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  • jyotiparmale30 2d

    आषाढ माह

    धरामंपल-पल बैटी आस लगाये, मेधके, पावस आषाढ की देखे शह निहार के,

    आ भी जाओ वर्षा रानी अब रिम झिम करके
    धरती कहे पुकार के लाओ दिन बाहार के ,

    बढ़ी जा रही है जिस तरह से अरुणिमा लगता है जैसे कहर की है लालिमा
    अभी तो अम्बर का क्रोध प्रकट हो रहा है तभी तो शोल जैसा ऊषा का आगमन हो रहा है।

    बिनवर्षा तरसे हरियाली, बैठे सभी ताक मे ,
    पावस आषाढ की देखे राह निहार धरा मे

    क्षितिज पर अभी भी है। सुखी रूखी धरा
    सभी प्राणी आस लगाये बैठे है कब होगा हरा

    घरा पर पल- पल बढी आस लगाये पावस आषाढ को देखे राह निहार के अभी जाओ वर्षा रानी , धरती कहेपुकार के

    शाख पर पक्षियो का है सुना है कलरव, सूख रहे है नादी सरोवर, सूखे ताल तलैया ,

    आषाढ का महिना है, पर लगे जेठ की अंगारे ,
    आभी जाओ वर्षारानी करती रिमझिम बौधारे,

    बिनवर्षा तरसे हरियाली बैठे सभी ताक में ,
    पावस आषाढ का देखे राह निहार धरा में,

    देखो छाई घटा घनघोर पानी बरस ने वाला है,
    झमें खुशी से सभी प्राणी लो वर्षा होने वाली है।


    स्वरचित
    ज्योति परमाले
    रायपुर छत्तीसगढ

    ©jyotiparmale30

  • jyotiparmale30 3d

    " समय का फेर "

    न ये मेरा है न ये तेरा है
    काहे लड मरता है ये तो बस,
    माया जाल का फेरा है,

    काहे जीता है लड़ कर ये जिन्दगी,
    ना तू रहेगा , ना में रहेगा,
    बस रह जायेगी ये बन्दिगी,

    फिर किस आश लिये लड़ता है,
    क्या वक्त को कैद कर सकता,

    नहीं नहीं ये कर सकता,
    न समय मेरा है न तेरा होगा,

    तो आहे वतन पर लड़ता है,
    वतन पर सबका पताका फेरता है,
    यही तो हिन्दुस्तान कहता है।


    स्वरचित
    ज्योति परमाले
    रायपुर छत्तीसगढ

    ©jyotiparmale30

  • jyotiparmale30 3d

    देश द्रोही

    ओ फिरंगीयो के चाल चलने वालो
    क्या मिला अपने ही भूमि को बांटने वालो ।

    अपने जहान के गुलिसते को उजाड़ा है तुमने,
    अपने ही हाथो से अपना कब बनाया है तुमने ।


    न हो सके फिरंगीयो के साथी, न हो सके अपने मातृ भूमि के साथी ,
    रह गये अधूरे होकर ,फिरंगी चाल अपना कर ।

    ना कुछ दिया ,तुमने इस जहान को,
    ना कुछ लिया ,तुमने इस जहान से।


    बस रिश्ता ही तोड़ डाला तुमने मातृ भूमिसे ,
    तुम्हारा अस्तित्व ही नष्ट हो गया बिना मातृभूमि के ।


    स्वरचित
    ज्योति परमाले
    रायपुर छत्तीसगढ

    ©jyotiparmale30

  • jyotiparmale30 3d

    बसंत- री

    आ गई बसंत , छा गई मौसम मे बहार,
    वो आमो के डाली पर, आमो की बौराई का लदना ।


    खेतो मे गेंहू की बाली का सुनहरा जाल,
    सोने से लदी धरती, लग रही है दुल्हन ।


    फिर ले आई दुल्हन को रंगने फागुन की प्रातः ,
    इसे देख कर पलाश ने भी अपनी खुशी फूलो से दर्शाया ।


    अपनी खुश्बू से , वातावरण को महकाया,
    और सब तरफ केसरिया रंग बिखराया ।


    चारो तरफ सरसो के पीले पीले वो फूल
    मोह लेते है मन, पतझड़ को जाते है भूल ।

    स्वरचित
    ज्योति परमाले
    रायपुर छत्तीसगढ

    ©jyotiparmale30

  • jyotiparmale30 3d

    " कोशिश "

    हो ना यू उदास तु
    डर कर थक जाने का

    जिन्दगी की सफर यू ही
    चलता रहेगा हमेशा

    हारना मत चलते रहना
    अपनी मंजिल पाने के लिए

    रूक कर हौसला न खोना
    अपनी उम्मीदे बांधे रख

    बढ चल तु आगे बढ़ चल
    न देख पिछे मूड कर

    मंजिल खुद - ब- खुद मिलजायेगि
    हौसला रख उस रब पर

    जो सोचा वह पायेगा
    बस वक्त का इंतजार कर

    बढ़ते रहे कदम तुम्हारे
    कोशिश यु ही करता चल

    मिल जायेगा मंजिल तुझे
    बस सब पर भरोसा कर ।


    स्वरचित
    ज्योति परमाले
    रायपुर छत्तीसगढ

    ©jyotiparmale30

  • jyotiparmale30 4d

    प्यारी गौरैया

    अपनी ची ची ची करके मुझे उठाती
    आंगन मे फूंदक-फूदक दाने चूगती
    तिनका-तिनका बिन बिन लाती
    तिनको से अपना घोसला बनाती

    प्यारी गौरैया मेरे मन को भाती
    प्यारी गौरैया हमेशा ही मेरी साथी
    उठते ही मन मेरा प्रकृति की तरह झाके
    उनकी मधुर आवाज से विभोर हो उठती हु।

    हर रोज़ पक्षियो की आवाज सुनती हु
    खासकर अपनी प्यारी गौरैया
    जो कभी न साथ छोड़े हर दम रहे पास मेरे आँगन मे हर दिन गौरैया आती है ।

    ये देख मन मेरा प्रफुल्लित हो उठता है
    मै भी उनके साथ प्रकृति की घटा मे खो जाती
    हर रोज यही क्रम चलता है
    गौरैया मेरी सबसे प्यारी पक्षी ।

    जो हर वक्त, हर कही मुझे मिल जाती
    मेरी प्यारी गौरैया मेरी साथी
    उसकी आवाज मेरे मन को भाती
    ओ मेरी प्यारी गौरैया हमेशा रहना साथ प्रकृति के और रहना हमेशा पास मेरे ।

    स्वरचित
    ज्योति परमाले
    रायपुर छत्तीसगढ

    ©jyotiparmale30

  • jyotiparmale30 4d

    बारिश का मौसम

    मेघो की घटा छाई
    देखो वर्षा ऋतु आई
    सोंधी- सोंधी महक लाई
    जीवन मे रंग उमंग लाई
    सभी के मन को हर्षाई
    झमझमाती वर्षा ऋतु आई
    जीव जन्तु सबको भायी
    हरियाली चारो ओर छाई
    मखमल सी हरी धरती भायी ।



    स्वरचित
    ज्योति परमाले
    रायपुर छत्तीसगढ

    ©jyotiparmale30

  • jyotiparmale30 4d

    " करोना वक्त "

    ये कैसा बचपन है मेरा
    स्कूल है ना ट्यूशन है मेरा
    बस घर पर ही कैद रहना है
    न ही दूसरो के साथ खेलना है

    दूरी बनाकर व मास्क लगाकर रहना है
    ऑनलाइन पढ़ाई से बोर हो गए है
    स्कूल ड्रेस पहना है स्कूल जाना है
    ये कैसा बचपन है मेरा

    कही नही जाना कुछ नही करना
    बस घर पर ही रह कर डाट खाना है
    ये कैसी बिमारी आई है,जो हमे रुलाई है अपनो से दूर रहना व कुछ न कहना

    टी.वी और मोबाइल भी बोर लगता है
    बस अब दोस्तो से मिलना है
    स्कूल हमे जाना है घर से बाहर जाना है
    पहले छुट्टी अच्छी लगती थी

    अब हर दिन स्कूल खुले ऐसा लगता है
    ये कैसा बचपन है
    उदास हर बच्चे का मन है
    न कोई खुशी न कोई खेल है

    बस शांत वातावरण है
    कब होंगे आजाद हम
    कब लौटेगी स्कूल की खुशिया
    न फोन चाहिए, न टी.वी चाहिए
    हमे बस स्कूल जाने की इजाजत चाहिए।

    स्वरचित
    ज्योति परमाले
    रायपुर छत्तीसगढ
    ©jyotiparmale30

  • jyotiparmale30 4d

    अमृत धारा

    जिवन का अस्तित्व पानी है
    बहता पानी अमृत धारा स,

    जल ही जीवन है,
    जल है तो कल है,

    जल ही जीवन अमृत धारा
    जल ही कल है जल बिना कल नही

    जल जग कि जरूरत है
    जल बिना जीवन नही है

    जल धरती ही नही आकाश की जरूरत है
    जल बिना कुछ नही और


    स्वरचित
    ज्योति परमाले
    रायपुर छत्तीसगढ
    ©jyotiparmale30

  • __awkwardd__ 1w

    "Numb" is a feeling these days!

  • shaizuwrites 2w

    तुम्हें दिखूंगा फिर गायब हो जाऊंगा मैं
    परछाइयों सा चलूंगा के रोशनी मैं शामिल हो जाऊंगा मैं
    और तस्वीर बना बसा लेना आंखों मै के
    आज हकीकत हूं कल ख्वाब हो जाऊंगा मैं..!!
    ©shaizuwrites

  • __awkwardd__ 2w

    sometimes hurt is peaceful.

  • __awkwardd__ 3w

    i don't think there's anything bigger than fear in this world, a believer isn't believer without it.

  • praachii 9w

    GRATEFUL WE ARE

     How pretty is this season change;
    That one after another nature has arranged.
    Different season brings different vibe;
    People start preparations before they arrive.
    "Where's my cloak I wore last year?
    It's almost October, winter is near!"
    And so like this people do arrangements;
    Alongwith seasons, for festivals they wait with patience.
    But every season is not happy for everyone;
    It depends on people's source of income.
    People with seasonal jobs,
    Wish their working season last long.
    People with no shelter over head,
    Wish this year skips monsoon & they could get some more bread.
    Grateful we are to have all the resources;
    Unlike other children of our age who work due to preforces.
    Grateful we are to enjoy every season;
    Unlike others who struggle for living in better condition.
    - Prachi Bera

  • praachii 9w

    EVERYTHING WILL BE ALRIGHT IN THE END

    It's easy to tell 
    "Calm down friend,
    Everything will be alright in the end";
    But is it that easy
    To accept these things,
    To go through the storm that life brings?
    The life tests are so hard to pass,
    Some of which leave me aghast.
    No one feels right to be spoken,
    It's me left with a heart that's broken.
    The magical clouds of happiness and love is unknown,
    To the dried gargantuan desert I own.
    A phase full of dilemma and exasperation,
    Plants of hopes are out of vision.
    The heat of aridisol is increasing per minute,
    I keep on trying beyond my limits.
    It's easy to tell 
    "Calm down friend,
    Everything will be alright in the end";
    It seems tough to accept
    But the fact is true,
    We grow through what we go through.
    Every desert of life becomes fertile,
    And the process during it makes us versatile.
    - Prachi Bera

  • myasir99 12w

    Nazam
    ( Umeed - E - Sahar )


    shab -e- ghum se umeed -e- sahar ki ibtidaa hoti hai ek nai umeed ki kiran parh ti hai
    shab -e- num ke zakmo pe ghum ki kahi chatt ti hai shab-e-ashq ke aasmaa pe umeed ka khora path ta hai
    dil pahir hassta hai kisi ki yaad main ehsaas hota hai apni kari har sahi bat ki ghalti ka
    dil pahir roo parh ta hai uss bat pe waqt pahir chal parh ta hai pahir uss he intizar main umeed-e-sahar ki talaash main
    ©myasir99
    ©myasir99

  • __awkwardd__ 15w

    aren't we supposed to be perfect?
    ain't the world ask for perfection?
    but is anyone ever born perfect?

  • __awkwardd__ 15w

    leave the legacy and not the people you love.

  • myasir99 15w

    Poem ( She Blooms )

    She Blooms
    She hides ,she cried alone at night
    she thinks alike all the time
    she was a queen she was a kind

    she wore a crown of humbleness
    Her act of kindness left her mark on people's minds

    She was not like a open book take anyone can read her she was a mistry of thoughts no one can read her mind

    She was an enchanted soul
    she tried to cope up with
    every color of rainbow
    She was a moon
    between the lightning stars.

    ( it's a dedication to someone by me )
    ©myasir99

  • __awkwardd__ 16w

    the real pain is not that people don't understand
    but that they don't care.