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  • goldenwrites_jakir 1d

    गुमनाम ही सही ...... जिंदा तो है
    उसके दिल में मोहब्बत आज भी तो है
    अजनबी ही सही उसके अपनों के सामने मेरी चाहत
    उसके मनमन्दिर में होती रोज मेरी पूजा
    वो आशिक़ी आजभी ज़िंदा तो है
    ©goldenwrites_jakir

  • goldenwrites_jakir 1d

    उम्मीद का सूरज उदय होने को है
    किसी अपने की दुआ पूरी होने को है
    ज़िन्दगी इम्तिहान बहुत लेती है मेरे यार
    ज़िन्दगी को ज़िन्दगी अब कहने को है
    ©goldenwrites_jakir

  • goldenwrites_jakir 1d

    लहरों को अक्सर किनारों की तलाश रही
    बहती रही इक तरफ से दूसरी तरफ
    हवाओं में उनके दर्द का शौर कभी ख़ामोश
    कभी चिखो का तूफ़ान रही .....
    ©goldenwrites_jakir

  • goldenwrites_jakir 1d

    अब ख़ुदको ही पहचानने से इनकार करता हूँ
    हूँ ज़िंदा और ज़िन्दगी से मौत की दुआ मांगता हूँ
    ©goldenwrites_jakir

  • goldenwrites_jakir 1d

    #jp #rachanaprati120 @anandbarun गुरु G ��

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    #पहली ख़ुशी

    आज भी वो दिन दिल को इक सुकून दे जाता
    ज़ब वो लम्हा याद आता ,,
    अपनी पहली कमाई का वो हिसाब अपनी माँ पिता को दिया
    इक अलग ही ख़ुशी थी मुझसे कहीं ज्यादा मेरे माँ पापा की आँखों में
    वो पल ख़ुशी का इक अलग ही एहसास दिल को दे रहा था
    दूसरी ख़ुशी ज़ब में पिता बना वो लम्हा भी यादगार था...|
    ©goldenwrites_jakir

  • goldenwrites_jakir 2d

    #Collab ✍️

    #pathak01 G
    किसी ने मुफ्त में वो शख्स पाया ....
    जो हर कीमत पे मुझको चाहिए था |

    लगाकर बोली वो मेरी , मुझे खरीद ना सका
    मांग कर दुआओं में , उसने मुझे अपना बना लिया |
    ©goldenwrites_jakir

  • goldenwrites_jakir 2d

    कारवाँ हर रोज ज़िन्दगी का ,, कागज़ पर यूँ बदलता है
    देखते हो जैसे आईना और बातें अपनी परछाई से करते हैं
    ©goldenwrites_jakir

  • goldenwrites_jakir 2d

    #rachanaprati119 #rachanaprati120 @anandbarun G आप संचालन को आगे बढ़ाए ��������
    ... @gannudairy_ भाई जी का तहदिल से आभार जिन्होंने मुझे अवसर दिया ��������
    .. @jigna_a दी " @anusugandh दी " @mamtapoet दी "
    आप सबने बहुत खूबसूरत इस पाठशाला का निर्माण किया ��������������������������������������

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    #rachanaprati120

    आप सभी आदरणीय पाठको का तहदिल से शुक्रिया
    आप सब ने इक दूसरे की रचना पढ़ी और सराहनीय की और दिल से अपनी रचना इस पाठशाला में उपस्थित की आप सभी लेखकों का दिल से शुक्र गुजार हूँ
    और कामना करता हूँ आगे भी इसी तरह हर रोज इस पाठशाला से जुड़े रहेंगे और अपने बिचार अपनी रचना इक दूसरे तक पहोंचाते रहेंगे
    हम सब mirakee पर इक परिवार हैं
    यहां पर इक दूसरे को जानने पहचानने और सिखने सिखाने का अवसर हमसब को मिला किसी को दोस्त किसी को भाई किसी को बहन किसी को गुरु मिला
    इनसब में मैं भी इक हूँ जहां मुझे बहन का प्यार गुरु का आशीर्वाद भाइयो का हौसला दोस्तों का साथ मिला .... |
    आप सबने लाजबाव कमाल की रचना से इस पाठशाला को खूबसूरत बनाया हर इक अल्फाज़ से रौशन बनाया आप सब ही विजेता है
    कोशिस यही रहती है हर बार इक नया इस पाठशाला को आगे बढ़ाए पर आज नई कलम से हम रूबरू नही हुए
    इसी लिए आज फिर दोबारा हमें किसी इक को इस पाठशाला को आगे बढ़ाने के लिए आमंत्रित करना है
    माननीय आदरणीय गुरु G आनंद सर से आग्रह करता हूँ पुनह वो इस पाठशाला को आगे बढ़ाए और हमें फिर कुछ नया लिखने का समझने का मौका प्रदान करें
    और आप सब से यही उम्मीद करता हूँ आप सब इस पाठशाला से जुड़े रहेंगे और ज्यादा से ज्यादा योगदान देकर इसे प्यार मोहब्बत से आगे बड़ाते रहें
    ©goldenwrites_jakir

  • goldenwrites_jakir 2d

    #आशिक़ी

    कईं दफ़ा देखा आईना .......पर अब मुद्दत हो गई
    परछाई पूछती सवाल और ज़िन्दगी जवाब हो गई
    खयाल तेरा रूबरू होता ऐसे जैसे फूलों में खूसबू
    चाँद में चाँदनी ऐसी मेरी रूह में तू समा गई ...|
    ©goldenwrites_jakir

  • goldenwrites_jakir 3d

    आईनापरछाई

    यादों की परछाई के साय में - हक़ीक़त का
    आईना ही देखना भुल गए ,,,,
    तेरे ख़्वाबों ख्यालों में डूबे हम कुछ इस तरह
    ज़िन्दगी जीने का हुनर ही भुल गए ,,,,
    फ़ूल गुलाब का अब चुभता है हाथों को
    हम ज़िन्दगी की जीने की खुसबू ही भुल गए ,,
    इश्क़ हुआ तबसे हम चाहत की हर इक दीवांगी में
    अब ख़ुदको ही पहचानना भुल गए ,,, ||
    शौर ज़माने का ख़ामोशी में बदल गया
    ज़ब तेरी तस्वीर को लगाकर रखा सीने में
    आईना बदल गया ज़िन्दगी का सनम तेरी यादों की परछाई में
    हर तरफ - दूर तक आता नही कुछ भी नज़र
    टूटकर बिखरे यार तेरे इंतजार में तन्हाई की गलियों में
    किस्से हमारी मुलाक़ात के कागज़ पर चंद लफ़्ज़ों में बयां हो जाते
    देखता ज़ब आईना वफ़ा का हमदम तेरा साया मेरी परछाई में
    |||||||||||||||
    गिला शिकवा - माफ़ी नामा सब तुझसे है किया
    देख कर अपनी ही परछाई में आईना तुझे जानकर
    लौटकर आई नही तू - तेरा ही इंतजार किया तेरी ही गली में
    मेरे घर का पता " मैं भुल गया
    ज़ब इंतज़ार तेरा किया तेरी ही शहर में ,,,,,
    आईना मुस्कुराहट का टूट कर बिखर गया यार तेरी ही गलियों में
    परछाई बनकर साथ तू चलती रही दर्द गम बनकर तन्हाई में |
    ©goldenwrites_jakir