#shreekrishna

11 posts
  • dais_yblossom 35w

    " एक तू हैं "

    गैरों से शिकायतें क्या करूं मैं
    शिकायतें तो अपनों से होती हैं
    एक तू हैं, एक तू हैं
    बस एक तू ही तो हैं

    मुझे अपना समझने वाला
    मुझे चलना सिखाने वाला
    मुझे में उम्मीद जगाने वाला
    मेरी नईया पार लगाने वाला

    एक तू हैं, एक तू हैं
    बस एक तू ही तो हैं

    मैं रूठूं, तू मनाने वाला
    मैं रोऊं, तू हँसाने वाला
    मैं हारूं, तू जीताने वाला
    मैं गाऊं, तू नचाने वाला

    श्री कृष्ण, एक तू हैं, एक तू हैं
    श्री कृष्ण, बस एक तू ही तो हैं

    ©dais_yblossom

  • soft_y 53w

    ..




    ©soft_y

  • bhairav_ 67w

    .

  • bhairav_ 67w

    One of my favorites ����
    Rashmirathi - Krishna ki Chetavani
    By Ramdhari Singh Dinkar Ji

    #krishna #shreekrishna #vishnu

    वर्षों तक वन में घूम-घूम,
    बाधा-विघ्नों को चूम-चूम,
    सह धूप-घाम, पानी-पत्थर,
    पांडव आये कुछ और निखर।
    सौभाग्य न सब दिन सोता है,
    देखें, आगे क्या होता है।

    मैत्री की राह बताने को,
    सबको सुमार्ग पर लाने को,
    दुर्योधन को समझाने को,
    भीषण विध्वंस बचाने को,
    भगवान् हस्तिनापुर आये,
    पांडव का संदेशा लाये।

    ‘दो न्याय अगर तो आधा दो,
    पर, इसमें भी यदि बाधा हो,
    तो दे दो केवल पाँच ग्राम,
    रक्खो अपनी धरती तमाम।
    हम वहीं खुशी से खायेंगे,
    परिजन पर असि न उठायेंगे!

    दुर्योधन वह भी दे ना सका,
    आशीष समाज की ले न सका,
    उलटे, हरि को बाँधने चला,
    जो था असाध्य, साधने चला।
    जब नाश मनुज पर छाता है,
    पहले विवेक मर जाता है।

    हरि ने भीषण हुंकार किया,
    अपना स्वरूप-विस्तार किया,
    डगमग-डगमग दिग्गज डोले,
    भगवान् कुपित होकर बोले-
    ‘जंजीर बढ़ा कर साध मुझे,
    हाँ, हाँ दुर्योधन! बाँध मुझे।

    यह देख, गगन मुझमें लय है,
    यह देख, पवन मुझमें लय है,
    मुझमें विलीन झंकार सकल,
    मुझमें लय है संसार सकल।
    अमरत्व फूलता है मुझमें,
    संहार झूलता है मुझमें।

    ‘उदयाचल मेरा दीप्त भाल,
    भूमंडल वक्षस्थल विशाल,
    भुज परिधि-बन्ध को घेरे हैं,
    मैनाक-मेरु पग मेरे हैं।
    दिपते जो ग्रह नक्षत्र निकर,
    सब हैं मेरे मुख के अन्दर।

    ‘दृग हों तो दृश्य अकाण्ड देख,
    मुझमें सारा ब्रह्माण्ड देख,
    चर-अचर जीव, जग, क्षर-अक्षर,
    नश्वर मनुष्य सुरजाति अमर।
    शत कोटि सूर्य, शत कोटि चन्द्र,
    शत कोटि सरित, सर, सिन्धु मन्द्र।

    ‘शत कोटि विष्णु, ब्रह्मा, महेश,
    शत कोटि जिष्णु, जलपति, धनेश,
    शत कोटि रुद्र, शत कोटि काल,
    शत कोटि दण्डधर लोकपाल।
    जञ्जीर बढ़ाकर साध इन्हें,
    हाँ-हाँ दुर्योधन! बाँध इन्हें।

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    ‘भूलोक, अतल, पाताल देख,
    गत और अनागत काल देख,
    यह देख जगत का आदि-सृजन,
    यह देख, महाभारत का रण,
    मृतकों से पटी हुई भू है,
    पहचान, इसमें कहाँ तू है।

    ‘अम्बर में कुन्तल-जाल देख,
    पद के नीचे पाताल देख,
    मुट्ठी में तीनों काल देख,
    मेरा स्वरूप विकराल देख।
    सब जन्म मुझी से पाते हैं,
    फिर लौट मुझी में आते हैं।

    जिह्वा से कढ़ती ज्वाल सघन,
    साँसों में पाता जन्म पवन,
    पड़ जाती मेरी दृष्टि जिधर,
    हँसने लगती है सृष्टि उधर!
    मैं जभी मूँदता हूँ लोचन,
    छा जाता चारों ओर मरण।

    ‘बाँधने मुझे तो आया है,
    जंजीर बड़ी क्या लाया है?
    यदि मुझे बाँधना चाहे मन,
    पहले तो बाँध अनन्त गगन।
    सूने को साध न सकता है,
    वह मुझे बाँध कब सकता है?

    ‘हित-वचन नहीं तूने माना,
    मैत्री का मूल्य न पहचाना,
    तो ले, मैं भी अब जाता हूँ,
    अन्तिम संकल्प सुनाता हूँ।
    याचना नहीं, अब रण होगा,
    जीवन-जय या कि मरण होगा।

    ‘टकरायेंगे नक्षत्र-निकर,
    बरसेगी भू पर वह्नि प्रखर,
    फण शेषनाग का डोलेगा,
    विकराल काल मुँह खोलेगा।
    दुर्योधन! रण ऐसा होगा।
    फिर कभी नहीं जैसा होगा।

    ‘भाई पर भाई टूटेंगे,
    विष-बाण बूँद-से छूटेंगे,
    वायस-श्रृगाल सुख लूटेंगे,
    सौभाग्य मनुज के फूटेंगे।
    आखिर तू भूशायी होगा,
    हिंसा का पर, दायी होगा।’

    थी सभा सन्न, सब लोग डरे,
    चुप थे या थे बेहोश पड़े।
    केवल दो नर ना अघाते थे,
    धृतराष्ट्र-विदुर सुख पाते थे।
    कर जोड़ खड़े प्रमुदित,
    निर्भय, दोनों पुकारते थे ‘जय-जय’!

  • bhavti 67w

    हो प्रीत मेरी राधा सी,
    मन में यूं तुम बस जाओ मोहन।
    द्रौपदी सा हो मित्रता का श्रंगार,
    परम सखा मेरे बन जाओ मोहन।
    मीरा की भांति हो हलाहल निष्प्रभाव,
    ऐसे रोम- रोम में भक्ति बन रम जाओ मोहन।
    रुक्मिणी सा दो भाग्य हे नाथ !
    सदा साथ मेरे रह जाओ मोहन।

    ©bhavti

  • leena_t 75w

    Shree Krishna

    His day when comes,
    Peacock feather blooms up
    flute starts to hum,
    And Vrindavan spruce up.
    Rasleelas are deciphered,
    Radha's love is revered,
    With flute being played in background,
    Heart fills up with devotion.
    Bhagawad Gita's path is treasured,
    Every riddle is answered,
    Truth of life shows up,
    And Soul sees divinely world.
    Material life lose relevance,
    As life's meaning unravels,
    Peaceful, this heart becomes,
    And Jai shree Krishna, Radhe Krishna chant follows up.

    ©leena_t

  • ariprakashyap 75w

    अगर बुरे लोग समझाने से समझ जाते, तो वो बांसुरी बजाने वाला कभी महाभारत होने ही नहीं देता|

    जय श्री कृष्णा❣️
    ©ariprakashyap

  • sunny3260 150w

    श्री कृष्णा

    वो हर किरदार में है
    ओर... उसे पाने को
    हर कोई कतार में है

  • dil_ki_kahi 175w

    सुनो कान्हा..

    सुना है मैंने
    तू पापों को हर लेता है।
    तेरा नाम ले लेने भर से
    कितने पतितों का उद्धार हुआ।
    मेरी भी विनती सुनो कान्हा
    मेरा भी उद्धार करो..
    नव ज्योति भर दो हृदय में सांवरे.
    मुझ अज्ञानी का अज्ञान दूर कर,
    ज्ञान का विस्तार करो..
    कान्हा शरण में आई हूँ तेरे
    मेरे जन्मों की भटकन मिटा दो..
    मेरा मन पावन कर दो कान्हा
    मन वृन्दावन धाम सा बना दो..

    जय श्रीकृष्णा
    ©Anju_Tripathi.."तेजा" ✍

  • dil_ki_kahi 178w

    सुप्रभात मित्रों... ��

    #Goodmorning
    #love
    #Shreekrishna
    #mirakee
    #hindiwrite
    #hindi

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    सुप्रभात

    श्याम सलोने पिया
    कब लोगे सुध हमारी ??

    तेरे दर्शन की चाह में हम,
    तेरी राह तक रहे हैं..॥





    ©Anju_Tripathi ✍

  • dil_ki_kahi 180w

    मेरी प्रीत बस एक नाम से
    जो मेरी सांसें बन गया है
    उस नाम के बिना
    जीवन ही नहीं
    और वो नाम है..
    मेरे श्याम का

    जय श्रीश्याम
    ©Anju_Tripathi