#vilomaurparyay

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  • iam_vaibhav07 39w

    विलोम और पर्याय

    आज फिर जज़्बातों की स्याही से पन्ना भरने चला हूँ।
    काफी जज़्बात भरे हुए हैं अंदर, सम्भल नहीं रहे मगर सम्भाल रहा हूँ।
    अंदर से टूट कर टुकड़ों में बिखर गया हूँ, धीरे धीरे हर एक टुकड़े को समेटने की कोशिश कर रहा हूँ, कभी कभी हाथ कट जाते हैं, मगर दर्द का एहसास नहीं होता,  आदत जो पड़ गयी है। या यूँ कहूँ कि हालातों ने इतना मज़बूत बना दिया है कि इन छोटी मोटी खरोंच से फर्क़ नहीं पड़ता। विडंबना देखो कि एक हाथ को पकड़ने की होड़ में मैंने ना जाने कितने हाथों को ठुकरा दिया, यह सोच कर की कम से कम वो हाथ तो मिलेगा जिसे मैं पकड़ना चाहता था।
    मगर जिंदगी जनाब ! जिंदगी! यहीं पर अपना दाँव खेलती है, अंत में हमारा मनचाहा हाथ भी नहीं मिलता, और बाकी हाथों को तो आपने छोड़ ही दिया था।
    कैसा मेहसूस होता है अकेले रहकर, साथ रहने के सपने देखते देखते सोने पर। पर कौन जानता है उस नमी की वज़ह क्या है, हो सकता है आप खुद हो।
    जो गलती मैंने की ही नहीं, उसकी सजा काटना आसान नहीं होता। पर मोहब्बत की यही तो खास बात है।मोहब्बत आपका वक़्त, जज़्बात, स्वाभिमान, सब कुछ लेकर खाली हाथ छोड़ देती है। और यहां हम एक गलती कर बैठते हैं, हम एक जगह रुक जाते हैं, इस फ़िराक़ में की वो वापिस आयेगा, और इस इंतजार में वक़्त हाथ से निकल जाता है।
    तो अब फैसला हमे खुद करना चाहिए कि वही एक चीज चाहिए या उससे बेहतर।
    दुनिया में अगर किसी चीज़ का 'विलोम' है तो यकीनन उसका 'पर्याय' भी होगा। और ये फैसला आपको खुद करना होगा कि आपको विलोम चाहिए या पर्याय।

    -वैभव