ

    के रह भी जाए एक शिकायत
    तो क्या सितम वो लाएगा
    क्या भरम है
    क्या पता
    या शिकायत है मेरा
    या है सनम
    क्या पता ‍♂️

    - पार्थ -

  • satender_tiwari 8w

    नज़रिया !!

    कोई चंद खुशियाँ संभाल न पाया
    कोई गम में भी मुस्कुराता रहा
    कोई लिए शिकायतों का पुलिंदा
    सिर्फ चंद जवाब तलाशता रहा ।।

    किसी ने रोटी दो टुकड़ों में बाँट ली
    कोई पकवान भी ढंग से न खा सका
    निकालता रहा कमी हर निवाले पर
    कोई रोटी में स्वाद बेमिसाल पा गया।।

    सुख और दुख नज़रिया है नज़रों का
    कोई सब कुछ पाकर खुश न दिखा
    जिसको रोटी टुकड़ो में मिली खाने को
    वो कोटि कोटि धन्यवाद हज़ारों दे गया।।

    ©सतेंदर तिवारी (ब्रोकेन्वोर्डस)

  • aryaaverma12 8w

    #rachanaprati171
    @anusugandh didi
    @mamtapoet
    अक्सर लोगों को अपनी जिंदगी से बड़ी शिकायते रहती हैं,
    जब भी शिकायतें बड़ने लगे,एक नज़र उनपर भी डाल लेना,
    जिन्हें जिंदगी में,कुछ तो क्या बहुत कुछ नही मिला,
    रहने को घर नही,सोते को बिस्तर नही ,����

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    शिकायत

    शिकायत तो बहुत हैं, तूझसे ये जिंदगी,बस
    सुकून इस बात का हैं, कि जो मुझे मिला,
    वो कितनों के नसीब में नहीं,
    ©aryaaverma12

  • khaire_patil 8w

    सूबह सुबह छह बजे उठती
    सारा काम करती
    स्कूल को जाती, बाराह बाजे आती
    दोपहर का खाना भी बनाती

    झाडू पोछा लगाती
    अपने भाई के गंदे प्लेट्स भी धोती
    सारे काम करने बाद
    पढाई करके अव्वल नंबर भी लाती
    पूरा का पुरा घर वही तो संभालती

    भाई उसका बेकार है
    ना सुनता उसकी कूछ है
    कितनी भी बिमार हो,
    या उन चार दिनोंकी शिकार हो
    फिर भी घर का पुरा काम तो
    उसके ही नसिब है

    घर चलाने खातीर
    ट्युशन चलाती
    पापा को हातभार लगाती
    पुरा दीन काम में जाता
    अपना दुःख किसको नहीं बताती

    शिकायते करती तो किससे करती
    क्योंकी बीन माँ की ही तो
    थी वो लडकी
    ना पापा की परी थी,
    ना भाई की दुलारी थी
    माँ, बेहन, बेटी का किरदार संभाले
    वो तो एक छोरी थी

    ©khaire_patil

    """"आजकल लडके नहीं
    लडकिया समजदार हूई है
    बाप का बोझ कंधे पे लिये
    लडकों का किरदार निभा रही है""""

  • psprem 8w

    शिकायत

    अब ये शिकायत है खुद से,,,,,
    कि शिकायत नहीं की।
    अब शिकायत है ये कि,,,,,
    रब की इबादत नहीं की।
    शिकायत अब करें भी तो क्या,,,,,
    जब किसी से कोई शिकायत नहीं।
    बस एक शिकायत है खुदा से,,,,
    कि तेरी हम पर क्यूं इनायत नहीं।
    बाकी हमको कोई शिकायत नहीं।
    ©psprem

  • _scratched_emotions 8w

    शिकायतें नही की कभी किसी से,
    ये शिकायत भी, आज खुद से हैं

    ©_scratched_emotions

  • psprem 8w

    शिकायत

    ये सच है कि सबको शिकायत है जिन्दगी से।
    मगर हम खुद की खुद से शिकायत करते नहीं।
    औरों की गलतियों पर हम रखते हैं नजर,
    मगर खुद की गलतियों पर नजर हम रखते नहीं।
    अगर हम खुद की शिकायत खुद से करें,
    तो जिंदगी से शिकायत फिर होगी नहीं।
    ©psprem

  • zakirm 8w

    Sikayat

    Sikayat ab Ye Kalam har roj khudse krti h
    Ho gya kalam gagaj se dur is bat ka dard hr roj sehti he ,,,,
    Pakar khoobsoorat duniya mirakee
    Us ghar parivar se dur ajnabi si ye kalam ab rehti h ,,,
    Yad sbki bahut aati pr mjboori ki janjiron me qaid kagaj kalam ki duniya tanha rehti h ,,,,,
    ©zakirm

  • uttamky 38w

    आपको कुछ बुरा न लग जाए
    इसीलिए अब हम कोई शिकायत नहीं करते
    मेरी इस खामोशी को
    आप मेरी बेपरवाही ना समझ लेना
    ©uttamky

  • uttamky 42w

    अब नहीं है हमें शिकायत किसी से
    शिकायतें पसंद नहीं करते लोग
    खामोश रह कर के भी देखा है मैंने
    खामोश होने का वजह भी नहीं पूछते लोग
    ©uttamky

  • uttamky 65w

    सोचे थे तुमसे मिलकर
    अपनी हरे'क एहसास जताएंगे हम
    खैर;दिल दुखा कोई बात नहीं
    अच्छा हुआ जताने से पहले,हकीकत तो जान गए हम।
    अगर दिल दुखा तो उनसे शिकायत क्या करें हम
    गलती हमारी थी,जो खुदी को उनका ख़ास समझ बैठे थे हम।
    ©uttamky