#rachanaprati91

18 posts
  • anandbarun 32w

    मैं कायल हूँ:
    ईशु शर्मा जी @______i के 'पानी से मोती' में स्त्री अस्तित्व पर गहन चिंतन और सफर पानी से मोती बनने का।
    लवनीत जी @loveneetm के 'नीर' में पानी के गुण और महत्ता के उत्तम गुणानुवाद का।
    अलका त्रिपाठी @alkatripathi79 जी के 'पानी' में जीवन के विभिन्न रगों को घोलने का तथा एक और रचना 'बोतल में पानी बा' में हास-परिहास में बदलाव और हृदय को छू लेने वाले भावों को रोचक ढंग से समाहित करने का।
    जिग्ना मेहता जी @jigna_a के 'दो बूँदें' में जीवन में नवरस की अभिव्यक्ति और जल से हमारा अन्योनाश्रय संबंध दर्शाने का।
    प्रेम सिंह जी @psprem के 'जल' में जल संरक्षण का महत्व सफलता से स्थापित करने का।
    तेजस्मिता जी @tejasmita_tjjt के 'पानी' में जल की महिमा के अद्भुत बखान का।
    जाकिर भाई @goldenwrites_jakir के 'जल धारा' की दो प्रविष्ठियों में दिली एहसासों की रूहानी अदा और यादों का सुहानी रंग घोलने का।
    सौरभ जी @amateur_skm के 'नदी' में प्रेम और विछोह के माध्यम से लगाव और बिखरने की कहानी गढ़ने का।
    ममता जोशी जी @mamtapoet के 'पानी (नीर)' में स्त्री दुर्दशा पर करारा कुठाराघात करने का।
    अनीता दहिया जी @anusugandh के 'पानी' में जल-चक्र से जीवन के भेद का उजागर कर उल्लास का संचार करने का।
    अनुष्का जैन जी @shayarana_girl के 'मैं बादल' में जल की तरह इश्क़ से समस्त सृष्टि में घुलने का।

    आप सभी की रचना अपने-अपने भावों में उत्कृष्ट हैं और किसी एक को विजेता घोषित करना बहुत ही मुश्किल है।

    फिर भी सौरभ जी की कविता मुझे बहुत पसन्द आई, अतः मैं उन्हें विजेता घोषित करता हूँ।

    @amateur_skm सौरभ जी को #rachanaprati92 का संचालन करने हेतु आमंत्रित करता हूँ

    ©anandbarun

  • shayarana_girl 32w

    मै बादल बनकर तेरे इश्क़ को
    बूंदों की तरह अपने साथ लिए,,
    खुद में ही समेटे हुए ,,
    इधर उधर विचरण करती हूं।।

    कभी किसी आकार में तो कभी किसी,,
    पर अपनी इश्क़ की बूंदों पर,,
    तनिक भी फर्क नहीं पड़ने देती।।

    मुझे पता है तुम मेरे नहीं होगे,,
    और होगे क्या,,तुम तो कभी से
    थे है नहीं मेरे,,

    बस इसलिए तेरे प्रेम को,,
    कभी मिला देती हूं नदियों
    की गहराई में,,जिससे पता
    ही न चले उसका अस्तित्व
    और मिट जाए वो उठने से
    पहले ही।
    तो कभी गेहूं की फसलों में
    जाकर मिला देती हूं,,
    अपनी निर्मल बूंदों को,
    और तृप्त कर लेती हूं अपनी
    आत्मा किसानों के पसीने
    को मुस्कुराहट का स्वरूप देके।
    कभी कभी तो वो भीगते
    बच्चों की मस्तियां में
    छोड़ आती हूं अपने इश्क़
    की धारा का अंश और
    संतुष्ट कर लेती हूं
    अपने दिल को उनका
    संतोष देख कर।।

    पर कोई बता नहीं सकता
    बादलों में बूंदों कि गहराइयों को,,
    उनमें एकत्रित बूंदों की संख्या को,,
    ठीक उसी तरह यूं टुकड़ों में
    बूंद(इश्क़) छोड़ने के बाद भी,,
    बच जाती है दिल में,,
    सागर जितनी तेरी यादें,,
    और आसमान जितना,,
    प्रेम।।

    खैर......किसी ने सच ही कहा है,,
    यह इश्क़ नहीं आसान इतना
    समझ लीजिए..........।।।

    @amateur_skm bhaiyaa kch aapki post ke Andaaz mai��
    #rachanaprati91 @anandbarun

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    बादल।।
    (Read Caption)
    Anushka Jain....
    ©shayarana_girl

  • anusugandh 32w

    #rachanaprati91
    @anandbarun

    बूंदों की चाहत बादल
    बादल की चाहत सागर
    सागर का इंतज़ार नदियां
    नदियां मुंतजीर पहाड़ों की
    पहाड़ की चाहत वृक्ष
    वृक्ष की तमन्ना बीज
    बीज की चाहत पानी
    पानी की इच्छा बादल
    बादल चाहे पानी
    पानी चाहे बूंदे
    यह सिलसिला चलता रहे
    जीवन क्षण भंगुर
    यूं ही दौर चलता रहे
    जीवन की यह रीत
    सिलसिला चलता रहे
    चक्र जीवन का
    ना कभी खत्म होता
    सदा गतिमान रहता

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    पानी

    जब पड़ती नन्ही- नन्ही बूंदे आह्लादित होता मन
    खिल जाता है रोम- रोम चहक उठता तन मन
    जब सहरा जल उठता दिखता बस नखलिस्तान तरसते एक एक बूंद पानी को जब ना बरसे गगन

    पानी बचाओ उपज बढ़ाओ
    देश को संकट से बचाओ️
    ©anusugandh

  • mamtapoet 32w

    पानी( नीर)

    नीर भरे नैनन से एक बाप करे गुहार
    अगले जनम जो बेटी दीजो,
    तो तुम भी लिजों अवतार।

    पिछले माह की बीस को छ बरस की
    हुई थी बिटिया,
    हमरी गुड़िया को दिलावत ही लाये थे
    हम नीली आँखों वाली गुड़िया।

    डेढ़ बरस बाद अब ही हंसती हुई स्कूल थी जावत,
    खून से लथपथ, झाड़ियों में मिली औरन को आवत।

    हिम सा होई गया हृदय, जड़ हो गए पाँव,
    कुछ पहर में ही वीरान हुई गवा, मेरा हँसता पूरा गाँव।

    बादल भी गरज गरज के बरसा,
    नीर चहुँ ओर,पर किसी के नैनन एक बूंद दया को तरसा।

    आज कहे पुलिस पिये हुए था वो छोरा भी रंगीन ही पानी,
    काहे लोगन की अँखियों से निकल कर बोतल में
    समा गया पानी।

    बंजर हो गये सबके मनवा, मर गया आँखों का पानी,
    ओंस की बूंद थी मेरी गुड़िया, आज गंगा में
    मिल गया उस बूंद का पानी।।
    ©mamtapoet

  • goldenwrites_jakir 32w

    जल धारा ✍️

    आज भी बहती उस जल धारा के किनारे यादें हमारी
    लेजाती संग अपने मेरे पलकों से कुछ बुँदे लेकर नाम तुम्हारी
    कितने हसीन खूबसूरत वो लम्हें थे
    ज़ब संग हम तुम उस धारा के हिस्से थे
    छल छल बहती मधुर संगीत की वो लहरें जिसमे दिखती तस्वीर हमारी थी
    चार रोटी की वो कहानी "प्याज़ के संग आम का अचार
    और बहती नदियाँ की जल धारा और तेरे आंचल की छाँव में
    पेट के साथ रूह भी सुकून से भर जाती थी
    तेरे लबों की मुस्कान वो तेरी नादानियाँ - मस्तियाँ
    आज भी इस बहती धारा में मौजूद है
    आता में तन्हा यहां - और जाता संग तेरे
    इसी खूबसूरत हमारी यादों की ये जल धारा .... !¡!
    ©goldenwrites_jakir

  • anandbarun 32w

    शब्द सर

    अनुभूतियों का अजब संसार
    वृहत अनंत अगम अपार
    अतल सागर से दिगंत विस्तार
    शब्द बिंद जल सम यत्र तत्र सर्वत्र
    उथले हैं जो मेरे सर
    अपूर भीने भावों के असर
    कभी मन रह जाता कचोट कर
    मगर डगमग बढ़ते रहे डगर
    कम पड़ सकते मेरे अक्षर, पर
    भाव का विस्तृत है सागर
    रूक सकता न कुंठित हारकर
    भले रच सकूँ लघु सरोवर
    बसे हरीतिमा ज्यों मरू अंतर
    ©anandbarun

  • goldenwrites_jakir 32w

    जल धारा ✍️

    गगन से जमीं पर तेरती धारा जल
    दो दिलो को मिलाती वो धारा जल

    नेनो से होकर दिल के जज़्बात गज़ल पर ठहर जाए
    एहसास की रूहानी इश्क़ लिखती " वो धारा जल
    ©goldenwrites_jakir

  • alkatripathi79 32w

    #rachanaprati91 @anandbaun

    फिर से भोजपुरी में लिखने की कोशिश की हूँ
    त्रुटियों से अवगत जरूर कराएं ��������

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    बोतल में पानी बा

    बोतल में बिकत पानी बा
    लड़िका सब के मनमानी बा
    अधेर में पनपत जवानी बा
    सबके इहे कहानी बा,, अब त
    बोतल में बिकत पानी बा

    कुआँ अरहट वाला बात नइखे
    बढ़िया बा.....
    पहिले जइसन जात पात नइखे
    मेहरारू खात, जूता लात नइखे
    बदलल बहुत कहानी बा
    बोतल में बिकत पानी बा

    एक्के पोखर पर पूरा गाँव जमात नइखे
    गाँवो में लउकत उ गगरा वाला बात नइखे
    एक्के थरिया में अब चार लोग खात नइखे
    हर आँखें में लउकत अब पानी बा
    इहे बदलाव के निशानी बा
    बोतल में बिकत पानी बा

    चापाकल वाला अब ठंढा पानी नइखे
    दुआरा पर अब कोई नाहात नइखे
    बबुआ बबुनी वाला अब बात नइखे
    सभे कोई अब अगराइल बा
    सबके भइल मनमानी बा
    बोतल में बिकत पानी बा
    ©alkatripathi79

  • tejasmita_tjjt 32w

    #rachanaprati91
    @anandbarun जी सर
    @alkatripathi79
    @goldenwrites_jakir
    @anusugandh

    बिन पानी कुछ भी संभव नहीं है
    राजहंस के लिए मोती मानव के लिए इज्जत
    और भोजन के लिए अतिआवश्यक है।
    Please read post��������

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    पानी

    नीर की महिमा भी निराली है
    अंबु वारी तोय जाने कितने नाम हैं
    कभी बरखा बन अंबर से बरसता है
    तो कभी दर्द बनकर नैनों से बहता है
    प्यासे को गर ना मिले जो वारी
    तो जान की लग जाती है बाजी
    बहुलता हो जाए तो आफत है भारी
    जमकर श्वेत रूप में बनता है हिमानी
    जरा सी भाप से ही हो जाता है पानी

    रहीम जी का दोहा भी क्या खूब है-
    "रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून
    पानी गए न ऊबरै मोती मानस चून।"
    ©tejasmita_tjjt

  • anandbarun 32w

    शब्दबिंद

    शब्दों के वातायन में भाव भींनी जो धारा है
    कविताओं में ढ़लती ज्यों सुकुमारी काया है
    अनछुए पहलुओं को सहज संप्रेषण से रजे
    मन वीणा के तारों को जो सद्य: झंकृत करे
    मनोअाकाश को नव आयाम का विस्तार दे
    शब्द अनगढ़ भावों के मूर्त आकार से उभरे
    यत्र-तत्र सहज, इस धरा-गगन पे जो बिखरे
    सकल जलबिंदों को जैसे महासागर समाए
    ©anandbarun

  • psprem 32w

    जल

    ये झरने की मीठी कल कल।
    देखो कैसी है ये हल चल।
    कितना सुंदर ,कितना निर्मल।
    कितना शीतल है इसका जल।
    इससे निकली सरिता बहती।
    ये हमको सब कुछ है कहती।
    जल ही तो सबका जीवन हैं।
    ये देखो कितना पावन है।
    बिन जल के जीवन मुश्किल है।
    इसके बिना सब नामुमकिन है।
    जल के बिन सब सूनापन है।
    जल से सुखी सबका जीवन है।
    अब इसका संरक्षण जरूरी है।
    ये अब सबकी मजबूरी है
    यदि कमी हो जाए जल की।
    क्या होगा सोचो तुम कल की।
    माना ये प्रकृति की देन है।
    फिर भी इसकी रक्षा हम करें।
    तो ये हमारी रक्षा करेगा।
    ©psprem

  • jigna_a 32w

    दो बूँदें ही तो
    कोई ज्वारभाटे भी नहीं,
    पर बरस नहीं जाती जबतक,
    महज़ दो बूँदें
    परिपूर्णता नहीं लगती।

    हृदय मध्य फँसता कुछ
    जब नैनों मध्य न धँसता कुछ,
    बस थोड़ा सा जल,
    तुच्छ सा नीर केवल,
    बह नहीं जाता जबतक,
    धन्यता नहीं मिलती।

    नवरसों में कोई सा रस,
    अभिव्यक्ति का माध्यम अश्रु,
    युद्ध स्वयं से स्वयं का हो तो,
    करता परास्त वो ही शत्रु,
    ढल नहीं जाता जबतक,
    सत्यता नहीं संभलती।
    ©jigna_a

  • anandbarun 32w

    पल-पल पलकें पानी-पानी
    जग जाए, जब, जग जानी
    ©anandbarun

  • alkatripathi79 32w

    पानी

    पानी
    तु प्यासे कि प्यास है
    तड़पते अंखियों कि आस है
    बंजड़ भूमि में तेरी तलाश है
    किसानों की तो, तु ख़ास है
    उन्हें तु मिल जाए।

    पानी
    तेरा कोई रंग नहीं
    तेरा कोई अंग नहीं
    तुझमें झुठी सुगंध नहीं
    तु जितनी निर्मल है
    ऐसा कोई मुझे मिल जाए।

    पानी
    जितने तेरे नाम है
    जितने तेरे काम है
    तु सबके लिए समान है
    तुझमें पलती कितनी जान है
    हर जीव की तु प्राण है
    कोटी-कोटी ,
    तुझको मेरा प्रणाम है।
    तु कभी कहीं न जाए।।
    ©alkatripathi79

  • loveneetm 32w

    नीर

    कवियों के भाव का स्वरूप रही नीर है,
    कृष्ण के प्रेम का साक्ष्य यमुना तीर है,
    अमृत की धार का मंथन हुआ है नीर से,
    देव ऋषि मुनियों के हरती वो पीड़ है।

    नीर से ही श्वासो को मिलता प्रवाह है,
    रक्त भांति नीर जब बहता वहाँ है,
    नीर जैसा पेय नहीं दुनिया जहान मे,
    नीर बिन सृष्टि का रूप ही कहाँ है।

    नीर को गुणीजनों ने बोला यहाँ मात है,
    नीर जग ना देखता क्या धर्म है क्या जात है,
    नीर है प्रतीक यहाँ एकता सद्भाव का,
    नीर है विचार विषय शोषण अभाव का।

    नीर की मलिनता से आहत समाज है,
    नीर की विशुद्धियो से खतरे में आज है,
    नीर के विषय में यहाँ चिंतन अनिवार्य है,
    नीर जग संरक्षण का उतम एक कार्य है।
    @लवनीत

  • ______i 32w

    पानी से मोती❤

    जब मेरे अंदर से आवाज़ आयी अकेले बैठकर,
    तब मैं सुलझाने लगी ज़िंदगी के झमेले बैठकर।

    कर सकती हूँ बहुत कुछ पर कर नहीं पाती हूँं,
    वज़ह यही है शायद कि मैं स्त्री जाति हूँ।

    जब करने लगूँगी तो बस कुछ कर ही जाऊँगी मैं,
    कोशिश यही रहेगी मेरी,
    सबकी परेशानियाँ दूर भगाऊंगी मैं।

    मैं चाहती हूँ मेरी जिंदगी में बहुत बेहतरीन लोग आएं,
    जब खुद न कर पाऊँ मैं खुदपर,
    तब वो मुझ पर विश्वास कर जाएं।

    ऐसी बनूं मैं न मेरे बारे किसी के मुख पर निंदा रहे,
    मैं मिट जाऊं पूरी तरह बेशक,पर मेरा वज़ूद जिंदा रहे।

    यहाँ दुःख दर्द की आग सभी लोग सेकते हैं,
    रुकावटें कोई नहीं देखता ज़माने में,
    यहाँ सब परिणाम देखते हैं।

    निष्ठा बनी रहे मेरी प्रभु में,मैं न किसी से अंजान रहूँ,
    मन की मैल मिट जाए बस,मैं न ज़रा भी बेईमान रहूँ।

    सहारा बनूं मैं सबका, अँधों के लिए मैं ज्योति बनूं,
    ऐसी शख्सियत बनाना प्रभु,मैं पानी से मोती बनूं।

    ©ईशु शर्मा

  • anandbarun 32w

    तेजस्मिता जी #rachanaprati91 के संचालन हेतु मुझे अवसर देने के लिए अनेक आभार

    जल, जीवन ही नहीं बल्कि जीवन की उत्पत्ति का अनन्य कारक है। जल, पानी, नीर, सलिल, वारि, अम्बु, अमृत, पय... कितने ही इनके पर्याय हैं। हम इन्हें हिम, ओस, अश्रु, मेघ, वाष्प, कुहासा, धुंध इत्यादि कई रूपों में अपने इर्द-गिर्द पाते हैं। यह कवि मन के भावों में कोमलता, आद्रता, नमी, रस, शर्म, स्वास्थ्य इत्यादि कई अर्थों में प्रतीक और द्योतक बने हैं। मैं #rachanaprati91 में विषय 'जल' का अनुमोदन करता हूँ। यह विषय वॄहत है और आप इसके किसी भी पर्याय, रूप, भाव व संदर्भ में प्रविष्ठियाँ कल संध्या 8 बजे तक प्रेषित कर सकते हैं। अनुग्रह

    "मेरा मानना ​​है कि बुद्धिमान व्यक्ति के लिए पानी ही एकमात्र पेय है।" ~महान दार्शनिक थोरो
    ©anandbarun