#rachanaprati44

19 posts
  • _do_lafj_ 55w



    मैं बहुत बहुत धन्यवाद कहना चाहूंगी @bhaijaan_goldenwriteszakir जिन्होंने मेरी लिखी रचना को पसंद किया था और मुझे संचालन के लिए चुना था।।
    मेरा टॉपिक था बचपन जिसपे आप सबने बहुत ही अच्छा प्रदर्शन किया।।
    सबकी रचनाएं बहुत ही अच्छी थी।।
    मैं #rachanaprati45 के लिए @dixitpriya22 को विजेता घोषित करना चाहूंगी।।


    ©_do_lafj_

  • bhaijaan_goldenwriteszakir 55w

    बचपन ✍️✍️

    घर पर ही भुआ G ज्ञान की देवी बनकर
    हर इक पाठ सिखाती थी -- ABCD से लेकर
    अ आ इ ई का सफर लिखना पढ़ना सिखाती थी
    क्या होती थी गिनती किसे जोड़ना घटाना कहते थे
    हर इक पाठ का सही सही रास्ता दिखाती थी
    भुआ हमारी ज्ञान की देवी हर रोज एक नया पाठ पढ़ाती थी .

    दादी की छोटी छोटी कहानियां हमें बड़ी बड़ी बातें सिखाती थी
    दादा देकर चाबन्नी अठन्नी हमारी ख़ुशीयों की बजह बन जाते थे
    शाम को ज़ब पापा घर आते - कपडे की थैली में
    मिढ़ाई नमकीन हर रोज साथ लाते
    मिलजुल कर हम बड़े छोटे सब संग खाते .....
    कितना pyara वो कल हमारा वो बचपन सुहाना
    जिसमे सिर्फ ख़ुशीयों के फ़ूल ही फ़ूल थे ......
    ❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤
    ©bhaijaan_goldenwriteszakir

  • piu_writes 55w

    इस जिंदगी की होड़ में इस पागलपन की दौड़ में वो समाँ याद रखिए , जो खुश हो जाता था चंद चीजों से , खुद में अपने बचपना आबाद रखिए
    ©piu_writes

  • sapnagarg17 55w

    Respect your parents🙏🏻

    हमारे बड़ों ने बखूबी फ़र्ज़ निभाए;
    अब है हमारी बारी कुछ उनके लिए करने की ..
    अपने सपनो को अधूरा छोड़, पूरे किए है हमारे शोख़ इन्होंने ;
    आज बारी है इनके अधूरे सपनो को पूरा करने की ..


    ©sapnagarg17

  • bhaijaan_goldenwriteszakir 55w

    बचपन ✍️

    आँखों में आज भी - बचपन की तस्वीर उभर आती है
    देखता हूँ ज़ब किसी का बचपन -- ज़िन्दगी उसी राह पर फिर लौट जाती है .....
    क्या खोया है बड़ा होकर - एक सवाल फिर जहन में एक पहेली बन जाती है
    ज़िन्दगी वक्त की सुई के साथ अजीब खेल खेल रही है
    कभी मिट्टी के खिलौनो से प्यार था
    और आज किसी की आँखों का इंतज़ार है
    ❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤
    ©bhaijaan_goldenwriteszakir

  • dixitpriya22 55w

    Bachpan...

    Jab Sab bacche khelte the
    ham per Kuchh zimmedariyan thi...
    sabse alag Thodi Hamare bachpan ki kahaniyan thi

    Sabko Chahat Thi Khel Khilauna ki
    Hamen Ek Waqt Ki Roti Ki Chintaye thi...
    Sabko Milta tha tyoharo Mein naye kapde aur mithaiyon ki saugat
    Hame chulhe jalane ke liye Lakadi ki pareshaniyan thi...
    sabne padhna Sikha Kapi or slate pe
    Hame Maa ne sikhai Rakh se likhna
    ka kha ga gha aur gintiya thi...
    Kuch Is Tarah Thodi sabse alag Hamari bachpan ki kahaniyan thi...

    Jahan zid Karte The Sab hamumar bacche
    Ham me Kuchh jyada hi samajhdariya thi...
    Rote the sab mummy papa ke Samne Chilla kar
    Maa Sun Le Hamari siskiyan
    Hamen siskiyon ko chhupane Ki Bimari thi...
    Bahut Hi Pyara tha Bachpan mera
    bahut pyari meri bachpan ki kahaniyan thi....
    ❤❤❤❤❤❤❤

    ©dixitpriya22

  • _do_lafj_ 55w

    ❤️बचपन खुशियों का खजाना था,
    कितना अनमोल वो जमाना था।।❤️


    #rachanaprati44

    @bhaijaan_goldenwriteszakir
    @greenpeace767 @anusugandh @aka_ra_143

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    कागज की नाव थी,
    बारिश का बहाना था।।
    वो मासूम बचपन भी,
    खुशियों का खजाना था।।
    थक हार के माँ की गोद में,
    जाते ही बस सो जाना था।।
    पापा की डांट खाते ही,
    एकदम चुप हो जाना था।।
    बस प्यार ही प्यार था,
    कितना खूबसूरत ,
    बचपन वो यार था।।
    भूलती नही यादें,
    माँ की लोरियाँ,
    पापा की बातें।।
    दादी की कहानियां,
    बाबा की कहावतें।।
    वो छोटी छोटी बातों पे,
    मुह फुला लेना।।
    बिना कुछ बोले,
    पापा का मना लेना।।
    वो पहली बार स्कूल जाना,
    गेट पे खड़े होके बस का इन्तेज़ार करना।।
    उतनी ही देर में भाइयों से,
    लड़ाइयां हज़ार करना।।
    तुझे डस्टबिन से उठा के लाये है बोल के,
    भाई को खूब चिढ़ाना।।
    बहुत याद आता है,
    वो बचपन का जमाना।।


    ©_do_lafj_

  • shru_pens 55w

    #rachanaprati44
    @_do_lafj_ @bhaijaan_goldenwriteszakir @aka_ra_143 @shivi_18

    Bachpan ki baat hi kuch aur thi
    Daur tha wo masoomiyat aur apnepan ka

    Un dino koi paraya nai hota tha
    In dino apno ko pehchanne me hichak hoti hai

    Tab hamare rone se baatein samajh li jaati thi
    Aaj bolne par bhi samajhta nahi koi

    Tab ghumne se katraya nahi jaata tha
    Aaj nikalne se pehle sochna padhta hai

    Kyu wo din itne tez gati se udd chale
    Aur bhi to jeene the wo waqt suhaane

    Wo rone ki dhun badi meethi thi
    Wo badi moocho waale uncle kitne bhayankar the naa

    Aur wo nokjhok yaad hai naa
    Usne maara to maine bhi laga diye do char
    Bhaiya ne rulaya,
    Par in sabse pyaara hai
    Wo masoom se chehre aur sabka pyaar.

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    Kuch lafz bachpane ke naam

    Umar badhne se bachpana chhoot'ta nahi
    Muskuraa lene se badappan chhipti nahi.
    ©shruti_25904

  • anusugandh 55w

    बचपन

    वो बचपन की बातें,वो मीठी सौगातें,
    वो हंसना हंसाना, वो रूठ कर मुंह फुलाना,
    पुचकारने पर, झट से मान जाना
    कैसे वो दिन थे , कैसी थी वो बातें
    वो बचपन की बातें,वो मीठी सौगातें!

    वो मिट्टी के घरौंदे, कुछ बनते कुछ टूटते,
    कुछ रोते ,कुछ बिलखते,कुछ सुबकते,
    कितने प्यारे मंज़र, कितनी प्यारी बातें ,
    वो बचपन की बातें, वो मीठी सौगातें!

    वो छुपन छुपाई, पकड़म पकड़ाई,
    देर तक खेलना, सबकुछ भूल जाना,
    वो माँ की डाँट, पापा का प्यार,
    बहुत याद, हम हैं करते,
    वो बचपन की बातें,वो मीठी सौगातें !

    बड़े होकर, कुछ ख्वाब बनते बिगड़ते,
    तितलियों के जैसे ,उड़ते फिरते,
    मन को पंख,लग गए हो जैसे ,
    फिर भी रह रहकर याद आते,
    वो बचपन की बातें, वह मीठी सौगातें,
    न भूली हूं अब तक, ना भूलूंगी मरते दम तक!!
    ©anusugandh

  • paper_reaper 55w

    Bachpan

    मन की आवाज़ बचपन
    कांच का खिलौना बचपन

    उस पानी की तरह बचपन
    उस आकर में ढले जैसा बर्तन

    हमें खुद से मिलाए बचपन
    गंगा सा पवित्र होता बचपन


    कांच सा पारदर्शी बचपन
    विद्वान सा दूरदर्शी बचपन

    सदुपयोग तो उद्धार जीवन
    दुरुपयोग तो मैला हो मन

    संभाले रखे अपना बचपन
    संजोये रखे अपने भीतर

    ©paper_reaper

  • aka_ra_143 55w

    #Rachanaprati44
    @_do_lafj_
    ����������������������
    मुझे एक बार फिर से वही बचपन जीना है
    जिसमें सभी लोग कुछ भी कर जाते थे
    बस मेरे चेहरे की एक मुस्कान के लिए
    ����������������������

    Read More

    बचपन

    ❤️❤️❤️❤️❤️❤️
    मुझे एक बार फिर से वही बचपन जीना है
    जो बिना किसी की रोक-टोक के जिया है
    मुझे फिर वही सब खिलौनों से खेलना है
    जिसके टूट जाने पर कभी डांट न पड़ी हो
    मुझे फिर से वही मां की गोद मे सोना है
    जिसमें सोने से कभी दर्द महसूस न हुआ हो
    मुझे फिर वही पापा की उंगली पकड़कर घूमने जाने है
    जहाँ पर किसी भी खिलौने की ज़िद पर पापा ने खरीदा है
    ❤️❤️❤️❤️❤️❤️
    ©aka_ra_143

  • _do_lafj_ 55w

    #rachanaprati44

    मैं बहुत बहुत धन्यवाद कहना चाहूंगी @bhaijaan_goldenwriteszakir जिन्होंने मेरी लिखी रचना को पसंद किया और मुझे संचालन के लिए चुना।।
    हमारी जितनी भी यादें होती है वो सबसे ज्यादा बचपन से शुरू होती है और बचपन से ही जुड़ी होती है तो #rachanaprati44 के लिए हमारा टॉपिक भी यही है-
    "बचपन"
    हम सब चाहते है अपने बचपन को फिर से जीना, पर हम जी तो नही सकते फिर से लेकिन महसूस जरूर कर सकते है अपने लेख से।।
    उम्मीद है आप सबको मेरा टॉपिक अच्छा लगा होगा।।

    Result time- 4 pm
    Date- 23 july..

    ©_do_lafj_

  • bhaijaan_goldenwriteszakir 55w

    #rachanaprati44

    #Rachanaprati43 पाठशाला में अब सबने भाग लेकर इसे और भी खूबसूरत बनाया है
    आप सब की कलम जादूगर है आप सब ही विजेता है ..
    इस पाठशाला को आगे बढ़ाने के लिए @_do_lafj_ G ko आमंत्रित करता हूँ और दिल से हार्दिक अभिन्दन करता हूँ
    ©bhaijaan_goldenwriteszakir

  • bhaijaan_goldenwriteszakir 59w

    #Rachanaprati all

    .
    ©bhaijaan_goldenwriteszakir

  • beleza_ 66w

    #rachanaprati44 @_do_lafj_


    Lost memories of childhood
    When there were only rains of smiling treasures

    (`“•.__.|.__.•“´)
    "��“
    (¸.•“-“•.¸)

    Even today when I remember my childhood, I feel that I have started living my childhood again
    Like that beautiful childhood memories again became part of my present life

    (`“•.__.|.__.•“´)
    "��“
    (¸.•“-“•.¸)

    ★☆★☆★☆★☆★☆★☆★☆★☆★☆★
    ★ 。☆。★ 。☆。★ 。☆。★ 。☆。★ 。☆
    याद आतीं हैं �� आज भी सबको
    बचपन����की वो नटखट यादें
    वो माँ �� की लोरी सुनना
    और पापा का बेसुमार �� प्यार
    वो रंग बिरंगी �� तितलियों के पीछे दौड़ना
    और हवाओं में�� पतंग उड़ाना
    वो दादी के संग �� स्कूल जाना
    और दादू का आइसक्रीम��खिलाना
    वो किताबों �� पर रंग �� सजाना
    और बारिश �� मे दौड़ लगाना
    वो चीटियों ��को चीनी खिलाना
    फिर मम्मी से �� डांट खाना
    वो दीदी का हँसकर �� मनाना
    और भाई का �� साइकिल पर सैर कराना
    याद आती हैं आज �� भी हमको
    बचपन की वो नटखट �� बातें
    लंच से पहले ही टिफिन �� खा लेना
    काम न करने पर नए बहाने �� बनाना
    छुट्टी की �� घंटी का इंतज़ार करना
    घंटी बजते ही बाग़ �� में जाना
    वो पेडों �� पर लटकना
    और उछल कूद ����‍♀करना
    वो पापा के �� साथ मेले में जाना
    और मेलों में रंग बिरंगे �� खिलौनो का होना
    वो खिलौनों की ज़िद �� पकड़ना
    और �� झूले के लिए �� आंसू बहाना
    वो माँ पापा का प्यार ��
    और खुशियों का �� खज़ाना
    वो बचपन �� की ज़िद
    और यादों का �� खज़ाना
    वो सपनों ☺ की दुनिया
    और हँसना �� हँसाना
    कभी न �� भूलना वो
    बचपन ❤️ का ज़माना

    ★ 。☆。★ 。☆。★ 。☆。★ 。☆。★ 。☆
    ★☆★☆★☆★☆★☆★☆★☆★☆★☆★

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    Lost memories of childhood
    When there were only rains of smiling treasures.
    ©beleza_

  • shivi_18 75w

    बचपन के वो पल

    काश कि वो पल फिर वापस आते.......
    काश कि वो पल हम दोबारा जी पाते........
    अब तो वो पल बस कुछ याद बनकर रह गए हैं.........
    जो सिर्फ......... और सिर्फ......... ख्वाबों में हैं आते.........
    - Shivi soni
    ©shivi_18

  • yuvi7rawat 82w

    #rachanaprati44
    @_do_lafj_



    Tasveer mere bachpan ki,
    Mujhe jeena sikhate hai...����❤

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    Bachpan

    Tasveer mere bachpan ki,
    Mujhe kuch batate hai,
    Mere khoye hue atite ki,
    Mujhe yaad dilate hai...

    Tasveer mere bachpan ki,
    Mujhe bada hasate hai,
    Yaad mere khelono ki,
    Mujhe bada satati hai...
    ©yuvrajr

  • anantsharma_ 114w

    ◆बचपन का जमाना◆

    ऐसा हुआ करता था अपने बचपन का जमाना
    ना यादों का रुलाना
    ना खाबों का सताना
    बस अपनी धुन के मगन में , शरारतों का किये जाना
    ऐसा हुआ करता था अपने बचपन का जमाना।

    ना समय का ठिकाना
    ना शरारतों के गट्ठरों का पैमाना
    और वो बापू के लठ पड़ने से पहले
    दौड़ भाग माँ के आँचल में छुप जाना
    ऐसा हुआ करता था अपने बचपन का जमाना ।

    स्कूल से लौटते वक्त कपड़ो का धूल मिट्टी से लतपटाना
    फिर सबसे छुपके , छुपाके घर के अंदर जाना
    फिर भी माँ के द्वारा पकड़े जाना
    और उनका भी दो चार लठ लगाना
    ऐसा हुआ करता था अपने बचपन का जमाना।

    ना सुरों का ठिकाना
    ना रागों का तराना
    बस दूसरों के सामने बिना शरमाये
    अपनी धुन में मगन होक गाना
    ऐसा हुआ करता था अपने बचपन का जमाना।

    ना प्यार का झूठा अफसाना
    ना ही भविष्य का ठौर ठिकाना
    बिना किसी गम का बोझ लिए
    बस अपनी मगन में जिये जाना
    ऐसा हुआ करताथा अपने बचपन का जमाना।
    ©anantsharma_