#samaaj

39 posts
  • sanjeevkumarpatre 19w

    #rishte #रिश्ते #samaaj #समाज #insaaniyat #इंसानियत #soch #thought #vichar #pyar #love #sanjeevkumarpatre

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    रिश्ते तय होती है जात, जमी, दौलतो से आज भी
    प्रेम हार जाती है इन शौहरतो से आज भी!

    ये इंसान तो इंसानियत का दुश्मन निकला संजीव,
    तू सोचता था व्यवहार बड़ी है हैसियतो से आज भी!

    ©sanjeevkumarpatre

  • vy_thoughts 35w

    रात गई
    बात गई,

    खास नही जो अब साथ नही,

    मालिक मैं बस अपने मन का

    ये समाज मेरा तात नही....!

    By - V¥ "R∆M∆"
    # tat - pita

    ©vy_thoughts

  • jee_tu 54w

    हमारे समाज का मजाक देखो

    बहुत सारे परिवारों में

    जितना तवज्जो एक लड़की को घर के बाहर मिलता है

    उससे कहीं ज्यादा उसके भाई को घर के अंदर मिलता है


    ©jee_tu

  • kaushik_official 58w

    #Samaaj ka aaina

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    Tum kis saadgi ki talaash mein ho?

    Yahan shorat dekh ke shadiya ki jaati hai.

    ©kaushik_official

  • vinitrai31 75w

    Kive dassa

    Jaadi samaj v samaj nu paar kr dendi hai
    Eh ana jad khud nu e bas sahi kehndi hai
    Eh samjna har kise de vasda nahi
    Ki kuch den layi eh Zindagi vapis v kuch laindi hai

    Eh umar kise nu sahi hon da haq nahi dendi
    Eh kaisi sayanap jedhi dujeya nu galat hai kehndi
    Samay badalda rehnda hai
    Insaan ta sikhda rehnda hai
    Fer eh samaj de assola vich menu labb ke dasso
    Insaniyat kithe rehndi hai

    Aurat nu eh ghr bithaun
    Aurat te eh jor chalaun
    Kam aurat de eh sab nu samjaonde
    Ehna vaddeya siyana nu poocho ki eh dharti te hai kitho aunde

    Roti eh pakka khawave
    Ghr nu hai eh roz chalave
    Roti khan tak sanu eh sikhave
    Fer samaj pain te.
    Ena nu samjaun di akal saade che pata nhi kitho ave ?

    Ess samaaj che mei kive vassa
    Kudi kare te galat mundeya de karan te mei uchi hassa
    Eh barabari daa mei sabche qyo kive chassa
    Eh meriya akhan agge ki chal reha mei kive dassa
    ©ghumnamkirk

  • kritikakiran 77w

    मैं मिट्टी से बनी, मिट्टी से भरी
    एक फूलदान हूँ
    जिसमें जब तब उग आती है
    जंगली, ज़हरीली घास

    घास लालन पालन नहीं खोजती
    वो बढ़ती चली जाती है
    और फैल जाती है
    अनंत तक

    मैं चाहती हूँ मेरे माथे पर
    एक सुंदर सा फूल सजे
    पर यह ढीठ घास
    फूलों को उगने क्यों नहीं देती?

    यह घास मुझमें इस तरह समायी है
    जैसे समाया है तुम में तुम्हारा पूरा "समाज"
    एक फूल के लिए मुझे इन्हें जड़ से काट फेंकना होगा
    ठीक वैसे ही जैसे तुम्हें तुम्हारी बेहतरी के लिए
    काटना होगा ख़ुद से ख़ुद को!

    - कृतिका किरण




    #samaaj #hindi #hindikavita #poem #selfcontradiction #bethechange

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    // समाज और हम //

  • suhani05 88w

    This is for all the boys who comments or who has problm with the short dresses of woman..!!
    So listen.. the size of dress is not small infact the size of ur thinking is too small / low. So chnge ut this thinking..bcuz
    कपड़े भले छोटे हो..
    पर सपने नहीं हो सकते..।
    .
    .
    .
    #size
    #chotisoch
    #kapde
    #samaaj
    #society
    #changeurthinking
    #betibachaobetipadhao
    #rape
    #socialissue
    #gurls
    #girlpower
    #beamen
    #begentlemen
    #bestrong
    #girlarebrave
    #bebrave
    #mirakee
    #mirakeeworld

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    साइज..

    नज़रें इधर ही हैं..
    पर कहते हो..
    है इज्जत का झंडा सीने पर मेरे..
    मुझे तो अफसोस है जीने पर भी तेरे..।
    हां.. साइज तो छोटा है..
    पर कपड़ों का नहीं..
    तुम्हारी सोच का..।।
    नजरें तेरी..
    दोष मेरा..
    शायद हर ओर छाया है घोर अंधेरा..।
    एक तरफ..
    बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ..
    और फिर जाओ.. उसी बेटी की इज्ज़त उताराओ..।
    हां.. साइज तो छोटा है..
    पर कपड़ों का नहीं..
    तुम्हारी सोच का..।।
    ©suhani05

  • grotesque 115w

    Mujhe laga tha ke log toot ke pyaar karte hai.
    Aaj pata chala ke log tukdo mein pyaar karte hai!

    ©grotesque

  • hp2310 117w

    अगर हमें मोहब्बत है,
    तो ये समाज की बंदिशें कैसी।
    अगर बात हमारी है,
    तो मोहब्बत में ये रंजिशें कैसी?
    @H.P.

    Agar hume mohabbat hai
    Toh ye samaaj ki bandishen kaisi.
    Agar baat hamari hai,
    Toh mohabbat me ye ranjishein kaisi.
    @H.P.

  • ayush019 135w



    Bohot aayege log rokne waale
    Bohot aayege log tokne waale
    Tm apne pyar pr bharosa rkhna
    Q ki bohot aayege pyar ko torne waale
    ©ayush019

  • thoughtvik 139w

    भूख- एक एहसास।

    भूख शब्द नही एहसास है।

    समाज के चौराहों पर मैले कुचैले और फटे कपड़ो में एक बच्चे का इंसान से हाथ जोड़कर खाने के लिए कुछ मांगने के दृश्य का।


    भूख शब्द नही एहसास है।

    एक अपाहिज व्यक्ति का पथरीले रास्तों पर धूप में करहाते हुए चलने का और लोगो के पास जा जाकर कुछ खाने के लिए मांगने का।


    भूख शब्द नही एहसास है।

    सभ्य समाज के कचरे में से इंसानो और जानवरों का अपने पेट भरने के लिए दो कौर ढूंढने का।


    भूख शब्द नही एहसास है।

    समाज की माँ कहे जानी वाली गौमाता का उसी समाज के फैंके गए कचरे के ढेर में से खाने के साथ साथ पौलिथिन खा के मर जाने का।


    भूख शब्द नही एहसास है।

    एक मजदूर का जो कि अपने परिवार की दो जून की रोटी के लिए दूसरे इंसान की जरूरतें पूरी करने के लिए अपने सपने बेच देता है।


    भूख शब्द नही एहसास है।

    उन गरीब लोगों का जो दो जून की रोटी के लिए अपने बच्चो को सभ्य समाज के लिए मजदूरी पर भेजने से खुद को नही रोक पाते और उनका बचपन बेच देते है।


    भूख शब्द नही एहसास है।

    ये एहसास में हर रोज जब सभ्य समाज के चौराहों पर निकलता हु तो अक्सर कर लेता हूँ। मेरी भूख का एहसास शून्य हो जाता है।

    ©thoughtvik

  • shreyash_saheb 141w

    ●मय'ख्वार: शराबी
    कुरआन: कुरान


    सच रख दो सामने डरूंगा नही,
    मैं झूठ के आगे झुकूंगा नही।
    -साहेब

    आज के समाज के लिए आईने का काम करती एक ग़जल।
    1222 1222 1222 1222 मीटर

    #rekhta #hindi #samaaj #sach #love #share

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    ग़जल

    जहाँ पर दिल नही होता, वहीं दिलदार होता है,
    मुहब्बत ना समझ पाती, उसी से प्यार होता है।

    निभाने को नही होते, कहे की बात है ये सब,
    हज़ारों भीड़ में बस एक सच्चा यार होता है।

    यहाँ क़ुर'आन-गीता की क़सम खा झूठ कहते सब,
    ज़ियादा आज सच्चा तो यहाँ मय'ख्वार* होता है।

    यहाँ सिस्टम सही है, बस सही से कुछ नही होता,
    बिकी सरकार ना होती, बिका अख़बार होता है।

    दुःखी, लाचार लोगों को डरा-धमका रहे हो क्यों?
    सुनो हर एक इंसा प्यार का हकदार होता है।

    मुहब्बत की गली में तो मुहब्बत अब नही मिलती,
    यहाँ "साहेब" तो बस हुस्न का व्यापार होता है।

    -साहेब
    ©shreyash_saheb
    मीटर: 1222 1222 1222 1222

  • dreamy_logophile 143w

    मोती की माला सी थी वो,
    अपनो के हाथों ही टूट के बिखर गई।
    ©dreamy_logophile

  • anchalbarnwal_ 146w

    कितनी अजीब दास्तां हैं इस दुनिया की...
    भरोसा जिस पर करो अक़्सर वही तोड़ जाते हैं...
    आज भी हमारे समाज में लोग जाति के आधार पर ख़ुद को बड़ा बताते हैं...
    जाति के नाम पर लोग अपना status दिखाते हैं...
    बात बतानी ही है तो बात पूरी बताओ ना... फ़िर लोग क्यूं सबसे...
    सिर्फ़ अपने favour की आधी अधूरी और one sided बात बताते हैं...
    हर शख़्स के चेहरे के ऊपर एक चेहरा है...
    फ़िर भी लोग नक़ाब लगाकर उसे छुपाते हैं...
    अल्फाजों की तो बात ही अलग है साहब...
    यहां तो लोग गाली गलौज तक पर उतर आते हैं...
    खुद को बेहतर और दूसरों को बाकियों की नज़र में गिराने की होड़ में...
    सोच भी नहीं सकती मैं कि लोग किस क़दर झूठी अफ़वाहें फैलाते हैं...
    ©anchalbarnwal

  • saurav_sultania 152w

    समाज

    सोचते थे की बदलेंगे समाज की सोच को।
    समाज नें ही बदल डाला हमारे सोच को।
    गर्द की मोटी रज़ाई जम चुकी है इनके दिमाग में।
    इसे पाकीज़ा करना मुमकिन नहीं है,
    क्योंकि पानी डालने पर भी कोई फर्क नहीं है आग में।

    ©सौरव सुल्तानिया

  • writer_boy_nj 159w

    समाज

    देखो जरा आँख खोलकर,
    समाज हमारा कहा जा रहा,
    बड़ो-बूढों की इज्जत नही ,
    खुद को कोई सर्वज्ञ बता रहा ,
    देखो समाज हमारा कहा जा रहा ।

    बेटियों की इज्जत नीलाम ,
    औरतों पर हाथ उठा रहा,
    और सीना चौड़ी कर खुद ,
    नामर्द, खुद को बलवान बता रहा,
    देखो समाज हमारा कहा जा रहा ।

    शराब -सिगरेट की बातो पर,
    पैसा धुँआ सा उड़ा रहा,
    भूख़ से माँगे दो रोटी कोई,
    लात से फटकार लगा रहा ,
    देखो समाज हमारा कहा जा रहा ।

    बचपन में पाला है जिसने,
    भूँख मारकर खिलाया जिसने,
    जरा-जरा सी अब बातों पर,
    बच्चा उनको आँख दिखा रहा,
    देखों समाज हमारा कहा जा रहा ।

    हाथ पकड़कर चलाया जिसने,
    गिरे तो पकड़कर उठाया जिसने,
    अब उनकों संभालने की बारी में,
    संतान ,वृद्धाआश्रम का रास्ता दिखा रहा,
    देखों समाज हमारा कहा जा रहा ।

    आओ सुधारे समाज को अपने,
    बच्चों को अच्छे संस्कार सिखाये,
    हर इंसान की करें वो इज्जत ,
    ऐसे गुण उसको सिखलाये ,
    चलो एक नया समाज बनाये ।

    नारी का सम्मान करें हम ,
    देश का अभिमान बने हम,
    मिलकर सब संकल्प करें,
    बेटियों को न्याय दिलाये ,
    चलों एक नया समाज बनाये ।

    बेटों को अपने हम आज ,
    कृष्ण सा भाई बनाये ,
    द्रौपदी सी बहन मिले कही,
    तो चीरहरण से उसे बचाए,
    चलों एक नया समाज बनाये ।

    -अज्ञान (निहाल jaiswal)

    ©writer_boy_nj

  • anudeepvaranasi 161w

    Khwaab

    Khayaalon ki gehraayi mein dooba hoon main
    Samaaj ke beydiyon mein bandha hoon main
    Khwaab sajaaoon yaa zindagi sawaarloon
    Iss savaal mein uljhaa hoon main
    ©anudeepvaranasi

  • _pratyusha_and_rohit_ 172w

    Khooni Samaaj

    Somvaar ka din tha.. Shaam ke kareeb 6 baj rhe the....
    Mai upar apne kamre me beth kar chai pee rahi thi mri beti t.v dekh rhi thi....
    Humdono kuch baat kar rhe the... Dono has rahe the..
    Tabhi neeche se ek cheekh sunai di... bahot dari hui aawaj..
    Pata chala wo maasi thi jo mere ghr me kaam karti thi..
    Aawaj aaya "didi jaldi niche aao dekho ye kya ho gya"..
    Me dari hui daur ke tezi se niche gyi.. Aur samne dekha to mere hosh ur gye.. Jaise kisi saanp ne sungh liya ho... Mere rongte khare ho gye.. Me kaanpne lagi..
    Wo "shreya" thi ek student jo mre ghr me rehti thi...
    Mere ghar ke aage behosh pari thi... Ulti kiya tha usne.. Uske kapre sahi jagah pe nahi the...
    Me sunn par gyi....
    Maasi darte hue rote hue boli.. "4 ladke aaye the auto me isko yaha choor ke gye, mere aane tak bhaag gye the"
    Me kuch samajh nahi paayi..
    Piche meri beti kaanp rahi thi.. Roo rahi thi..
    Humlog use apne kamre me le gye... Uska kapra thik kiya.. Usko saaf kiya... Maasi uske pair maalish kar rahi thi.. Me uske sir ko maalish kar rhi thi...
    Man he bht sawaal aa rhe the...
    Kya hua hoga?
    Balatkar?
    Meri beti uska phone kholne lagi Uska ghr me phone karne ka koshish ki nahi hua...
    Mene bola "beti tu doctor leke aa.. Me phone karti hu"
    Tabhi yaad aaya uska ek dost.. "Ajay" wo v kuch din ke liye mere ghr me raha tha....Aur dono ek hi jagah ke rehne wale the..
    Mene ajay ko phone kiya... Bola "shreya ke ghr me jao Baat karwao"
    Thore der Baad ek phone aaya " hlw me shreya ka papa" ... Mene unko sara ghatna bataya..
    Shayad us raat ek pita ke fikr ka "khoon" hua tha..
    Unki beti dard se behaal chilla rahi thi.. Mene dil pe patthar rakh ke unko bola " sab thik he aap chinta naa kare.. Yaha aa jaye"
    Shayad us raat mene ek sacchai ka "khoon" kiya...
    Sab aaye shreya se pucha gya... Usne kuch nahi bola...
    Shayad us raat shreya ne apne dard ka "khoon" kiya..
    Shayad un 4 ladko ne inshaaniyat ka "khoon" kiya..
    Shayad shreya ka izzat ka "khoon" kiya..
    Uske pariwar walo me mujh se kaha ye Baat kisi ko mat bolna Samaaj me badnaami hogi..
    Shayad us raat ek ladki ka aawaj ka "khoon" hua..
    Samaaj ne bahot saare khoon kiye us raat..
    Khooni kaun tha.. Afsos pata nahi chala.. Us pata karne ka chah jo tha mre man me... Uska "khoon" hua...
    "log kya bolenge" is baat ne v khoon kiya..
    Bahot saare khoon hue us raat... Sab jaise kahi gum ho gye... Sab chip gya...
    Khooni aaj v khush he.. Aazad ghum raha he..
    Mene socha khooni ko dhundu.. Kisi ne kaha khooni to samaaj he..
    Samaaj??
    Kaun samaaj..
    Mai aur aap hum sab hi to samaaj he..
    Aisa khoon fir kavi naa ho iske liye samaaj ko nahi.. Mujhe aur aapko thik hona parega..

    -Rohit thakur

  • ankit_tiwari 182w

    Samaaj

    वीदर्भ सा बना दीया है

    धर्म के समाज ने

    अधर्म का है रास्ता

    धर्म के बचाव में
    ©ankit_tiwari

  • ankit_tiwari 184w

    Vichaar

    हूँ तलाश में जवाब की
    हृदय के अहसास की

    कहा हूँ में?

    अकार हूँ?
    विकार हूँ?

    या तथ्य के उस पार हूँ

    अदम्य सा सवाल है

    विचार मुक्त विधान है

    समान है, समाज के!

    जो रोज़ तंज़ साधते

    निचोड़ते खरोद्ते है आन बन शान को

    शान से

    यही विधान है समाज का?

    समाज के सुधर का?

    अनंत ये सवाल

    अंत ही कमाल है

    विहीन हम

    विचार के
    प्रहार से
    ©ankit_tiwari