#undying_emotions

56 posts
  • undying_emotions 1d

    बस टुकड़ा मेरे दिल का,
    हवाले आपके है।......♥️



    मुकर्रर*-constant, continuous
    नुमाइंदा*-example

    #undying_emotions
    #keepsupporting

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    मनहूसियत की लाश ढो के थक गया,
    एक रोज़ मैं रोया और रो के थक गया।

    इन हादसों से अब मुझे मुश्किल कोई नहीं,
    इक और हुआ हादसा और हो के थक गया।

    वो फाज़िल हकीकत में किल्लत से वाकिफ था,
    ऐतिहातन वो बस ख्वाब पिरो के थक गया।

    मेरी मुहब्बत की इतनी ही दास्तां मुकम्मल है,
    वो जो मेरा होता था मेरा हो के थक गया।

    मैं जो हौसलों का मुकर्रर नुमाइंदा हूँ'आभा'
    जिल्लत से मर जाऊंगा मैं जो के थक गया।
    ©undying_emotions

  • undying_emotions 5d

    ख्यालों को कड़ी में जोड़ने की ज़ेहद .....
    बेतरतीब.....बे-रीत...बे-जोड़.....बेवजह...!


    बेजा=बेवजह*
    बगा'=बगावत*


    #AbhaNagrami
    #undying_emotions
    #keepsupporting

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    इश्क में जो हमको दगा मिला है,
    फिर भी दिल उनसे लगा मिला है।

    बेजा ही खुदको हलकान करते साहेब,
    कब कौन,किसका यहाँ सगा मिला है।

    है दुआ बस रब से उसे हश्र अता करे,
    मुद्दतों से वो रातों को जगा मिला है।

    कुदरत की मयस्सर तुझे नेमत है'आभा'
    कतरा जो तेरी हस्ती में तुझे बगा'मिला है।
    ©undying_emotions

  • undying_emotions 4w

    Humein kisi ki mohabbat se koi parhaiz nhi khair,
    Bas Ishq me mere khayal kuch khud-saakhta hai!

    Gustaakhiyaan Maaf..!

    *अम्लियत-Practicality
    #undying_emotions
    01.05.2022

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    इश्क का दरिया डूब,पार हो गए खैर।
    आशिक ये माहिर..अय्यार हो गए खैर।

    मान लीजिए के उन्हें मुहब्बत हुई ही नहीं,
    बाद में जो कभी-कहीं..यार हो गए खैर।

    किस्से हीर-राँझा के कल की हकीकत थे,
    वो आज अम्लियत में...ख्वार हो गए खैर।

    हिज्र था वाहिद या फिर हश्र थे मेहबूब
    अब दरम्यां कितने..हकदार हो गए खैर।

    दुनिया के हक में ये बद-दलीली क्यूँ 'आभा'
    तेरे कौन से कामिल..इंतजार हो गए खैर।
    ©undying_emotions

  • undying_emotions 6w

    मेंटल डी-क्लट्टर।


    #undying_emotions
    #150th_Post
    #PyaarAurNawazishkaShukriya

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    परवाह की आगोश में कौन रखेगा,
    फाज़िल को होश में कौन रखेगा।

    मजनू तो मुहब्बत में मारे गए सब,
    आशिकों को जोश में कौन रखेगा।

    शायद किसी के ही काम आए जिन्दगी,
    सिर्फ इश्क-ए-सरफरोश में कौन रखेगा।

    मुकम्मल मुझे मुकद्दर का मिलता है खैर
    फिर दिल इतना अफ़सोस में कौन रखेगा।

    तुम खुद में ही कायम दोज़ख हो'आभा',
    तुम्हें दामन-ए-फ़िरदौस में कौन रखेगा।
    ©undying_emotions

  • undying_emotions 14w

    न कैद ही है न आज़ादी है,
    मुहब्बत भी क्या बर्बादी है!

    मुझे वो जिन्दगी ज़हर लगती हैं
    बगैर तेरे जो हमने बिता दी है।

    मेरा उम्मीदों पे गुज़ारा होता है
    मेरे दिल के मयार फ़रियादी है।

    हम इश्क़ में बेहद यकीन रखते हैं
    मेरे इश्क के मुकद्दर ना-मुरादी है

    है ज़ख्मों को बस दरकार वक्त की
    तेरे मर्ज भी तो 'आभा'बुनियादी है।
    ©undying_emotions

  • undying_emotions 16w

    उम्मीदों पर है जिन्दगी
    कुछ क़ायम सी,
    कुछ कामिल सी।
    -Abha
    #undying_emotions
    #keepsupporting
    #ummed

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    मुझसे है इंतिहाई उम्मीद,
    क्या है तुमको भाई उम्मीद?

    खातिर उसके दिल दुहाई देता है
    जिस शख्स ने है बनाई उम्मीद।

    फलसफा है फकत जिंदगी इतना,
    कुछ अपनी तो कुछ पराई उम्मीद।

    मुहब्बत है बेशक हश्र उम्मीदों का
    कहीं वस्ल तो कहीं रिहाई उम्मीद।

    है तेरी उम्मीदों का तकाजा ये आभा,
    तेरे लफ्जों से लोगों की गहराई उम्मीद।
    ©undying_emotions

  • undying_emotions 18w

    अब हमारे दरम्यां बस इतना रिश्ता है
    वो याद किश्तों में मुझे कर लेता है।
    ©undying_emotions

  • undying_emotions 20w

    मयस्सर है वाबस्ता हादसों से फकत,
    ताज़्जुब है जिंदगी ये गुलज़ार कैसे है।
    - आभा

    #undying_emotions

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    यकीन कैसे हैं, ऐतबार कैसे हैं,
    इश्क के मेरे ये मयार कैसे हैं?

    वो ज़ीस्त मुसलसल हर लम्हे की मेरे,
    फिर फासले कैसे इंतज़ार कैसे हैं।

    मिलते हैं शख़्स हर शख़्स के दरम्यां,
    लोगों में पोशीदा ये किरदार कैसे हैं?

    न याद करूं तो ख्याल भी नहीं करते,
    अहद ये मेरे कैसे ये मेरे यार कैसे हैं!

    बरकत है बस वो हासिल मुझे है'आभा'
    फिर उससे बेहतर मुझे हज़ार कैसे हैं।
    ©undying_emotions

  • undying_emotions 21w

    ज्यादा ना सही तो जरा कम रहने दो,
    मुझे उदास, आंखों को नम रहने दो।

    है मुझे तुमसे जो मोहब्बत की उम्मीद,
    मुझे इस उम्मीद का भरम रहने दो।

    इल्म मुझे है कुछ,सरकशी का तुम्हारी,
    बेवजह क्यों खाते हो कसम रहने दो।

    और जिक्र हुआ जो मोहब्बत का फकत,
    रिसता है फिर कोई जखम रहने दो।

    जिंदगी ये राहतों में बसर न होगी आभा,
    लाजिम है मेरी खातिर कुछ गम रहने दो।
    ©undying_emotions

  • undying_emotions 21w

    कतरा कतरा बाकी है कहीं दिल में,
    है कोई तो मुहब्बत अनकही दिल में।

    अलमिया*- tragic,भयंकर

    #undying_emotions
    #poetry
    #spreadlove
    #keepsupporting

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    जुदा न तुम मुझसे मेरे करीब भी नहीं होते,
    बेनाम ये ताल्लुक तो अजीब भी नहीं होते।

    मोहब्बत की खातिर कायनात तक लुटा कर,
    लोग ऐसे हमारे कूचे के गरीब भी नहीं होते।

    मयस्सर है दरमियां हमारे कुछ रब्त ए खामोशी,
    वरना दुनिया के दस्तरस हम हबीब भी नहीं होते।

    अलमिया ही है मंजर ये हकीकत के मुझे 'आभा,
    हमें ख्वाब तेरी सोहबत के नसीब भी नहीं होते।
    ©undying_emotions

  • undying_emotions 22w

    कहकशां भी तेरी हथेली में वो ब-वक्त रख देगा
    तुम्हारा फकत मसला है तुम सबर नहीं करती।
    -आभा

    #undying_emotions
    #keepsupporting
    #poetry
    #spreadlove

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    बात कोई अब मुझपे असर नहीं करती,
    जिन्दगी भी मुझमें कहीं घर नहीं करती।

    गर्ज दुनिया के,तो कभी खुद के खातिर,
    करना बहुत मैं चाहु मगर नहीं करती।

    तबाही में मेरी शख्स वो ब-शरीक होता,
    दूर उसे खुद से जो अगर नहीं करती।

    पैदा फिर होती कई काँटो सी ख्वाहिशें
    ज़मीं जो दिल की मैं बंजर नहीं करती।

    बे-इल्मी की इन्तेहा है ये नामुरादी'आभा'
    तुम बरकतों की अपनी जो कदर नहीं करती।
    ©आभा_नगरामी
    ©undying_emotions

  • undying_emotions 22w

    माना के जख्म कभी फिर भरते नहीं है,
    किसी के जाने से घर तो उजड़ते नहीं हैं।

    हौसलों के वाबस्ता मुसलसल रही जिन्दगी,
    शिकस्तों की अफजाई से हम डरते नहीं हैं।

    हिजरत में अब इश्क खुद ही मर जाता है,
    इश्क की खातिर लोग अब मरते नहीं है।

    ख्वाहिशें उनकी खुद पे ही होती हैं अज़ाब
    ठोकरों पर भी जो सब्र से मुकरते नहीं हैं।

    अज़ीयत है और हमें अज़ीज़ है बहुत,
    मलाल तेरा ज़िन्दगी हम करते नहीं हैं।

    मुकद्दर के भी हमसे ये मसले रहे 'आभा'
    वक़्ती शीशों में हम इसके उतरते नहीं हैं!
    ©आभा_नगरामी
    ©undying_emotions

  • undying_emotions 36w

    मुश्किल तो वैसे हम पे कम ही हैं
    हमारा मसला और नहीं हम ही हैं।

    मुहब्बत में नुकसान उठाए कब कोई,
    वफाएं ना मयस्सर हों तो गम ही हैं।

    कायम होते राब्ते मुहब्बत के जिनसे
    दर्द भी मिले अगर तो मरहम ही हैं।

    करते हो जिनसे दावे जान के 'आभा'
    तुझे देने बस उनको भी जख्म ही हैं।
    ©आभा_नगरामी
    ©undying_emotions

  • undying_emotions 89w

    माँगों तो रब से क्या क्या नही मिलता,
    जमीन नहीं मिलती के जहाँ नहीं मिलता!

    कोई दो वक्त की रोटी का बहुत शुक्र-गुजारी है
    नाशाद है कोई के उसको आसमां नहीं मिलता!

    जंग जिन्दगी से करते है खातिर वो ख्वाबों के,
    हकीकत के कद में जिनका हौसला नहीं मिलता!

    हर अक्स में मुझे मेरी खुद तलाश रहती है'आभा'
    मैं खुद परास्त हूँ मुझे खुद का पता नहीं मिलता..!
    ©आभा_नगरागी
    ©undying_emotions

  • undying_emotions 94w

    #AbhaNagrami
    #undying_emotions
    कशीदगी*-tensions

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    फलसफे सभी लगते अजीब से यहाँ,
    मेरे अपनों में ही रहते है रकीब से यहाँ..!

    कोशिशों से कभी हार कर बैठो न तुम हौसले,
    वक्त जाते है पलट ज़रा सी तरकीब से यहाँ!

    अक्सर जख्म देने में कवायद उन्होंने की,
    जिन्हें जानते थे हम बेहद ही करीब से यहाँ!

    ऊँची कोठियों में लोग दिल-फकीर बसते है,
    माँग पानी देखना तुम कभी गरीब से यहाँ!

    बेवजह की कशीदगी में इसे ज़या न करो 'आभा'
    नसीब होती है जिन्दगी,बड़े ही नसीब से यहाँ!
    ©आभा_नगरामी
    ©undying_emotions

  • undying_emotions 95w

    बेघर्ज़- selfless
    काज़ी- judge
    #AbhaNagrami
    #undying_emotions
    #Keepsupporting

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    ख्वाब खुद के सभी ,गुमराह करते आए,
    बस हम लोगों की परवाह करते आए!

    माना की मुहब्बत की सज़ाएँ मुश्किल है
    बेघर्ज़ बेपरवाह हम ये गुनाह करते आए!

    जिक्र जब भी मुहब्बत के पैमानों का हुआ,
    हम फकत 'बेपनाह-बेपनाह'करते आए..!

    बेक़सूर हैं ये आँधियों न क़सूर चिरागों का
    हम घर अपना खुद ही सियाह करते आए!

    हमें क्या खबर?कीमत क्या है? जिन्दगी की!
    लोग कहते तो है हम इसे तबाह करते आए!

    बेबुनियाद इल्ज़ाम ये खुद के धुल जाएगे'आभा
    काज़ी रब को हम वक्त को गवाह करते आए!
    ©आभा_नगरामी
    ©undying_emotions

  • undying_emotions 97w

    Paronia,Insecurities and fear,
    The world inside me seems so lonlier.

    Eating me up everytime with no one to share,
    I Walk over circumference to lead me somewhere.

    Grief grows large and the miseries burden,
    I try ooze my sufferings in paper with pen.

    But not everybody is accustomed to this pretty habit,
    They needs your shoulder for pains to subside a bit.

    Just be there to listen and help them out,
    Maybe you owe this life to make your soul proud!
    ©AbhaNagrami

    #AbhaNagrami
    #undying_emotions
    #keepsupporting

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    कोई खैरियत कभी हाल तुम पूछ के देखो,
    खुद ही दिल से ये सवाल तुम पूछ के देखो!

    मशरूफ रखती है दुनिया ये जिन्दगी हरदम,
    वक्त खुद से थोड़ा निकाल तुम पूछ के देखो!

    उम्मीदें कई की शायद किसी पहलू पर टिकी हों,
    सिक्के कोशिशों के कभी उछाल तुम पूछ के देखो!

    वक्त गुजरा हुआ बन रह न जाए अपने 'आभा'
    बाकी रह न जाए बस मलाल तुम पूछ के देखो!
    ©आभा_नगरामी
    ©undying_emotions

  • undying_emotions 101w

    मुशाहिदा*-beholder, observer
    #AbhaNagrami
    #undying_emotions
    #PyaarBanayeRakhe

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    जरूरतों के बस्ते में गुजारा किसका होता है!
    सफर ही हो तन्हा तो सहारा किसका होता है!

    खुबसुरती-ए-मुशाहीदा सब हसीन बना देती है,
    गौर कर के देखो तो नजारा किसका होता है!

    बात है गर इश्क की तो हम ये दिल निसार करते हैं,
    मसला तो बस ये है दिल तुम्हारा किसका होता है!

    गैरों के हादसों में सब ही हौसले बाँटते फिरते हैं
    मगर खुद पर जो गुजरे तो गवारा किसका होता है

    गलतियों के सबब में नामुमकिन भी मुमकिन होता है
    वरना एक और एक मिला अट्ठारह किसका होता है!

    निगरानी में आसमां की तो सब तारे ही नूर होते हैं,
    ख्वाहिश लिए टूटा कोई सितारा किसका होता है!

    हालातों से हारके भी तुम मुसकुराते रहो'आभा'
    जिन्दगी का ये तजुर्बा दुबारा किसका होता है!
    ©आभा_नगरामी
    ©undying_emotions

  • undying_emotions 107w

    अक्सर हम माँ पर जब भी लिखते हैं उनका त्याग लिखते हैं..
    उनकी ख्वाहिशों का ख्याल कभी क्यों नहीं आता..!
    #HappyMothersDay
    #In_a_different_way
    #AbhaNagrami
    #Undying_emotions

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    अहसान उनके हेै बेशक हमपर थोड़े नहीं,
    फिर चलती हुई रीत क्यों हम तोड़े नहीं..!
    जरूरतें उनकी भी हैं ये ख्याल करके
    माँ को हमेशा 'त्याग 'से जोड़े नहीं..!
    ©आभा_नगरामी
    ©undying_emotions

  • undying_emotions 107w

    गम रिश्तों के दरम्यां हर दराज में जीते हैं,
    फिक्र कल की छोड़ हम आज में जीते हैं..!

    तमाशों के वक्त जो जुबां घोट गए खामोश,
    खौफ गुनाहों के वो मेरी आवाज में जीते हैं..!

    लंबी है फेरिस्त जिन्दगी से शिकवों की बेहद,
    हम बेपरवाह न जाने किस अंदाज में जीते हैं.!

    हौसलों को दुनिया में कोई कफस न-मयस्सर,
    ये परिन्दों से वाबस्ता परवाज़ में जीते हैं..!

    मुकम्मल हो अंजाम है परवाह किसे 'आभा'
    हम अपनी हर दास्ताँ के आगाज़ में जीते हैं..!
    ©आभा_नगरामी
    ©undying_emotions