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  • gauravs 5h

    सोचने में और याद करने में
    कुछ तो फर्क़ होगा.. ��

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    वो सोचता है मुझे इस बात पर तो यक़ीन है


    मगर ये कैसे मान लूँ वो याद भी कर रहा है


    ©gauravs

  • gauravs 17h

    अपनों से बात भी आज-कल
    नाप तौल कर करनी पड़ती है.. ��

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    ग़र गुनहगार हूँ मैं तो पहले साबित कीजिए



    या मेरी बात रखने का मुझे इक मौका दीजिए


    ©gauravs

  • gauravs 1w

    ��

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    "ज़िंदगी मोह से शुरु होती है , मोह भंग पर ख़त्म।"

    ~ हरिवंशराय बच्चन

  • gauravs 1w

    सच को सच रहने देते हैं.. ��

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    ना मुझे नफ़रत करनी है ना इश्क़ करना है



    तुम से जो सच का रिश्ता है उसे क़ायम करना है


    ©gauravs

  • gauravs 1w

    ��

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    इश्क़ के नाम पर अक्सर जो आहें भरते हैं


    साथ निभाने की बात पर ये मुकर क्यूँ जाते हैं


    ©gauravs

  • gauravs 1w

    @jigna_a जी बहुत दिनों के बाद धन्यवाद दे रहा हूँ.
    आपने सच कहा था लिखावट में गहराई होनी चाहिए. खतों का सफरनामा किताब का आपका सुझाव बहुत ही बेहतरीन था. कुछ पन्ने ही पढ़ पाया हूँ लेकिन ऐसा लग रहा है सिर्फ पढ़ता जाऊं बिना किसी रोक टोक के. ये पोस्ट आपको धन्यवाद देने के लिए है. माफ कर दीजिएगा.


    जितना लिखा गया तुझे ऐ इश्क़
    सोचती हूँ उतना निभाया क्यूँ न गया
    ©अमृता प्रीतम

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    मैंने जब तुझको पहना
    दोनों के बदन अन्तर्धान थे
    अंग फूलों की तरह खिल गए
    और रूह की दरगाह पर अर्पित हुए....
    तू और मैं हवन की अग्नि
    तू और मैं सुगंधित सामग्री
    एक-दूसरे का नाम-
    होठों पर आया
    तो वही नाम पूजा के मंत्र थे....
    यह तेरे और मेरे अस्तित्व का एक यज्ञ था
    धर्म-कर्म की गाथा-
    तो बहुत बाद की बात है-
    ©अमृता प्रीतम

  • gauravs 1w

    काग़ज़ों को क़लम नहीं
    ज़ज्बात छु कर निकलते हैं.. ��

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    लफ्जों में ज़ज्बात ना निकले ये क़लम को कसम थी


    वर्ना मेरी ख़त में असर बढ़ाने की कोशिश बहोत थी


    ©gauravs

  • gauravs 1w

    ��

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    गहरे ज़ख्म की तरह हो गए हो तुम


    वक़्त का मरहम भी असर नहीं कर रहा


    ©gauravs

  • gauravs 3w

    ��

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    दिलों के फ़ासले जुबां की बातों से मिटा नहीं करते


    सिर्फ़ खैरियत पूछने से हालात अच्छे हुआ नहीं करते


    ©gauravs

  • gauravs 3w

    रोने से अगर मन हलका होता है
    तो हँसने से मन भरता क्यूँ नहीं.. ��

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    आँखों की सतह पर आंसुओं के समुंदर


    ग़मों की परत दर परत बस बह जानी हैं


    ©gauravs