#shyaam

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  • shrihari_nandini 103w

    #mahalakshmi #narayan #mylordvishnu #ram #govind #shri #hari #shrihari #little #shyaam #venkatesha #moon #dance #descend #toy #play #cradle #flute #earth #hymn #vaishnav #serve #seeking #refuge #devotion

    Hari thinks moon is a toy. 😁
    My poem specially the first two paragraphs are inspired by ShriPeriyalwar Thirumoli. 😊🙏❤

    Here's the part of Thirumoli by ShriVishnuchittar Periyalwar, even if you don't see my poem atleast read this. 🙏🙏🙏
    Tamil with translation...

    ||श्रीहरि||
    54. than mugaththuch sutti * thUngkath thUngkath thavaznthupOy *
    pon mukak kiNkiNi Arppap * puzuthi aLaikinRAn **
    en makan gOvinthan * kUththinai iLamAmathI *
    nin mukam kaNNuLavAkil * nI ingkE nOkkip pO


    O, Tender Moon! If you have eyes on your face, come and see my child Govinda’s pranks as he crawls, kicking up dust. His forehead pendant sways, his golden anklet jingles.


    55.en siRuk kuttan * enakkOr innamuthu empirAn *
    than siRuk kaikaLAl * kAttik kAtti azaikkinRAn **
    anjchana vaNNanOdu * AdalAda uRuthiyEl *
    manjchil maRaiyAthE * mAmathI makiznthOdi vA


    O, Great moon! My dark hued little child, my sweet ambrosia, my master calls and beckons to you with his wee hands. If you wish to play with him, do not hide behind the clouds. Come running here happily.


    56. suRRum oLivattam * sUznthu sOthi paranthengkum *
    enththanai seyyinum * en makan mukam nErovvAy **
    viththakan vEngkadavANan * unnai viLikkinRa *
    kaiththalam nOvAmE * ambulI kadithOdi vA


    O, Bright Moon with rounds of halo spreading light everywhere! With all that, you are no match for my son’s face. The wonder Lord, resident of Venkatam, calls, Come running quickly, lest you cause pain to his hand.


    57. sakkarak kaiyan * thandangkaNNAl malara viziththu *
    okkalai mElirunthu * unnaiyE suttik kAttum kAN **
    thakkathaRithiyEl * chanthirA salam seyyAthE *
    makkal peRAtha * maladanallaiyEl vA kaNdAy


    O, Full Moon! The discus-wielding Lord with his large eyes opened wide, seated on my waist, points at you alone. Know what is proper, and do not deceive him. If you are not a child-less sterile, take note and come.


    58. azakiya vAyil * amuthavURal theLivuRA *
    mazalai muRRAtha * iLanjsollAl unnaik kUvukinRAn**
    kuzakan sirItharan * kUvak kUva nI pOthiyEl *
    puzaiyilavAkAthE * nin sevi pukar mAmathI


    O, Big bright Moon! The adorable Sridhara with spittle dripping from his beautiful mouth, blabbers indistinctly, coos and calls to you. If you go on ignoring his calls, would it not mean that your ears are without a bore?


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    Little Shyaam

    By ShriHari Nandini

  • rukmini_vasudev_yadav 149w

    ख़ुशी

    होठों का मधुरस पिया नहीं,
    पर स्वाद जिह्वा पर ताज़ा है,
    तेरे दिल की धड़कन सुनी नहीं,
    पर महक अंग में ताज़ा है।

    तू बाकी जैसा नहीं है वासु,
    कि प्रेम के मीठे बोल सुनाये,
    पर मेरे अनहद संवरते इश्क़ में,
    तेरी मुस्कन ताज़ा है।

    तेरा हाथ कभी भी छुआ नहीं।
    ©rukmini_vasudev_yadav

  • rukmini_vasudev_yadav 149w

    प्रेम

    तू सहज ही हो स्वभाव मेरा,
    तेरा नाम ही हो अभिमान मेरा,
    तेरी याद में आँसू बहे दिन रैन,
    आँसू का दरिया धाम मेरा।

    बस तू ही हो, सिर्फ तू ही हो,
    हर राह की मंज़िल, साध्य मेरा,
    तेरा नाम रटत कुंजन में फिरूं,
    हो चन्दन मांग सिंगार मेरा।
    ©rukmini_vasudev_yadav

  • rukmini_vasudev_yadav 149w

    वफ़ा

    अनंत जन्म के फासले हैं और,
    अनंत दूर तू बैठा है,
    हर एक मेरी आह पे तू पर,
    मुतियन आँसू रोया है।

    तू पास बढ़ा, मैं दूर गयी,
    मेरी हर चालाकी जीत गयी।

    तू हार गया , मैं हार गयी,
    उस हार से कैसे खफ़ा करूँ,

    तेरी चाहत हूँ मैं जानती हूँ,
    पर तुझसे कैसे वफ़ा करूँ।
    ©rukmini_vasudev_yadav

  • sadashiv_sharma 153w

    न चिंता न भय हो,
    महाकाल आपकी जय हो ।।
    ।।सदाशिव।।

  • subhagabhatt 199w

    "मीरा-प्रेम"

    प्रेम करो तो मीरा जैसे,
    निश्छल, निर्मल, निष्काम।
    कान्हा हुए तो सौ के,
    किंतु मीरा के इक श्याम।।

    ©subhagabhatt

  • aparna_shambhawi 206w

    हे केशव, हे माधव, हे कृष्ण मुरारी।
    हे राधा के वल्लभ, जय हो तिहारी।।

    हे गोपा, हे मोहन, हे कुंज बिहारी।
    हे रास रचईया , जय हो तिहारी।।

    हे रामचंद्रायै , हे पीताम्बरायै।
    हे लक्ष्मी प्रियायै, जय हो तिहारी।।

    गोकुल के वासी, ओ मथुरा निवासी।
    बरसाने की राशि, जय हो तिहारी।।

    यशोदा के लाला, हे नंद गोपाला।
    धारी बैजन्ती माला, जय हो तिहारी।।

    कान्हा कन्हईया ओ मुरली बजइया।
    हे राधे सँवरिया, जय हो तिहारी।।

    अपर्णा "जानकी प्रिया"

  • aparna_shambhawi 210w

    बिखर

    हुलस हुलस मैं,
    प्रेम विवश,
    मुरली बजाऊँ,
    मैं रैन दिवस ।

    नहीं सरस-सरस,
    यह प्रेम तपस,
    झस आस में मैं,
    पीयूँ रजनी निरस।

    तु छिपा यहीं है,
    निकट-निकट,
    मुरली में चुनरी
    रही लिपट लिपट।

    बंसी पुकारे धुन,
    यमुना के तट,
    जाऊँ झपटी देखूँ,
    विटप वो वट।

    हर पहर-पहर
    बढ़ी आग-लहर,
    घर छोड़ के ढूँढूँ,
    तुझे कौन शहर?

    मैं डगर-डगर
    और नगर-नगर,
    मिलती नहीं है,
    तेरी कोई खबर।

    उर में सवाल,
    कई अगर-मगर,
    पर प्रेम अमर,
    नहीं कोई असर।

    चलूँ अटक-लटक,
    पथ पे मटक,
    तरसूँ मैं हाय,
    तेरी एक झलक।

    मन धड़क-धड़क ,
    जिय भड़क-भड़क,
    मैं हुई तुषार,
    पड़ी बीच सड़क।

    हुई लचक-लचक
    कर बंद पलक,
    मिलने लगी तेरी,
    चमक-दमक।

    बजा तार-तार,
    मन का सितार,
    रौशनी माँगे है,
    चंदा उधार।

    पपिहा पुकार,
    गाए जिया मल्हार,
    मन मयुर नाच,
    करे हिय के द्वार।

    किया वार-वार
    और बार-बार,
    बड़ी तेज है रे,
    तेरे नैनों की धार।

    चढ़ा प्रेम रोग का
    तेज बुखार,
    मन माटी मेरा
    तू है कुम्हार।

    रंगा अंग-अंग,
    तेरे प्रेम रंग,
    हुई दंग-दंग
    देख हिय उमंग।

    छोड़ी रीत-रीत,
    बँधी प्रीत-प्रीत,
    सब भूली गाऊँ,
    अनुराग गीत।

    मैं सँवर-सँवर
    फँसी प्रेम भवर,
    छलकी ही जाए,
    ये बाली उमर।

    यही दिनों रात
    कहूँ बात-बात,
    यूँ ही रहूँ,
    मैं जन्म सात।

    ढली शाम-शाम,
    तेरा लेते नाम,
    पग कमल तेरा,
    मेरे चारों धाम।

    पड़ी बिखर-बिखर,
    वहीं शाम-सहर,
    तू ने थामा हाथ,
    पहुँची शिखर।

    हुई अचल-अचल,
    नहीं पाऊँ संभल,
    तुझे सामने पाऊँ,
    जाऊँ मचल-मचल।

    मुरली बजाई तुने,
    गजब हुनर,
    नाचूँ भूल-भूल,
    उड़ी चुनर-चुनर।

    मैं विचर-विचर,
    फिर जाऊँ सिहर,
    देखूँ निहर-निहर,
    तेरे मुख ये सुनर।

    बुझी प्यास-प्यास,
    जब चूमा अधर,
    हाय! श्याम जाऊँ मैं,
    फिर बिखर-बिखर!!

    -अपर्णा शाम्भवी

  • shiv_sehrawat 210w

    सुबह और शाम

    रोज सुबह शाम तुझे मैं याद करता हूँ
    कुछ इस तरह टूटे दिल को आबाद करता हूँ


    मसरूफ़ तो बहुत हूँ मैं ईस छोटी सी जिंदगी में
    पर तेरे लिए वक़्त निकालकर उसे बर्बाद करता हूँ


    अरसे निकाल दिए जिसने तेरी सलाखों के पीछे
    उस मुजरिम को अब मैं अपनी मर्ज़ी से आजाद करता हूँ.




    -शिव